दसवीं में फेल होने पर भी 11वीं में मिलेगा नामांकन- बड़ा बदलाव:-शिक्षा के क्षेत्र में वर्ष 2026 से एक ऐतिहासिक और छात्र-हित में लिया गया फैसला लागू होने जा रहा है। अब अगर कोई विद्यार्थी कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा में असफल (Fail) हो जाता है, तब भी उसे कक्षा 11वीं में अस्थायी (प्रोविजनल) नामांकन दिया जाएगा। यह फैसला उन लाखों छात्रों के लिए राहत की खबर है, जो एक परीक्षा में असफल होने के कारण आगे की पढ़ाई से वंचित हो जाते थे।
हालांकि, यह नामांकन कुछ शर्तों के साथ होगा, जिन्हें समझना हर छात्र और अभिभावक के लिए बेहद जरूरी है।
दसवीं में फेल होने पर भी 11वीं में औपबंधिक दाखिला मिलेगा
केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की ओर से वर्ष 2026 से कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा दो बार आयोजित की जाएगी। बोर्ड द्वारा लागू की जा रही नई व्यवस्था के तहत यदि कोई विद्यार्थी मुख्य बोर्ड परीक्षा में अनुत्तीर्ण हो जाता है, तो उसे कक्षा 11 वीं में औपबंधिक रूप से प्रवेश दिया जा सकेगा। हालांकि ऐसे विद्यार्थियों के लिए बोर्ड द्वारा आयोजित दूसरी परीक्षा में उत्तीर्ण होना अनिवार्य होगा।
दूसरी परीक्षा में विद्यार्थी को पास करना अनिवार्य, तभी स्कूल में दाखिला सुनिश्चित होगा
बोर्ड ने स्पष्ट कहा है कि दूसरी परीक्षा के परिणाम के आधार पर ही विद्यार्थियों का कक्षा 11वीं में प्रवेश अंतिम रूप से सुनिश्चित माना जाएगा। पहली बार साल में दो बार बोर्ड परीक्षाएं आयोजित किए जाने को लेकर विद्यार्थियों के मन में चल रहीं पास-फेल की शंकाएं को दूर करते हुए बोर्ड ने इसे स्पष्ट किया है।
दाखिला लेने से नहीं मना कर सकेंगे स्कूल
कई विद्यार्थी दसवीं तक एक स्कूल में पढ़ने के बाद 11वीं में दूसरे स्कूल में नामांकन लेते हैं। ऐसे में पहली परीक्षा में अनुत्तीर्ण विद्यार्थियों का दाखिला लेने से स्कूल मना नहीं कर सकेंगे। नामांकन के बाद बोर्ड की दूसरी परीक्षा के परिणाम में भी यदि संबंधित विद्यार्थी अनुत्तीर्ण होता है तो उसका 11वीं का दाखिला रद्द किया जाएगा।
बोर्ड के अनुसार
यह व्यवस्था एनईपी 2020 के तहत छात्रों को तनावमुक्त शिक्षा प्रणाली प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की जा रही है। बच्चों में परीक्षा को लेकर तनाव न हो इसे लेकर यह व्यवस्था की गई है। बता दें कि इस वर्ष सीबीएसई दसवीं की बोर्ड परीक्षा में बिहार से 1.70 लाख विद्यार्थी शामिल होंगे।
मुख्य परीक्षा में सभी विद्यार्थियों को शामिल होना अनिवार्य
सीबीएसई दसवीं की मुख्य परीक्षा 17 फरवरी से शुरू होगी। मुख्य परीक्षा में सभी विद्यार्थियों को शामिल होना अनिवार्य होगा। दूसरी बोर्ड परीक्षा मई महीने में आयोजित होगी। जिसका परिणाम जून महीने में जारी किया जाएगा।
- 2026 से सीबीएसई 10वीं की दो बार बोर्ड परीक्षा लेने की शुरुआत कर रहा
- इस बार बिहार से 1.70 लाख विद्यार्थी बोर्ड परीक्षा में शामिल होंगे
क्या है नया नियम?
- 2026 से कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा साल में दो बार आयोजित की जाएगी
- यदि कोई छात्र पहली परीक्षा में फेल हो जाता है
- तो उसे 11वीं में अस्थायी दाखिला दिया जाएगा
- लेकिन दूसरी (पूरक/सप्लीमेंट्री) परीक्षा में पास होना अनिवार्य होगा
- दूसरी परीक्षा में पास न होने पर 11वीं का नामांकन रद्द भी किया जा सकता है
यानी यह सुविधा छूट नहीं, बल्कि एक मौका है।
यह व्यवस्था क्यों लाई गई?
अब तक की शिक्षा व्यवस्था में यह देखा गया कि:-
- एक बार फेल होते ही छात्र का पूरा साल बर्बाद हो जाता था
- कई छात्र पढ़ाई छोड़ देते थे
- मानसिक तनाव, अवसाद और ड्रॉप-आउट की संख्या बढ़ रही थी
इसी को देखते हुए बोर्ड ने यह फैसला लिया कि:-
“छात्र को एक परीक्षा के कारण शिक्षा से बाहर नहीं किया जाना चाहिए।”
यह बदलाव नई शिक्षा नीति (NEP) की सोच के अनुरूप है।
11वीं में नामांकन कैसे मिलेगा?
स्थिति 1: छात्र पहली परीक्षा में पास
- सीधे 11वीं में नियमित नामांकन
- कोई समस्या नहीं
स्थिति2: छात्र पहली परीक्षा में फेल
- 11वीं में प्रोविजनल नामांकन
- स्कूल में पढ़ाई जारी रख सकता है
- दूसरी परीक्षा देना अनिवार्य
स्थिति 3: दूसरी परीक्षा में पास
- 11वीं का नामांकन स्थायी हो जाएगा
स्थिति 4: दूसरी परीक्षा में भी फेल
- 11वीं में नामांकन मान्य नहीं रहेगा
- छात्र को 10वीं दोबारा पास करनी होगी
क्या सभी विषयों में फेल होने पर भी नामांकन मिलेगा?
नहीं
- यदि छात्र एक या दो विषय में फेल है → सुविधा मिलेगी
- यदि छात्र अधिकांश विषयों में फेल है → स्कूल/बोर्ड निर्णय लेगा
स्कूल की भूमिका क्या होगी?
- स्कूल को छात्र को नामांकन से मना करने का अधिकार नहीं होगा
- लेकिन स्कूल यह सुनिश्चित करेगा कि:
- छात्र दूसरी परीक्षा की तैयारी करे
- नियमित उपस्थिति बनाए
- परीक्षा में शामिल हो
क्या यह नियम सभी बोर्ड पर लागू होगा?
- यह व्यवस्था 2026 से चरणबद्ध तरीके से लागू होगी
- केंद्रीय बोर्ड और राज्य बोर्ड इसमें शामिल होंगे
- अनुमान है कि इससे करीब 1.70 लाख से अधिक विद्यार्थी हर साल लाभान्वित होंगे
छात्रों के लिए जरूरी सलाह
- इस फैसले को ढील न समझें
- दूसरी परीक्षा को अंतिम मौका मानें
- 11वीं की पढ़ाई के साथ-साथ 10वीं की तैयारी करें
- स्कूल और शिक्षकों के संपर्क में रहें
अभिभावकों के लिए जरूरी बातें
- बच्चे पर मानसिक दबाव न बनाएं
- यह समझें कि यह सुधार का अवसर है
- पढ़ाई के लिए सही माहौल दें
- समय-समय पर स्कूल से जानकारी लेते रहें
क्या इससे शिक्षा का स्तर गिरेगा?
नहीं
क्योंकि:-
- पास होना अनिवार्य रखा गया है
- केवल समय और मौका दिया गया है
- बिना पास हुए आगे बढ़ने की अनुमति नहीं
निष्कर्ष (Conclusion)
10वीं में फेल होने के बाद भी 11वीं में नामांकन का यह नियम छात्रों के भविष्य को बचाने वाला फैसला है। इससे न केवल ड्रॉप-आउट कम होंगे, बल्कि छात्रों को खुद को सुधारने का एक और अवसर मिलेगा।
लेकिन याद रखें—
दूसरी परीक्षा पास करना अनिवार्य है, वरना 11वीं में आगे पढ़ाई संभव नहीं होगी।
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