स्नातक का इंटरनल परीक्षा | परीक्षा में मोबाइल किताब ले जाकर उत्तर लिखते हैं छात्र -:-स्नातक (UG) की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के लिए इंटरनल परीक्षा/आंतरिक मूल्यांकन काफी महत्वपूर्ण होता है। इसी के आधार पर छात्रों को सेमेस्टर के कुल अंकों में निर्धारित अंक दिए जाते हैं। लेकिन इन दिनों इंटरनल परीक्षा में कथित तौर पर मोबाइल, किताब और अन्य सामग्री के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट में इंटरनल परीक्षा में परीक्षा व्यवस्था और मूल्यांकन को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार कुछ कॉलेजों में छात्र परीक्षा के दौरान नकल करते दिखाई दिए और कुछ मामलों में मोबाइल फोन तथा किताबों का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई। वहीं, शिक्षकों पर भी मूल्यांकन के दौरान छात्रों की मदद करने के आरोप लगाए गए हैं।
इंटर्नल परीक्षा को वीक्षक लगा रहे धांधली का बट्टा, कोई एक्शन नहीं
कॉलेजों के शिक्षक और वीक्षक ही स्नातक की इंटर्नल परीक्षाओं को धांधली का बट्टा लगा रहे हैं। उनकी मौजूदगी में छात्र न सिर्फ परीक्षा में नकल कर रहे हैं, बल्कि वीडियो भी बनाकर वायरल करते हैं। शिक्षक मूल्यांकन की अपनी ड्यूटी भी छात्रों से करवाने लगे हैं। बीते 6 महीने में ऐसे कई मामले हुए, लेकिन एक भी शिक्षक पर अबतक कोई एक्शन नहीं हुआ है। टीएनबी कॉलेज में एक दिन पहले छात्राओं से मूल्यांकन कराने के मामले में कहा जा रहा है कि शिक्षक कम थे, इसलिए ऐसा करना पड़ा। वहीं, अन्य कॉलेजों में नकल और उसकी रील बनने देने के पीछे शिक्षकों की क्या मजबूरी थी, इस पर कोई जवाब नहीं।
शिक्षक कमः- मूल्यांकन में लेनी पड़ी छात्राओं की मदद
वीडियो वायरल न होता तो ये धांधलियां कॉलेज में ही दबी रह जातीं। गड़बड़ियों को रोकने के लिए टीएमबीयू ने भी कोई कदम नहीं उठाया। इंटर्नल परीक्षा किसी भी सेमेस्टर की सत्रांत परीक्षा से पहले संबंधित कॉलेज में ही ली जाती है। प्रश्नपत्र और कॉपी की व्यवस्था कॉलेज ही करते हैं। वीक्षक और मूल्यांकन की ड्यूटी भी कॉलेज अपने शिक्षकों को ही देते हैं।
टीएनबी कॉलेज के मामले में कुछ शिक्षकों ने नाम नहीं छापने का आग्रह कर बताया कि
छात्राएं असाइनमेंट पर केवल टिक मार्क कर रही थीं। जिस विषय की कॉपियां थीं उसके हेड नहीं आए थे। तीन शिक्षक हाल ही में नए डिग्री कॉलेजों की प्रतिनियुक्ति से लौटे हैं। विवि को इंटर्नल परीक्षा के अंक उपलब्ध कराने की जल्दी के कारण छात्राओं से मूल्यांकन कराना पड़ा। शिक्षक बोलने से बचते रहे कि कॉलेजों में वीक्षक के रहते नकल व रील कैसे बनी।
तोड़े गए ये नियम
- छात्रों को परीक्षा हॉल में मोबाइल, चिट, किताबले जानेदी।
- परीक्षा हॉल में प्रवेश से पहले छात्रों की जांच नहीं की
- तय मूल्यांकन ड्यूटी में हेरफर की
विवि के सिस्टम को दोष दे रहे शिक्षक
मूल्यांकन वाले मामले को लेकर शिक्षकों ने विवि के सिस्टम को दोष दिया। इन्होंने कहा की नामांकन लेट होता है। इससे सत्र लंबित रहता है। उसे नियमित करने के लिए विवि जल्दी सत्रांत परीक्षा लेना चाहता है। इस परीक्षा में इंटर्नल एग्जाम के अंक भी जुड़ते हैं। इसलिए कॉलेज को जैसे-तैसे परीक्षा लेनी पड़ती है। कई विषयों में शिक्षक काफी कम हैं। मूल्यांकन के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता है।
पहले भी होती रहीं शिकायतें पर एक्शन नहीं
एसएम कॉलेज में परीक्षा के दौरान परीक्षा कक्ष में खुलेआम मोबाइल फोन का उपयोग कर सोशल मीडिया ग्रुपों से उत्तर लिखने के वीडियो छात्राओं ने वायरल किए थे। मारवाड़ी कॉलेज में भी नकल करते हुए एक छात्रा ने इसकी रील बनाकर वायरल की थी पर वीक्षकों पर कार्रवाई नहीं हुई।
इतिहास विभाग के प्रभारी हेड डॉ. कुमार कार्तिक से शोकॉज
मामले में प्राचार्य ने इतिहास विभाग के प्रभारी हेड डॉ. कुमार कार्तिक से शोकॉज पूछा है। साथ ही स्टाफ रूम में चल रहे इतिहास विभाग को शिफ्ट करने को कहा है। अनुशासन समिति ने भी शुक्रवार को बैठक की। समिति ने जांच पूरी करने के लिए प्राचार्य से सात दिनों का समय लिया है।
इंटरनल परीक्षा को लेकर क्या मामला सामने आया?
अखबार में प्रकाशित खबर के अनुसार, कॉलेजों में स्नातक की इंटरनल परीक्षाओं के दौरान परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ जगहों पर छात्रों द्वारा परीक्षा के दौरान नकल करने और वीडियो बनाकर वायरल करने के मामले सामने आए।
बताया गया है कि कुछ शिक्षकों ने मूल्यांकन के दौरान छात्रों से कॉपी में उत्तर लिखवाने में मदद की। इसके अलावा कुछ कॉलेजों में इंटरनल परीक्षा के दौरान निगरानी और परीक्षा संचालन की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
रिपोर्ट में यह दावा भी किया गया है कि पिछले कुछ महीनों में ऐसे कई मामले सामने आए, लेकिन कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
रिपोर्ट में बताए गए प्रमुख आरोप
- परीक्षा के दौरान छात्रों के पास मोबाइल फोन, चिट और किताबें होने की बात सामने आई।
- कुछ छात्रों द्वारा मोबाइल से उत्तर लिखने के वीडियो वायरल होने का उल्लेख किया गया।
- कुछ मामलों में छात्रों को नकल करते हुए पकड़े जाने की बात कही गई।
- परीक्षा की कॉपियों और प्रश्नपत्रों की व्यवस्था कॉलेज स्तर पर होने की बात सामने आई।
- मूल्यांकन की जिम्मेदारी भी कई जगह कॉलेज के शिक्षकों को दिए जाने का उल्लेख है।
- कुछ शिक्षकों पर छात्रों को उत्तर लिखने में मदद करने के आरोप लगाए गए।
- रिपोर्ट में इंटरनल परीक्षा के मूल्यांकन और निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
हालांकि, किसी एक कॉलेज में सामने आए आरोप को सभी विश्वविद्यालयों और सभी कॉलेजों की व्यवस्था पर लागू नहीं किया जा सकता। संबंधित विश्वविद्यालय और कॉलेज के आधिकारिक नियम ही अंतिम माने जाएंगे।
इंटरनल परीक्षा क्या होती है?
इंटरनल परीक्षा को Internal Examination, Internal Assessment या Continuous Internal Assessment (CIA) भी कहा जाता है।
यह विश्वविद्यालय की मुख्य End Semester/External परीक्षा से अलग होती है। इसका उद्देश्य पूरे सेमेस्टर के दौरान छात्र की पढ़ाई, कक्षा में प्रदर्शन, असाइनमेंट, टेस्ट, प्रेजेंटेशन और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों का मूल्यांकन करना होता है।
कई विश्वविद्यालयों में इंटरनल असेसमेंट के लिए अलग से परीक्षा या टेस्ट कराया जाता है। इसके अलावा असाइनमेंट, उपस्थिति, सेमिनार, प्रोजेक्ट आदि को भी आंतरिक मूल्यांकन का हिस्सा बनाया जा सकता है।
इंटरनल परीक्षा कितने नंबर की होती है?
यह सबसे महत्वपूर्ण सवाल है। इंटरनल परीक्षा के अंक सभी विश्वविद्यालयों में बिल्कुल समान नहीं होते। यह संबंधित विश्वविद्यालय के परीक्षा नियम, पाठ्यक्रम और विषय के अनुसार निर्धारित होता है।
हालांकि, बिहार के कई विश्वविद्यालयों के UG CBCS/FYUGP पैटर्न में 30 अंक Internal Assessment और 70 अंक End Semester Examination का पैटर्न देखने को मिलता है।
उदाहरण के लिए, BRABU के UG पाठ्यक्रम में कई विषयों के लिए CIA 30 अंक और End Semester Examination 70 अंक निर्धारित हैं।
इसी तरह Patliputra University के FYUG पाठ्यक्रम में भी Continuous Internal Assessment 30 अंक और End Semester Examination 70 अंक का प्रावधान दिया गया है।
सामान्य 100 अंकों का पैटर्न
| मूल्यांकन | अंक |
|---|---|
| Internal Assessment / Internal Exam | 30 अंक |
| End Semester Examination | 70 अंक |
| कुल | 100 अंक |
महत्वपूर्ण: प्रत्येक विश्वविद्यालय और पाठ्यक्रम का नियम अलग हो सकता है। इसलिए अपने विश्वविद्यालय के नवीनतम syllabus/ordinance/official notice को जरूर देखें।
इंटरनल के 30 नंबर कैसे मिलते हैं?
यह जरूरी नहीं कि पूरे 30 अंक केवल एक लिखित परीक्षा से मिलें। विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित व्यवस्था के अनुसार अलग-अलग गतिविधियों को इसमें शामिल किया जा सकता है।
उदाहरण के तौर पर इंटरनल मूल्यांकन में निम्न चीजें शामिल हो सकती हैं:-
- Internal Test
- Class Test
- Assignment
- Seminar/Presentation
- Project Work
- Classroom Performance
- Attendance
- Practical/Record Work, जहां लागू हो
हालांकि इन सभी के लिए अंक-वितरण हर विश्वविद्यालय में एक जैसा नहीं होता।
कुछ विश्वविद्यालयों के नियमों में Internal Assessment को टेस्ट, असाइनमेंट, सेमिनार और उपस्थिति जैसे अलग-अलग घटकों में बांटा गया है।
क्या इंटरनल परीक्षा में भी मोबाइल ले जा सकते हैं?
नहीं। अगर कॉलेज/विश्वविद्यालय ने परीक्षा कक्ष में मोबाइल फोन, किताब, चिट या अन्य अनधिकृत सामग्री प्रतिबंधित की है, तो छात्र को इन्हें परीक्षा हॉल में नहीं ले जाना चाहिए।
इंटरनल परीक्षा होने के बावजूद यह परीक्षा का ही हिस्सा है। केवल इसलिए कि परीक्षा कॉलेज स्तर पर आयोजित हो रही है, परीक्षा में नकल करने या मोबाइल का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं मिल जाती।
छात्रों को हमेशा कॉलेज द्वारा जारी परीक्षा निर्देशों का पालन करना चाहिए।
अगर मोबाइल से उत्तर लिखते पकड़े गए तो क्या होगा?
कार्रवाई संबंधित विश्वविद्यालय/कॉलेज के परीक्षा नियमों पर निर्भर करेगी। संभावित कार्रवाई में:-
- नकल का मामला दर्ज किया जा सकता है।
- परीक्षा की कॉपी जब्त की जा सकती है।
- संबंधित परीक्षा को निरस्त किया जा सकता है।
- छात्र से स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है।
- विश्वविद्यालय के नियम के अनुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है।
इसलिए विद्यार्थियों को इंटरनल परीक्षा को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
इंटरनल परीक्षा इतनी महत्वपूर्ण क्यों है?
इंटरनल के अंक आपके सेमेस्टर के कुल परिणाम में जुड़ते हैं। उदाहरण के लिए, यदि किसी पेपर में 30 अंक Internal और 70 अंक End Semester परीक्षा के हैं और किसी छात्र को इंटरनल में 25 अंक मिलते हैं तथा मुख्य परीक्षा में 50 अंक मिलते हैं, तो कुल अंक:- 25 + 50 = 75/100 होंगे।
इसलिए इंटरनल में अच्छे अंक प्राप्त करना कुल स्कोर और ग्रेड सुधारने में काफी मदद कर सकता है।
क्या इंटरनल में कम अंक आने से नुकसान हो सकता है?
हां। क्योंकि इंटरनल के अंक अंतिम परिणाम में शामिल होते हैं।
उदाहरण के लिए:-
| Internal | External | कुल अंक |
| 28/30 | 55/70 | 83/100 |
| 25/30 | 50/70 | 75/100 |
| 20/30 | 45/70 | 65/100 |
| 15/30 | 40/70 | 55/100 |
| 10/30 | 40/70 | 50/100 |
इंटरनल परीक्षा में छात्रों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
छात्रों को इंटरनल परीक्षा को भी मुख्य परीक्षा की तरह गंभीरता से लेना चाहिए।
1. समय पर कॉलेज पहुंचें
परीक्षा शुरू होने से पहले कॉलेज पहुंचें और अपने परीक्षा कक्ष की जानकारी पहले ही प्राप्त कर लें।
2. मोबाइल फोन न ले जाएं
यदि कॉलेज ने मोबाइल प्रतिबंधित किया है तो मोबाइल लेकर परीक्षा कक्ष में बिल्कुल न जाएं।
3. किताब और चिट से बचें
परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की अनधिकृत सामग्री का इस्तेमाल न करें।
4. असाइनमेंट समय पर जमा करें
यदि इंटरनल में असाइनमेंट के अंक शामिल हैं तो उसे निर्धारित समय पर जमा करें।
5. उपस्थिति बनाए रखें
जहां Internal Assessment में Attendance के अंक निर्धारित हैं, वहां नियमित कक्षा में उपस्थित रहना फायदेमंद रहेगा।
6. शिक्षक द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करें
हर विश्वविद्यालय/कॉलेज की Internal Assessment प्रक्रिया अलग हो सकती है। इसलिए कॉलेज द्वारा जारी सूचना को ध्यान से पढ़ें।
क्या इंटरनल के अंक रिजल्ट में जुड़ते हैं?
हां। जिन पाठ्यक्रमों में Internal Assessment निर्धारित है, वहां इसके अंक अंतिम परिणाम में शामिल किए जाते हैं।
उदाहरण के लिए 30+70 पैटर्न में:-
Internal Assessment (30) + End Semester Examination (70) = कुल 100 अंक
BRABU और Patliputra University के उपलब्ध UG पाठ्यक्रम दस्तावेजों में 30+70 का ऐसा पैटर्न दिया गया है।
निष्कर्ष
स्नातक की इंटरनल परीक्षा केवल औपचारिकता नहीं है। यह छात्र के सेमेस्टर के कुल प्रदर्शन का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। कई UG पाठ्यक्रमों में 100 अंकों के पेपर में 30 अंक Internal Assessment और 70 अंक End Semester Examination के होते हैं, लेकिन अंतिम अंक-वितरण संबंधित विश्वविद्यालय के नियमों पर निर्भर करता है।
जहां तक हाल में सामने आए मोबाइल, किताब और नकल से जुड़े मामलों का सवाल है, ये परीक्षा व्यवस्था और मूल्यांकन की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। विद्यार्थियों को भी यह समझना चाहिए कि इंटरनल परीक्षा में नकल करके अंक प्राप्त करने की कोशिश आगे चलकर परेशानी का कारण बन सकती है।
इसलिए छात्रों के लिए सबसे बेहतर तरीका यही है कि इंटरनल परीक्षा ईमानदारी से दें, असाइनमेंट समय पर पूरा करें, कक्षा में नियमित रहें और विश्वविद्यालय के परीक्षा नियमों का पालन करें।
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