सोना चांदी लोगों के पहुँच से दूर- देखिए क्यूँ बढ रहा है इतना दाम

By: arcarrierpoint

On: Sunday, January 18, 2026 6:39 PM

सोना चांदी लोगों के पहुँच से दूर- देखिए क्यूँ बढ रहा है इतना दाम
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सोना चांदी लोगों के पहुँच से दूर- देखिए क्यूँ बढ रहा है इतना दाम:-सोना और चांदी सिर्फ धातु नहीं, ये हर किसी के जीवन की अनमोल धरोहर हैं। एक भारतीय महिला से पूछिए, तो ये महज तिजोरी में रखा महंगा गहना नहीं, बल्कि उसकी साधना, सुरक्षा और सम्मान का प्रतीक है। मां से मिला पहला सोने का कंगन हो, शादी का भारी मंगलसूत्र या चांदी की छोटी सी बिछिया। ये बुरे वक्त के साथी भी है और अगली पीढ़ी को सौंपा जाने वाला प्रेम भी।

हालांकि, आज जब सोने-चांदी की कीमतें रिकॉर्ड तोड़ रही हैं, तो सवाल उठता है क्या अब वो सुनहरे सपने सिर्फ यादों में सिमट जाएंगे? या इस चुनौतीपूर्ण समय में ग्राहकों के लिए बीच का कोई रास्ता भी है? महंगे सोने की खरीदारी में ठगी भी कम नहीं, ऐसे में सावधान कैसे रहें?

सोने पे छाई महंगाई कि मैं चांदी ले आई. नब्बे के दशक का यह गाना, तब के समय में सोने का हाल कहता है। सोना हमेशा से ही चांदी से आगे रहा है। हालांकि, जिस तरह से इन दिनों सोना और चांदी के बीच सांप-सीढ़ी का खेल चल रहा है, वह दिन दूर नहीं, जब चांदी भी खरीदना आम लोगों के लिए सपना बन जाएगा। भारतीय महिलाओं के लिए हमेशा से ही सोना-चांदी भावनात्मक सुरक्षा और वित्तीय योजना की तरह रहा है, लेकिन पिछले दो सालों में जिस तरह से सोना-चांदी में तेजी आई है, उससे गृहिणियों की चिंता यढ़ना लाजिमी है।

भारतीयों के दिलों, विनोरियों, अलमारियों व तहखानों में बसने वाले सोने की कीमतों में सुनामी आ गई है। चीते महान एक साल में इसकी कीमतों में तकरीबन 70 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। सोने की इस तेजी से बजट तो बिगड़ा है, पर महिलाओं का सोने के प्रति जो भावनात्मक जुड़ाव है, यह उन्हें इस महंगाई में भी टूटने नहीं देखा।

ऐसी ही कहानी है कुसुम की। दिसंचर में उनका रिश्ता तय हुआ और इसके साथ ही पूरे परिवार ने शादी की तैयारियां शुरू कर दीं। इन तैयारियों में सबसे भावनात्मक हिस्सा है नहनों की खरीदारी। अब तक एक हार व कंगन खरीदे जा चुके हैं, जिसका किल बना 16 लाख 95 हजार रुपये। यह तो एक भारतीय बह‌के श्रृंगार की बस शुरुआत भर है। कुसुम के भाई हालांकि थोड़ी राहत की सांस लेते हुए कहते हैं, ‘शुक्र है कि मां ने कुछ गहने पहले बनवा लिए थे, वरना आन की कीमतों में शायद सोना किस्तों पर लेना पड़ जाता।”

दूसरी ओर हैं दिल्ली की विधि सिंह, जिन्होंने बीते अक्षय तृतीया पर सात लाख रुपये का हार खरीदा था, जिसकी कीमत अब लगभग 10 लाख 20 हजार रुपये हो गई है। यह कहती है, ‘सुनकर अच्छा जरूर लगता है. लेकिन ये खुशी बस सुनने तक ही है। भगवान न करे कभी इसे बेचने की नौबत आए। सीना हमारे लिए निवेश से ज्यादा भाचन्य है। दरअसल, सोने की कीमतें चाहे जितनी ऊंची क्यों न चली जाएं, भारतीयों के लिए यह सिर्फ बातु नहीं, बल्कि परंपरा, सुरक्षा और विश्वास का प्रतीक ही रहेगा। लोग डीएम आई पर भी सोना खरीदने को तैयार हैं।

बीते साल जब राहुल रस्तोगी को अचानक एक बड़ी रकम की जरूरत पड़ी, तो उनकी पत्नी ने अपने गहनों के बदले लोन लेकर परिवार की वित्तीय चुनौती को संभाला। जाहिर है भारत में सोना सिर्फ श्रृंगार का माध्यम नहीं, संकट के समय भरोसेमंद आर्थिक वाल भी रहा है।

भारतीय चरों में करीब 34,600 टन सोना जमा है, जिसकी वर्तमान में कीमत करीब 3.8 से 50 खरब डॉलर के बीच है। पह दुनिया के किसी भी अन्य देश केनिजी स्वर्ण भंडार से कहीं अधिक है। दिलचस्प बात यह है कि सोने के दाम में आई ऐतिहासिक उछाल के कारण इसका कुल मूल्य भारत की जीडीपी के लगभग 88-90% के बराबर पहुंच चुका है। मतलब, भारतीय महिलाएं, जो सालों से छोटी छोटी बचत कर सोना जोड़ती आई हैं, अनजाने में ही सही देश के लिए एक विशाल आर्थिक सुरक्षा कवच तो तैयार कर ही दिया है।

मध्यम वर्ग के चरों की इंडिंग रूम चर्चाओं में आजकल एक ही डर है-सोने का भाव। फिर भी सोने को लेकर उनका नो जुड़ाव है, वो कम नहीं हुआ है। जैसे रीता कहती है, ‘मैं तो बीते महीने अपनी बिटिया के लिए कंगन बनवाने का सोच रही थी। महंगा हो गया है, मगर लेना ती है ही, सोना सस्ता कब था? मेरा जो बजट है, उसी में कुछ नकुछ तो लूंगी ही।’ दरअसल, यह उस मां का भरोसा है, जिसे पता है कि विटिया के हाथ सीने से ही सजेंगे, चाहे वजन मोड़ा कम ही क्यों न हो।

“मेरा मन तो था कान के लिए कुछ लेने का, मगर अभी तो हिम्मत नहीं पड़ रही। में पैसे जोड़ रही हूं और इस उम्मीद में हूं कि शायद कीमत कुछ कम हो जाए। मगर मैं लूंगी तो जरूर।’ यह उस गृहिणी की आवाज है, जो अपनी छोटी-छोटी है बचत को सोने में चलते देखना चाहती है। तो यहां किसी ने भी यह नहीं कहा कि सोना अब भाता नहीं। वो ललचाता और उसे खरीदने को मन कुलबुलाता भी है। ज्वेलर्स की दुकानों पर भीड़ कम नहीं हुई है, बस अब लोग 10 तोले की जगह 2 तोले की बात कर रहे हैं। हां, आज की पीढ़ी सोने के लिए, फिलहाल उतनी दीवानी नहीं दिख रही, मगर इनकी पिक्चर अभी बाकी है।

पिछले साल के मुकाबले महनों की कुल खपत में करीब 26% की कमी आई है। यानी लोग कम सोना खरीद रहे है, लेकिन उच्च कीमतों के कारण कुल कारोबार बढ़ा हुआ दिख रहा है, जहा मांग (वजन) में 16% की कमी आई है, वहीं सोने की कुल बिक्री का मूल्य 2.3% बढ़कर ₹2,03,240 करोड़ पहुंच गया है। इसका मतलब है कि लोग कम सोना खरीदकर भी ज्यादा पैसे खर्च कर रहे हैं।

गहनों की बिक्री गिर रही है, लेकिन सोने के सिक्कों और छड़ों की मांग में 20% का उछाल आया है। लोग अब गहनों पर लगने वाले 15-20% मेकिंग चार्ज से बचना चाहते हैं। ये अब सोने को सजावट की बजाय संपत्ति के रूप में देख रहे हैं, जिसे जरूरत पड़ने पर बिना किसी कटौती के तुरंत कैश कराया जा सके।

सोने की चमक फिलहाल चमने का कोई आसार नजर नहीं आ रहा। विशेषज्ञों के अनुसार, ऊंची कीमतों की वजह से भले ही आम उपभोक्ता गहनों की खरीद में थोड़ी सावधानी बरतें, लेकिन सोना निवेश के रूप में अपनी पकड़ मजबूत करता जा रहा है। खासतौर पर सिक्कों, बार और अन्य निवेश माध्यमों के जरिए इसकी मांग लगातार बनी हुई है। यही निवेश मांग, गहनों की सुस्त खरीद की भरपाई भी कर रही है।

हालांकि, विशेषज्ञ निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो का 10-15 फीसदी हिस्सा ही सोने में रखने की सलाह दे रहे हैं।

  • जनवरी 2024 64,000 (प्रति 10 ग्राम सेना)
  • जनवरी 2026 1,42,789 २ (प्रति 10 ग्राम सोना।

चांदी की गरीबों का सीना माना जाता है, जहां इसकी मांग हमेशा बनी रहती है। भगर अब चांदी की कीमतों में आई हालिया उछाल ने इसे अब लम्जरी की श्रेणी में खड़ा कर दिया है। पिछले एक साल में चांदी की कीमते 80,000-85,000 र प्रति किली से बढ़कर ₹1.25 लाख से ₹1.30 लाख के स्तर को पार कर गई है।

सोने की बढ़ती कीमतों ने भारतीय महिलाओं की खरीदारी को बदल दिया है। मार्केट रिसर्च बताते है कि अब तीन मुख्य ठगरीकी से सोने की खरीदारी हो रही है-

  • लो कैरेट ज्वेलरीः- अब लोग 22 के बजाय 18. 14 और यहां तक कि 8 कैरेट तक की गोल्ड ज्वेलरी की ज्यादा मांग कर रहे हैं।
  • लाइटवेट डिजाइनः- शादियों में 10 तोले के भारी हार की जगह हल्के, जडाऊ, या मिनिमलिस्ट डिजाइन वा गहनों का वलन बढ़ा है।
  • पुराना सोनाः- लोग पुराने सोने को गला कर नई डिजाइन बनवा रहे हैं। पिछले माल भारत में सोने की रीसाइक्लिंग में 15-20% का उछाल देखा गया।

जैसे-जैसे सोने की कीमत बढ़ रही है, बाजार में इससे संबंधित ठगी के मामले भी बढ़ रहे हैं। अगर आप चाहते है कि आपका सौना सी आने खरा साबित हो, तो इन्हें जाने

  • हमेशा बीआईएस हॉलमार्क बाला सोना खरीदें, जिस पर वैआईएस लोगों, शुद्धता और हॉलमार्किंग सेंटर का कोड हो। एचयूआईडी कोड बिल और गहने पर जरूर देखें। इसे बीआईएस केयर ऐप पर जाकर मिलान कर सकते हैं।
  • ग्राहकों को कैरेट और शुद्धता के अंतर को समझाना चाहिए, जैसे 24 कैरेट सबसे शुद्ध होता है, पर गहनों के लिए 22 या 18 कैरेट का उपयोग होता है।
  • सोने का वजन हमेशा डिजिटल तराजू पर करवाए और यह सुनिश्चित करें कि पत्थर, मोती या धागे का वजन अलग से घटाया गया हो। इसके अलावा, मेकिंग चार्ज के बारे में पहले ही स्पष्ट जानकारी लें और उस दिन के अधिकारिक गोल्ड रेट का अखबार या वेबसाइट से मिलान करें, ताकि छूट के नाम पर अधिक रेट न वसूला जाए।
  • हमेशा जीएसटी वाला पक्का बिल है। कच्चे बिल पर सोना खरीदना आपको कानूनी व आर्थिक मुश्किल में डाल सकता है।
  • अगर पुराने गहने से नए गहने बनवा रहे हैं, तो शुद्धता की जांच अपने सामने करवाएं। एक्सचेंज वैल्यू या कटौती की शरी पहले ही लिखित में ले लें, क्योंकि कई बार दुकानदार पुराने सोने की शुद्धता में भारी कटौती कर देते हैं।
  • बाजार भाव से बहुत सस्ता सोना खरीदने के लालच में न पड़े, क्योंकि यह नकली या कम शुद्ध हो सकता है।
  • गहनों से ज्यादा Investment Gold पर ध्यान दें
  • एक साथ खरीदने की बजाय SIP / Digital Gold
  • केवल जरूरत पर ही ज्वेलरी खरीदें
  • Digital Gold
  • Sovereign Gold Bond (SGB)
  • Gold ETF
  • Silver ETF

इन विकल्पों में:-

  • चोरी का डर नहीं
  • मेकिंग चार्ज नहीं
  • टैक्स में फायदा
  • शॉर्ट टर्म में बड़ी गिरावट की उम्मीद कम है
  • कभी-कभी हल्का Correction संभव
  • लेकिन लॉन्ग टर्म में सोना अब भी मजबूत निवेश माना जा रहा है
  • गहनों की बजाय निवेश के लिए सोना खरीदें
  • एक साथ बड़ी रकम न लगाएं
  • Digital Gold या SGB पर ध्यान दें
  • जरूरत पर ही ज्वेलरी लें

सोना और चांदी महंगे जरूर हुए हैं, लेकिन इनकी अहमियत आज भी बनी हुई है। हालांकि अब आम लोगों को सोच-समझकर और सही विकल्प चुनकर निवेश करना होगा।

आज के दौर में समझदारी इसी में है कि:-

परंपरा और निवेश के बीच संतुलन बनाकर चलें।

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