मनरेगा हुआ बंद – अब आया जी राम जी योजना- नया योजना के बारें में जाने विस्तार से:-हाल के दिनों में सोशल मीडिया और अखबारों में यह खबर तेजी से वायरल हो रही है कि मनरेगा (MGNREGA) को बंद कर दिया गया है और उसकी जगह केंद्र सरकार “जी राम जी योजना” नाम से एक नई रोजगार योजना लाने जा रही है।
इस खबर ने ग्रामीण इलाकों में काम करने वाले करोड़ों मजदूरों को चिंता में डाल दिया है।
लेकिन सवाल यह है कि क्या मनरेगा सच में बंद हो गया है?
और जी राम जी योजना क्या है, इसमें क्या बदलाव होंगे?
इस आर्टिकल में हम आपको पूरी सच्चाई, सरकारी तैयारी और प्रस्तावित नए नियम विस्तार से बता रहे हैं।
‘जी राम जी’ से आठ करोड़ मजदूरों को मिलेगा 25 दिन ज्यादा रोजगार
मनरेगा यानी ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम’ निरस्त कर दिया जायेगा. इसकी जगह नया कानून आयेगा, जिसका नाम ‘विकसित भारत जी राम जी विधेयक, 2025’ यानी ‘विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन, ग्रामीण’ होगा.
केंद्र सरकार की योजना : मनरेगा को निरस्त कर 125 दिन रोजगार वाला नया कानून लाने की तैयारी
इस नये कानून की सबसे बड़ी बत यह होगी कि जिन अकुशल मजदूरों (शारीरिक श्रम करने के लिए स्वेच्छा से आगे आने वाले) के प्रत्येक ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्यों को पहले एक वित्त वर्ष में 100 दिनों का काम मिलता था, अब उन्हें 125 दिन के रोजगार की वैधानिक गारंटी दी जायेगी. केंद्र सरकार ने यह नया कानून बनाने के लिए लोकसभा में विधेयक लाने की तैयारी में है, नये कानून का लक्ष्य सशक्तीकरण एवं विकास को बढ़ावा देकर समृद्ध और सक्षम ग्रामीण भारत का निर्माण करना है. मनरेगा के तहत इन कामगारों को 100 दिन काम की गारंटी मिलती है.
बीते पांच वर्षों में मनरेगा के तहत हर साल करीब 300-390 करोड़ व्यक्ति-दिन का रोजगार सृजित हुआ और ₹50-₹74 हजार करोड़ तक मजदूरी का भुगतान किया गया,
कुछ बिदुओं में समझें जी राम जी योजना को
- जी राम जी योजना मनरेगा की जगह लायी जायेगी और इसके लिये नया कानून बनाया जायेगा.
- योजना सरकार के विकसित भारत 2047 विजन के तहत लाई जा रही है.
- योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को मिलने वाला गारंटीड रोजगार 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन करने पर विचार है.
- योजना का उद्देश्य केवल मजदूरी देना नहीं, बल्कि रोजगार के अधिक अवसर और आय वृद्धि है.
- मजदूरी भुगतान के लिए साप्ताहिक पेमेंट सिस्टम लाने का प्रस्ताव है.
- काम पूरा होने के 15 दिनों के भीतर भुगतान जरूरी होगा.
- अगर 15 दिन के अंदर काम नहीं मिलता है, तो बेरोजगारी भत्ता देने की व्यवस्था होगी.
मनरेगा को बदलेगी नई योजना
केंद्र सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को निरस्त कर एक नया कानून बनाने की तैयारी में है। इस बाबत सरकार जल्द लोकसभा में नया विधेयक पेश कर सकती है। इसका नाम ‘विकसित भारत, रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण)’ यानी‘विकसित भारत, जी राम जी विधेयक, 2025’ होगा।
विकसित भारत, जी राम जी विधेयक की प्रति लोकसभा सदस्यों को वितरित कर दी गई है। सरकार ने लोकसभा की संशोधित कार्य सूची में विधेयक को शामिल किया था, पर विधेयक को पेश नहीं किया गया। माना जा रहा है कि सरकार मंगलवार को यह विधेयक पेश कर सकती है।
तैयारीः ‘विकसित भारत-जी राम जी’ बिल लाएगा केंद्र, 125 दिन काम की गारंटी मिलेगी
ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह ने 20 समय तक ग्रामीण परिवारों को रोजगार की गारंटी दी है। सामाजिक सुरक्षा के बड़े कवरेज और योजनाओं को पूरी तरह लागू करने से ग्रामीण इलाकों में जो सामाजिक-आर्थिक बदलाव आया है, उसे देखते हुए इसे और मज़बूत करना ज़रूरी हो गया है। मनरेगा में आजीविका सुरक्षा बढ़ाने पर ध्यान था। नया विधेयक विकसित भारत के साथ तालमेल बैठाते हुए एक आधुनिक वैधानिक ढांचा स्थापित करता है। यह हर ग्रामीण परिवार को मनरेगा में 100 की जगह 125 दिनों की वेतन रोजगार की गारंटी देता है।
नाम बदलने पर विपक्ष ने सरकार पर हमला बोला
विपक्ष ने मनरेगा के स्थान पर नया कानून बनाने की तैयारी के बीच सोमवार को कहा कि आखिर इस योजना से महात्मा गांधी का नाम क्यों हटाया जा रहा है। प्रतिपक्ष ने यह आरोप भी लगाया कि सरकार का यह कदम महात्मा गांधी का अपमान है।
प्रियंका बोली, सरकार आखिर क्यों हटाना चाहती है महात्मा गांधी का नाम
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम हटाने पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि इसका मकसद क्या है। पार्टी के कई दूसरे नेताओं ने भी सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा है कि
मनरेगा का नाम बदलने की कोशिश भाजपा और संघ का षड्यंत्र है। कांग्रेस सांसद रंजीता रंजन ने भी सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि अभी तक सरकार पंडित नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के नाम पर चल रही योजनाओं के नाम बदल रही थी, पर अब वह महात्मा गांधी का भी नाम बदलने लगी है। पार्टी सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने तंज कसा की सरकार सिर्फ नाम को बदलना जानती है।
तृणमूल कांग्रेस नेता और राज्यसभा सदस्य डेरेक ओब्रायन ने सरकार के इस कदम को महात्मा गांधी का अपमान बताया। माकपा के महासचिव एमए बेबी ने इसे इस तथ्य को छिपाने का प्रयास बताया।
विधेयक का लक्ष्य
- चार प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के माध्यम से रोजगार और टिकाऊ ग्रामीण बुनियादी ढांचा बनाना।
- पानी से संबंधित कार्यों के माध्यम से जल सुरक्षा, मुख्य ग्रामीण बुनियादी ढांचा, आजीविका से जुड़ा बुनियादी ढांचा व अत्यधिक मौसम की घटनाओं को कम करने के लिए विशेष कार्य
पारदर्शिता-जवाबदेही तय होगी
- बायोमीट्रिक प्रमाणीकरण, जियो टैगिंग, डिजिटल एमआईएस डैशबोर्ड, साप्ताहिक सार्वजनिक खुलासे और सामाजिक अंकेक्षण अनिवार्य होगा
- शिकायत निवारण के लिए
- बहुस्तरीय व्यवस्था और जिला स्तर पर लोकपाल की नियुक्ति का भी प्रावधान।
प्रस्तावित विधेयक में ये हैं प्रमुख प्रावधान
- अधिसूचित ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक ग्रामीण परिवार को एक वर्ष में 125 दिनों के मजदूरी रोजगार की कानूनी गारंटी के साथ मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक या कार्य पूरा होने के 15 दिनों में किया जाएगा|
- यदि आवेदन के 15 दिनों के भीतर काम उपलब्ध नहीं कराया गया तो बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान भी है।
- खेती-बाड़ी के समय में (अधिकतम 60 दिन प्रतिवर्ष) इस योजना के तहत कार्य नहीं कराए जाएंगे, हालांकि प्राकृतिक आपदा या असाधारण परिस्थितियों में इसमें छूट दी जा सकेगी।
ताकि राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों पर बोझ नहीं पड़े
उत्तर-पूर्वी और हिमालयी राज्यों के लिए 90:10, अन्य राज्यों के लिए 60:40 और बिना विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 100 प्रतिशत केंद्रीय सहायता का प्रावधान
… इसलिए बड़े बदलाव की जरूरत पड़ी
मनरेगा में कई समस्याएं थी, जिसकी वजह से बदलाव की जरूरत है। वर्ष 2024-25 में राज्यों में कुल 193.67 करोड़ का गबन हुआ। वहीं, 2025-26 में 23 राज्यों की मॉनिटरिंग से पता चला कामा हिसाब से नहीं किए गए। जांच में पाया गया कि जहां मजदूरों की जरूरत थी, वहां मशीनों का इस्तेमाल हुआ। हाजिरी को बड़े पैमाने पर नजरअंदाज किया।
लोकसभा में ये विधेयक पेश किए गए
- विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक
- परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी भागीदारी देने संबंधी विधेयक
- उपयोगिता खो चुके 71 कानूनों को रद्द करने का विधेयक भी पेश
- 01 दिसंबर से शुरू हुआ था शीत सत्र
- 19 दिसंबर को सत्र समाप्त होगा
अभी ग्रामीण मजदूर क्या करें?
- मनरेगा जॉब कार्ड अपडेट रखें
- बैंक खाता और आधार लिंक कराएं
- ग्राम पंचायत से संपर्क बनाए रखें
- अफवाहों पर भरोसा न करें
निष्कर्ष (Conclusion)
- मनरेगा बंद नहीं हुआ है
- सरकार नई जी राम जी योजना पर विचार कर रही है
- 125 दिन रोजगार का प्रस्ताव है
- अंतिम फैसला संसद और अधिसूचना के बाद होगा
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