ऐसे हो रहा साइबर ठगी | देखिए कैसे ठग बना रहे हैं आपको शिकार

By: arcarrierpoint

On: Saturday, December 27, 2025 7:41 PM

ऐसे हो रहा साइबर ठगी | देखिए कैसे ठग बना रहे हैं आपको शिकार
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ऐसे हो रहा साइबर ठगी | देखिए कैसे ठग बना रहे हैं आपको शिकार:-देश में डिजिटल लेनदेन और मोबाइल उपयोग बढ़ने के साथ-साथ साइबर ठगी के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। हालिया जांच और मीडिया रिपोर्ट्स से यह साफ हो गया है कि बिहार अब साइबर ठगों के लिए एक बड़ा अड्डा बनता जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोहों ने राज्य के कई जिलों में अपना नेटवर्क फैला लिया है और आम लोगों की मेहनत की कमाई पर डाका डाल रहे हैं।

ताजा खुलासों में सामने आया है कि फर्जी बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और तकनीकी सॉफ्टवेयर के जरिए करोड़ों रुपये का अवैध लेनदेन किया गया। इस साइबर ठगी के जाल में पढ़े-लिखे लोग, छात्र, नौकरीपेशा और ग्रामीण इलाकों के भोले-भाले नागरिक सबसे ज्यादा शिकार हो रहे हैं।

पाकिस्तान, बांग्लादेश समेत कई देशों से ऑनलाइन बेटिंग का पैसा भारत मंगवाकर उसे खपाने वाले एक संगठित अंतरराष्ट्रीय गिरोह का बिहार पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है. गर्दनीबाग पुलिस ने इस नेटवर्क से जुड़े 13 शातिरों को गया, पटना, वैशाली, मुजफ्फरपुर और बेतिया से गिरफ्तार किया है.

इस गिरोह में सॉफ्टवेयर इंजीनियर, कई बैंकों के लिए काम करने वाला लोन एजेंट और मेडिकल की तैयारी कर रहा एक छात्र भी शामिल है. शुक्रवार को एसएसपी कार्तिकेय शर्मा, पश्चिमी एसपी भानु प्रताप सिंह और सचिवालय एएसपी अनु कुमारी ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि गिरोह के पास मौजूद म्यूल (फर्जी) खातों में सिर्फ भारतीय मुद्रा में ही 55 करोड़ रुपये के ट्रांजेक्शन का प्रमाण मिला है. अगर इसमें क्रिप्टो करेंसी और विदेशी मुद्रा के जरिये हुए लेन-देन को जोड़ दिया जाए, तो यह रकम 100 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच जाती है.

जांच में यह भी सामने आया है कि यही गिरोह एटीएम मशीनों में ग्लू लगाकर कार्ड फंसाने और लोगों के खातों से रुपये निकालने की घटनाओं में भी शामिल रहा है.

पुलिस के मुताबिक, गिरोह का पूरा मॉडल बेहद सुनियोजित था. सदस्य पहले कॉरपोरेट कंपनियों के नाम पर फर्जी खाते खुलवाते थे. कई मामलों में असली कंपनी मालिकों तक को यह जानकारी नहीं होती थी कि उनकी कंपनी के नाम से एक से अधिक खाते खुल चुके हैं. खाता खोलते समय दूसरे खातों के दस्तावेजों पर भी हस्ताक्षर करवा लिये जाते थे. कॉरपोरेट खातों का चयन इसलिए किया जाता था ताकि उनमें बड़ी रकम का ट्रांजेक्शन आसानी से हो सके. इन सभी म्यूल खातों को गिरोह के सरगना को सौंप दिया जाता था, जो आगे अपने विदेशी आकाओं तक पैसा ट्रांसफर करता था. बदले में हर सदस्य को कमीशन मिलता था.

पुलिस के अनुसार, सरगना सौरभद्विवेदी मेडिकल की तैयारी कर रहा था, जबकि गिरोह का पूरा तकनीकी सिस्टम जैसे खातों का संचालन, ट्रांजेक्शन मैनेजमेंट और डिजिटल ट्रेल मिटाने का काम मुजफ्फरपुर का सॉफ्टवेयर इंजीनियर सत्यम संभालता था. वहीं वैशाली का राहुल कुमार कई बैंकों के लिए लोन एजेंट के रूप में काम करता था और इसी का फायदा उठाकर वह खातों की व्यवस्था करता था.

24 दिसंबर की शाम पुलिस को सूचना मिली कि अनीसाबाद में एटीएम व साइबर ठगी से जुड़े गिरोह के सदस्य वारदात की योजना बना रहे हैं. इसके बाद सेंट्रल एसपी के नेतृत्व में टीम ने गया के 26 वर्षीय मो. आमिर और 22 वर्षीय मो. आमिर को पकड़ा. पूछताछ में पूरे गिरोह की संरचना, खातों और विदेशी लेन-देन से जुड़ी जानकारियां दीं. इसी निशानदेही पर गर्दनीबाग रोड नंबर-16 से गिरोह के 11 सदस्यों को दबोचा गया.

पुलिस ने आरोपितों के पास से 54 एटीएम कार्ड, 11 पासबुक, 28 चेकबुक, दो ब्लैक चेक, 23 सिम कार्ड, दो कार, एक पासपोर्ट और 5900 रुपये नकद बरामद किये हैं. सभी दस्तावेज और कार्ड फर्जी हैं, जांच में कई बैंकों के स्टाफ भी संदेह के घेरे में आये हैं. उन्होंने कहा कि मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर का है और क्रिप्टो करेंसी व विदेशी मुद्रा का इस्तेमाल हुआ है, तो जरूरत पड़ने पर जांच सीबीआइ को सौंपी जा सकती है.

मो. बकार, मो. जाहिद एहसान, नवनीत कुमार उर्फ सौरभ, सोनू कुमार, सुजीत कुमार व प्रभात रंजन कौतुक (सभी गया), मो. खुशाम व विशाल कुमार (पटना), राहुल कुमार (वैशाली), सत्यम कुमार (मुजफ्फरपुर) और सौरभद्विवेदी (बेतिया)

मोबाइल के उपयोग में बिहार देश में 28वें स्थान पर है। यहां की 56.18 फीसदी आबादी मोबाइल का इस्तेमाल करती है। बिहार से अलग हुआ झारखंड भी इस मामले में हमसे आगे है। झारखंड के 64 फीसदी मोबाइल यूजर हैं, जबकि उत्तराखंड तो यह 104 फीसदी है। बिहार भले ही मोबाइल इस्तेमाल के मामले में पीछे है, लेकिन साइबर धोखाधड़ी के हॉटस्पॉट के मामले में देशभर में तीसरे स्थान पर है। इस मामले में हरियाणा पहले तो महाराष्ट्र दूसरे पायदान पर है।

बिहार में नालंदा, पटना, नवादा, शेखपुरा जिले से धोखाधड़ी सबसे ज्यादा हुई है। इन जगहों के तार अन्य राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी जुड़े हैं। साइबर ठगी के जो मामले सामने आए हैं, उनकी जांच में पाया गया कि सबसे ज्यादा धोखाधड़ी के फोन कॉल इन्हीं जगहों से हुए हैं।

दूर संचार विभाग के मुताबिक इस वर्ष 80 लाख के लगभग लोग साइबर ठगी के शिकार हुए हैं। 90 हजार से ज्यादा ऑनलाइन धोखाधड़ी की शिकायतें दर्ज हुई हैं। पिछले साल की तुलना में धोखाधड़ी के शिकार होनेवालों की संख्या में 40 फीसदी की कमी आई है। 2024 की बात करें तो एक करोड़ 40 लाख लोग साइबर अपराधियों के जाल में फंसे थे, लेकिन संचार साथी एप के कारण इस बार संख्या कम हुई है।

बिहार की आधी आबादी के पास अभी भी मोबाइल नहीं है। अभी राज्य में सात करोड़ 38 लाख के पास मोबाइल है। इसमें भी एक करोड़ 71 लाख के पास टूजी सिम है। ये उपयोगकर्ता इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं करते हैं। थ्रीजी सिम का इस्तेमाल करने वाले 31 लाख सात हजार 228 है।

राज्यमोबाइल उपयोगकर्ता
झारखंड63.95 फीसदी
उत्तर प्रदेश70.30 फीसदी
उत्तराखंड106.89 फीसदी
मध्य प्रदेश69.35 फीसदी
राजस्थान80.01 फीसदी
  • साइबर ठगी में हरियाणा पहले तो महाराष्ट्र दूसरे पायदान पर है
  • 90 हजार से ज्यादा ऑनलाइन धोखाधड़ी की शिकायतें दर्ज हुई हैं

उपयोगकर्ता अभी बिहार में कम हैं। इस वर्ष दो फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इसके बाद भी मात्र 56 फीसदी लोग ही मोबाइल का इस्तेमाल कर रहे हैं। अभी सात करोड़ 38 लाख लोग मोबाइल इस्तेमाल करते हैं।

  • किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें
  • फोन पर OTP / PIN / KYC जानकारी न दें
  • APK फाइल डाउनलोड न करें
  • बैंक/पुलिस कभी फोन पर जानकारी नहीं मांगती
  • शक हो तो तुरंत 1930 पर कॉल करें
  • cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें

साइबर ठगी अब सिर्फ एक व्यक्ति का अपराध नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क बन चुका है। जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। यदि आप सतर्क हैं, तो ठग आपके पास भी नहीं फटक सकते।

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