जीवन जीने का तरीका बदल देगा | ये कहानियाँ आपको बनाएगी सफल

By: arcarrierpoint

On: Monday, September 15, 2025 8:34 PM

जीवन जीने का तरीका बदल देगा | ये कहानियाँ आपको बनाएगी सफल
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जीवन जीने का तरीका बदल देगा | ये कहानियाँ आपको बनाएगी सफल:-हर इंसान की ज़िंदगी में कभी न कभी ऐसा मोड़ आता है जब वह सोचता है, “क्या मैं सही दिशा में हूँ?” या “क्या मैं अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल कर रहा हूँ?” ऐसे समय में प्रेरणादायक कहानियाँ हमें न सिर्फ सोचने पर मजबूर करती हैं, बल्कि हमें बदलने और आगे बढ़ने की शक्ति भी देती हैं।

आज हम आपको ऐसी ही कुछ कहानियाँ बताएंगे, जो आपके जीवन जीने का तरीका बदल देंगी और आपको सफलता की राह पर ले जाएँगी।

नई चीजों से हाट-बाजारों को पाट दिया जाता है। व्यापाक स्तर पर नई चीजों की दस्तक प्रदर्शन से हमारा मन उलझन में फंस कर भ्रमित हो जाता है। परिणाम, जो भी मनुष्य के पास होता है वह उसे पुराना प्रतीत होने लगता है। नए वर्जन का मोबाइल बाजार में आते ही व्यक्ति को अपना मोबाइल हैंडसेट पुराना ही नहीं अपितु व्यर्थ लगने लगता है। परिधान-चप्पल आदि के साथ भी ऐसा ही भाव सताने लगता है।

हर व्यक्ति की अपने इन भावों को परिपूर्ण करने की आर्थिक स्थिति नहीं होती। सभी मनुष्य हर बार नई-नई चीज-वस्तुओं को खरीदने की इच्छापूर्ति नहीं कर पाते और अधूरापन उन्हें घेर लेता है। इन कारणों से कई लोगों के घरों में कहासुनी की स्थितियां बन जाती हैं, संतान इच्छापूर्ति न होने पर तोड़फोड़ के रूप में अपनी निराशा व्यक्त कर बैठती है, कुछ मामलों में गलत मार्ग चले जाते हैं।

बात अगस्त 1977 की है। प्रमुख स्वामी महाराज के आंखों के नंबर में बदलाव हुआ। डॉक्टर ने नए चश्मे की जरूरत बताई। महाराज ने सहजता से कहा कि नए नंबर के कांच को पुरानी फ्रेम में फिट कर दीजिए। सभी हरिभक्त डॉक्टर भौंचक रह गए।

फ्रेम पुराना हो गया है बदलने की इजाजत दीजिए न? प्रमुख स्वामी बोले- देखना कांच से है या चश्मे के फ्रेम से? अनुरोध करने वाले अनुत्तरित थे। उन्होंने समझाया कि मनुष्य अपने अधूरेपन-अक्षमता के मनोभाव से कैसे उबर सकता है। सरल शब्दों में उनकी दृष्टि हमेशा ही जरूरत पर रहती थी, वैभव प्रदर्शन की ओर नहीं

नए परिधानों को पाने की चाह को पूरा करने के लिए ज्यादा उधेड़बुन में न पड़ो, ऐसा करना शक्ति सार्मथ्य का निरंथक व्यय ही है। छोटी-मोटी बातों में ही हमारी जीवन ऊर्जा छितरा जाती है। संभलिए और अपना हिसाब का ब्यौरा इतना सटीक स्पष्ट रखिए कि अंगूठे के नाखून पर लिखा जा सके।

दस किलो वजन लेकर दौड़ने वाले की तुलना में उस व्यक्ति की गति ज्यादा होगी, जो बिना किसी भार के दौड़ रहा है। जीवन यात्रा के मार्ग में भी यह सिद्धांत काम करता है। गैर-जरूरी चीज-बस्तु और विचार न सिर्फ आपकी लय-गति को बाधित करते हैं अपितु कई बार बंधक बना देते हैं। किसी भी वस्तु की आसक्ति की अति यही करती है। इसके पाश में बंधा व्यक्ति खुद को बेचैन महसूस करता है।

अमेरिकी दार्शनिक एमर्सन इसका निदान सादगी को बताते हैं कहते हैं- सादा जीवन ही महान जीवन है। जर्मन दार्शनिक गेटे कहते हैं कि सादगी में स्वास्थ्य व सौंदर्य निहित है।

सादगी की शक्ति सरदार पटेल के पास थी। उनकी घड़ी 30 साल पुरानी थी। संसार छोड़ा तब उनके खाते में 200-250 रुपए ही थे। वे सिर्फ चार जोड़ी कपड़े में ही जीवनयापन कर रहे थे। उनके चश्मे की एक ही डंडी थी दूसरा हिस्सा धागे के सहारे टिकता था। ऐसी महान आत्माओं की छवियां दिलों में छप-बस जाती हैं। अभाव-अधूरेपन का पाश सादगी की साधना करने वालों को कभी अपने पाश में नहीं जकड़ पाता। हम भी सादगी की साधना की राह अपना कर जीवन में शांति-संतोष का प्रकटन कर सकते हैं।

भारतीय टेनिस स्टार सुमित नागल (28) चर्चा में बने हुए हैं। उनके प्रदर्शन के चलते भारत ने स्विटजरलैंड को हराया है। ये 32 सालों में पहली बार है, जब भारत ने यूरोपीय धरती पर यूरोप के देश को हराया है। हरियाणा के सुमित को यहां तक पहुंचने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा है।

7 साल की उम्र तक सुमित की रुचि क्रिकेट में थी। वे रोजाना 7-8 घंटे क्रिकेट खेलते थे। पिता ने सुमित को क्रिकेट से दूर होकर टेनिस खेलने की सलाह दी। उनके पिता म्यूनिसिपल स्कूल में टीचर थे। घर की आर्थिक स्थिति भी कमजोर थी।

टेनिस इंफ्रास्ट्रक्बर के अभाव में सुमित को ट्रेनिंग के लिए रोजाना 27 किलोमीटर दूर जाना पड़ता था, वो भी खचाखच भरी बस में। उनके खेल से प्रभावित होकर महेश भूपति ने उन्होंने दो साल तक ट्रेनिंग दी थी। उन्हें अपोलो 2018 प्रोग्राम के लिए छात्रवृत्ति मिली, लेकिन मंदी का हवाला देकर कुछ समय बाद वो बंद हो गई। इसलिए सुमित ने टेनिस छोड़ने तक की ठान ली थी।

लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था।

महेश भूपति ने उनकी मदद की और सुमित ने टेनिस नहीं छोड़ा। टेनिस में बड़ा नाम बनने के बाद भी साल 2023 में उन्हें वित्तीय संघर्ष से जूझना पड़ा। खाते में 80 हजार रुपए ही रह गए थे। जबकि साल भर में कोच के साथ टूर पर जाने का खर्च ही करीब 1 करोड़ रुपए था। सेविंग्स के नाम पर उनके पास कुछ भी नहीं था। चोटें भी करियर में रोड़ा बनीं।

कठिनाइयों के बावजूद हार नहीं मानने के जज्बे की ही वजह से सुमित ने ग्रैंड स्लैम के अपने डेब्यू मैच के पहले सेट में रोजर फेडरर को हरा दिया था। 13 साल की उम्र में वे अंडर-16 नेशनल चैम्पियनशिप जीत चुके थे। 2015 में उन्होंने बॉयज विंबलडन का डबल्स जीता था। इससे विशेषज्ञों को भारतीय टेनिस का भविष्य सुमित में नजर आने लगा था।

प्रदर्शन के बूते सुमित टोक्यो ओलिंपिक में भी शामिल हुए।

वहां उन्होंने 25 साल बाद भारत के लिए ओलिंपिक में सिंगल्स मैच जीता था। पेरिस ओलिंपिक में भी सुमित ने देश का प्रतिनिधित्व किया था। सुमित नागल एटीपी सिंगल्स में 290वीं रैंक पर हैं। वे भारत के नंबर-1 टेनिस खिलाड़ी हैं। नागल अपने जीवन में 6 एटीपी चैलेंजर टूर्नामेंट जीत चुके हैं|

पोलैंड के पावेल डुराकिवित्ज ने एक अनोखा विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किया है। दरअसल उन्होंने नॉर्वे की बर्फ पर जमी एक झील पर नंगे पैर मैराथन पूरी की है। 42.2 किलोमीटर की उनकी यह कठिन दौड़ 4 घंटे 57 मिनट 54 सेकंड में पूरी हुई।

दौड़ के 500 मीटर बाद ही मन में आया कि दौड़ना असंभव होगा। 10 किमी के बाद तो पैरों से खून बहने लगा था। 12 किमी तक पहुंचते-पहुंचते उन्होंने हार मान ली थी। लेकिन आगे बढ़ते रहे। अपने मन को शांत कर और उन्होंने दर्द को पीछे छोड़ दिया। इस रिकॉर्ड के साथ उन्होंने समाज में नशे के शिकार हुए लोगों के की नई जिंदगी के लिए काम करने वाली डायमंड सोल फाउंडेशन के लिए फंड भी जुटाया। पावेल के इस संकल्प से हम सीख सकते हैं कि जहां हौसला हो, वहां बर्फ भी पिघल जाती है।

सीख: पावेल के जज्बे से सीखना चाहिए कि धैर्य, जुनून और दिशा हो तो आप पहाड़ों को भी हिला सकते हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन सकते हैं।

एक शिकारी को अपना एक कुत्ता सबसे प्रिय था और वह वर्षों से उसके साथ था। लेकिन कुत्ता धीरे-धीरे बूढ़ा हो चला और अब उसमें पहले जितना दमखम नहीं रहा। एक दिन शिकारी शिकार पर था। उसका बूढ़ा कुत्ता एक हिरण को पकड़ने के लिए जी-जान से दौड़ा और जैसे तैसे उसने हिरण को पकड़ लिया, लेकिन उसके कमजोर दांत टूट गए और हिरण उसके चंगुल से भाग निकला।

यह देख शिकारी को बहुत क्रोध आया और उसने अपना हंटर उठा लिया। कुत्ते ने शिकारी की ओर देखा और कहा- माना कि में अब कमजोर हूं, पर मेरे पुराने दिनों को याद करो और अपने खुद के बुढ़ापे के बारे में सोचो। यह सुनकर शिकारी के हाथ से हंटर छूट गया और वह कुत्ते को प्यार से थपथपाने लगा।

मोरल ऑफ द स्टोरी जब किसी पर क्रोथ आए, उसकी दशा के बारे में सोच लें और खुद को उसकी जगह रखकर भी देख लें।

  1. संघर्ष से मत डरें: हर कठिनाई आपके मजबूत बनने का अवसर है।
  2. असफलताओं से सीखें: असफलताएँ हमारी सबसे बड़ी शिक्षक हैं।
  3. अनुशासन और समय प्रबंधन अपनाएं: सफलता का आधार है सही दिनचर्या।
  4. सकारात्मक सोच रखें: नकारात्मक सोच अवसरों को रोकती है।
  5. दूसरों की मदद करें: इससे ना सिर्फ समाज में मान बढ़ता है बल्कि आपके रास्ते भी खुलते हैं।
  6. लक्ष्य पर केंद्रित रहें: बिना ध्यान और मेहनत के सफलता असंभव है।

जीवन में सफल होने के लिए सिर्फ पढ़ाई या मेहनत ही नहीं, बल्कि सकारात्मक सोच, अनुशासन, दूसरों की मदद और अपने लक्ष्य पर फोकस भी जरूरी है। इन कहानियों से हमें यह सिखने को मिलता है कि हर चुनौती एक अवसर है, हर असफलता एक सीख है और हर संघर्ष सफलता की राह में एक कदम है।

अगर आप इन कहानियों से प्रेरणा लें और उन्हें अपने जीवन में लागू करें, तो निश्चित ही आपका जीवन भी सफलता और खुशियों से भरा होगा।

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