आज से खरमास शुरू- डेढ महीने नहीं होगा मांगलिक कार्य:-आज से खरमास (मलमास) की शुरुआत हो गई है। हिंदू पंचांग के अनुसार खरमास की अवधि में विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, नामकरण, यज्ञोपवीत जैसे सभी मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं। यह अवधि लगभग डेढ़ महीने तक रहती है।
आज से खरमास शुरू, डेढ़ महीने के लिए मांगलिक कार्यों पर रोक
पौष कृष्ण प्रतिपदा में मंगलवार 16 दिसंबर से खरमास शुरू हो रहा है। इसके साथ ही हिन्दुओं के सभी तरह के मांगलिक व शुभ कार्यों पर करीब डेढ़ महीने तक रोक लग जाएगी। इस बार आठ साल बाद खरमास के दौरान शुक्र ग्रह के अस्त होने से डेढ़ महीने के बाद शादी-विवाह, गृहप्रवेश व अन्य शुभ एवं मांगलिक कार्य शुरू होंगे।
8 साल बाद ऐसा संयोग, खरमास के दौरान अस्त रहेगा शुक्र तारा और 31 जनवरी को उदय होगा, इसलिए 1 फरवरी से फिर शुरू होंगे लग्न
इस दौरान केवल बसंत पंचमी के दिन 23 जनवरी को अबूझ मुहूर्त होने से इस दिन सगाई, व्यापार आरंभ, विशेष वस्तुओं की खरीदारी आदि हो सकती है। 16 दिसंबर मंगलवार की दोपहर 1.24 बजे सूर्य धनु राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के धनु राशि में गोचर से खरमास आरंभ हो जाएगा। फिर नए साल में माघ कृष्ण एकादशी 14 जनवरी बुधवार की रात्रि 9.19 बजे सूर्य का मकर राशि में प्रवेश होने के बाद खरमास समाप्त हो जाएगा। 14 जनवरी को ही मकर संक्रांति मनाई जाएगी।
14 जनवरी को मकर संक्रांति और 23 को मनाई जाएगी बसंत पंचमी
सूर्य के राशि परिवर्तन से बदलेगा मौसम
ज्योतिषाचार्य राकेश झा के अनुसार सूर्य के राशि परिवर्तन करने से ऋतु परिवर्तन भी होगा। खरमास के दौरान हेमंत ऋतु रहेगी, लेकिन सूर्य जब धनु राशि में प्रवेश करेंगे तो उस दिन से दिन छोटे और रातें बड़ी होने लगेगी। मकर संक्रांति से दिन बड़े होने शुरू हो जाएंगे। इस दिन सूर्य उत्तरायण हो जाएंगे। लेकिन, इस बार शुक्र तारा 31 जनवरी को उदय होगा, इसलिए शादी-विवाह के लग्न 1 फरवरी से शुरू होंगे। खरमास के दौरान दान-पुण्य, भागवत कथा, ग्रंथों का पाठ, मंत्रों का जाप अौर रामायण पाठ आदि कर सकते हैं। खरमास में मंत्र जप, दान, पवित्र नदी में स्नान और तीर्थ दर्शन करने की परंपरा है।
खरमास की पौराणिक कथा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान सूर्यदेव सात घोड़ों के रथ पर सवार होकर लगातार ब्रह्मांड की परिक्रमा करता है। सूर्यदेव को कहीं भी रुकने की इजाजत नहीं है, लेकिन रथ से जुड़े घोड़े लगातार चलने से थक जाते हैं। घोड़ों की हालत देखकर सूर्यदेव का मन द्रवित हो गया और वे घोड़ों को तालाब के किनारे ले गए, तभी उन्हें एहसास हुआ कि अगर रथ रुका तो अनर्थ हो जाएगा। तालाब के पास दो खर यानि गधों को रथ में जोत लिया। गधे सूर्यदेव का रथ खींचने में पूरी तरह समर्थ नहीं हो पा रहे थे। इससे उनके रथ की चाल धीमी हो गई। फिर भी सूर्यदेव ने जैसे-तैसे इस एक माह के चक्र को पूरा किया। घोड़ों को विश्राम करने के बाद सूर्य का रथ फिर अपनी गति में लौट आया। इस तरह प्रत्येक वर्ष यह क्रम चलता रहता है। इसी से हर साल खरमास लगता है।
सूर्य का राशि परिवर्तन समय काल
- सूर्य का धनु राशि में प्रवेशः- मंगलवार 16 दिसंबर, दोपहर 1.24 बजे
- सूर्य का धनु राशि में समयावधिः- एक माह
- सूर्य की स्थिति में परिवर्तनः- 14 जनवरी की सुबह 9.19 बजे मकर राशि में प्रवेश
- मकर संक्रांतिः- बुधवार, 14 जनवरी 2026
- पुण्यकातः- दोपहर 2.49 से शाम 5.45 बजे तक
- महापुण्यकालः- दोपहर 2.49 से दिन के 3.42 बजे तक बसंत पंचमी 23 जनवरी को
- सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्तः- सुबह 7.15 से दोपहर 12.50 बजे तक
- तिथि का आरंभः- 23
- जनवरी की सुबह:- 2.28
- बजे तिवि का समापनः- 24 जनवरी की सुबह 1.46 बजे।
निष्कर्ष
खरमास की अवधि भले ही मांगलिक कार्यों के लिए वर्जित हो, लेकिन यह समय आत्मिक शुद्धि, भक्ति और पुण्य अर्जन के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। 1 फरवरी 2026 से विवाह और अन्य शुभ कार्य पुनः शुरू हो जाएंगे।
ताज़ा धर्म–ज्योतिष समाचार, तिथि और सरकारी अपडेट पढ़ते रहने के लिए हमारे साथ जुड़े रहें।
IMPORTANT LINK
| ARATTAI CHANNEL | CLICK HERE |
| WHATSAPP CHANNEL | CLICK HERE |
| TELEGRAM CHANNEL | JOIN |
| YOU TUBE CHANNEL | SUBSCRIBE |


























