ग्रीनलैंड अमेरिका विवाद क्या है? अमेरिका ग्रीनलैंड को क्या हडप लेगा- जाने विस्तार से

By: arcarrierpoint

On: Wednesday, January 21, 2026 9:15 PM

ग्रीनलैंड अमेरिका विवाद क्या है? अमेरिका ग्रीनलैंड को क्या हडप लेगा-
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ग्रीनलैंड अमेरिका विवाद क्या है? अमेरिका ग्रीनलैंड को क्या हडप लेगा- ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और यूरोप के बीच समय-समय पर चर्चा और विवाद सामने आते रहे हैं। हाल के वर्षों में यह मुद्दा फिर से अंतरराष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है। कई लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या अमेरिका ग्रीनलैंड पर कब्जा करना चाहता है? और ग्रीनलैंड आखिर इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

इस लेख में हम ग्रीनलैंड से जुड़े पूरे विवाद को इतिहास, राजनीति, भू-रणनीति, संसाधन और भविष्य के नजरिए से विस्तार से समझेंगे।

ग्रीन लैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है, जो उत्तरी अटलांटिक और आर्कटिक महासागर के बीच स्थित है। यह भौगोलिक रूप से उत्तरी अमेरिका महाद्वीप के करीब है, लेकिन राजनीतिक रूप से यह डेनमार्क के अधीन है।

ग्रीन लैंड की आबादी बहुत कम है, लगभग 56 हजार के आसपास। यहां अधिकतर लोग इनुइट (Inuit) समुदाय से आते हैं।

ग्रीन लैंड पूरी तरह स्वतंत्र देश नहीं है। यह डेनमार्क का एक स्वायत्त क्षेत्र (Autonomous Territory) है। ग्रीनलैंड को अपने आंतरिक मामलों में काफी आज़ादी है, लेकिन रक्षा, विदेश नीति और मुद्रा जैसे अहम मुद्दे अभी भी डेनमार्क के नियंत्रण में हैं।

ग्रीन लैंड का महत्व केवल उसकी जमीन के कारण नहीं है, बल्कि उसकी रणनीतिक स्थिति के कारण है। ग्रीनलैंड आर्कटिक क्षेत्र में स्थित है, और आर्कटिक भविष्य में वैश्विक राजनीति और व्यापार का नया केंद्र माना जा रहा है।

जलवायु परिवर्तन के कारण बर्फ पिघल रही है, जिससे नए समुद्री रास्ते और प्राकृतिक संसाधन सामने आ रहे हैं।

ग्रीनलैंड खनिज संसाधनों से भरपूर है। यहां दुर्लभ पृथ्वी तत्व (Rare Earth Elements) पाए जाते हैं,
जो मोबाइल, मिसाइल, सैटेलाइट और इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल होते हैं। इसके अलावा ग्रीनलैंड में
तेल, गैस, यूरेनियम, सोना और हीरे जैसे संसाधनों की भी संभावना है। यही कारण है कि बड़ी ताकतें इस क्षेत्र पर नजर बनाए हुए हैं।

  • अमेरिका की रुचि ग्रीनलैंड में कोई नई बात नहीं है।
  • 1867 में अमेरिका ने पहली बार ग्रीनलैंड खरीदने का विचार किया था।
    द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका ने ग्रीनलैंड में सैन्य ठिकाने बनाए।
  • आज भी ग्रीनलैंड में अमेरिका का Thule Air Base मौजूद है,
    जो मिसाइल डिफेंस और अंतरिक्ष निगरानी के लिए बेहद अहम है।
  • अमेरिका के लिए ग्रीनलैंड कई कारणों से महत्वपूर्ण है।
  • पहला कारण है राष्ट्रीय सुरक्षा
    ग्रीनलैंड अमेरिका और रूस के बीच एक रणनीतिक स्थान पर स्थित है।
  • दूसरा कारण है चीन का बढ़ता प्रभाव
    चीन ग्रीनलैंड में निवेश करना चाहता है,
    जिसे अमेरिका अपने लिए खतरा मानता है।
  • तीसरा कारण है प्राकृतिक संसाधन और आर्कटिक कंट्रोल

2019 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को खरीदने की इच्छा जताई थी। इस बयान ने पूरी दुनिया में हलचल मचा दी। डेनमार्क और ग्रीनलैंड दोनों ने इस प्रस्ताव को साफ तौर पर खारिज कर दिया। डेनमार्क की प्रधानमंत्री ने इसे “बेतुका विचार” कहा।

कानूनी और राजनीतिक रूप से यह बेहद मुश्किल है। ग्रीनलैंड कोई खाली जमीन नहीं है। वहां की अपनी सरकार, अपनी संस्कृति और अपनी जनता है। डेनमार्क के संविधान और अंतरराष्ट्रीय कानून किसी भी जबरन कब्जे की अनुमति नहीं देते।

सीधा जवाब है – नहीं

आज के समय में किसी भी लोकतांत्रिक और स्वायत्त क्षेत्र पर जबरन कब्जा करना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन होगा। ऐसा करने से अमेरिका की वैश्विक छवि को भारी नुकसान पहुंचेगा और नाटो जैसे संगठनों में भी संकट पैदा हो जाएगा।

ग्रीनलैंड की जनता न तो अमेरिका के अधीन जाना चाहती है और न ही पूरी तरह डेनमार्क पर निर्भर रहना चाहती है। कई लोग भविष्य में पूर्ण स्वतंत्रता की बात करते हैं। ग्रीनलैंड की सरकार चाहती है कि वह अपने संसाधनों पर खुद फैसला ले सके।

डेनमार्क ग्रीनलैंड को अपने साम्राज्य का अहम हिस्सा मानता है। डेनमार्क अमेरिका का सहयोगी है,
लेकिन वह ग्रीनलैंड की संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करना चाहता। डेनमार्क यह भी स्पष्ट कर चुका है कि ग्रीनलैंड “बिक्री के लिए नहीं” है।

चीन ग्रीनलैंड में बंदरगाह, एयरपोर्ट और खनन परियोजनाओं में निवेश करना चाहता है। अमेरिका को डर है कि
अगर चीन यहां मजबूत हुआ तो आर्कटिक क्षेत्र में उसका दबदबा बढ़ जाएगा। यही वजह है कि अमेरिका ग्रीनलैंड पर खास नजर रखे हुए है।

आर्कटिक क्षेत्र में अमेरिका, रूस, चीन और यूरोपीय देशों के बीच धीरे-धीरे प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। बर्फ पिघलने से नए व्यापार मार्ग खुल रहे हैं, जिससे इस क्षेत्र का महत्व कई गुना बढ़ गया है। ग्रीनलैंड इसी आर्कटिक राजनीति का केंद्र बनता जा रहा है।

ग्रीनलैंड में स्वतंत्रता को लेकर धीमी लेकिन निरंतर चर्चा चल रही है। हालांकि आर्थिक निर्भरता ग्रीनलैंड के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। अगर ग्रीनलैंड अपने संसाधनों का सही इस्तेमाल कर पाया, तो भविष्य में स्वतंत्रता संभव हो सकती है।

ग्रीनलैंड–अमेरिका विवाद असल में जमीन हड़पने का मामला नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक प्रभाव और रणनीतिक नियंत्रण की लड़ाई है। अमेरिका ग्रीनलैंड को जबरन नहीं हड़प सकता, लेकिन वह वहां अपना प्रभाव जरूर बढ़ाना चाहता है।

ग्रीनलैंड, डेनमार्क और अमेरिका – तीनों के हित इस क्षेत्र से जुड़े हैं, और आने वाले समय में यह इलाका वैश्विक राजनीति में और भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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