गुप्त नवरात्र शुरू | ऐसे करें पुजा होगी सभी मनोकामना पूर्ण

By: arcarrierpoint

On: Tuesday, January 20, 2026 7:56 AM

गुप्त नवरात्र शुरू
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गुप्त नवरात्र शुरू – 19 से 27 जनवरी तक माघ गुप्त नवरात्र मनाई जाएगी। इस दौरान मां की गुप्त आराधना की जाएगी। इस बार नवरात्र खास योग और नक्षत्रों के शुभ संयोग में मनाया जाएगा। पटना के गर्दनीबाग ठाकुरबाड़ी, श्री सिद्धेश्वरी काली मंदिर बांसघाट, अखंडवासिनी मंदिर गोलघर समेत अन्य देवी मंदिरों में गुप्त नवरात्र के पहली तिथि को लेकर विशेष तैयारी है। गुप्त नवरात्र में मां के 10 महाविद्याओं की पूजा का विशेष महत्व है। यह आराधना मुख्य रूप से शक्ति के आंतरिक रूप और आध्यात्मिक साधना के लिए समर्पित है। इन नौ दिनों में नक्षत्र और योग के शुभ संयोग में भक्तजन मां के प्रत्येक रूप की विधिपूर्वक पूजा करेंगे।

माघी या मौनी अमावस्या पर रविवार को सर्वार्थ सिद्धि का संयोग बना। श्रद्धालुओं ने सुबह-सुबह बिना कुछ बोले मौन रहकर गंगा स्नान किया। इसके बाद दान कर पूजा-अर्चना की। सुबह से ही पटना के दीघा घाट सहित कई गंगा घाटों पर भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। ठंड मौसम में भी श्रद्धालुओं ने गंगा में पवित्र डुबकी लगाई। वहीं सोमवार से माघ महीने का गुप्त नवरात्र शुरू हो रहा है। नौ दिनों में 10 महाविद्या की पूजा होगी।

बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के अध्यक्ष प्रो. रणवीर नंदन ने बताया कि गुप्त नवरात्र हिंदू धर्म में शक्ति उपासना का एक विशेष और रहस्यमय पर्व है। इसे गुप्त इसलिए कहा जाता है, क्योंकि इस नवरात्र में की जाने वाली साधना, पूजा और आराधना प्रायः सार्वजनिक न होकर गोपनीय, मौन और अंतर्मुखी होती है। यह पर्व विशेष रूप से तांत्रिक साधना, सिद्धि और आध्यात्मिक उन्नति से जुड़ा माना जाता है। माता के भक्त पाठ का संकल्प लेते हैं और नौ दिनों तक पूरे विधि-विधान से श्री दुर्गाशप्तसती का पाठ करते हैं।

हिंदू पंचांग के अनुसार, साल में कुल 4 नवरात्र मनाए जाते हैं। इनमें से दो प्रमुख चैत्र व शारदीय नवरात्र (प्रकट) व दो गुप्त नवरात्र होते हैं। इससे मन, बुद्धि और आत्मा में सकारात्मक परिवर्तन आता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस पावन काल में किए गए सत्कार्य, पूजा और दान से जीवन में समृद्धि, सुख और वैभव की प्राप्ति होती है। गुप्त नवरात्रि में जिन 10 महाविद्याओं की आराधना की जाती है- उनमें काली, तारा, छिन्नमस्ता, षोडशी, भुवनेश्वरी, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी व कमला देवी हैं।

गुप्त नवरात्र हिंदू धर्म में शक्ति उपासना का एक रहस्यमय और साधना-प्रधान पर्व है। इसे “गुप्त” इसलिए कहा जाता है क्योंकि-

  • इसमें पूजा-पाठ सार्वजनिक रूप से नहीं होता
  • साधना व्यक्तिगत और मौन रूप से की जाती है
  • ध्यान, जप, पाठ और आत्मचिंतन पर अधिक जोर दिया जाता है

यह पर्व विशेष रूप से मानसिक एकाग्रता, आत्मबल और ज्ञान प्राप्ति से जुड़ा हुआ है।

इस वर्ष गुप्त नवरात्र शुभ योग और नक्षत्रों के संयोग में पड़ रहा है। माघी या मौनी अमावस्या पर सर्वार्थ सिद्धि योग बना, जिसे शिक्षा, साधना और लक्ष्य प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

गुप्त नवरात्र में मां दुर्गा के जिन 10 महाविद्या स्वरूपों की पूजा की जाती है, वे हैं –

  1. मां काली – साहस और निडरता
  2. मां तारा – ज्ञान और वाणी
  3. मां षोडशी – बुद्धि और सौंदर्य
  4. मां भुवनेश्वरी – सृजन शक्ति
  5. मां छिन्नमस्ता – आत्मसंयम
  6. मां त्रिपुर भैरवी – ऊर्जा और अनुशासन
  7. मां धूमावती – वैराग्य और धैर्य
  8. मां बगलामुखी – एकाग्रता और विजय
  9. मां मातंगी – शिक्षा, कला और संगीत
  10. मां कमला – समृद्धि और स्थिरता

शिक्षा के दृष्टिकोण से मातंगी, तारा और बगलामुखी की साधना को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।

शिक्षा वेबसाइट के पाठकों के लिए सरल विधि-

  • सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें
  • शांत स्थान पर दीपक जलाएं
  • मां दुर्गा या किसी एक महाविद्या का ध्यान करें
  • प्रतिदिन 15–20 मिनट ध्यान करें
  • संभव हो तो दुर्गा सप्तशती का पाठ करें
  • पढ़ाई शुरू करने से पहले मां से प्रार्थना करें

गुप्त नवरात्र का पालन यदि सही तरीके से किया जाए, तो यह छात्रों को निम्न लाभ देता है- एकाग्रता में वृद्धि, पढ़ाई में मन लगना, स्मरण शक्ति मजबूत होना, परीक्षा का भय कम होना, आत्मविश्वास में बढ़ोतरी कई विद्यार्थी इस दौरान मौन व्रत, ध्यान और दुर्गा सप्तशती पाठ करते हैं।

गुप्त नवरात्र 2026 केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आत्मअनुशासन, मानसिक शक्ति और शैक्षणिक विकास का एक श्रेष्ठ अवसर है। यदि छात्र इस दौरान संयम, ध्यान और नियमित अध्ययन का पालन करें, तो यह समय उनके जीवन में सफलता की मजबूत नींव रख सकता है।

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