इस साल दो दिन पूर्णिमा | 4 को मनेगा होली | 2 मार्च को होलिका दहन – देखें शुभ मुहूर्त

By: arcarrierpoint

On: Sunday, February 22, 2026 7:08 PM

इस साल दो दिन पूर्णिमा | 4 को मनेगा होली | 2 मार्च को होलिका दहन - देखें शुभ मुहूर्त
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इस साल दो दिन पूर्णिमा | 4 को मनेगा होली | 2 मार्च को होलिका दहन – देखें शुभ मुहूर्त:-फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला होली का पर्व इस वर्ष खास संयोग लेकर आया है। इस बार पूर्णिमा दो दिन पड़ रही है, साथ ही भद्रा और ग्रहण योग का प्रभाव भी बन रहा है। इसी कारण लोगों के मन में सवाल है कि होलिका दहन कब होगा और रंगों की होली किस दिन मनाई जाएगी?

पंचांग और ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस वर्ष 2 मार्च 2026 को होलिका दहन और 4 मार्च 2026 को रंगों की होली मनाई जाएगी। आइए विस्तार से समझते हैं पूरा विषय।

फाल्गुन पूर्णिमा दो दिन होने से इस बार होलिका दहन के एक दिन बाद रंगों का त्योहार होली मनाया जाएगा। फाल्गुन की पूर्णिमा (सोमवार) 2 मार्च की शाम 5.32 बजे से शुरू होकर (मंगलवार) 3 मार्च की शाम 4:46 बजे तक रहेगी। पूर्णिमा पर इस बार भद्रा और चंद्रग्रहण का संयोग भी बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र में होलिका दहन के लिए तीन नियम बताए गए हैं। इसके लिए रात्रिकाल, पूर्णिमा तिथि व भद्रा मुक्त काल होना चाहिए।

व्रत की पूर्णिमा में सोमवार की शाम पूर्णिमा के साथ भद्रा भी शुरू हो रहा है, जो मंगलवार तक रहेगा। ऐसे में भद्रा के पुच्छ काल में सोमवार की मध्य रात्रि के बाद 12:50 बजे से 2:02 बजे के बीच होलिका दहन किया जाएगा।

सामान्यतः पूर्णिमा की रात्रि में होलिका दहन और अगले दिन प्रातःकाल रंगोत्सव (होली) मनाया जाता है, लेकिन इस बार पंचांग गणना और शास्त्रीय निर्णय के आधार पर पर्व तिथियों में आंशिक परिवर्तन है। फाल्गुन पूर्णिमा का आरंभ 2 मार्च की सायंकाल से होकर 3 मार्च की सायंकाल तक रहेगा। पूर्णिमा लगते ही भद्रा का प्रवेश हो जाएगा। धर्मशास्त्रों में भद्रा के मुखकाल में शुभ कार्य वर्जित बताए गए हैं। भद्रा के पुच्छकाल में ही होलिका दहन करना चाहिए। इसी आधार पर 2 मार्च की अर्द्धरात्रि के बाद होलिका दहन होगा। 3 मार्च को सायंकाल चंद्रग्रहण का योग है। ग्रहण से लगभग नौ घंटे पहले सूतक काल प्रारंभ हो जाएगा। इसमें शुभ और मांगलिक कार्य नहीं करना चाहिए। इसी कारण 3 मार्च को होली मनाना शास्त्रोचित नहीं है।

ज्योतिषाचार्य राकेश झा के अनुसार फाल्गुन की पूर्णिमा 3 मार्च मंगलवार को मनाई जाएगी। इस दिन सूर्योदयकालीन पूर्णिमा में कुलदेवी को सिंदूर अर्पण होगा। इस दिन शाम में 5:50 बजे से 6:46 बजे तक खंडग्रास चंद्रग्रहण भी लग रहा है। यह ग्रहण पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र व सिंह राशि में लगेगा। होली ग्रह-नक्षत्रों के शुभ संयोग में 4 मार्च को मनेगी। इस दिन सुबह 7:27 बजे तक पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र एवं इसके बाद पूरे दिन उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र का युग्म संयोग रहेगा। धृति योग भी विद्यमान होगा।

  • 2 मार्च (रात्रि):- भद्रा पुच्छकाल में होलिका दहन
  • 3 मार्च:- चंद्रग्रहण व सूतक, केवल पूजन-पाठ
  • 4 मार्च:- स्नान-शुद्धि के बाद रंगोत्सव यानी होली
  • 2020 :- 10 मार्च
  • 2021 :- 29 मार्च
  • 2022 :- 19 मार्च
  • 2023 :- 8 मार्च
  • 2024 :- 26 मार्च
  • 2025 :- 15 मार्च
  • 2026 :- 4 मार्च

हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा तिथि 2 मार्च को प्रारंभ होकर अगले दिन तक रहेगी। तिथि के विस्तार और भद्रा काल के कारण पर्व की तिथि को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है।

इस वर्ष:-

  • पूर्णिमा तिथि दो दिन तक प्रभाव में रहेगी
  • 2 मार्च को दिन में भद्रा काल रहेगा
  • शास्त्रों में भद्रा काल में होलिका दहन वर्जित माना गया है
  • इसी कारण दहन भद्रा समाप्त होने के बाद किया जाएगा

तारीख: 2 मार्च 2026 (सोमवार)
समय: रात 12:50 बजे के बाद
शर्त: भद्रा समाप्ति के बाद

धार्मिक मान्यता के अनुसार होलिका दहन सदैव भद्रा रहित समय में ही करना चाहिए। इस बार भद्रा देर रात तक रहने के कारण दहन मध्यरात्रि के बाद किया जाएगा।

यदि आपके क्षेत्र में भद्रा का समय अलग है तो स्थानीय पंचांग अवश्य देखें।

3 मार्च को पूर्णिमा तिथि का प्रभाव और ग्रहण योग का संयोग रहेगा। शास्त्रों के अनुसार ग्रहण योग के दिन उत्सव मनाना शुभ नहीं माना जाता। इसी कारण रंगों की होली 4 मार्च को मनाई जाएगी।

रंगों की होली: 4 मार्च 2026 (बुधवार)

सुबह स्नान-पूजन के बाद लोग एक-दूसरे को गुलाल लगाकर उत्सव मनाएंगे।

भद्रा काल पंचांग का एक विशेष समय होता है जिसे शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता।

धार्मिक मान्यता के अनुसार:-

  • भद्रा में विवाह, गृह प्रवेश, यज्ञ और दहन कार्य नहीं किए जाते
  • भद्रा को शनि की बहन माना गया है
  • इस काल में किए गए शुभ कार्यों का फल बाधित हो सकता है

इसी कारण होलिका दहन भद्रा समाप्ति के बाद ही किया जाता है।

होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। यह पर्व प्रह्लाद और होलिका की पौराणिक कथा से जुड़ा है।

राजा हिरण्यकश्यप स्वयं को भगवान मानता था। उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का भक्त था। क्रोधित होकर राजा ने प्रह्लाद को मारने की कई कोशिशें कीं। अंत में उसने अपनी बहन होलिका की सहायता ली, जिसे अग्नि से न जलने का वरदान था।

होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई, लेकिन भगवान की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित बच गया और होलिका जलकर भस्म हो गई।

इस घटना की स्मृति में होलिका दहन किया जाता है।

होली सिर्फ धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता का भी प्रतीक है।

  • आपसी मनमुटाव दूर करने का अवसर
  • रिश्तों में मधुरता लाने का पर्व
  • भाईचारे और प्रेम का संदेश
  • जाति-धर्म से ऊपर उठकर उत्सव

गांवों और शहरों में यह पर्व उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जाता है।

यदि आप सही तरीके से होलिका दहन करना चाहते हैं, तो यह सरल विधि अपनाएं:-

  1. पहले स्थान को साफ करें
  2. लकड़ी और उपले से होलिका सजाएं
  3. रोली, अक्षत, हल्दी, नारियल और मिठाई चढ़ाएं
  4. परिक्रमा करें
  5. भगवान से परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें
  6. भद्रा समाप्ति के बाद अग्नि प्रज्वलित करें
  • रासायनिक रंगों से बचें
  • प्राकृतिक गुलाल का उपयोग करें
  • पानी की बर्बादी न करें
  • जबरदस्ती रंग न लगाएं
  • आग से सुरक्षित दूरी बनाए रखें

ज्योतिषीय गणना के अनुसार कई वर्षों बाद ऐसा संयोग बना है जब पूर्णिमा दो दिन पड़ रही है और भद्रा का प्रभाव होली पर पड़ रहा है।

ऐसे विशेष योग में शास्त्रसम्मत निर्णय का पालन करना ही उचित माना जाता है।

इस वर्ष होली को लेकर भ्रम की स्थिति पूर्णिमा के दो दिन पड़ने और भद्रा काल के कारण बनी है।

2 मार्च 2026 को रात 12:50 बजे के बाद होलिका दहन होगा
4 मार्च 2026 को रंगों की होली मनाई जाएगी

धार्मिक नियमों और शुभ मुहूर्त का ध्यान रखते हुए ही पर्व मनाएं।

आप सभी को होली की अग्रिम शुभकामनाएं। प्रेम, सौहार्द और खुशियों के रंग आपके जीवन में हमेशा बने रहें।

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