नेपाल में पहली बार बनी महिला प्रधानमंत्री | जानिए पूरी नेपाली मंत्रिमंडल को:-नेपाल में शुक्रवार को पांचवें दिन राजनीतिक गतिरोध टूट गया। पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की ने देर शाम अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। सुशीला कार्की नेपाल के इतिहास में पहली महिला प्रधानमंत्री बनी हैं। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडुल ने कार्की को अंतरिम पीएम पद की शपथ दिलाई। कार्की ने अकेले ही शपथ ली है।
राष्ट्रपति के प्रेस सलाहकार किरण पोखरियाल ने दैनिक भास्कर को बताया कि
वर्तमान संसद को भंग कर दिया गया है। छह महीने में चुनाव होंगे। देर रात कहा गया कि 21 मार्च, 2026 को चुनाव होंगे। शनिवार को कैबिनेट में छह लोग शामिल हो सकते हैं। इनमें अंतरिम पीएम पद की रेस में शामिल रहे बिजली प्राधिकरण के पूर्व एमडी कुलमान घीसिंग, जेन-जी के सुदन गुरुंग और महाबीर पुत्र को लिया जा सकता है।
नेपाल की पहली महिला पीएम बनीं सुशीला कार्की; संसद भंग, 6 महीने में नए चुनाव होंगे
देर शाम को जेन जी संगठनों की सेना और राष्ट्रपति रामचंद्र पौडुल के साथ बैठक में पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री बनाने का फैसला किया गया। जेन-जी की ओर से सुशीला कार्की पहली पसंद रहीं थीं। सेना की मध्यस्थता में नए प्रधानमंत्री के चयन के लिए बैठकों के दौर अब तक बेनतीजा रहे थे।
जेन-जी संगठनों की सेना और राष्ट्रपति पौडुल के साथ बैठक में निर्णय
इस सब के बीच सेना सड़कों पर खूनखराबा रोकने के लिए दोनों कम्युनिस्ट पार्टियों और नेपाली कांग्रेस के बड़े नेताओं को अपने कैंपों में रखे हुए है। सेना प्रमुख अशोक सिग्देल को आशंका है कि ये नेता बाहर आने पर सार्वजनिक बयानबाजी कर सकते हैं।
सुशीला को बीएचयू से डिग्री, यहीं उन्हें जीवनसाथी भी मिला था
अंतरिम पीएम सुशीला कार्की ने बीएचयू से 1975 में एमए की डिग्री हासिल की। बीएचयू में ही उन्हें जीवनसाथी भी मिला। बीएचयू के वर्ष 1985 के छात्रसंघ अध्यक्ष अनिल श्रीवास्तव ने बताया कि वह सामान्य छात्रा की तरह से हॉस्टल से विभाग तक आती-जाती थीं। लाइब्रेरी के अलावा कहीं जाना नहीं था।
कार्की को शपथ दिलाते राष्ट्रपति पौडुल।
बीएचयू में सुशीला की मुलाकात नेपाली कांग्रेस के नेता दुर्गा प्रसाद सुबेदी से हुई। बाद में दोनों ने विवाह किया था। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार 1973 में बतौर नेपाली कांग्रेस कार्यकर्ता दुर्गा प्रसाद सुबेदी प्लेन हाईजैक की घटना में भी शामिल रहे थे। सुबेदी प्लेन को लेकर बिहार के फारबीसगंज लाए थे और बतौर फिरौती 4 लाख डॉलर लिए थे। नेपाली राजशाही को उखाड़ने के लिए इस राशि का इस्तेमाल किया गया। सुबेदी को 2 साल की जेल काटनी पड़ी थी।
राजशाही समर्थक सत्ता में आ जाते, इसलिए राजनीतिक दल सुशीला के नाम पर सहमत हुए
नेपाल में सुशीला कार्की का नाम जेन-जी की ओर से बढ़ाया गया था, लेकिन शुरुआत में ओली और प्रचंड की कम्युनिस्ट पार्टी तथा नेपाली कांग्रेस कार्की के नाम पर सहमत नहीं थी। लेकिन आर्मी चीफ अशोक सिग्देल लगातार राजशाही समर्थक दुर्गा प्रसाई को बैठकों में शामिल कर रहे थे। जबकि राजशाही समर्थक आरपीपी पार्टी का जेन-जी आंदोलन से कोई नाता नहीं था।
साथ ही सिग्देल ने राष्ट्र के नाम संबोधन में पूर्व नरेश के चित्र का बैकग्राउंड में इस्तेमाल कर अपने इरादे जाहिर कर दिए थे।
इससे राजनीतिक दलों को सत्ता हाथ से फिसलकर राजशाही के पाले में जाती दिखी। काफी ना-नुकर के बाद शुक्रवार शाम को तीनों प्रमुख राजनीतिक दल कार्की के नाम पर सहमत हो गए। इन पार्टियों की शर्त थी कि अंतरिम पीएम के शपथ ग्रहण के साथ ही नए चुनाव की तारीखों का ऐलान भी किया जाए। ताकि ये पार्टियां चुनाव में भाग्य आजमा कर सत्ता पाने की जुगत कर सकें।
कार्की के नए अंतरिम पीएम बनने के बाद काठमांडू की सड़कों पर कुछ जगहों पर लोगों ने खुशी का इजहार किया। लेकिन देश के अन्य शहरों में बड़े पैमाने पर कोई आयोजन नहीं हुए।अंतरिम पीएम के ऐलान के बाद भी राजनीतिक स्थिरता को लेकर आशंका बनी हुई है।
आगे क्या… भ्रष्टाचार की जांच के लिए आयोग बनेगा
जेन-जी नेताओं और उनके परिवार के लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों की जांच की पक्षधर रहा है। सूत्रों के अनुसार अंतरिम पीएम सुशीला कार्की शनिवार को भ्रष्टाचार के मामलों की जांच के लिए आयोग के गठन का ऐलान कर सकती हैं। साथ ही जेन-जी की ओर से रोजगार की मांग को भी बड़ा मुद्दा बनाया गया था। कार्की की ओर से रोजगार को लेकर ‘भी बड़ा ऐलान किए जाने की संभावना है। साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव होने की संभावना है। जेन-जी शिक्षा व्यवस्था में बदलाव का हिमायती है।
भारत के लिए नेपाल अहम… क्योंकि अमेरिका-चीन की भी इस पर नजरें
भारत के लिए जियो पॉलिटिक्स और सांस्कृतिक रूप से नेपाल अहम है। बफर स्टेट होने के कारण नेपाल में राजनीतिक स्थिरता भारत के लिए जरूरी है। नेपाल पर चीन और अमेरिका की भी नजरें हैं। चीन और अमेरिका का यहां पर बड़ा इन्वेस्टमेंट है। चीन बीआरआई और अमेरिका एमसीसी के नाम पर नेपाल में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है। भारत-चीन जैसी महाशक्ति के बीच स्थित नेपाल की हर घटना भारत पर असर डालती है। हम नेपाल को उसके हाल पर नहीं छोड़ सकते हैं।
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