दुनिया में चाहिए नाम पैसा और पावर तो आज से ही अपने दिनचर्या में करें ये बदलाव

By: arcarrierpoint

On: Sunday, September 14, 2025 6:53 PM

दुनिया में चाहिए नाम पैसा और पावर तो आज से ही अपने दिनचर्या में करें ये बदलाव
Google News
Follow Us

दुनिया में चाहिए नाम पैसा और पावर तो आज से ही अपने दिनचर्या में करें ये बदलाव:-हर इंसान की ख्वाहिश होती है कि उसके पास नाम, पैसा और पावर हो। लेकिन यह सिर्फ़ ख्वाहिश करने से नहीं मिलता, बल्कि इसके लिए सही आदतें, अनुशासन और मेहनत ज़रूरी है। अगर आप अपनी डेली रूटीन (दिनचर्या) में छोटे-छोटे बदलाव कर लें, तो धीरे-धीरे आपके जीवन में बड़ा परिवर्तन आ सकता है।

मैं सपने देखने वाला इंसान हूं… लेकिन मैं खुली आंखों से सपने देखता हूँ। मेरा मानना है कि जिंदगी में कुछ भी असंभव नहीं है, बस आपके लक्ष्य साफ होने चाहिए। जो कुछ मेरी जिंदगी में हुआ है, यह कभी एक सपना था और अब हकीकत है। इस बात से मुझे गर्व और खुशी दोनों मिलती है।

अपने करियर को और सफल बनाना। सबसे अहम, अपने देश के लिए बड़ी ट्रॉफी जीतना। अगर ऐसा होता है, तो यह मेरे जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक होगी। मुझे पूरा विश्वास है कि आने वाले समय में पुर्तगाल जरूर कोई अहम खिताब जीतेगा। यह विश्वास मुझे और मेहनत करने की प्रेरणा देता है।

सपने हकीकत बन जाएं, इसके लिए आपको मेहनत के साथ काम करते रहना होगा। आज भी मेरी कोशिश खूब मेहनत करने की होती है। मैं अच्छे से जानता हूं कि केवल मेहनत के कारण ही में इस स्तर पर आ पाया हूं। अगर वाकई मैंने कोई स्तर हासिल किया है, तो यहां तक पहुंचने में सिर्फ मेरे आत्मविश्वास का हाथ ही नहीं है। यह सिर्फ इसलिए हो पाया है कि मैं कुछ अलग और ज्यादा करता था। मैदान पर भी और मैदान के बाहर भी।

तब मैंने यह सोचा कि शरीर तो सुधर सकता है, जिम जाकर बन सकता है। कड़ी मेहनत और समर्पण से सब संभव है, सब ठीक हो सकता है। मैंने तय किया कि मैं अपना शरीर बना लूंगा। मैंने यह बेहद कम वक्त में किया। आज भी मैं अपने शरीर को आखिरी दम तक खींचता हूं और यह प्रतिक्रिया करता है, यह अलग अनुभव है जो मुझे हर रोज खुशी देता है। यह पहला मौका था जब मैंने मेहनत का रंग देखा था। इसके बाद से मुझे मेहनत का शौक लग गया। हर इंसान मेहनत का आनंद लें। एक बार आपने मेहनत को रंग लाते देख लिया तो फिर यह रंग उतरने

मेरा हीरो कोई ऐसा इंसान नहीं है जिससे मैं सिर्फ ऑटोग्राफ लेना चाहं। हीरो तो वह है जिसकी सोच और राय मुझे प्रेरित करे। चाहे वह कोई अभिनेता हो या बास्केटबॉल, गोल्फ या फॉर्मूला वन का खिलाड़ी। मैं केवल फुटबॉलर नहीं हूं, बल्कि हमेशा से एथलीट बनने की भावना रखता हूं। अगर मैं फुटबॉल फुटबॉल में न होता, तो जरूर किसी और खेल में अपनी पहचान बनाता।

मेरे लिए जिंदगी का असली मतलब है… पूरी गहराई से जीना, अपने पेशे में छाप छोड़ना, खुश रहना और एक अच्छा इंसान बनकर युवाओं को प्रेरित करना। यही मेरी सोच है और यही मेरे जीने का तरीका। अब यह सवाल नहीं कि मैं कैसे याद किया जाना चाहता हूं क्योंकि जो कुछ मैंने पिछले दस-बारह सालों में हासिल किया है, उसने मुझे फुटबॉल के इतिहास का हिस्सा बना दिया है।

  • अपनी संवेदनाओं को मजबूत करें, ताकि जीवन आपको यथासंभव कम चोट पहुंचाए।
  • सभी वस्तुएं एक ही तंत्र का हिस्सा हैं, जिसे प्रकृति कहते हैं; जीवन तभी अच्छा है जब वह प्रकृति के साथ सामंजस्य में हो।
  • मनुष्य स्वयं को जीतकर ही संसार को जीत सकता है।
  • हमारे पास दो कान और केवल एक मुंह होने का कारण यह है कि हम अधिक सुनें और कम बोलें।
  • पैरों से ठोकर खाना बेहतर है, बनिस्बत जुबान से।
  • कोई भी बुराई सम्मानजनक नहीं है; केवल मृत्यु सम्मानजनक है, अतः मृत्यु बुराई नहीं है।
  • भाग्य कारणों की अनंत कड़ी है, जिसके द्वारा वस्तुएं अस्तित्व में आती हैं। वही कारण या सूत्र है जिसके द्वारा संसार चलता है।
  • सुख-समृद्धि धीरे-धीरे प्राप्त होते हैं, फिर भी वह कोई छोटी चीज नहीं हैं।
  • सुख जीवन के अच्छे प्रवाह का नाम है।
  • बुरा भाव मन का ऐसा आंदोलन है, जो तर्क के विरुद्ध और प्रकृति के विपरीत है।
  • सभी सज्जन लोग एक-दूसरे के मित्र होते हैं।

कमजोरी दिखाना कमजोरी नहीं कहलाता है, यह तो साहस का सबसे बड़ा प्रमाण है। जब हम अपने डर, असुरक्षा और अपूर्णताओं को स्वीकारते हैं, तभी मजबूत बनते हैं। लोग अक्सर सोचते हैं कि खुद को बचाने के लिए भावनाएं छुपाना जरूरी होता है, लेकिन असल में खुलकर जीना ही रिश्तों और जीवन, दोनों को गहराई दे सकता है।

मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु उसका डर है और सबसे बड़ा मित्र उसका आत्मविश्वास। जब तक हम अपने डर को नहीं जीतते, तब तक अपनी क्षमताओं को नहीं पहचान सकते। हर असफलता याद दिलाती है कि हमने प्रयास किया। जीवन में जीतता वही है, जो हार कर भी मुस्कराता है और दोबारा खड़ा हो जाता है। बस इरादे मजबूत हों।

किसी भी लक्ष्य तक पहुंचने के लिए केवल प्रतिभा पर्याप्त नहीं होती। निरंतर प्रयास और धैर्य जरूरी है। लोग शुरुआत में तेजी से आगे बढ़ते हैं, लेकिन जल्दी हार मान लेते हैं। जो कठिनाइयों के बावजूद लगातार छोटे कदम उठाता है, वह मंजिल तक पहुंचता है। जुनून रास्ता दिखाता है, धैर्य उस रास्ते पर टिकाए रखता है। बस रुकें नहीं, चलते रहें।

लोग केवल पुरस्कार से प्रेरित नहीं होते। उनका उत्साह तब जागता है जब वे अपने काम में कोई उद्देश्य देखते हैं। यदि हम किसी कार्य को केवल वेतन या लाभ के लिए करते हैं, तो प्रेरणा क्षणिक होती है। लेकिन जब हम महसूस करते हैं कि हमारा प्रयास किसी बड़े मकसद से जुड़ा है, तब काम आनंद में बदल जाता है। आत्मनिर्भरता, निपुणता और उद्देश्य प्रेरणा देते हैं। जब व्यक्ति को निर्णय लेने की स्वतंत्रता और सुधार करने का अवसर मिलता है, तो उसकी क्षमता दोगुनी हो जाती है।

बिजनेस लीडर्स अक्सर स्वाभाविक रूप से जीत पर ही ध्यान केंद्रित करते हैं। यह तो एक बात है। लेकिन शालीनता से हारना सीखना भी उन्हें आना चाहिए। यह भी उतना ही जरूरी है। एक समाज के रूप में हमें हार को ऐसे अनुभव के रूप में अपनाना चाहिए, जो आवश्यक बदलाव और विकास को प्रेरित कर सकता है। साथ ही हमें कुछ ऐसे कार्यस्थल भी बनाने चाहिए जहां यदि कोई हार जाए, तो उसे हारने वाला न समझा जाए। यहां चार तरीके दिए गए हैं, जिन्हें अपनाकर लीडर्स अच्छे ढंग से हारने का उदाहरण प्रस्तुत कर सकते हैं:

स्टुअर्ट बटरफील्ड और उनकी टीम ने शुरुआत में ग्लिच नामक एक मल्टीप्लेयर वीडियो गेम बनाने की कोशिश की थी। जब यह प्रोजेक्ट सफल न हुआ, तो उन्होंने दिशा बदली और उस आंतरिक संचार उपकरण को एक उत्पाद में बदल दिया, जिसे उन्होंने खुद के लिए विकसित किया था। यही आगे चलकर स्लैक बना, जिसे सेल्सफोर्स ने 27.7 बिलियन डॉलर में अधिग्रहित किया।

यदि आप अपने काम का भरपूर आनंद लेते हैं और उसमें हर बार किसी उद्देश्य को देखते हैं, तो आप अल्पकालिक जीत या हार से कहीं ज्यादा व्यवसाय की निरंतर सफलता पर ध्यान देंगे। वे लीडर्स जो लगातार खेल खेलते हैं, जिनमें एक मिशन बनाना, एक अनूठी संस्कृति पैदा करना और एक सुदृढ़ टीम को विकसित करना भी शामिल होता है, अपने कर्मचारियों को सच्ची प्रेरणा देते हैं।

स्टार्टअप संस्कृति ने तेजी से असफल होने के महत्व को दिखाया है, ताकि जोखिम और उद्यमिता से व्यावसायिक सबक सीखे जा सकें। हारना कभी-कभी बहुत धीमा और पीड़ादायक हो सकता है, जिसमें कर्मचारियों को आर्थिक और मानसिक हानि हो सकती है। ऐसे में लीडर्स को सुनिश्चित करना चाहिए कि लोगों को असफलता की हताशा और दुःख महसूस करने का स्पेस मिले।

जीतना अच्छा है, लेकिन हार को स्वीकार करना भी कमजोरी हरगिज नहीं है, बल्कि यह अपनी विनम्रता और मानवीयता दिखाने का एक बेहतरीन अवसर है। लीडर्स को यह पहचानना भी सीखना चाहिए कि कब उनके कार्य केवल बढ़त बनाए रखने की प्रवृत्ति से प्रेरित होते हैं और कब वे सचमुच कर्मचारियों और ग्राहकों की भलाई करने के लिए काम कर रहे

Whtsapp ChannelJOIN
Telegram ChannelJOIN
You Tube ChannelSUBSCRIBE

BSEB Update

Scholarship

For Feedback - feedback@example.com

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment