जीवन में सफलता प्राप्त करना चाहते हैं। तो आज से करें ये काम -इन नियमों का करें पालन

By: arcarrierpoint

On: Tuesday, February 24, 2026 7:48 PM

जीवन में सफलता प्राप्त करना चाहते हैं। तो आज से करें ये काम -इन नियमों का करें पालन
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जीवन में सफलता प्राप्त करना चाहते हैं। तो आज से करें ये काम -इन नियमों का करें पालन:-सफलता कोई संयोग नहीं है। यह स्पष्ट लक्ष्य, मजबूत इच्छाशक्ति, अनुशासन और निरंतर प्रयास का परिणाम है। बहुत लोग प्रतिभाशाली होते हुए भी पीछे रह जाते हैं, जबकि सामान्य क्षमता वाले लोग निरंतरता और सही आदतों के कारण आगे निकल जाते हैं। यदि आप सच में जीवन में बड़ी उपलब्धि हासिल करना चाहते हैं, तो आज से इन सिद्ध नियमों को अपनाना शुरू करें।

दुर्बल इच्छाशक्ति एक सीमित इच्छाशक्ति है। जैसे ही कठिनाइयां और असफलताएं उसे नष्ट कर देती हैं, अनंत शक्ति के स्रोत से उसका संबंध टूट जाता है। अच्छे उद्देश्य के लिए इच्छाशक्ति के पीछे ईश्वर की इच्छाशक्ति होती है, जो कभी विफल नहीं हो सकती। यहां तक कि ईश्वर की इच्छाशक्ति को रोकने की शक्ति मृत्यु में भी नहीं है। जिस प्रार्थना के पीछे अनवरत इच्छाशक्ति हो, उस प्रार्थना का उत्तर प्रभु अवश्य देंगे।

अधिकांश लोग जब कुछ ऐसा पाने की कोशिश कर रहे होते हैं, जिसका उनके लिए बहुत महत्व है, तो वे अत्यधिक अशांत या तनावग्रस्त हो जाते हैं। अधीर और अशांत कार्य ईश्वर की शक्ति को आकर्षित नहीं करते, परंतु इच्छाशक्ति का निरंतर शांत, शक्तिपूर्ण प्रयोग सृष्टि की शक्तियों को झकझोर देता है और अनंत से उत्तर प्राप्त करता है।

आप जो कुछ भी करना चाहते हैं, उसकी सफलता का बीज आपकी इच्छाशक्ति में है। कठिनाइयों से बुरी तरह आहत हुई इच्छाशक्ति थोड़े समय के लिए पंगु हो जाती है, परंतु जो कृतसंकल्प मनुष्य यह कहता है, ‘मेरा शरीर भले ही टूट जाए, परंतु इच्छाशक्ति रूपी मेरा सिर झुक नहीं सकता।’ वह इच्छाशक्ति की सबसे बड़ी अभिव्यक्ति को प्रदर्शित करता है।

इच्छाशक्ति ही आपको दिव्य बनाती है। जब आप उस इच्छाशक्ति का प्रयोग करना बंद कर देते हैं, तो आप नश्वर मानव बन जाते हैं। बहुत-से लोग कहते हैं कि हमें अपनी इच्छाशक्ति का प्रयोग परिस्थितियों को बदलने के लिए नहीं करना चाहिए। हम ईश्वर की योजना में हस्तक्षेप नहीं करें। यदि हमें इच्छाशक्ति का प्रयोग न करना होता, तो ईश्वर हमें वह शक्ति देते ही क्यों? एक बार मैं ऐसे आदमी से मिला, जो कहता था कि वह इच्छाशक्ति के प्रयोग में विश्वास नहीं करता, क्योंकि उससे अहंकार बढ़ता है। मैंने कहा, ‘आप बोलने के लिए, खड़े होने के लिए या खाने के लिए, यहां तक कि सोने के लिए भी। आप जो कुछ भी करते हैं, उसमें इच्छाशक्ति का प्रयोग करते हैं।

इच्छाशक्ति के बिना आप केवल एक यंत्रवत व्यक्ति बन जाएंगे।’ जब ईसा मसीह ने कहा था, ‘प्रभु, मेरी इच्छा नहीं, केवल आपकी इच्छा पूर्ण हो’, तो उनका यह अर्थ नहीं था कि इच्छाशक्ति का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। वे यह दर्शा रहे थे कि मनुष्य को वासनाओं के अधीन रहनेवाली अपनी इच्छाशक्ति को झुकाकर ईश्वर की इच्छा के साथ जोड़ना सीखना चाहिए। जब दृढ़ता से उचित प्रार्थना की जाती है, तो वह इच्छाशक्ति है।

आप जिस परिणाम के लिए प्रार्थना कर रहे हों, उसकी संभावना में आपको पूर्ण विश्वास होना चाहिए। आपको यदि घर की आवश्यकता हो और आपका मन कह रहा

हो, ‘अरे मूर्ख ! घर बनाना तेरे बस की बात नहीं।’ तब फिर आपको अपनी इच्छाशक्ति को और अधिक बलवान बनाना चाहिए। जब आपके मन से ‘बस की बात नहीं’ निकल जाएगा, तब ईश्वर की शक्ति उसका स्थान ले लेगी।

आपके लिए आसमान से कोईघर गिराया नहीं जाएगा। आपको उस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए रचनात्मक कार्यों द्वारा इच्छाशक्ति को निरंतर प्रयुक्त करते जाना होगा। जब आप असफलताओं से हार माने बिना निरंतर प्रयास करते रहेंगे, तो आपकी इच्छित वस्तु प्राप्त हो जाएगी। जब आप लगातार अपने विचारों और कार्यकलापों में उस इच्छाशक्ति का प्रयोग करते रहते हैं, तो जिसकी आप इच्छा कर रहे हों, उसे साकार होना ही पड़ेगा।

यदि आपकी इच्छा के पूर्ण होने का कोई तरीका दुनिया में न हो, तब भी अगर आपकी इच्छाशक्ति निरंतर दृढ़ बनी रहती है, तो इच्छित परिणाम किसी-न-किसी तरह प्रकट हो ही जाएगा। इस प्रकार की इच्छाशक्ति में ही ईश्वर का उत्तर होता है, क्योंकि इच्छाशक्ति ईश्वर से ही आती है। अखंड इच्छाशक्ति दैवीय इच्छाशक्ति है।

से दुर्बल इच्छाशक्ति एक सीमित इच्छाशक्ति है। जैसे ही कठिनाइयां और असफलताएं उसे नष्ट कर देती हैं, अनंत शक्ति के स्रोत उसका संबंध टूट जाता है। मानवीय इच्छाशक्ति के पीछे ईश्वर की इच्छाशक्ति होती है, जो कभी विफल नहीं हो सकती। यहां तक कि ईश्वर की इच्छाशक्ति को रोकने की शक्ति मृत्यु में भी नहीं है। जिस प्रार्थना के पीछे अनवरत इच्छाशक्ति हो, उस प्रार्थना का उत्तर प्रभु अवश्य देंगे।

अधिकांश लोग मानसिक या शारीरिक जब उन्हें प्रार्थना करनी होती है, तब प्रार्थना और जैसे ही झप‌की आती है, तो वे सीधे स्तर पर अथवा दोनों में आलसी होते हैं। के स्थान पर वे निद्रा के बारे में सोचते हैं बिस्तर में घुस जाते हैं। उसी के साथ उनकी प्रार्थना का अंत हो जाता है।

संसारी व्यक्ति का दिमाग नकारात्मकता से ही भरा रहता है। कुछ विशेष गुणों और आदतों वाले परिवार में जन्म लेने के कारण वह इनसे प्रभावित होकर सोचने लगता है कि वह कुछ कार्य नहीं कर सकता, वह ज्यादा चल नहीं सकता, वह इस चीज को खा नहीं सकता, वह उसको सहन नहीं कर सकता। उन सब नकारात्मकताओं को जलाना ही होगा। आप जो कुछ भी करना चाहें, उसे कर पाने की शक्ति आपके अंदर है। वह शक्ति इच्छाशक्ति में निहित है।

जो कोई इच्छाशक्ति को विकसित करना चाहे, उसके लिए अच्छी संगति में रहना अनिवार्य है। आप यदि महान गणितज्ञ बनना चाहते हैं और आपके सभी संगी-साथी गणित में रुचि नहीं रखते हैं, तो आप निश्चय ही हतोत्साहित हो जाएंगे। जब आप पारंगत गणितज्ञों की संगत में रहते हैं, तो आपकी इच्छाशक्ति को उससे बल मिलता है। आप सोचते हैं- ‘यदि दूसरे लोग इसे कर सकते हैं, तो मैं भी इसे कर सकता हूं।’

अपनी इच्छाशक्ति को विकसित करने की उत्सुकता में तुरंत बड़े कार्यों को न लें। सफल होने के लिए पहले अपनी इच्छाशक्ति को किसी ऐसे छोटे कार्य में इस्तेमाल कीजिए, जिसके बारे में आप सोच रहे हों कि आप उसे नहीं कर सकते। यदि आप उस पर कठिन परिश्रम करते हैं, तो आप सफल हो सकते हैं। मुझे वे सभी लक्ष्य याद हैं, जिनके बारे में मेरे मित्र और अन्य कई लोग मुझे बताते थे कि मैं उनमें कभी सफल नहीं हो सकता, लेकिन मैं सफल हुआ। ऐसे ‘शुभचिंतक’ बहुत हानि कर सकते हैं। भगवान बचाए ऐसे लोगों से! संगति का इच्छाशक्ति पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है।

निष्कर्ष

सफलता कोई जादू नहीं है। यह रोज़ किए गए छोटे-छोटे सही निर्णयों का परिणाम है।

यदि आप आज से:-

  • लक्ष्य स्पष्ट करेंगे
  • इच्छाशक्ति मजबूत करेंगे
  • अनुशासन अपनाएँगे
  • निरंतर प्रयास करेंगे

तो सफलता निश्चित है।

याद रखें:-
सपने वो नहीं जो सोते समय आते हैं, सपने वो हैं जो आपको सोने नहीं देते।

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