मकर संक्रांति 15 को मनेगी देखिए शुभ मुहूर्त- मकर संक्रांति हिंदू धर्म का एक प्रमुख सूर्य पर्व है, जिसे स्नान, दान और पुण्य कर्मों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। वर्ष 2026 में मकर संक्रांति को लेकर लोगों के मन में असमंजस की स्थिति बनी हुई है, क्योंकि इस बार यह पर्व दो अलग-अलग तिथियों पर मनाया जाएगा। इसका कारण विभिन्न पंचांगों की गणना पद्धति और सूर्य के राशि परिवर्तन का समय है।
इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि
- एकादशी और गुरुवार को लेकर चल रही भ्रांतियों की सच्चाई
- मकर संक्रांति 15 जनवरी को क्यों मनाई जाएगी
- सूर्य किस समय मकर राशि में प्रवेश करेंगे
- विशेष पुण्यकाल कब से कब तक रहेगा
- शास्त्रों के अनुसार सही दिन कौन-सा है
सूर्य आज रात 9:19 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे, मकर संक्रांति कल
मकर संक्रांति इस बार दो दिन मनेगी। वाराणसी पंचांग को मानने वाले लोग 15 जनवरी गुरुवार को और मिथिला पंचांग को मानने वाले 14 बुधवार को मकर संक्रांति मनाएंगे। सूर्य 14 जनवरी की रात 9:19 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इस खगोलीय घटना के साथ सूर्य उत्तरायण हो जाएंगे और उसी समय से विशेष पुण्यकाल भी शुरू हो जाएगा। यह विशेष पुण्यकाल 15 जनवरी गुरुवार को दोपहर बाद 1:19 बजे तक रहेगा।
गुरुवार दोपहर 1:19 बजे तक विशेष पुण्यकाल, लेकिन प्रभाव पूरे दिन रहेगा
हालांकि इस पुण्यकाल को पूरे दिन माना जाएगा। यानी 15 जनवरी को पूरे दिन मकर संक्रांति का स्नान-दान, चूड़ा-दही-तिलकुट आदि सेवन लोग कर सकेंगे। वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी श्रीकांत मिश्रा के अनुसार वहां 15 जनवरी को ही मकर संक्रांति मनाई जाएगी। जाएगी। ज्योतिषाचार्य प्रेमसागर पांडेय के अनुसार सूर्य 14 जनवरी की रात 9:19 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे।
मकर संक्रांति 15 जनवरी को क्यों मनाई जाएगी
इसके साथ सूर्य उत्तरायण होंगे और विशेष पुण्यकाल शुरू होगा, इसलिए इस बार 15 जनवरी को ही मकर संक्रांति मनाना शास्त्रोचित है। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय विश्व पंचांग के सह संपादक डॉ. अजय कुमार पांडेय ने बताया कि 14 की रात 8:49 बजे सूर्य का धनु राशि से मकर राशि में संक्रमण होगा, उसके बाद 16 घंटे तक पुण्यकाल रहेगा। इसी अवधी में मकर संक्रांति का स्नान-दान करना विशेष फलदायी होगा।
मकर संक्रांति पर सूर्य होते हैं उत्तरायण
ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश झा के अनुसार मकर संक्रांति के दिन सूर्य दक्षिणायण से उत्तरायण हो जाते हैं। उत्तरायण की इस अवधि को देवताओं का दिन और दक्षिणायण को देवताओं की रात के तौर पर माना जाता है। सूर्य छह महीना दक्षिणायण और छह मास : उत्तरायण रहते हैं। सूर्य के उत्तरायण होने से मनुष्य की कार्यक्षमता में वृद्धि होती है।
संक्रांति रात्रि में होने पर मुख्य पुण्यकाल अगले दिन
ज्योतिषाचार्य पंडित श्रीपति त्रिपाठी के अनुसार मकर संक्रांति एक महापर्व है, जो सूर्य सिद्धांत पर आधारित है। धर्मशास्त्रों में कहा गया है कि जब संक्रांति रात्रि में घटित होती है, तब उसका मुख्य पुण्यकाल अगले दिन होता है। निर्णय सिंधु जैसे प्रामाणिक ग्रंथ में यह स्पष्ट निर्देश मिलता है कि जिस दिन सूर्योदय के समय संक्रांति का प्रभाव हो, वही दिन स्नान-दान के लिए ग्राह्य होता है।
इसी शास्त्रीय सिद्धांत के अनुसार इस वर्ष मकर संक्रांति का मुख्य पुण्यकाल 15 जनवरी को माना गया है। मकर संक्रांति पर एकादशी होने और गुरुवार पड़ने के कारण खिचड़ी नहीं बनेगी, यह भी चर्चा है। यह धारणा न तो शास्त्रसम्मत है और न ही किसी प्रमाणिक परंपरा पर आधारित। एकादशी व्रत भगवान विष्णु की उपासना से जुड़ा है और चंद्र तिथि पर आधारित होता है। वहीं मकर संक्रांति सूर्योपासना, स्नान और दान का पर्व है। दोनों के नियम अलग-अलग हैं। शास्त्रों में कहीं भी यह नहीं कहा गया कि एकादशी पड़ने पर संक्रांति के कर्म निषिद्ध हो जाते हैं।
विशेष पुण्यकाल कब से कब तक रहेगा?
ज्योतिषाचार्य प्रेमसागर पांडेय के अनुसार-
- विशेष पुण्यकाल की शुरुआत: 14 जनवरी रात 9:19 बजे से
- विशेष पुण्यकाल की समाप्ति: 15 जनवरी गुरुवार दोपहर 1:19 बजे तक
हालांकि, धर्मशास्त्रों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पुण्यकाल का प्रभाव पूरे दिन माना जाता है। इसलिए 15 जनवरी को पूरा दिन स्नान-दान, जप-तप और धार्मिक कार्य किए जा सकते हैं।
मकर संक्रांति पर क्या-क्या करना शुभ होता है?
मकर संक्रांति के दिन विशेष रूप से-
- पवित्र नदी में स्नान
- दान (तिल, गुड़, चावल, वस्त्र, अन्न)
- चूड़ा-दही-तिलकुट का सेवन
- सूर्य को अर्घ्य
- जप-तप और पूजा-पाठ
करना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।
एकादशी और गुरुवार को लेकर भ्रम – सच्चाई क्या है?
इस वर्ष मकर संक्रांति के दिन एकादशी तिथि और गुरुवार पड़ने के कारण यह चर्चा चल रही है कि- खिचड़ी या संक्रांति के कर्म नहीं होंगे। इस पर ज्योतिषाचार्यों ने स्पष्ट किया है कि-
- एकादशी व्रत चंद्र तिथि पर आधारित होता है और भगवान विष्णु की उपासना से जुड़ा है।
- मकर संक्रांति सूर्य आधारित पर्व है, जिसका संबंध स्नान-दान और सूर्योपासना से है।
- शास्त्रों में कहीं भी यह निषेध नहीं है कि एकादशी पड़ने पर संक्रांति के कर्म वर्जित हो जाते हैं।
अतः खिचड़ी, दान और सभी संक्रांति कर्म पूर्ण रूप से किए जा सकते हैं।
निष्कर्ष (Conclusion)
- सूर्य का मकर राशि में प्रवेश: 14 जनवरी रात 9:19 बजे
- विशेष पुण्यकाल: 14 जनवरी रात से 15 जनवरी दोपहर 1:19 बजे तक
- शास्त्रानुसार मुख्य पर्व: 15 जनवरी 2026 (गुरुवार)
- एकादशी या गुरुवार होने से कोई धार्मिक बाधा नहीं
यदि आप शास्त्रीय मान्यता और निर्णय सिंधु जैसे ग्रंथों का अनुसरण करते हैं, तो 15 जनवरी को मकर संक्रांति मनाना सर्वाधिक उचित माना जाएगा।
IMPORTANT LINKS
| Arattai Group Join | CLICK HERE |
| Whatsapp Group Join | CLICK HERE |
| TELEGRAM | join |
| YOUTUBE | SUBSCRIBE |
2026 में ऐसे बनवाएं अपना पैन कार्ड वो भी घर बैठे- यहाँ से करें आवेदन


























