एआई का ऐसे करें इस्तेमाल आपकी काम करने और पढने की स्पीड होगी 4 गुना:-इसमें दोराय नहीं कि एआई की मदद से घंटों के काम मिनटों में पूरे हो रहे हैं, लेकिन हर बात पर एआई का सहारा, हमारी सोचने की क्षमता छीन रहा है। हमें याद रखना होगा कि स्मार्ट टूल्स ध्यान करने की सलाह दे सकते हैं, हमारे बदले ध्यान कर नहीं सकते। मानसिक शांति के लिए ‘डिजिटल माइंडफुलनेस’ का अभ्यास बेहद जरूरी है।
एआई को आदत नहीं ताकत बनाएं
एआईआपका असिस्टेंट है। यह असिस्टेंट आपके दिन की योजना बना सकता है, आपके ईमेल को संक्षेप में लिख सकता है और आपके कामों को रफ्तार दे सकता है। पर क्या एआई सब कुछ है? मेरा मानना है कि एआई आपको ध्यान करने की सलाह दे सकता है, लेकिन वह आपके लिए ध्यान नहीं कर सकता। ध्यान तो आपको ही करना होगा।
अगर एआई तकनीक और हमारे डिजिटल उपकरण हमारी जगह ध्यान भी कर सकते, तो मेरे पास ‘माइंडफुलनेस’ के बेहतरीन आंकड़े होते। हर कोई ध्यान के हर सत्र में मौजूद होता और शायद हर किसी को ‘आंतरिक शांति’ का गोल्ड मेडल मिल जाता। हममें से अधिकांश लोगों की तरह मैंने यही सीखा है कि हमारे उपकरण कितने भी स्मार्ट क्यों न हो जाएं, वे हमारे हिस्से के ‘महसूस’ करने वाले काम नहीं कर सकते। जिन कामों से हमारी भावनाएं, हमारी प्रेरणाएं जुड़ी होती हैं, ये काम हमारे स्मार्ट उपकरण नहीं कर सकते। वे हमारी सांसें धीमी नहीं कर सकते या यह याद नहीं दिला सकते कि हमारे लिए क्या जरूरी है। वह काम आज भी, सौभाग्य से, इंसान के हिस्से ही है।
तकनीक संग ऐसा हो रिश्ता…
तकनीक के साथ हमारा ऐसा रिश्ता होना चाहिए, जो थकाने की बजाय हमारा सहायक हो। आइए तकनीकी उपकरणों के इस्तेमाल से जुड़ी एक संतुलित दिनचर्या बनाने की कोशिश करते हैं। मैं इसे ‘माइंडफुल टेक रूटीन’ कहता हूं। एक ऐसी दिनचर्या, जो स्पष्टता बढ़ाने के लिए एआई का उपयोग करे, उसे और उलझाने के लिए नहीं।
एआई ने आधुनिक जीवन को काफी कुछ बदला है। जैसे, नोशन एआई प्रोजेक्ट्स को व्यवस्थित कर सकता है। ‘ग्रामरली’ आपके लेखन को निखारता है। आपकी कॉफी ठंडी होने से पहले चैटजीपीटी आपके 80 प्रतिशत ईमेल्स के ड्राफ्ट तैयार कर देता है, लेकिन, इस शक्ति की छिपी हुई कीमत भी चुकानी पड़ती हैः निरंतर उत्तेजना। हम न केवल अपने काम, बल्कि सोच को भी बाहर ठेके पर देने लगे हैं। हम टैब्स और नोटिफिकेशन के बीच कूदते रहते हैं और दोपहर 2 बजे तक हमारा दिमाग उस ब्राउजर विंडो की तरह लगता है, जिसमें बहुत सारे टैब खुले हैं।
एआई खलनायक नहीं है, चुनौती यह है कि हम इसे कैसे उपयोग करते हैं? लक्ष्य डिजिटल मिनिमलिज्म’
तकनीक का कम इस्तेमाल नहीं, बल्कि डिजिटल माइंडफुलनेस है। हम तकनीक का उपयोग विवेक से करें।
‘माइंडफुल टेक रूटीन’ के पांच कदम
1 दिन की शुरुआत ‘एनालॉग ढंग से। इसका मतलब है- स्क्रीन से दूर। कुछ भी ऐसा करें, जो डिजिटल दुनिया से परे हो। मसलन, डायरी लिखना, स्ट्रेचिंग करना या नोटिफिकेशन चेक करने से पहले सुकून से कॉफी पीना। दुनिया या आपका इनबॉक्स, आपसे क्या चाहता है, यह देखने से पहले खुद से मिलें।
2 एआई आकर्षक है। जल्दी ही आप हर छोटी चीज के लिए इस पर निर्भर हो सकते हैं। एआई का उपयोग करने से पहले ऐसा करें।
- रुकैः- मैं क्या हासिल करना चाहता हूं?
- साधनः- एआई का उपयोग मदद के लिए करें, निर्णय लेने के लिए नहीं?
- सोचें:- क्या नतीजे मेरे व्यक्तित्व के अनुरूप हैं?
3 आत्म-चिंतन करें, इसलिए कि आप किसी चीज को तकनीक के जरिये कर सकते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि आपको उसे करना ही चाहिए। किसी काम को एआई को सौंपने से पहले खुद से पूछें, ‘क्या मैं अपना समय बचा रहा हूं या मैं सोचने से बच रहा हूं?’
4 दोपहर में कुछ देर अपने लिएः दूसरी कॉफी और लगातार आ रहे नोटिफिकेशन के बीच, कुछ देर तकनीक से दूर हटें। 10 मिनट का डिजिटल डिटॉक्स करें। कोई स्क्रीन नहीं, कोई ईयरबड नहीं। थोड़ा टहलें, पानी पिएं या लिखें कि आज मैंने सार्थक काम क्या किया? आगे क्या किया जाना है? दिमाग को व्यवस्थित होने में मदद मिलेगी।
5 दिन का अंत ‘मानवीय’ तरीके से करें। अगर मन की सतह पर कई टैच यानी दिन भर के जरूरी या गैर जरूरी मुद्दे खुले रह गए हैं, तो सोने से पहले उनमें से कुछ को बंद कर दीजिए।
सोने से पहले
- कुछ गहरी सांसे लें। सांस लेते समय चार तक गिनती करें और बाहर छोड़ते समय छह तक गिर्ने। इससे तंत्रिका तंत्र को विश्राम मोड में जाने का संकेत मिलेगा |
- दो-तीन मिनट के लिए शांत बैठे या ध्यान करें। पूरे शरीर पर ध्यान दें और देखें कि कहीं तनाव तो नहीं है। अगर तनाव महसूस हो तो खुद को सहज करें।
- अंत में पूछेंः ‘कल क्या जरूरी किया जाना है?
- इस अभ्यास से आप समझ पाएंगे कि अब और तकनीक की जरूरत नहीं है।
हर दिन बेहतर बनने की तैयारी
डिजिटल डिटॉक्स का मतलब अपने ऐप्स डिलीट करना या तकनीकी उपकरणों से दूरी बनाना नहीं है। इसका मतलब यह याद रखना है कि जब आप उन्हें खोलते हैं, तो कंट्रोल किसके हाथ में है। वे आपके ऊपर हावी तो नहीं हो रहे? इन्हें अपनी बेड़ी बनाने से बचें।
दिन में 10 मिनट ये जरूर करें (AI से पहले)
- आंखें बंद करें
- गहरी सांस लें
- फोन और स्क्रीन से दूरी बनाएं
इससे:-
- दिमाग शांत होता है
- सोचने की क्षमता बढ़ती है
- AI का सही उपयोग करना सीखते हैं
छात्रों के लिए खास सलाह
अगर आप:-
- मैट्रिक / इंटर स्टूडेंट
- प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं
- सरकारी नौकरी की तैयारी में हैं
- तो AI को:-
- गाइड बनाएं
- शॉर्टकट नहीं
क्योंकि परीक्षा में AI नहीं, आपका दिमाग काम आता है।
AI इस्तेमाल करते समय ये गलतियां न करें
- बिना सोचे कॉपी-पेस्ट
- हर सवाल का जवाब AI से
- खुद लिखना छोड़ देना
- स्क्रीन पर घंटों बैठे रहना
सही तरीका अपनाया तो फायदा क्या होगा?
- पढ़ाई तेज
- काम जल्दी
- कम समय में ज्यादा रिजल्ट
- दिमाग तेज
- आत्मविश्वास मजबूत
यानी आपकी स्पीड 4 गुना तक बढ़ सकती है।
निष्कर्ष (Conclusion)
AI एक शक्तिशाली हथियार है, लेकिन तभी जब आप इसे सही दिशा में इस्तेमाल करें।
याद रखें—
AI आपकी ताकत बने, आपकी आदत नहीं।
अगर आप संतुलन बनाकर चलते हैं, तो AI आपकी पढ़ाई और काम दोनों में आपको बाकियों से आगे ले जा सकता है।
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