मेडिकल ऑफिसर बनना चाहते हैं तो आज से ऐसे करें तैयारी

By: arcarrierpoint

On: Monday, January 12, 2026 8:47 PM

मेडिकल ऑफिसर बनना चाहते हैं तो आज से ऐसे करें तैयारी
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मेडिकल ऑफिसर बनना चाहते हैं तो आज से ऐसे करें तैयारी:-मेडिकल ऑफिसर (Medical Officer – MO) बनना लाखों MBBS डॉक्टरों का सपना होता है। यह न केवल एक सम्मानजनक सरकारी नौकरी है, बल्कि समाज सेवा, जॉब सिक्योरिटी और बेहतर सैलरी का भी अवसर प्रदान करती है। यदि आप मेडिकल ऑफिसर बनने की तैयारी कर रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए एक Complete Preparation Roadmap साबित होगा।

मेडिकल-ऑफिसर राज्य या केंद्र सरकार के अधीन अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) और मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत होते हैं। इनकी नियुक्ति विभिन्न आयोगों द्वारा की जाती है।

भारत में मेडिकल ऑफिसर की भर्ती निम्न संस्थानों द्वारा की जाती है:-

  • राज्य लोक सेवा आयोग (PSC)
  • UPPSC / BPSC / JPSC / RPSC
  • ESIC
  • Railways
  • AIIMS
  • Central Health Services (CHS)

चिकित्सा के क्षेत्र में सरकारी नौकरी का सपना देखने वाले युवाओं के लिए यह एक सुनहरा अवसर है। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) जल्द ही मेडिकल ऑफिसर पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है। मेडिकल ऑफिसर का पद केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि मानवता की सेवा और सामाजिक दायित्व का प्रतीक है। यह परीक्षा विशेष रूप से उन अभ्यर्थियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है जो पहली बार आवेदन कर रहे हैं। ऐसे में सफलता पाने के लिए केवल मेहनत ही नहीं, बल्कि स्मार्ट स्टडी, प्रभावी समय प्रबंधन और सही रणनीति अपनाना भी जरूरी है। पाठ्‌यक्रम के अनुरूप सामान्य ज्ञान और विषयगत तैयारी पर विशेष ध्यान देकर अभ्यर्थी इस प्रतियोगी परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।

परीक्षा का पैटर्न समझना तैयारी की दिशा में प्रथम चरण होता है। इससे परीक्षा को पास करने की दिशा में आगे बढ़ना आसान हो जाता है। इस भर्ती प्रक्रिया में तीन चरण होंगे। प्रथम चरण में स्क्रीनिंग टेस्ट होगा। स्क्रीनिंग टेस्ट में दो भाग होंगे-पहले भाग में सामान्य अध्ययन और दूसरे भाग में संबंधित मेडिकल विषय से प्रश्न पूछे जाएंगे। लिखित परीक्षा दो घंटे की होगी। वहीं, दूसरे भाग में साक्षात्कार शामिल होगा और तीसरे चरण में दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा।

सामान्य अध्ययनः इस भाग में 30 प्रश्न पूछे जाएंगे, प्रत्येक प्रश्न एक नंबर का होगा और हर गलत उत्तर के 0.33 अंक काटे जाएंगे। इसके लिए दो घंटे का समय दिया जाएगा। इसमें सामान्य विज्ञान, भारत का इतिहास, भारतीय संविधान, भारतीय अर्थव्यवस्था एवं संस्कृति, भारतीय कृषि, भारत का भूगोल तथा विश्व भूगोल और प्राकृतिक संसाधन, यूपी की शिक्षा संस्कृति और सामाजिक प्रथाओं के सम्बन्ध में विशिष्ट जानकारी, भारत और उसके पड़ोसी देशों के चीच सम्बन्ध, राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय महत्व के समसामयिक विषय, राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय संगठन, पुरस्कार और सम्मान, देश राजधानी/मुद्रावें, महत्वपूर्ण दिवस, अनुसंधान एवं खोज, पुस्तक और उनके लेखक और सरकार की स्वास्थ्य नितियों से संबंधित प्रश्न पूछे जाएंगे।

  • अखबार पड़ना अपनी दिनचर्या में शामिल करें।
  • सामान्य ज्ञान की पुस्तकें पढ़ना शुरू करें।
  • एक बार पढ़ने के बाद मुद्दों का रोविजन जरूर करें।

इस भाग में 120 प्रश्न पूछे जाएंगे, प्रत्येक प्रश्न एक नंबर का होगा। इसमें अनाटॉमी, फिजियोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, फार्माकोलॉजी, फोरेंसिक मेडिकसिन एंड टॉक्सिकोलॉजी, कम्युनिटी मेडिसिन, मेडिसिन, सर्जरी, पेडियाट्रिक्स, ओबीजी, ऑप्थेमोलॉजी, ईएनटी, ऑर्थोपेडिक्स, साइकछट्री, एनेस्थीसियोलॉजी, रेडियो डायग्नोसिस, डर्मेटोलॉजी आदि विषयों से प्रश्न पूछे जाएंगे।

  • सिलेबस को विषयवार बांटकर पढ़ें
  • रोज अभ्यास करें और गलतियों का विशलेषण करें।
  • नियमित रीवजिन और संक्षिप्त नोट्स बनाएं।

साक्षात्कार: अंतिम चयन स्क्रीनिंग परीक्षा और साक्षात्कार के संयुक्त अंकों के आधार पर किया जाएगा। लिखित परीक्षा की वेटेज 75 और साक्षात्कार की 25 फीसदी होगा। इसमें आपके विषय से संबंधित ज्ञान, आपके व्यक्तित्व और सामान्य ज्ञान से संबंधित प्रश्न पूछे जाएंगे।

  • अपने विषय से संबंधित सवालों को दोहराएं।
  • सरकारी योजनाओं और नितियों की जानकारी रखें।
  • व्यवहार और बॉडी लैंग्वेज पर ध्यान दें।

दस्तावेज सत्यापनः- दस्तावेज सत्यापन के दौरान आयोग अभ्यर्थियों द्वारा ऑनलाइन आवेदन में दी गई सभी जानकारियों की जांच मूल प्रमाणपत्रों के आधार पर करेगा।

  • सबसे पहले अभ्यर्थी की आयु की पुष्टि के लिए हाई स्कूल अथवा समकक्ष परीक्षा का प्रमाणपत्र देखा जाएगा, क्योंकि जन्मतिथि के लिए यही मान्य दस्तावेज होता है।
  • इसके बाद शैक्षिक योग्यता से संबंधित सभी अंकपत्र और डिग्री/डिप्लोमा प्रमाणपत्र जांचे जाएंगे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अभ्यर्थी ने निर्धारित कट-ऑफ तिथि तक आवश्यक योग्यता प्राप्त कर ली है।
  • सभी मूल प्रमाणपत्र और उनकी स्व प्रमाणित प्रतियां सही क्रम में तैयार रखें।
  • आवेदन में भरी गई जानकारी और प्रमाणपत्रों में नाम, जन्मतिथि व श्रेणी का मिलान कर लें।
  • आरक्षण प्रमाणपत्र, पंजीकरण या एनओसी जैसे आवश्यक दस्तावेज वैध प्रारूप और समय-सीमा के अनुसार रखें

परीक्षा में प्रश्नों का स्तर कठिन होता जा रहा है। परीक्षा की तैयारी में उन अध्यायों को अवश्य पढ़ना चाहिए जो प्रासंगिक हैं। पाठ्यक्रम की मदद से उम्मीदवार महत्वपूर्ण विषयों और अध्यायों पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।

परीक्षा की तैयारी के दौरान छोटे नोट्स बनाना उपयोगी होता है। इसलिए प्रत्येक अध्याय से महत्वपूर्ण अवधारणाओं और विषयों को याद रखने के लिए, नोट्स बनाएं। यह अंतिम समय में रिवीजन में बहुत उपयोगी होता है। इससे आपकी समझ मजबूत होती है। नोट्स में महत्वपूर्ण लाइनों को हाइलाइट कर सकते हैं।

विषयों का दोहराना तैयारी का अभिन्न अंग है। जो भी उम्मीदवार एक दिन अध्ययन करता है, वह अगले दो दिनों में उसे भूल सकता है। अधिक समय तक सूचना को बनाए रखने के लिए रिवीजन जरूरी है।

परीक्षा में सफल होने के लिए नियमित रूप से अध्ययन करने की आवश्यकता होती है। 2. परीक्षा की तैयारी के लिए अभ्वधर्थी दैनिक, साप्ताहिक और मासिक अध्ययन कार्यक्रम बनाएं। इसमें सभी विषयों को व्यवस्थित रूप से शामिल करें।

परीक्षा में समय का प्रबंधन करना महत्वपूर्ण है। उम्मीदवारों को कम समय में प्रश्नों को हल करना होता है। यदि आपका समय प्रबंधन के कौशल में मजबूत पकड़ बना लेते हैं, तो अतिरिक्त समय का उपयोग 4. आप उत्तरों को संशोधित करने या लंबे या कठिन प्रश्नों पर अतिरिक्त ध्यान देने में कर सकते हैं।

परीक्षा की तैयारी में विगत वर्षों के प्रश्नपत्र आहम भूमिका निभाते हैं। पिछले वर्षों के प्रश्न पत्रों को हल करने से आपको परीक्षा के पेपर में रुझानों को समझने में मदद मिलती है। आप पूछे गए प्रश्न के प्रकार और कठिनाई स्तर का विश्लेषण कर सकते हैं। इससे परीक्षा को समझने में मदद मिलेगी।

परीक्षा की तैयारी स्तर को जानने का सबसे अच्छा और सबसे प्रभावी तरीका मॉक टेस्ट है। नियमित रूप से मॉक टेस्ट का प्रयास करके आप गति, सटीकता और समग्र तैयारी स्तर में सुधार कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त यह मॉक टेस्ट मजबूत और कमजोर क्षेत्रों को निर्धारित करने में मदद करता है।

  • बहुत सारी किताबें खरीदकर पढ़ने की कोशिश न करें।
  • केवल मानक और भरोसेमंद किताबों पर ध्यान दें।
  • सबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम आदि पर समय बर्बाद न करें।
  • पढ़ाई के समय फोन को साइलेंट या डू नॉट डिस्टर्व मोड में रखें।
  • सिर्फ याद करने की बजाय सिद्धांत और नियमों को समझें।
  • समझकर पढ़ना प्रश्न हल करने में मदद करता है।
  1. दूसरों से तुलना करने या खुद को कम आंकने में समय न गवाएं।
  2. अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहे और सकारात्मक मानसिकता बनाए रखें।
  • परीक्षा भवन में हर परीक्षार्थी की अपनी रणनीति होती है। प्रारंभिक परीक्षा में सारा दारोमदार सामान्य अध्ययन पर होता है। इसलिए पेपर में क्या और कैसे करना है, इस पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।
  • इस परीक्षा में हर वर्ष हजारों की संख्या में छात्र असफल हो जाते है, इसलिए इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। अतः परीक्षार्थियों को यह सलाह दी जाती है कि परीक्षा भयन में प्रवेश करने से पहले एक मुकम्मल रणनीति बनाकर ही जाएं।
  • पहली और सबसे जरूरी बात सामान्य अध्ययन की परीक्षा अवधि में समय-प्रबंधन की है। ‘परीक्षा’ निश्चित समय-सीमा में अपने ज्ञान-कौशल के प्रदर्शन का ही दूसरा नाम है. इसलिये समय प्रबंधन परीक्षा का अनिवार्य पहलू है।
  • प्रारम्भिक परीक्षा में प्रश्नों की प्रकृति इतनी गहरी और विकल्प इतने जटिल होते हैं कि अंत में समय-प्रबंधन खुद एक चुनौती बन जाता है। इससे निफ्टने का एक तरीका यह है कि वही प्रश्न हल करें आपकी ज्ञान की सीमा के दायरे में हों।
  • जिन प्रश्नों के उत्तर पता न हों या जिन पर उधेड़बुन हो, उन्हें निशान लगाकर छोड़ देना चाहिए।

मेडिकल ऑफिसर बनना किस्मत नहीं, रणनीति का खेल है।
अगर आप आज से:-

  • सही सिलेबस
  • सीमित संसाधन
  • नियमित MCQ
  • बार-बार Revision

अपनाते हैं, तो चयन पूरी तरह संभव है।

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