यूजीसी का नया नियम | जिसपर हो रहा है विवाद | जाने विस्तार से:-देश में उच्च शिक्षा को समान, निष्पक्ष और भेदभाव-मुक्त बनाने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने वर्ष 2026 से लागू होने वाले कुछ नए नियम जारी किए हैं। लेकिन ये नियम लागू होते ही देशभर में छात्रों, शिक्षकों और सामाजिक संगठनों का विरोध तेज हो गया है।
दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश, झारखंड, बिहार और अन्य राज्यों तक सड़कों पर प्रदर्शन, यूजीसी मुख्यालय के सामने धरना, और यहां तक कि मामला अदालत तक पहुंच गया है।
यूजीसी के नए नियमों का देशभर में विरोध, कोर्ट पहुंचा मामला
उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव खत्म करने के लिए लाए गए यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ कई राज्यों में मंगलवार को विरोध-प्रदर्शन हुए। दिल्ली, यूपी से लेकर झारखंड तक छात्र सड़कों पर उतरे। दिल्ली में यूजीसी मुख्यालय के सामने विद्यार्थियों ने प्रदर्शन कर नियम वापस लेने की मांग की। इस बीच, नियम के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में एक और याचिका दाखिल की गई है।
झारखंड और उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली तक सड़कों पर उतरे छात्र, यूजीसी मुख्यालय के सामने प्रदर्शन कर नियम वापस लेने की मांग की
राजधानी दिल्ली में बारिश और भारी बैरिकेडिंग के बीच छात्रों के समूह ने प्रदर्शन किया। छात्रों का कहना था कि आयोग द्वारा जारी नए नियम परिसरों में अराजकता पैदा कर सकते हैं। समूह ने यूजीसी को अपनी मांगों की सूची सौंपी, जिसमें विनियमों को पूरी तरह से वापस लेने की मांग भी शामिल है। छात्रों का दावा है कि यूजीसी के अधिकारियों ने हमारी बात सुनी और 12 फरवरी तक का समय मांगा।
यूपी में प्रदर्शन-इस्तीफे
नोएडा, गाजियाबाद, लखनऊ, मेरठ, अलीगढ़, प्रयागराज, वाराणसी, रायबरेली, अमेठी समेत कई जिलों में प्रदर्शन हुए। छात्रों ने संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव का आरोप लगाया। लखनऊ में मंडल महामंत्री सहित 11 पदाधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया। उधर, नए नियमों के विरोध में सोमवार को इस्तीफा देने वाले बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री को निलंबित कर दिया गया। उन्हें डीएम कार्यालय शामली से संबद्ध किया गया है।
किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा : धर्मेंद्र प्रधान
डीडवाना (राजस्थान)। उच्च शिक्षण संस्थानों में समता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम, 2026 पर हो रही आलोचनाओं के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आश्वासन दिया कि किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं होगा। विनियमों का दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा। प्रधान ने पत्रकारों से कहा कि मैं सभी को आश्वस्त करना चाहता हूं कि किसी को भी किसी प्रकार के उत्पीड़न का सामना नहीं करना पड़ेगा। किसी को भी भेदभाव के नाम पर इस नियम का दुरुपयोग करने का अधिकार नहीं होगा।
यूजीसी के नए नियमों पर देशभर में उबाल, सड़कों पर उग्र प्रदर्शन
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों के खिलाफ देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। मंगलवार को दिल्ली-एनसीआर, यूपी से झारखंड तक लोग सड़कों पर उतरे।
विरोध
नई दिल्ली में यूजीसी मुख्यालय के बाहर विद्यार्थियों ने विरोध प्रदर्शन कर उच्च शिक्षा संस्थानों में समता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम, 2026 को वापस लेने की मांग की। यूपी के कई शहरों में यूजीसी के पुतले फूकेगा। छात्रों ने बुधवार को प्रदर्शन करने का फैसला किया है।
लखनऊ में मंगलवार को श्रीराजपूत करणी सेना वालों को रोकती पुलिस। एएनआई
उत्तर प्रदेश के लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी, अलीगढ़, बरेली, संभल, कुशीनगर, देवरिया, जौनपुर, बहराइच, मथुरा समेत कई अन्य जिलों में यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ लोग सड़कों पर उतरे। हाथरस के सांसद अनूप प्रधान वाल्मीकि का छात्रों ने घेराव कर नारेबाजी की। अलीगढ़ में विराट हिंदू सम्मेलन में साध्वी प्राची की सभा में भी विरोध हुआ। वहीं, गाजियाबाद में क्षत्रिय महासभा राजपूत समाज अखंड भारत और श्रीराजपूत करणी सेना ने जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया और डीएम के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।
प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी का पुतला भी जलाया और केंद्र सरकार के विरोध में नारे लगाए। हाथरस की जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा उपाध्याय ने नियमों को तुरंत वापस लेने की मांग को लेकर प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है।
बुंदेलखंड समेत मध्य यूपी के जिलों में बदलाव का विरोध हुआ। वहीं आइसा की झारखंड इकाई ने इस कानून का समर्थन किया। वाम समर्थित आइसा ने समानता संरक्षण के दायरे में ओबीसी को शामिल किए जाने का स्वागत किया।
जानें यूजीसी का नियम, जिस पर विवाद
यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ गुस्सा सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है, बल्कि कई राज्यों में लोग सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं। इससे भेदभाव को बढ़ावा देने की बात कही जा रही है।
क्या हैं नए नियम
उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव खत्म करने के लिए यूजीसी ने अपने मौजूदा नियमों को और सख्त किया है। यूजीसी ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग विनिमय 2026 जारी किया है। उद्देश्य है कि धर्म, नस्ल, जाति, लिंग, जन्म स्थान, विकलांगता के आधार पर छात्र-छात्राओं से भेदभाव ना हो और इसे खत्म किया जाए।
किसकी क्या भूमिका
हर कॉलेज या यूनिवर्सिटी को ‘समान अवसर केंद्र’ और ‘इक्विटी कमिटी’ जैसे विशेष विभाग बनाने होंगे। ये विभाग भेदभाव की शिकायतों की जांच करेंगे और कैंपस के माहौल पर नजर रखेंगे ताकि सब कुछ निष्पक्ष रहे। संस्थानों को भेदभाव के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाने होंगे और प्रभावित छात्रों की मदद करनी होगी।
ये उपाय किए गए
केंद्र भेदभाव की किसी भी घटना की रिपोर्टिंग के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल बनाएगा और एक ‘इक्विटी हेल्पलाइन’ भी होगी। छात्र जाति या किसी भी तरह के भेदभाव की रिपोर्ट करने के लिए उपयोग कर सकते हैं।
उद्देश्य क्या है
आयोग के अनुसार इन नए नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में निष्पक्षता और सबको साथ लेकर चलने की भावना को बढ़ावा देना है। इनका मुख्य जोर जाति के आधार पर होने वाले भेदभाव को कम करना है।
यूजीसी की भूमिका
यह सुनिश्चित करेगा कि सभी यूनिवर्सिटी इन नियमों का ठीक से पालन करें। पिछड़े वर्ग के छात्रों को पढ़ाई और पैसों से जुड़ी सही सलाह दी जाएगी ताकि वे शिक्षा में सफल हो सकें। इन नीतियों को बेहतर तरीके से लागू करने के लिए अधिकारियों और संस्थाओं के साथ मिलकर काम करेगा।
यूजीसी नियम, शंकराचार्य मामलाः बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट का इस्तीफा, रात में निलंबन का आदेश
यूजीसी के नए नियमों के विरोध में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने सोमवार को इस्तीफा दे दिया। अग्निहोत्री 2019 बैच के पीसीएस अधिकारी हैं। उन्होंने दिन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल व बरेली के डीएम अविनाश सिंह को ईमेल के जरिए इस्तीफा भेजा। इसके बाद रात तक अनुशासनहीनता के आरोप में उनके निलंबन का आदेश आ गया।
उत्तर प्रदेश नजरबंद किए जाने का आरोप लगा धरने पर बैठे
इसके विरोध में अग्निहोत्री ने मंगलवार को जिला कलेक्टर ऑफिस के बाहर धरना दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सोमवार रात उन्हें नजरबंद करने की कोशिश की गई थी और अब पुलिस ने उनके सरकारी आवास के बाहर का मुख्य गेट बंद कर दिया है। इस्तीफे में अग्निहोत्री ने नए यूजीसी नियमों को ‘काला कानून’ बताया। अपने इस्तीफे के साथ जारी एक भावुक बयान में अग्निहोत्री ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का जिक्र करते हुए गंभीर आरोप लगाए। यह भी कहा कि सामान्य वर्ग दोनों सरकारों से दूर होता जा रहा है।
पीएम-सीएम के अपमान से आहत अफसर का इस्तीफा
अयोध्या के जीएसटी डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बयानों के विरोध में पद से मंगलवार को इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि वे सीएम योगी आदित्यनाथ और पीएम नरेंद्र मोदी के ‘अपमान’ से आहत हैं। सूत्रों के अनुसार, सिंह पर फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र का आरोप है। 4 साल से जारी केस में उनकी नौकरी जाने की आशंका है।
यूजीसी का नया नियम क्या है?
यूजीसी द्वारा जारी नए नियमों का आधिकारिक नाम है –
“UGC (Promotion of Equity in Higher Educational Institutions) Regulations, 2026”
इन नियमों का मुख्य उद्देश्य है:-
- उच्च शिक्षा संस्थानों में किसी भी प्रकार के भेदभाव को रोकना
- छात्रों को समान अवसर देना
- जाति, धर्म, लिंग, भाषा, क्षेत्र, विकलांगता आदि के आधार पर भेदभाव समाप्त करना
नए नियमों के प्रमुख प्रावधान
1. भेदभाव पर सख्त रोक
UGC के अनुसार अब किसी भी कॉलेज या यूनिवर्सिटी में:-
- जाति
- धर्म
- लिंग
- जन्म स्थान
- भाषा
- विकलांगता
- सामाजिक या आर्थिक स्थिति
के आधार पर भेदभाव करना दंडनीय अपराध होगा।
2. “इक्विटी कमेटी” का गठन
हर विश्वविद्यालय और कॉलेज में अनिवार्य रूप से:-
- Equity Committee (समानता समिति) बनाई जाएगी
- यह समिति छात्रों की शिकायतों की जांच करेगी
- भेदभाव की पुष्टि होने पर प्रशासन को कार्रवाई की सिफारिश करेगी
3. ऑनलाइन शिकायत पोर्टल
- UGC एक ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च करेगा
- छात्र सीधे भेदभाव की शिकायत दर्ज कर सकेंगे
- शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाएगी
4. छात्रों के अधिकार बढ़ेंगे
- छात्रों को मानसिक उत्पीड़न, जातिगत अपमान या पक्षपात के खिलाफ कानूनी संरक्षण मिलेगा
- गंभीर मामलों में संस्थान पर UGC की कार्रवाई संभव होगी
विवाद क्यों हो रहा है?
छात्रों और संगठनों की आपत्ति
विरोध कर रहे छात्रों और संगठनों का कहना है कि:-
- यह नियम पहले से मौजूद आरक्षण व्यवस्था को कमजोर कर सकता है
- “समानता” के नाम पर विशेष सामाजिक सुरक्षा खत्म की जा रही है
- यह नियम संविधान में दिए गए सामाजिक न्याय के सिद्धांतों से टकराता है
प्रदर्शन और आंदोलन
- दिल्ली में यूजीसी मुख्यालय के सामने धरना
- उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड सहित कई राज्यों में सड़क जाम और प्रदर्शन
- लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी, गाजियाबाद, मेरठ जैसे शहरों में विरोध
- कई जगह पुलिस हस्तक्षेप और लाठीचार्ज की खबरें भी सामने आईं
कोर्ट तक क्यों पहुंचा मामला?
विरोध बढ़ने के बाद यह मामला न्यायालय तक पहुंच गया है।
- याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह नियम संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करता है
- अदालत में नियमों की वैधता को चुनौती दी गई है
- अभी इस पर अंतिम फैसला आना बाकी है
सरकार और UGC का पक्ष
शिक्षा मंत्री और UGC का बयान
- सरकार का कहना है कि किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा
- ये नियम किसी जाति या वर्ग के खिलाफ नहीं हैं
- इसका मकसद केवल निष्पक्ष और सुरक्षित शिक्षा वातावरण बनाना है
UGC के अनुसार:-
“यह नियम सभी छात्रों के लिए हैं, किसी विशेष वर्ग के अधिकार छीनने के लिए नहीं।”
उत्तर प्रदेश में विशेष घटनाक्रम
- बरेली में UGC नियमों से जुड़ा शंकराचार्य मामला
- सिटी मजिस्ट्रेट के इस्तीफे और निलंबन की खबर
- प्रशासनिक स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर हलचल
आगे क्या हो सकता है?
- कोर्ट के फैसले के बाद नियमों में संशोधन संभव
- UGC छात्रों और संगठनों से बातचीत कर सकती है
- कुछ नियमों को स्थगित या स्पष्ट किया जा सकता है
छात्रों को क्या करना चाहिए?
- अफवाहों से बचें
- आधिकारिक UGC नोटिफिकेशन पढ़ें
- शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखें
- किसी भी समस्या पर ऑनलाइन शिकायत पोर्टल का उपयोग करें
निष्कर्ष
यूजीसी का नया नियम 2026 शिक्षा व्यवस्था को समान और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, लेकिन इसके कुछ प्रावधानों को लेकर भ्रम और आशंका भी है।
जब तक अदालत और सरकार की ओर से अंतिम निर्णय नहीं आता, तब तक यह मुद्दा राष्ट्रीय बहस का विषय बना रहेगा।
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