IAS बनने के लिए ऐसे करें तैयारी- कम उम्र में बन जाएंगे DM

By: arcarrierpoint

On: Thursday, February 12, 2026 8:15 PM

IAS बनने के लिए ऐसे करें तैयारी- कम उम्र में बन जाएंगे DM
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IAS बनने के लिए ऐसे करें तैयारी- कम उम्र में बन जाएंगे DM:-UPSC में सफलता उम्र से नहीं, attempt quality + conceptual maturity + consistency से तय होती है। जो अभ्यर्थी 18–21 की उम्र से सही दिशा में पढ़ाई शुरू कर देता है, वह 22–24 में चयन तक पहुँच सकता है — क्योंकि उसका बेसिक स्ट्रॉन्ग होता है।

संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) हर साल भारतीय सिविल सेवा परीक्षा आयोजित करता है। यह परीक्षा सिर्फ अभ्यर्थियों के ज्ञान और व्यक्तित्व का ही नहीं बल्कि उनके धैर्य, साहस और जुझारूपन का भी परीक्षण करती है। इस परीक्षा का पहला चरण प्रारंभिक परीक्षा है। इसे यूपीएससी प्रीलिम्स के नाम से भी जाना जाता है। यह परीक्षा 24 मई 2026 को प्रस्तावित है।

परीक्षा के लिए कड़ी मेहनत के साथ-साथ सही कार्य योजना की भी आवश्यकता होती है। सामान्य अध्ययन (जीएस) पर अपनी पकड़ मजबूत बनाकर आप इस परीक्षा में सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

प्रारंभिक परीक्षा को क्लियर करने के लिए उसका पाठ्यक्रम और परीक्षा पैटर्न समझना आवश्यक होता है। यह आपके सफलता की राह को आसान कर देती है, क्योंकि इससे यह पता चल जाता है कि आपको क्या पड़ना है और कितना पड़‌ना है। प्रत्येक विषय की तैयारी के लिए विशिष्ट रणनीतियों की जरूरत होती है। विषयवार तैयारी की युक्तियां इस प्रकार हैं….

परीक्षा में इस विषय का उद्देश्य उम्मीदवारों के सामान्य अध्ययन का टेस्ट करना होता है। यह प्रश्न पत्र 200 अंक का होता है, जिसमें 100 प्रश्न पूछे जाएंगे। इसके लिए समसामयिक घटनाक्रम, इतिहास, भूगोल, भारतीय राजनीति, पर्यावरण और पारिस्थितिकी, कला एवं संस्कृति, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, अर्थशास्त्र एवं सामाजिक विकास, सरकारी योजनाओं और हालिया घटनाक्रमों पर ध्यान दें।

यह प्रश्न पत्र भी प्रारंभिक परीक्षा का हिस्सा है। यह प्रश्न पत्र आपकी योग्यता, तार्किक समझ और निर्णय लेने के कौशल का आकलन करने पर केंद्रित है। यह पेपर 200 अंक का होता है, जिसमें 100 प्रश्न पूछे जाएंगे। इस प्रश्न पत्र में न्यूनतम 33% अंक प्राप्त करना अनिवार्य है।

  1. प्रारंभिक परीक्षा में दो पेपर होंगे। सभी प्रश्न बहुविकल्पीय प्रकार के होंगे। सामान्य अध्ययन-1 प्रश्न पत्र 200 अंक का होगा, जिसमें 100 प्रश्न होंगे।
  2. सामान्य अध्ययन-2 (सीएसएटी) प्रश्न पत्र भी 200 अंक का होगा, जिसमें 80 प्रश्न होंगे।
  3. दोनों प्रश्न पत्रों की परीक्षा अवधि दो-दो घंटे होगी। दोनों प्रश्न पत्रों में गलत उत्तर पर एक तिहाई अंक की कटौती होगी।
  4. प्रारंभिक परीक्षा की कट-ऑफ सामान्य अध्ययन-1 के आधार पर होगी। सामान्य अध्ययन-2 क्वालीफाइंग होगा।
  5. प्रारंभिक चरण के अंक अंतिम मेरिट सूची में नहीं जुड़ेंगे। मुख्य परीक्षा में नौ प्रश्न-पत्र होंगे। इनमें पूछे जाने वाले सभी प्रश्न निबंधात्मक (विस्तृत उत्तर वाले) होंगे।
  6. पहले दो प्रश्न-पत्र (पेपर-ए और-बी) भाषा से जुड़े होंगे।
  7. पेपर-ए के तहत 8वीं अनुसूची में शामिल किसी एक भाषा का चयन करना होगा। पेपर-वी अंग्रेजी भाषा का होगा।
  8. दोनों के लिए 300-300 अंक निर्धारित हैं। इनका स्तर 10वीं कक्षा के पाठ्यक्रम के अनुरूप होगा।
  9. ये दोनों पेपर क्वालिफाइंग होंगे। इनके अंक मेरिट में नहीं जुड़ेंगे। शेष सातों पेपर 250-250 अंक के होंगे।
  10. साक्षात्कार के लिए 275 अंक निर्धारित हैं।

प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार के आधार पर योग्य उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व को सामयिक घटनाएं, भारत का इतिहास और भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन, भारत एवं विश्व भूगोल (भारत एवं विश्वका प्राकृतिक, सामाजिक, आर्थिक भूगोल), भारतीय राज्य तंत्र और शासन (संविधान, राजनीतिक प्रणाली, पंचायतीराज, लोक नीति, अधिकारों संबंधी मुद्दे आदि), आर्थिक और सामाजिक विकास (सतत विकास, गरीबी, समावेश जनसांख्यिकी, सामाजिक क्षेत्र में की गई पहल आदि), पर्यावरण पारिस्थितिकी।

बोध गम्यता, संचार कौशल सहित अंतर वैयक्तिक कौशल, तार्किक कौशल एवं विश्लेषणात्मक क्षमता, निर्णय लेना, समस्या समाधान, सामान्य मानसिक योग्यता, आधाभूत संख्यनन (संख्या और उनके संबंध, विस्तार क्रम आदि), आंकड़ों का निर्वचन (चार्ट, ग्राफ, तालिका, आंकड़ों की पर्याप्तता आदि)

तीन महीनों को साप्ताहिक और दैनिक कार्यक्रम में विभाजित करें। प्रत्येक विषय और पुनरीक्षण के लिए समय स्लॉट आवंटित करें। अपनी तैयारी को अधिकतम करने के लिए उच्च महत्व वाले विषयों पर ध्यान केंद्रित करें। इतिहास, भूगोल और राजनीति जैसे विषयों में ठोस आधार के लिए एनसीईआरटी की पुस्तकें पढ़ें। पाठ्यक्रम को अच्छी तरह से समहों और प्रत्येक विषय के प्रमुख टॉपिक की पहचान करें।

प्रीलिम्स का सिलेबस काफी बड़ा और बिखरा होता है। कवरेज से अधिक महत्वपूर्ण संपूर्ण सिलेबस को रिवाइज करना है, इसलिए रिवीजन उचित और समयबद्ध होना चाहिए। सिलेबस के कवरेज और कवर किए गए हिस्से के रिवीजन में एक अच्छा संतुलन चना होना चाहिए। रिवीजन करने से अभ्यर्थी भूले हुए टॉपिक्स भी ध्यान कर लेते हैं और अपनी तैयारी को औरों से बेहतर कर लेते हैं।

बिना उचित नोट्स बनाए सिलेबस को गुणवत्ता के साथ कवर नहीं किया जा सकता है। नोट्स एक उचित प्रारूप में बनाए जाने चाहिए ताकि उम्मीदवारों के लिए इसे याद रखना और पुनः प्रस्तुत करना आसान हो। नोट्स भारी न हो, इसलिए नोट्स का उद्देश्य हमेशा ध्यान में रखना चाहिए।

पिछले वर्ष के पेपर तैयारी के लिए रडार की तरह होने चाहिए जो आपकी तैयारी को दिशा प्रदान करते हैं। आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ाने के अलावा पिछले वर्ष के पेपर आपके मानसिक दृष्टिकोण को बनाने में मदद करते हैं। यह आपके विकल्पों को खत्म करने में भी आपकी मदद करता है।

परीक्षाकी तैयारी के स्तर का मूल्यांकन करने में मॉक टेस्ट काफी मदद करते हैं। सिलेबस को कवर करने के बाद मॉक टेस्ट का प्रैक्टिस किया जाना चाहिए। अपने प्रदर्शन का विश्लेषण करें और सुधार के लिए कमजोर क्षेत्रों की पहचान करें। मॉक टेस्ट के बाद विश्लेषण एक जरूरी अभ्यास है।

  1. आंसर शीट मिलने के बाद उसमें दिए गए निर्देशों को ध्यान से पढ़ लें। नियत स्थान पर अपना अनुक्रमांक, हस्ताक्षर ताथ अन्य सुचनाओं को अंकित कर दें।
  2. प्रश्न पत्र मिलते ही प्रश्नों को हल करना शुरू न करें बल्कि उसके महत्वपूर्ण निर्देशों को पढ़ें। संभव है कि उन निर्देशों में कोई महत्त्वपूर्ण सूचना मिल जाए।
  3. संपूर्ण प्रश्नपत्र को एक बार सरसरी निगाह से देखने के बाद पुनः समय व्यवस्थित करें जिससे प्रश्नपत्र पूरा करने में समय कम न पड़े।
  4. पहले आसान या अपने पसंदीदा खंड से संबंधित प्रश्नों की
    ही हल करें, इससे आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा।
  5. जिन प्रश्नों को हल नहीं कर पाते हैं उन्हें टिक मार्क कर छोड़ दें। बचे हुए समय में उन्हें हल करने का प्रयास करें।
  6. उत्तर की समीक्षा करने और त्रुटियों को ठीक करने के लिए बाद में अपना कुछ समय बचाकर रखें।
  7. दिमाग में जो जवाब पहले आता है उसे तब तक न बदलै जब तक कि आप को यकीन न हो जाए कि वह गलत है।
  8. ओएमआर शीट पर गलत गोला भर जाने पर उत्तर को मिटाने के लिए रबर, ब्लेड या फ्लूड का इस्तेमाल न करें।
  9. अटेंडेंस शीट पर अपने हस्ताक्षर करें तथा अपने आंसर शीट पर निरीक्षक के हस्ताक्षर अवश्य करवाएं।
  10. प्रथम प्रश्नपत्र की समाप्ति के पश्चात प्रश्नों को लेकर माथापची न करें। अगले पेपर की तैयारी में जुट जाएं।

परीक्षा की चिंता के वशीभूत होकर परीक्षा प्रदर्शन को कम या खराब कर लेना सफल छात्रों का लक्षण कदापि नहीं हो सकता है। दबाव से निपटने तथा परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के लिये आशावादी चिंतन, सकारात्मक अभिवृत्ति, संतुलित आहार, व्यायाम, योग तथा पूरी नींद लेना आदि जरूरी हैं। परीक्षा से एक दिन पहले उन्हें अनावश्यक तनाव के बजाय सकारात्मक सोच बनाए रखनी चाहिए।

सिविल सेवा परीक्षा के लिए पढ़ाई की कोई सीमा तय नहीं है। अतः कोई भी पढ़ाई इस लिहाज से अंतिम या परिपूर्ण नहीं हो सकती है। इसलिए अभ्यर्थियों को समझना चाहिए कि परीक्षा से एक दिन पहले अत्यधिक पढ़ाई करने की बजाय अगले दिन होने वाली परीक्षा के 2 घंटे में क्या रणनीति हो. उस पर गंभीरता से विचार करें।

  1. 5 से 7 घंटे की नींद लेने के बाद परीक्षा वाले दिन प्रातः 5-6 बजे तक उठ जाना चाहिए।
  2. स्नान आदि के बाद अच्छा और सुपाच्य नाश्ता करें। परीक्षा उपयोगी समस्त सामग्रियों और संक्षिप्त नोट्स को व्यवस्थित कर ते।
  3. परीक्षा केंद्र में नियत समय से आधा घंटा पहले पहुंचना सुनिश्चित करें। समय हो तो संक्षिप्त नोट्स को सरसरी नजर से देख ले।
  4. परीक्षा कक्ष में यदि जरा भी तनाव महसूस हो तो पानी पीये और गहरी सांस लें। नकारात्मक विचारों को अपने ऊपर हावी न होने दें।
  5. खुद पर भरोसा रखें। पूर्ण आशावादी रहते हुए प्रसन्नता के साथ प्रश्नपत्र को हल करें।
  1. परीक्षा भवन में हर परीक्षार्थी की अपनी रणनीति होती है, लेकिन अनुभव की कमी (नए परीक्षार्थी) एवं बार-बार गलती दोहराने की प्रवृत्ति (पुराने परीक्षार्थी) के बलते अधिकांश परीक्षार्थी अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं। प्रारंभिक परीक्षा में सारा दारोमदार पेपर 1 यानी सामान्य अध्ययन पर होता है। मेरिट लिस्ट सामान्य अध्ययन वाले प्रश्नपत्र के आधार पर ही बननी है, इसलिए पेपर-1 में क्या और कैसे करना है, इस पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।
  2. सीसैट प्रश्नपत्र को क्वालीफाइंग बना दिए जाने के बावजूद हर वर्ष हजारों की संख्या में छात्र असफल हो जाते हैं, इसलिए इस क्वालीफाइंग पेपर को अभ्यर्थियों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। अतः परीक्षार्थियों को यह सलाह दी जाती है कि परीक्षा भवन में प्रवेश करने से पहले सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के द्वितीय प्रश्नपत्र (सीसैट) के लिये भी एक मुकम्मल रणनीति बनाकर ही जाए।
  3. पेपर-1 यानी सामान्य अध्ययन की परीक्षा अवधि में समय-प्रबंधन की है। वैसे तो समय-प्रबंधन जीवन के हर क्षेत्र में इंसान की बेहतरी के लिए आवश्यक है। चूँकि ‘परीक्षा’ निश्चित समय-सीमा में अपने ज्ञान कौशल के प्रदर्शन का ही दूसरा नाम है, इसलिये समय प्रबंधन परीक्षा का अनिवार्य पहलू है।

NCERT → Standard Books → PYQ → Revision → Writing → Test

यही रास्ता है जिससे 22–24 साल में IAS बनना संभव होता है।

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