जीवन में जो चाहे वो पा सकते हैं बस ऐसे जिएं जिवन

By: arcarrierpoint

On: Sunday, January 25, 2026 7:49 PM

जीवन में जो चाहे वो पा सकते हैं
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जीवन में जो चाहे वो पा सकते हैं बस ऐसे जिएं जिवन- आज की फेढ़ी को अपने बारे में काफी कुछ पता होता है। जबकि हम उस जमाने से हैं, जहां हमें अपनी कोई खबर नहीं होती थी। में बचपन से ही बोलने में अटकता हूं, तो उस वक्त शायद मुझे यह लगता था कि कुछ हासिल करूंगा तो लोग मेरी बात सुनेंगे। ऐसा हुआ भी। मुझे मेरे आस-पास के लोगों को ही प्रभावित करना था, लेकिन यह सफलता हद से बड़ी हो गई। पर अब देखता हूं, तो लगता है कि सब कुछ एक बहाव में हुआ।

जब हमने कंपनी शुरू की तो कभी नहीं सोचा कि कितने पैसे बनाने हैं, बस करना था… उसका जुनून था सो करते गए। हमने अपने निवेशकों को भी कोई विडिक्शन्स नहीं दिए। हम केवल लोगों को बताते थे कि अब तक ये हुआ है और अगले कुछ हफ्ते ऐसा करेंगे… इससे ज्यादा कभी कुछ प्लान नहीं किया। हम कभी अपने लोगों से भी नहीं कहते हैं कि पागलपन की हद तक काम करो। हमारी कंपनी में अभी भी त्रैमासिक, छमाही या सालाना गोल्स नहीं होते हैं। हम लोगों पर भरोसा करते हैं कि वो बेस्ट काम करेंगे… और वे करते भी हैं। बतौर लीडर में कभी अपनी टीम को हालात से समझौता करना नहीं सिखाता। में सच्चाई सामने रखता हूं कि देखो, हमारे फंड्स खत्म हो रहे हैं लेकिन फिर भी हम कुछ करके दिखा सकते हैं। तो काम में जुट जाइए।

में अपनी लीडरशिप को रोमांच वाली कैटेगरी में रखूंगा। पंजाबी माईटसेट है तो ऐसा होता है कि चलो ये भी करके देखते हैं, वो भी ट्राय करते हैं। अब थोड़ा बदला हूं, वास्तविकता को साथ रखने लगा हूं लेकिन रोमांच अभी भी आकर्षित करता है मैं जुनून और पागलपन में फर्क करता हूं।

मुझे बिजनेस में जुनूनी होना अच्छा लगता है। मैं चाहता हूं कि लोग जब काम करें तो यह सोच रखें कि वक्त पड़ने पर घर पर कॉल करके बोल सकें कि आज नहीं हो घाएगा… दफ्तर को मेरी जरूरत है, में मंडे को छुट्टी ले लूंगा। आज भले ही वीकेंड है पर मुझे काम करना होगा। यह भी ध्यान रहे कि स्टार्टअप्स तो कभी बढ़ ही नहीं सकते अगर आपके परिवार साथ नहीं है। परिवार अगर आपके पीछे खड़ा है, तो कुछ भी हासिल कर सकते हैं। काम और परिवार को मैनेज करना लीडर्स के लिए जरूरी है।

कंपनी का कल्चर ऊपर से सेट होता है। हम हर देश में एक टॉप मैनेजर चुनते हैं। चुना हुआ व्यक्ति सही है, तो वही सोच, वहीं काम करने का तरीका पूरी टीम में दिखता है। अगर व्यक्ति गलत है तो सब गड़बड़ा जाते हैं।

हम लोगों को पद नहीं, ऑनरशिप देते हैं। हम साफ कहते हैं कि अब यह काम आपका है. यह कंपनी अब आपकी जिम्मेदारी है। कोई समस्या है तो हमें बतएं। लेकिन छोटी-छोटी बातें पर हमारी तरफ न देखें।

कभी आपने महसूस किया है कि वह चीजें जो आपको रोकती हैं, असल में आपकी सबसे बड़ी ताकत भी हो सकती हैं? जब आप सुबह उठते हैं और वही पुरानी आदतें, वहीं डर, वही संदेह फिर आपका पीछा करते हैं. तो यही वह क्षण है जब आपको खुद से लड़ना होगा। यह कठिनाई ही आपकी क्षमता को परखेगी। जब आप अपने भीतर के डर को चुनौती देते हैं, तो वह हल्का लगने लगता है।

जब आप सुबह अपनी आंखें खोलते हैं, तो सबसे पहले खुद से एक सवाल करें कि आज आप अपने लिए जी रहे हैं या दूसरों की राय के लिए? जितना अधिक आप खुद को पहचानते और स्वीकार करते हैं, उतनी ही आपके भीतर की शक्ति जागृत होती है। डर, असफलता, आलोचना आपके मन के वे हिस्से हैं, जो आपको अपनी क्षमता से दूर करते हैं। आप कमजोर नहीं, सीखने और बढ़ने वाले हैं।

हर बार जब आप किसी बड़े लक्ष्य के बारे में सोचते हैं, जैसे एक किताब लिखना, एक नई स्किल सीखना या अपने सपनों को सच करना वे आपके मन में आकज उठती है कि यह कठिन है, बाद में करो। यही आवाज विरोध है। पर हर बार जब आप उस आवाज को टालते हैं और आगे बढ़ते हैं. आप प्रतिरोध को हराते हैं। आपका साहस बढ़ता है और यह विरोध तब कमजोर हो जाता है

इस चात को हमेशा दिमाग में रखें कि खुशी किसी बड़े मुकाम पर पहुंचने के बाद नहीं आती। यह तो रोजमर्रा के छोटे कामों में छिपी होती है। सुबह उठकर किसी उद्देश्य के साथ दिन शुरू करना, अपने काम में मन लगाना और जीवन की गति की जोर जबरदस्ती से तेज न करना। जो लोग धीरे चलते हैं, वही दूर तक जाते हैं। जब हम हर दिन को अर्थ देते हैं, तब जीवन बोझ नहीं लगता। उद्देश्य से जुड़ा जीवन न केवल लंबा होता है, बल्कि यह संतुलित और शांत भी होता है।

  • में कुछ भी नहीं हूं, लेकिन मुझे सब कुछ बनना है।
  • कट्टर होना मतलब चीजों को जड़ से समझना। तर्क हमेशा से मौजूद रहा है, लेकिन हमेशा तर्कसंगत रूप में नहीं।
  • बहुत अधिक उपयोगी चीजों का उत्पादन,बहुत अधिक बेकार लोगों को जन्म देता है।
  • वस्तुओं की दुनिया का मूल्य जितना बढ़ता है, इंस्खनों की दुनिया का मूल्य उतना ही घटता जाता है।
  • बीती पीढ़ियों की परंपराएं आज जीवित लोगों के दिमाग पर एक डरावने सपने की तरह बोझ बनी हुई हैं।
  • अगर आप प्रेम करते हैं लेकिन बदले में प्रेम नहीं पाते, तो आपका प्रेम शक्तिहीन है और यह दुर्भाग्य है।
  • जितना कम आप स्वयं होते हैं, उत्तना ही अधिक आप चीजों के मालिक बनते हैं।
  • अपने चारों ओर ऐसे लोगों को रखें जो आपको खुशी देते हैं, हंसाते हैं, मदद करते हैं, परवाह करते हैं।

जब आपके सामने कोई नया विचार रखा जाता है, तो क्या सबसे पहले आप यही सोचते हैं कि इसमें क्या गलत हो सकता है? जब लगे कि बातचीत स्पष्ट नहीं है, तो क्या आप तुरंत ही किसी नकारात्मक निष्कर्ष पर पहुंच जाते हैं? अगर आप ऐसा करते हैं, तो आप अपने सोचने के तरीके को बदलना सीख सकते हैं, ताकि वह आपको सीमित न करे। यहां बताया गया है कि चिंता (एंग्जाइटी) आपके काम में किस तरह की गंभीर समस्याएं पैदा कर सकती है और उन्हें कम करने के लिए आप क्या तरीके अपना सकते हैं….

ज्यादा चिंता करने वाले अक्सर यही सोचते हैं कि दूसरे उन्हें पसंद नहीं करते हैं। उन्हें अयोग्य समझाते हैं। इसका यह मतलब है कि उनकी सोच पर उनका कोई कंट्रोल ही नहीं रहता है। इससे बचने के लिए यह पहचानना सीखना बहुत जरूरी है कि कब आप बिना ठोस सबूत के अनुमान लगा रहे हैं। इस बात को स्वीकार करें कि आपका अनुमान गलत भी हो सकता है। ऐसा भी हो सकता है कि आप दूसरों के बारे में गलत समझ रहे हैं या उनकी राय को नकारात्मक तरीके से ले रहे हैं। खुद को थोड़ा वक्त दें।

चिंतित या ज्यादा एंग्जाइ‌टी से ग्रस्त लोग अक्सर उन्हें मिलने वाले फीडबैक को भी बढ़ा-चढ़ाकर लेने लगते हैं और उसे अपनी असफलता का संकेत भी मान लेते हैं। उन्हें यह समझाने की कोशिश करनी चाहिए कि उनके लिए आलोचना को खुले मन से स्वीकार करना किस तरह से आसान हो सकता है। जब फीडबैंक आपको अनावश्यक ही असहज कर दे या परेशान करे, तो आपको अपने आप से यह कहना चाहिए कि ये बातें सही हैं, पर मुझे इस पर थोड़ा सोचने का समय और चाहिए।

चिंता से ग्रस्त लोग अक्सर उन चीजों से बचने की कोशिश करने में लगे रहते हैं जिनसे उन्हें परेशानी होती है या घबराहट होती है। ये लोग बाद में इस बचाव को लेकर थोड़ी-बहुत शर्म भी महसूस करते हैं। जैसे, आपको किसी ईमेल का जवाब देने में शिखाक महसूस हो सकती है, तो आप टालमटोल करने लगते हैं जिससे लोग आपको एक बेहद गैर-जिम्मेदार व्यक्ति समदा सकते हैं, जबकी ऐसा है नहीं। कई बार शिक्षक की वजह लोगों को पूरी ईमानदारी के साथ बता देना हर तरह से बेहतर होता है।

अगर नए विचारों पर आपकी पहली प्रतिक्रिया उनके जोखिम और नुकसान देखने की होती है, तो लोग इसे बेहद नकारात्मक रवैया समझ सकते हैं। इसके बजाय, आपको पहले यह देखना चाहिए कि उस विचार में अच्छा क्या है। उसके बाद ही अपनी चिंताएं व्यक्त करें, लेकिन बात को सकारात्मक तरीके से ही समाप्त करें। या फिर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय बोड़ा समय लें, ताकि आपको प्रतिक्रिया सोच-समझकर दी गई लगे।

खुशी किसी बड़े रिज़ल्ट या डिग्री में नहीं छिपी होती। वह रोज़मर्रा की छोटी उपलब्धियों में होती है—

  • आज कुछ नया सीखा
  • आज समय पर काम किया
  • आज खुद पर थोड़ा भरोसा बढ़ा

यही आदतें जीवन को उद्देश्यपूर्ण बनाती हैं।

शिक्षा और करियर में अक्सर कहा जाता है—
“गोल्स सेट करो, प्लान बनाओ, टारगेट पूरा करो।”

यह ज़रूरी है, लेकिन उससे भी ज़्यादा ज़रूरी है खुद पर भरोसा
अगर आप ईमानदारी से सीखते हैं, लगातार प्रयास करते हैं और खुद को बेहतर बनाने पर ध्यान देते हैं, तो परिणाम अपने आप आते हैं।

जीवन में आगे बढ़ने के लिए जुनून जरूरी है, लेकिन पागलपन नहीं।

  • जुनून आपको मेहनत सिखाता है
  • पागलपन आपको थका देता है

शिक्षा के क्षेत्र में भी संतुलन बहुत जरूरी है।
अच्छा छात्र वही नहीं जो दिन-रात पढ़ता है, बल्कि वह है जो समझदारी से पढ़ता है, समय का सम्मान करता है और मानसिक संतुलन बनाए रखता है।

कोई भी छात्र या युवा अकेले सफल नहीं होता।
परिवार का सहयोग, समझ और भरोसा—सफलता की नींव होता है।

अगर परिवार आपके साथ खड़ा है, तो असफलताएं भी आपको तोड़ नहीं पातीं।
इसलिए पढ़ाई, करियर और जीवन-तीनों में परिवार के साथ संवाद बनाए रखना बहुत जरूरी है।

डर हर इंसान को लगता है-
फेल होने का डर, लोगों की राय का डर, भविष्य का डर।

लेकिन याद रखें-
डर आपको रोकता है, जबकि आत्मविश्वास आपको आगे बढ़ाता है।

हर दिन खुद से यह सवाल पूछिए:
“आज मैं अपने लिए क्या बेहतर कर सकता हूँ?”

छोटे-छोटे कदम ही बड़े बदलाव लाते हैं।

छात्रों और युवाओं की सबसे बड़ी समस्या है-
“कल कर लेंगे।”

लेकिन हर बार जब आप टालते हैं, आप खुद को कमजोर बनाते हैं।
और हर बार जब आप काम शुरू करते हैं-चाहे छोटा ही क्यों न हो-आप खुद को मजबूत बनाते हैं।

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