टैब से चेहरा स्कैन कर बनेगा हाजरी – स्कूल नहीं आने वाले के घर जाएंगे शिक्षक:-शिक्षा विभाग अब स्कूलों में उपस्थिति दर्ज करने की पुरानी व्यवस्था को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की तैयारी में है। इसके तहत अब टैबलेट से छात्रों का चेहरा स्कैन कर हाज़िरी लगाई जाएगी। यह सिस्टम पूरी तरह डिजिटल होगा और फर्जी हाज़िरी की संभावना लगभग खत्म हो जाएगी। इतना ही नहीं—जो छात्र स्कूल नहीं आएंगे, उनके घर शिक्षकों की टीम जाकर वास्तविक स्थिति की जांच करेगी।
यह पहल स्कूलों में अनुशासन, उपस्थिति दर और शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
टैब से चेहरा स्कैन कर बच्चों की हाजिरी बनेगी
राज्य के सभी प्रारंभिक से उच्च माध्यमिक स्कूलों के बच्चों की उपस्थिति टैब से चेहरा स्कैन कर बनेगी। इस संबंध में बिहार शिक्षा परियोजना परिषद (बीईपी) के राज्य परियोजना निदेशक मयंक वरबड़े ने बुधवार को सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों और जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (ईई एंड एसएसए) को पत्र भेजा है।
प्रत्येक प्रमंडल में कर्मी प्रतिनियुक्त हुए
जिलों के अधिकारियों से कहा गया है कि बच्चों की उपस्थिति फेसियल रिकॉग्नाइजेशन बेस्ड ऑथेंटिकेशन सिस्टम के तहत टैबलेट के माध्यम से दर्ज कराने के लिए एजेंसी का चयन किया गया है। एजेंसी के नौ कर्मियों को इस कार्य के लिए तत्काल प्रत्येक प्रमंडल में प्रतिनियुक्त किया गया है।
ये कर्मी प्रमंडल के सभी जिलों के साथ समन्वय स्थापित कर कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।
बीईपी के एसपीडी ने डीईओ को भेजा पत्र
बीईपी के एसपीडी ने टैब के माध्यम से बच्चों की दैनिक उपस्थिति दर्ज करना सुनिश्चित करने के का निर्देश दिया है।
विद्यालयों से गायब बच्चों का घर-घर सर्वे आज से
स्कूलों से गायब बच्चों का गृहवार सर्वेक्षण 20 नवंबर से होगा। सूबे में नामांकित बच्चों में से 30 से 40% बच्चों की लगातार अनुपस्थिति से चिंता बढ़ी है। इसे लेकर 6 से 14 की उम्र वाले ही नहीं, 15 से 19 साल वाले भी चिन्हित होंगे। इसको लेकर मुजफ्फरपुर समेत सभी जिलों में 70 हजार से अधिक स्कूलों में हेल्प डेस्क बनाया जाएगा।
हेल्प डेस्क पर प्रतिनियुक्त शिक्षक संबंधित बीएलओ से मतदाता सूची लेकर घरों को चिन्हित करेंगे। विभाग ने निर्देश दिया है कि शिक्षक ऐसे बच्चों की भी खोज करेंगे जो लगातार 30 दिनों से स्कूल नहीं आ रहे हैं। 30 दिन तक लगातार स्कूल नहीं आने वाले बच्चों को छीजित माना जाएगा।
केवल स्कूल ही नहीं, बल्कि शहरी क्षेत्र में स्टेशन, बस स्टैंड, मंदिर-मस्जिद के पास के बच्चे भी चिन्हित होंगे। सभी जिलों में 20 नवंबर से 20 जनवरी तक यह प्रक्रिया चलाई जाएगी। हेल्प डेस्क पर सबसे बेहतर और युवा शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति की जाएगी।
24 बिंदुओं पर बच्चे की भरी जाएगी जानकारी
स्कूल से बाहर के चिन्हित बच्चों की 24 बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी भरी जाएगी। इसके लिए विभाग की ओर से फॉर्मेट तैयार कर भेजा गया है। मतदाता सूची के अनुसार घर-घर जाने को लेकर हर शिक्षक के बीच काम का बंटवारा किया जाएगा। इस काम में शिक्षकों के साथ ही टोला सेवकों व आंगनबाड़ी सेविका का भी सहयोग लेना है। टीम को बच्चों की पारिवारिक पृष्ठभूमि, सामाजिक स्थिति और शैक्षणिक रुचि से जुड़ी जानकारी एकत्रित करनी होगी।
नामांकित बच्चों में से 40 फीसदी की लगातार अनुपस्थिति से चिंता बढ़ी
- 6 से 14 की उम्र वाले ही नहीं, 15 से 19 साल के किशोर भी होंगे चिन्हित
- 70 हजार से अधिक स्कूलों में इसके लिए बनाया जाएगा हेल्प डेस्क
- स्टेशन, बस स्टैंड, मंदिर-मस्जिद के पास के बच्चे भी होंगे चिन्हित
- 20 जनवरी तक चलाया सभी जिलों में 20 नवंबर से जाएगा अभियान
इन बच्चों को खोजा जाना है?
- बच्चा किसी स्कूल में नामांकित नहीं है
- स्कूल में नामांकित है, लेकिन लगातार अनुपस्थित है
- प्रवासी श्रमिकों के बच्चे
- विशेष आवश्यकता वाले बच्चे
- घरेलू कार्य में लगे बच्चे
- अनाथ बच्चे
इस तरह है शिड्यूल
- स्कूल स्तर पर कोर कमेटी का गठन:-
- 20 से 25 नवंबर के बीच
- हेल्प डेस्क का गठन:-
- 26 से 28 नवंबर के बीच
- जिला समन्वयकों का प्रशिक्षण:-
- 1 दिसंबर
- मतदाता सूची के अनुसर आंकड़ा लेना:-
- 15 से 19 दिसंबर
- घर-घर जाकर खोजना:-
- 16 से 19 दिसंबर
- 24 बिन्दुओं पर जानकारी भरना:-
- 22 से 29 दिसंबर
निष्कर्ष
टैब से चेहरा स्कैन कर हाज़िरी लगाना एक आधुनिक, पारदर्शी और प्रभावी व्यवस्था है।
इससे न केवल छात्रों की उपस्थिति बढ़ेगी, बल्कि शिक्षा में अनुशासन और गुणवत्ता भी बेहतर होगी।
स्कूल नहीं आने वाले छात्रों के घर तक शिक्षक पहुंचेंगे—यह कदम बच्चों के भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधार है।
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