किसान आईडी जल्दी बनाए – नहीं तो नहीं मिलेगा सब्सिडी या किसान कोड की समस्या

By: arcarrierpoint

On: Friday, January 23, 2026 8:44 AM

किसान आईडी
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किसान आईडी जल्दी बनाए- बिहार में किसानों के निबंधन के लिए चले विशेप अभियान के बावजूद बमुश्किल 29 लाख किसानों का ही निबंधन (फॉर्मर आईडी) हो सका। जनवरी में दो बार में कुल नौ दिनों के विशेष अभियान चलाए गए। फार्मर आईडी नहीं बनाने वाले किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल सकेगा।

सूबे में 85 लाख से अधिक किसानों ने पीएम किसान सम्मान योजना के लिए पंजीकरण करा रखा है। यानी, करीब एक तिहाई किसानों की ही आईडी बन पायी। वैसे 65 लाख से अधिक किसानों का ई-केवाईसी हुआ है। चूंकि अब केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ प्राप्त करने वाले सभी किसानों के लिए फार्मर आईडी को अनिवार्य कर दिया है।

आगामी किस्त का लाभ प्राप्त करने के लिए इन सभी लाभुकों को अनिवार्य रूप से फार्मर रजिस्ट्री कैंप में भाग लेकर फार्मर रजिस्ट्री वेब पोर्टल/ऐप के माध्यम से बायोमेट्रिक अथवा फेस ऑथेंटिकेशन द्वारा सत्यापन कराते हुए भूमि संबंधी दावा दर्ज करना होगा। राज्य में एग्री स्टैक योजना के तहत किसानों का निबंधन हो रहा है। इसका उद्देश्य कृषि सेवाओं को प्रभावी, पारदर्शी एवं किसानोन्मुख बनाना है।

इसके अंतर्गत प्रत्येक किसानों की फार्मर आईडी तैयार की जा रही है, जिसमें भूमि संबंधी विवरण को आधार से जोड़ा जा रहा है, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी बाधा के मिल सके। फार्मर रजिस्ट्री का कार्य प्रारंभ करने से पूर्व पांच जिले सारण गया, पूर्वी चंपारण, पूर्णिया और भागलपुर के दो-दो राजस्व ग्रामों में पायलट के रूप में यह काम हुआ। इसके बाद सभी 44500 राजस्व गांवों का बकेटिंग कार्य पूर्ण कर अप्रैल से फार्मर निबंधन प्रारंभ किया गया। बाकी गांवों के लिए सरकार से मंजूरी मांगी गई है।

  • पीएम किसान सम्मान निधि योजना का लाभ मिलेगा
  • अन्य सरकारी योजनाओं का आसानी से लाभ मिलेगा
  • निबंधित किसानों को सस्ता ऋण आसानी से उपलब्ध होगा
  • सही समय पर कृषि सब्सिडी, ऋण व बीमा की भी सुविधा
  • स्थानीय एवं विशिष्ट कृषि सलाह भी किसानों को मिलेगा

वैशाली (66 फीसदी), बेगूसराय (63 फीसदी), शिवहर, बक्सर और शेखपुरा (61 फीसदी), पूर्णिया व कटिहार (53 फीसदी) और लखीसराय (50 फीसदी)

सारण (12 फीसदी), सीवान (14 फीसदी), जमुई (16 फीसदी), पूर्वी चम्पारण (19 फीसदी), गोपालगंज (23 फीसदी) और पश्चिमी चम्पारण (27 फीसदी)

  • किसानों को किसान सम्मान निधि योजना की राशि नहीं मिलेगी
  • सरकार की योजनाओं से वंचित हो सकते हैं अनिबंधित किसान
  • सस्ते कर्ज की योजना से भी ऐसे किसान वंचित हो सकेंगे
  • कृषि सब्सिडी, ऋण व बीमा की भी सुविधा भी किसानों को नहीं
  • खेती से जुड़े सलाह भी अनिबंधित किसानों को नहीं मिल सकेगा

बिहार में जमीन से संबंधित मालिकाना हक अभी भी काफी संख्या में पूर्वजों के नाम पर हैं। इसलिए कम निबंधन हुए हैं। लेकिन, किसानों का निबंधन अभी जारी रहेगा। पीएम सम्मान निधि योजना के सभी लाभुकों का हर हाल में निबंधन किया जाएगा। जल्द ही और विशेष अभियान की घोषणा की जाएगी।

किसानों के निबंधन (फार्मर आईडी) के लिए 15 दिनों के विशेष अभियान के बावजूद पटना जिले में आधे से ज्यादा किसान इससे वंचित रह गए। 1.48 लाख किसानों का फार्मर आईडी बनाया जाना था, पर 62 हजार किसान ही कामयाब रहे। किसानों का कहना है कि सबसे ज्यादा समस्या जमीन संबंधी दस्तावेजों में त्रुटियों की वजह से हो रही है। किसी की लगान रसीद पर प्लॉट का नंबर नहीं है, तो किसी का जमाबंदी में नाम नहीं है। रही-सही कसर सर्वर डाउन रहने की समस्या ने पूरी की। किसान चिंतित हैं कि आईडी नहीं बनने से वे सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हो सकते हैं। किसानों ने आपके अपने अखबार ‘हिन्दुस्तान’ से अपनी परेशानियां साझा कीं।

कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ पाने के लिए किसान आईडी और ई-केवाईसी कराना अनिवार्य है। राज्य सरकार ने पटना समेत पूरे प्रदेश में किसान आईडी बनाने के लिए छह से 21 जनवरी तक विशेष अभियान चलाया। इसके तहत शिविर लगाये गये और किसानों की सहायता के लिए सरकारी कर्मियों की तैनाती भी की गई। इसके बावजूद पटना जिले में सिर्फ 40 फीसदी किसानों का ही निबंधन हो पाया। शिविरों में कागजात लेकर लंबे इंतजार के बाद बड़ी संख्या में किसान मायूस होकर लौट गए। किसानों का कहना है कि सबसे ज्यादा दिक्कत जमीन के दस्तावेजों में त्रुटियों की वजह से हुई। राजस्व कर्मियों की लापरवाही से भूमि दस्तावेजों की त्रुटियों का निराकरण समय सीमा के भीतर नहीं हो रहा है।

विक्रम प्रखंड के येनीबिगहा पंचायत के बारा गांव निवासी किसान विमल सिंह का दावा है कि उनके गांव के सिर्फ 20 प्रतिशत किसानों का ही निबंधन हो पाया है। इसी तरह की शिकायत प्रखंड के निसरपुरा गांव के दीपक कुमार की भी है। वे बताते हैं कि जमीन के लगान रसीद पर उनके खेतों का प्लॉट नंबर अंकित नहीं है। लगान की रसीद पर प्लॉट का नंबर चढ़ाना मामूली काम नहीं है। इसके लिए अंचल कार्यालय खुलने से लेकर बंद होने तक किसान बाबुओं के चक्कर काट रहे हैं।


जमाबंदी में नाम का नहीं होना किसान आईडी बनाने में सबसे बड़ी समस्या बनकर उभरी है। जमीन की जमाबंदी किसान के अपने नाम पर होना जरूरी है जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी जमीन पूर्वजों (दादा परदादा) के नाम पर ही है। जिन किसानों के जमीन की रसीद पर खाता और खेसरा नंबर नहीं चढ़ा है उन्हें किसान आईडी कार्ड बनाए बगैर लौटाया जा रहा है।

अधिकारियों के सख्त निर्देश के बावजूद अंचल कार्यालय में कर्मचारियों की लेटलतीफी परेशानी का सबब बनी हुई है। धनरूआ के आसरेपुर के किसान कुमुद कुमार सिंह बताते हैं कि राजस्व कर्मचारी ना तो किसानों से कार्यालय में मिलते है और ना ही मोबाइल पर संपर्क हो पाता है। उनका मोबाइल ज्यादातर बंद रहता है।
रामबली यादव बताते हैं कि जमीन के कागज पर खाता-खेसरा नंबर चढ़ाने के लिए यह जरूरी है कि आपके प्लॉट की मापी की जाए। लेकिन सीओ के पास गुजारिश के बावजूद मापी नहीं हो पायी है।

जमीन के कागज पर खाता व खेसरा नंबर के अतिरिक्त पिताजी या स्वयं के नाम में और आधार कार्ड के नाम में गलती भी किसानों की आईडी निर्माण में बड़ी बाधा साबित हो रही है। मसौढ़ी के भलुआ के किसान गोरेन्द्र शर्मा बताते हैं कि पिताजी का नाम राजस्व रसीद में स्व. राजा राम शर्मा है। जबकि आधार कार्ड में नाम राजा राम सिंह है। इससे उनकी आईडी नहीं बन सकी। इसका उपाय या समाधान पूछने पर कर्मचारियों का रवैया बेहद सख्त रहा।

  1. जमीन की जमाबंदी में खुद का नाम का नहीं होने से किसानों का आईडी नहीं बना
  2. आधार और जमीन के कागजात में अंतर होने से भी परेशानी खड़ी हुई
  3. पोर्टल का सर्वर धीमा, इंटरनेट की कम गति आदि तकनीकी समस्याएं आई
  4. म्यूटेशन की प्रक्रिया के धीमी रहने से किसानों को दिक्कत का सामना करना पड़ा
  5. उचित व्यवस्था नहीं होने से किसान दिनभर शिविर में रहे, पर नहीं हुआ काम
  1. जमीन की जमाबंदी में सुधार के लिए पंचायतों में विशेष शिविर लगाई जाए
  2. किसानों की समस्या समाधान के लिए वन स्टॉप सेंटर हर अंचल में शुरू किया जाए
  3. भूमि पोर्टल सहित किसान निबंधन से जुड़े सभी पोर्टलों के सर्वर की गति पर ध्यान दिया जाए
  4. म्यूटेशन प्रक्रिया में तेजी लायी जाए, गांव स्तर पर शिविर लगा म्यूटेशन का कार्य पूरा किया जाए
  5. किसानों की उचित व्यवस्था के लिए शिविर में टोकन का इंतजाम बेहतर विकल्प

नौबतपुर प्रखंड के नदवा गांव के धीरज कुमार का किसान आईडी नहीं बन सका। क्योंकि इनके खेत की जमाबंदी अभी भी इनके पूर्वजों के नाम से ही है। जिला में ऐसे किसानों की काफी बड़ी संख्या है जिनके जमीन की जमाबंदी उनके पिता, दादा के नाम से ही है। जमीन का रसीद अभी भी उनके बाप-दादा के नाम से ही कट रहा है। सत्येन्द्र कुमार गुप्ता बताते हैं कि उनके बाप-दादा ने दूसरे किसान से जमीन की खरीदारी की, लेकिन म्यूटेशन उस वक्त अपने नाम से नहीं कराया। अभी भी जिसके नाम से जमीन है उसके नाम से ही जमाबंदी है।

अब वे लोग अपने नाम से कैसे जमाबंदी करवा पाएंगे। जिनसे जमीने खरीदी गई थीं वे अपने जमीन के कागजातों को दाब कर रखे हुए हैं। मेरे पास खतियान है जिन पर मेरे दादा जी का शेयर दिखा रहा है, लेकिन जमाबंदी बेचने वाले के नाम से है। किसान ऐसे में विशेषज्ञों से मार्गदर्शन चाहते है। किसानों का कहना है कि जमीन के कागज पर खाता, खेसरा संख्या व अन्य मानदंडों को पूरा करने के बावजूद सर्वर डाउन रहने से 15 दिनों में आईडी नहीं बन पाया। राजस्वकर्मियों की लापरवाही भुगत रहे किसान कई किसानो का आईडी विभागीय लापरवाही से नहीं बन सका है।

जिले के बड़ी संख्या में किसान बताते हैं कि राजस्व रसीद को ऑनलाइन करने के दौरान कर्मचारियों के गलत टंकण के कारण किसानों का निबंधन नहीं हो सका है। मसौढ़ी प्रखंड के सुकड्डियां गांव के किसान संतोष कुमार बताते हैं कि ऑनलाइन करने के दौरान उनके खाता, प्लॉट और रकबा में शून्य अंकित हो गया है। इससे उनका किसान निबंधन नहीं हो सका है। शिविर में किसानों को सबसे ज्यादा परेशानी निबंधन पोर्टल के सुस्त रहने, नहीं चलने, रूक-रूक कर चलने, अपलोड की बेहद धीमी गति रहने से हुई।

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