आज होलिका दहन होली चार को देखें शुभ मुहूर्त- होली खुशियों का त्योहार है, लेकिन उत्साह में की गई छोटी गलती बड़ी परेशानी बन सकती है। इसलिए त्योहार मनाने से पहले जरूरी नियम जानना बेहद आवश्यक है
आज मध्यरात्रि में होगा होलिका दहन, होली चार को
बिहार की राजधानी समेत पूरे देश में इस बार फाल्गुन पूर्णिमा का त्योहार आध्यात्मिक और खगोलीय दृष्टि से बेहद खास होने जा रहा है. ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस बार भद्रा के साये और साल के पहले व अंतिम चंद्रग्रहण के बीच त्योहारों का गणित बैठा है. सोमवार की मध्यरात्रि 12:50 बजे से 02:02 बजे के बीच में होलिका दहन होगा और रंगों का त्योहार “होली” चार मार्च (बुधवार) को मनाया जायेगा
आज रात 12:50 बजे के बाद जलेगी होलिका
सोमवार को भद्रा के पुच्छ काल में पूर्णिमा तिथि और मघा नक्षत्र के संयोग में होलिका दहन किया जायेगा. आचार्य राकेश झा के अनुसार, भद्रा के कारण दहन के समय में विशेष सावधानी बरती जा रही है. शास्त्रों के अनुसार भद्रा काल में शुभ कार्य वर्जित होते हैं, इसीलिए होलिका दहन मध्यरात्रि 12:50 बजे से 02:02 बजे के बीच भद्रा के ‘पुच्छ काल’ में संपन्न होगा. आचार्य राकेश झा के अनुसार, होलिका में आम की लकड़ी, धूप, गुगुल, धूमन, जटामशी, कर्पूर, गोबर का उपला, तिल, चंदन की लकड़ी व अन्य शुद्धता व शुभतादायी लकड़ियों का प्रयोग करना ही शास्त्र सम्मत होता है. इससे नकारात्मक ऊर्जा का हास व सकारात्मकता का प्रवाह होता है. वातावरण शुद्ध और पवित्र होता है.
शाम 05:50 से 06:46 बजे तक चंद्रग्रहण
आचार्य राकेश झा के मुताबिक फाल्गुन पूर्णिमा में तीन मार्च मंगलवार को इस साल का पहला व अंतिम चंद्रग्रहण लग रहा है, क्योंकि इसके बाद पूरे वर्ष किसी भी प्रकार का ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा. मंगलवार की शाम 05:50 बजे से 06:46 बजे तक खंडग्रास चंद्रग्रहण लग रहा है. चंद्रग्रहण का सूतक नौ घंटे पहले ही शुरू हो जाता है. इसीलिए इस ग्रहण का सूतक तीन मार्च की सुबह 8:50 बजे से ही लग जायेगा. यह ग्रहण पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र व सिंह राशि में लगेगा.
चैत्र कृष्ण प्रतिपदा में मनेगी होली
होली चैत्र कृष्ण प्रतिपदा में 4 मार्च बुधवार को दो शुभनक्षत्रों के युग्म संयोग में मनायी जायेगी. होली पर पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र व उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र का युग्म संयोग बन रहा है. इस दिन सुबह 07:27 बजे तक पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र रहेगा. फिर पूरे दिन उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र रहेगा. इसके अलावे इस दिन धृति योग भी विद्यमान रहेगा. धृति योग” ज्योतिष में सुख-समृद्धि और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है. वहीं होली के दिन ग्रहों के राजा सूर्य शतभिषा नक्षत्र व कुंभ राशि में रहेंगे
शास्त्रों के अनुसार होली में वर्जित कार्य
हिंदू धर्मग्रंथों और परंपराओं के अनुसार होली का पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। इसलिए इस दिन मर्यादा और पवित्रता बनाए रखना आवश्यक माना गया है।
1. भद्रा काल में होलिका दहन
धार्मिक मान्यता के अनुसार भद्रा काल अशुभ समय माना जाता है। इस दौरान होलिका दहन करने से नकारात्मक प्रभाव पड़ने की मान्यता है।
2. अपवित्र वस्तुएं जलाना
होलिका दहन में निम्न वस्तुएं डालना शास्त्रों में निषिद्ध है:
- रबर
- चमड़े की वस्तु
- कचरा या गंदगी
- प्लास्टिक
अग्नि को देवता माना गया है, इसलिए शुद्ध सामग्री का प्रयोग ही उचित माना जाता है।
3. नशा और अशोभनीय व्यवहार
धार्मिक दृष्टि से पूजा या पर्व के दौरान:
- शराब सेवन
- अत्यधिक भांग
- अपशब्द या झगड़ा अधर्म माना जाता है।
4. किसी को जबरदस्ती रंग लगाना
होली प्रेम और सहमति का त्योहार है। जबरदस्ती रंग लगाना धार्मिक मर्यादा के विरुद्ध माना गया है।
5. प्रकृति को नुकसान पहुंचाना
हरी लकड़ी काटकर होलिका जलाना या पेड़ों को नुकसान पहुंचाना पाप कर्म माना गया है।
कानून के अनुसार होली में प्रतिबंधित गतिविधियां
होली के दौरान प्रशासन द्वारा विशेष सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाती है। कई कार्य सीधे कानून का उल्लंघन माने जाते हैं।
1. छेड़छाड़ या बदसलूकी
महिलाओं या किसी भी व्यक्ति के साथ अभद्र व्यवहार भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत अपराध है।
2. बिना अनुमति रंग लगाना
किसी की इच्छा के विरुद्ध रंग डालना मारपीट या उत्पीड़न की श्रेणी में आ सकता है।
3. शराब पीकर वाहन चलाना
Motor Vehicles Act के अनुसार:
- भारी जुर्माना
- लाइसेंस निलंबन
- जेल तक हो सकती है।
4. केमिकल रंगों का उपयोग
हानिकारक रंगों से त्वचा या आंखों को नुकसान पहुंचाना कानूनी मामला बन सकता है।
5. सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान
सरकारी या निजी संपत्ति तोड़ना दंडनीय अपराध है।
6. तेज आवाज में DJ
निर्धारित समय सीमा के बाद लाउडस्पीकर बजाना Noise Pollution नियमों का उल्लंघन है।
7. पानी के गुब्बारे फेंकना
चलते वाहन या राहगीरों पर गुब्बारा फेंकना दुर्घटना का कारण बन सकता है।
पर्यावरण और स्वास्थ्य के अनुसार सावधानियां
आज के समय में पर्यावरण संरक्षण भी उतना ही जरूरी है।
- अत्यधिक पानी की बर्बादी
- प्लास्टिक कचरा फैलाना
- जानवरों पर रंग डालना
- रासायनिक रंगों का प्रयोग
विशेषज्ञों के अनुसार प्राकृतिक गुलाल और सूखी होली सबसे सुरक्षित मानी जाती है।
छात्रों और युवाओं के लिए जरूरी सलाह
- सोशल मीडिया स्टंट से बचें
- बाइक स्टंट या तेज ड्राइविंग न करें
- अजनबियों पर रंग न डालें
- परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों का ध्यान रखें
- जिम्मेदार नागरिक बनें
सुरक्षित और आदर्श होली कैसे मनाएं
- प्राकृतिक रंगों का उपयोग करें
- बुजुर्गों का सम्मान करें
- पहले अनुमति लेकर रंग लगाएं
- कम पानी की होली खेलें
- स्वच्छता बनाए रखें
- परिवार और समाज के साथ मिलकर त्योहार मनाएं
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इस साल दो दिन पूर्णिमा | 4 को मनेगा होली | 2 मार्च को होलिका दहन – देखें शुभ मुहूर्त


























