एडमिशन रद्द हुआ तो संस्थान को लौटाना होगा पूरी फीस – बडा बदलाव

By: arcarrierpoint

On: Friday, October 23, 2026 6:04 PM

एडमिशन रद्द हुआ तो संस्थान
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एडमिशन रद्द हुआ तो संस्थान को लौटाना होगा पूरी फीस – कॉलेज में दाखिला लेने के बाद अग्र छात्र एडमिशन रद्द करता है या दूसरे संस्थान में जाता है, तो उसकी फीस लौटाने में आनाकानी अब उच्च शिक्षण संस्थानों को भारी पड़ सकती है। यूजीसी ने फीस वापसी के नियमों का पालन नहीं करने वाले विश्वविद्यालयों और संबद्ध कॉलेजों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने इस मामले में राज्यपाल सह कुलाधिपति के स्तर से हस्तक्षेप का अनुरोध किया है।

यूजीसी ने कुलाधिपति सहित सभी राज्यों के प्रमुख सचिव और उच्च शिक्षा सचिव को भी पत्र भेजकर नियमों का पालन सुनिश्चित कराने का अनुरोध किया है। आयोग के मुताबिक, बार-बार निर्देश जारी करने और दूरभाष पर संपर्क करने के बावजूद कई उच्च शिक्षण संस्थान फीस वापसी की निर्धारित नीति का पालन नहीं कर रहे हैं। इससे छात्रों को आर्थिक नुकसान उठाने के साथ मानसिक परेशानी भी झेलनी पड़ रही है। यूजीसी ने संबंधित पत्र के साथ फीस वापसी से प्रभावित छात्रों का विवरण और नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों की सूची भी भेजी है। आयोग इससे पहले 17 दिसंबर 2020, जुलाई 2021, 2 अगस्त 2022, 3 जुलाई 2023, 9 फरवरी 2024 और 12 जून 2024 को दिशा-निर्देश जारी कर चुका है।

इसके बाद 3 जुलाई 2025 को भी इस संबंध में कार्यालय पत्र भेजा गया था। इसके बावजूद शिकायतें मिलने का सिलसिला जारी है। यूजीसी की निर्धारित फीस वापसी नीति में दाखिले की अंतिम तिथि और छात्र की ओर से दाखिला रद्द करने की सूचना देने के बीच के समय को आधार बनाया गया है। इसी के अनुसार फीस वापसी की राशि तय होगी। निर्धारित समय-सीमा के भीतर दाखिला रद्द करने या संस्थान बदलने के मामलों में संस्थान अधिकतम एक हजार रुपए प्रोसेसिंग शुल्क के रूप में काट सकते हैं। यूजीसी ने स्पष्ट किया है कि फीस लौटाने में देरी या मना करना महज प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि छात्र की शिकायत है। यूजीसी के छात्र शिकायत निवारण विनियम, 2023 में इसे शिकायत की श्रेणी में शामिल किया गया है।

  • 100% वापसी : दाखिले की या अंतिम अधिसूचित तिथि से 15 दिन उससे अधिक पहले सूचना देने पर।
  • 90% वापसी अंतिम तिथि से 15 दिन से कम पहले सूचना देने पर।
  • 80% वापसी अंतिम तिथि के बाद 15 दिन या उससे कम के भीतर सूचना देने पर।
  • 50% वापसी : अंतिम तिथि के 16 से 30 दिन के भीतर सूचना देने पर।
  • फीस वापसी नहीं: अंतिम तिथि के 30 दिन से अधिक समय बाद पर।

तीन वर्षीय च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) के तहत स्नातक कर रहे छात्र-छात्राओं के लिए चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम में शामिल होने का रास्ता खुल गया है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। इसके अनुसार, जो छात्र पहले से तीन वर्षीय सीबीसीएस स्नातक पाठ्यक्रम में नामांकित हैं, वे एक साल का अतिरिक्त ब्रिज कोर्स कर 4 वर्षीय ऑनर्स डिग्री हासिल कर सकेंगे। इस फैसले से विद्यार्थियों को 1 वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएशन (पीजी) और सीधे पीएचडी में दाखिले की पात्रता जैसे उच्च शिक्षा के कई नए विकल्प मिलेंगे। हालांकि, इसके लिए संबंधित विश्वविद्यालय को इस व्यवस्था को लागू करना होगा। लेकिन, पटना विश्वविद्यालय और पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय में ये प्रावधान लागू नहीं हैं। इसके पीछे पुराने कोर्स और नए कोर्स में अंतर होना बताया जा रहा है।

पीयू में सत्र 2023 से चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम लागू है, लेकिन पुराने सीबीसीएस छात्रों के लिए ब्रिज कोर्स शुरू नहीं किया गया है। वहीं, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय (पीपीयू) में पहले सीबीसीएस की जगह वार्षिक परीक्षा प्रणाली लागू थी, जिससे वहां के छात्र सीधे इस दायरे में नहीं आ पाते। पीयू के रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेल के निदेशक प्रो. बीरेंद्र प्रसाद के अनुसार, पुराने सीबीसीएस और नए एनईपी कोर्स की संरचना में काफी अंतर है। इसे लागू करने के लिए पहले विवि एकेडमिक काउंसिल से प्रस्ताव पास कराना होगा, फिर लोकभवन से मंजूरी लेनी होगी।

राज्यभर के विश्वविद्यालयों में स्नातक के लिए राजभवन द्वारा यूनिफॉर्म सिस्टम लागू किया गया है। कोई भी विवि इसे अपने स्तर पर अकेले लागू नहीं कर सकता। जब तक लोकभवन पूरे राज्य में इसे एक समान रूप से लागू करने की अधिसूचना जारी नहीं करता, तब तक स्थानीय छात्रों को इसका सीधा लाभ नहीं मिलेगा।

  • उच्च शिक्षा में सीधे बढ़त 4 साल की स्नातक डिग्री पूरी करने के बाद विद्यार्थी केवल 1 साल में पीजी कर सकेंगे। इसके अलावा, निर्धारित पात्रता अंक प्राप्त करने वाले छात्र सीधे पीएचडी प्रवेश के लिए आवेदन के योग्य हो जाएंगे।
  • ऑनलाइन और ऑफलाइन, दोनों को मान्यता यह व्यवस्था ऑफलाइन रेगुलर मोड के साथ-साथ मान्यता प्राप्त ऑनलाइन और डिस्टेंस लर्निंग संस्थानों के छात्रों के लिए भी लागू होगी, बशर्ते संस्थान यूजीसी के नियमों का पालन करते हों।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग देश के उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए फीस रिफंड से संबंधित दिशा-निर्देश जारी करता है। इनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निर्धारित नियमों और समय-सीमा के अंतर्गत एडमिशन वापस लेने वाले विद्यार्थियों को नियमानुसार फीस लौटाई जाए।

UGC ने 7 अक्टूबर 2026 को फीस रिफंड नीति के अनुपालन को लेकर हस्तक्षेप का अनुरोध किया था, जिसकी सूचना आयोग की वेबसाइट पर 16 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित हुई। आयोग ने बताया कि कई संस्थानों में फीस वापसी से संबंधित शिकायतें लंबित हैं। इस संबंध में राज्यपाल कार्यालयों और राज्यों के उच्च शिक्षा विभागों से उचित कदम उठाने का अनुरोध किया गया है।

ध्यान दें: यह कार्रवाई फीस रिफंड के मौजूदा नियमों को लागू कराने के लिए है। इसे ऐसा नया नियम नहीं समझना चाहिए कि हर विद्यार्थी को, किसी भी समय एडमिशन रद्द कराने पर, बिना किसी शर्त के पूरी फीस वापस मिल जाएगी। रिफंड की पात्रता संबंधित शैक्षणिक सत्र, लागू UGC दिशा-निर्देशों और एडमिशन वापस लेने की तारीख पर निर्भर करती है।

UGC की सामान्य फीस रिफंड व्यवस्था में एडमिशन वापस लेने की तारीख के आधार पर अलग-अलग प्रतिशत में फीस लौटाने का प्रावधान है। नीचे दी गई तालिका अक्टूबर 2018 की अधिसूचना में दिए गए सामान्य नियमों पर आधारित है। किसी विशेष शैक्षणिक सत्र के लिए जारी अलग निर्देश लागू हों, तो उनकी शर्तें भी देखनी होंगी।

एडमिशन वापस लेने का समयफीस रिफंड
एडमिशन की आधिकारिक अंतिम तारीख से 15 दिन या उससे अधिक पहले100%
अंतिम तारीख से 15 दिन से कम पहले90%
अंतिम तारीख के 15 दिन के भीतर80%
अंतिम तारीख के 15 दिन बाद से 30 दिन के भीतर50%
अंतिम तारीख के 30 दिन से अधिक बादसामान्य नियम के अनुसार 0%

हां, निर्धारित समय-सीमा और लागू नीति की शर्तें पूरी होने पर विद्यार्थी पूरी फीस वापस पाने के पात्र हो सकते हैं। UGC की 12 जून 2024 की फीस रिफंड नीति में शैक्षणिक सत्र 2024-25 के लिए विशेष समय-सीमा निर्धारित की गई थी।

उस नीति के अनुसार, 30 सितंबर 2024 तक एडमिशन रद्द करने या माइग्रेशन के मामलों में पूरी फीस वापसी का प्रावधान था। 31 अक्टूबर 2024 तक रिफंड में अधिकतम ₹1,000 प्रोसेसिंग फीस काटने की व्यवस्था थी। उसके बाद निर्धारित सामान्य नियम लागू किए गए थे।

ये तारीखें 2024-25 सत्र की नीति से संबंधित हैं। इन्हें 2026-27 के हर एडमिशन पर स्वतः लागू नहीं मानना चाहिए। नए सत्र में दाखिला लेने वाले विद्यार्थी अपने कॉलेज की आधिकारिक फीस रिफंड नीति और उस सत्र के लिए UGC के नवीनतम निर्देश अवश्य जांचें।

UGC पहले भी उच्च शिक्षण संस्थानों को फीस रिफंड नीति का पालन करने के निर्देश दे चुका है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ उपलब्ध नियामक शक्तियों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

संस्थान के मामले और उसकी मान्यता के प्रकार के आधार पर संभावित कार्रवाई में निम्नलिखित कदम शामिल हो सकते हैं:

  • संबंधित ऑनलाइन या डिस्टेंस लर्निंग कार्यक्रम की मान्यता या पात्रता पर कार्रवाई।
  • UGC अधिनियम की धारा 2(f) और 12(B) के अंतर्गत प्राप्त दर्जे से संबंधित कार्रवाई।
  • संस्थान को मिलने वाले अनुदान रोकने की कार्रवाई।
  • स्वायत्तता या ग्रेडेड ऑटोनॉमी का दर्जा वापस लेने अथवा नहीं देने पर विचार।
  • संस्थान के नियमों का पालन नहीं करने की जानकारी सार्वजनिक करना।
  • नियामक अधिकारों के अंतर्गत अन्य उपयुक्त कार्रवाई।

ये संभावित नियामक कदम हैं, न कि प्रत्येक शिकायत पर स्वतः लागू होने वाली सजा। कार्रवाई से पहले संबंधित नियमों के अनुसार संस्थान को अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया जा सकता है।

यह इस खबर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि किसी विद्यार्थी ने निर्धारित समय-सीमा में एडमिशन रद्द कराया है, लेकिन कॉलेज फीस वापस नहीं कर रहा है, तो वह निम्नलिखित माध्यमों से शिकायत कर सकता है।

1. सबसे पहले कॉलेज या विश्वविद्यालय में लिखित शिकायत करें

विद्यार्थी को अपने कॉलेज के एडमिशन विभाग, फीस रिफंड शाखा, प्राचार्य या रजिस्ट्रार को लिखित आवेदन देना चाहिए। आवेदन में एडमिशन रद्द करने की तारीख, जमा की गई फीस, वापस मिलने वाली राशि और अब तक हुई कार्रवाई का विवरण दें।

आवेदन जमा करने के बाद उसकी प्राप्ति रसीद, ईमेल या शिकायत संख्या सुरक्षित रखें। केवल फोन पर बात करके इंतजार करने के बजाय लिखित रिकॉर्ड रखना अधिक उपयोगी होता है।

2. Student Grievance Redressal Committee (SGRC) में शिकायत करें

UGC के Redressal of Grievances of Students Regulations, 2023 के तहत फीस रिफंड में अनुचित देरी या पात्र होने के बावजूद रिफंड से इनकार करना छात्र की शिकायत का विषय हो सकता है।

ऐसी स्थिति में संबंधित कॉलेज या विश्वविद्यालय की Student Grievance Redressal Committee (SGRC) अथवा निर्धारित ऑनलाइन शिकायत पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।

शिकायत में साफ लिखें कि आपने कब एडमिशन रद्द कराया, कितनी फीस जमा की, किस नियम के अनुसार रिफंड मांग रहे हैं और संस्थान ने अब तक क्या जवाब दिया है।

3. UGC e-Samadhan पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें

यदि संस्थान स्तर पर शिकायत का समाधान नहीं होता है, तो विद्यार्थी UGC के आधिकारिक e-Samadhan शिकायत निवारण पोर्टल का उपयोग कर सकता है। आधिकारिक लिंक: https://samadhaan.ugc.ac.in/

यह UGC का शिकायत निवारण माध्यम है। शिकायत दर्ज करते समय सही श्रेणी चुनें और फीस वापसी से संबंधित सभी जरूरी दस्तावेज अपलोड करें, जहां पोर्टल इसकी सुविधा देता है।

UGC की वेबसाइट पर e-Samadhan के लिए सामान्य पूछताछ हेल्पलाइन 1800-111-656 और तकनीकी सहायता के लिए +91-79-2326-8279 भी सूचीबद्ध हैं। पोर्टल का उपयोग करते समय नवीनतम संपर्क विवरण की पुष्टि कर लें।

4. विश्वविद्यालय के Ombudsperson के पास अपील करें

यदि कॉलेज या विश्वविद्यालय की आंतरिक शिकायत निवारण व्यवस्था से समाधान नहीं मिलता है, तो लागू नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार संबंधित विश्वविद्यालय के Ombudsperson (लोकपाल) के समक्ष अपील की जा सकती है।

Ombudsperson का विवरण संबंधित विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर देखें। UGC के नियमों के तहत संस्थानों को अपने शिकायत निवारण तंत्र और संबंधित अधिकारियों की जानकारी उपलब्ध करानी होती है।

5. यदि मामला फिर भी नहीं सुलझे तो क्या करें?

यदि विद्यार्थी के पास फीस वापसी का वैध दावा है और संबंधित शिकायत प्रक्रियाओं के बावजूद समाधान नहीं मिल रहा है, तो वह अपने मामले के अनुसार संबंधित नियामक प्राधिकरण या उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग से संपर्क करने की उपयुक्तता भी जांच सकता है। उपभोक्ता मंच का अधिकार-क्षेत्र मामले की प्रकृति और लागू कानून पर निर्भर करेगा।

यदि मामला किसी तकनीकी संस्थान का है, तो यह भी जांचें कि उस संस्थान पर AICTE के नियम लागू होते हैं या नहीं। केवल UGC को शिकायत करना ही हर प्रकार के संस्थान के लिए एकमात्र विकल्प नहीं है।

  1. एडमिशन लेटर या प्रोविजनल एडमिशन स्लिप
  2. कॉलेज में फीस जमा करने की रसीद
  3. एडमिशन कैंसिलेशन आवेदन की कॉपी
  4. कैंसिलेशन आवेदन जमा करने की रसीद या ईमेल
  5. कॉलेज आईडी कार्ड या रजिस्ट्रेशन स्लिप
  6. आधार कार्ड या अन्य वैध पहचान पत्र (यदि मांगा जाए)
  7. बैंक पासबुक के पहले पेज की कॉपी या कैंसल चेक (यदि आवश्यक हो)
  8. कॉलेज की फीस रिफंड पॉलिसी या प्रॉस्पेक्टस
  9. कॉलेज को पहले भेजी गई शिकायत की कॉपी
  10. कॉलेज के साथ हुई ईमेल या लिखित बातचीत का प्रमाण
  11. पहले दर्ज की गई शिकायत का नंबर (यदि उपलब्ध हो)
  12. दूसरे कॉलेज में एडमिशन लेने का प्रमाण (यदि लागू हो)
  • एडमिशन रद्द कराने का आवेदन समय-सीमा के भीतर दें।
  • आवेदन की तारीख और प्राप्ति का प्रमाण सुरक्षित रखें।
  • कॉलेज की फीस रिफंड नीति और संबंधित शैक्षणिक सत्र के UGC निर्देश पढ़ें।
  • संस्थान द्वारा बताई गई किसी कटौती का लिखित आधार मांगें।
  • शिकायत का समाधान न होने पर SGRC, UGC e-Samadhan और लागू अपील व्यवस्था का उपयोग करें।
  • सोशल मीडिया पर शिकायत करने के साथ-साथ आधिकारिक शिकायत दर्ज कराना न भूलें।
UGC e-Samadhan शिकायत पोर्टलCLICK HERE
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