बन गया एनडीए सरकार – एनडीए की जीत का नंबर 200 पार हो गया। इतनी बड़ी जीत की उम्मीद संभवतः एनडीए को भी नहीं होगी। घटक दलों के तमाम बड़े नेता प्रचंड बहुमत या संख्या के रूप में 160-65 सीटों को जीतने की बात कहते रहे। तमाम एग्जिट पोल भी 200 पार के आंकड़े तक नहीं पहुंचे। लेकिन जनता ने एनडीए को 200 के पार पहुंचा दिया। महागठबंधन का सूपड़ा साफ हो गया। राजद का ‘माय’ (मुस्लिम यादव) समीकरण दरक गया। खासकर सीमांचल के मुसलमानों ने राजद से ज्यादा एआईएमआईएम पर भरोसा किया। ‘जनसुराज’ की हवा निकल गई। उसके 99 प्रतिशत प्रत्याशियों के जमानत जब्त हो गई। नीतीश रिकॉर्ड 10 वीं बार सीएम पद की शपथ लेंगे।
इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे—
- किस गठबंधन को मिली कितनी सीटें?
- किस पार्टी का वोट शेयर बढ़ा/घटा?
- कौन सी पार्टी कितनी सीटों पर लड़ी?
- परिणाम का बिहार की राजनीति पर क्या असर?
सोच से भी बड़ी जीत
रिजल्ट, कमोबेश 2010 के विधानसभा चुनाव जैसा रहा। फर्क यही कि तब जदयू सबसे बड़ी पार्टी थी। उसने 115 सीटें जीतें थी। 91 सीटें जीतकर भाजपा दूसरे नंबर पर थी। अबकी बार भाजपा सबसे बड़ी पार्टी रही। दूसरे नंबर पर जदयू है। इस बार की तरह तब भी जदयू-भाजपा साथ मिलकर लड़ी थी। जदयू ज्यादा सीटें लड़ी थी। अबकी जदयू और भाजपा बराबर सीटी (101-101) पर लड़ी। चिराग, मांझी और कुशवाहा का प्रदर्शन भी अच्छा रहा नीतीश ने लगातार नौ बार सीएम पद की शपथ ली, 10वीं की तैयारीः
नीतीश कुमार हृदय से आभार, धन्यवाद
राज्य के सभी सम्मानित मतदाताओं को मेरा नमन, हृदय से आभार एवं धन्यवाद। प्रधानमंत्री जी से मिले सहयोग के लिए उनका हृदय से आभार एवं धन्यवाद
हार-जीत के 10 कारण
एनडीए की जीत के कारण
- जीविका दीदीः चुनाव से पहले जीविका दीदियों को 10-10 हजार मिले। नौकरी-रोजगार, 125 यूनिट फ्री बिजली, बढ़ी पेंशन ने आकर्षित किया।
- जंगलराज का भय : ‘जंगलराज’ का मुद्दा उठाकर राजद को खलनायक बताया।
- SIR का असरः SIR के कारण रिकॉर्ड मतदान हुआ, जिसका लाभ एनडीए को मिला।
- मजबूत प्रचार : एनडीए ने समय पर सीटें बांटी।
पीएम की 20, सीएम की 84 और शाह की 38 सभाओं ने माहौल बदला। - डबल इंजन : नीतीश के काम पर भरोसा।
भाजपा-जदयू के तालमेल ने बड़ा काम किया। मोदी का सूत्र- ‘मेरा बूथ सबसे मजबूत’ सफल रहा।
महागठबंधन की हार के कारण
- कांग्रेस में विवाद: कांग्रेस के टिकट बंटवारे पर विवाद। खरीद-बिक्री के आरोप लगे। धरना-प्रदर्शन चलते रहे। सहनी भी डिप्टी सीएम के लिए अड़े रहे।
- घोषणाएं बेअसर : नीतीश सरकार ने घोषणाएं तुरंत लागू की। महागठबंधन अटका रहा।
- सीटों पर कलह : 12 सीटों पर फ्रेंडली फाइट रही। ‘सीएम फेस’ को लेकर लंबी खींचतान ।
- कमजोर प्रचार : तेजस्वी लगभग अकेले प्रचार
में लगे रहे। एसआईआर का मुद्दा जोरदारी से उठाने के बाद राहुल गांधी अचानक गायब हो गए। - लामबंदीः मोकामा में दुलारचंद की हत्या के बाद सवर्ण लामबंद हुए। अनंत की गिरफ्तारी ने सुशासन का संदेश दिया। यह सब विपक्ष के खिलाफ गया।
वोट का हिसाब : एनडीए 23,11,7627 वोट मिले, महागठबंधन 18,63,6694 वोट मिले
| जिला | कुल सीटें | NDA | महागठबंधन |
|---|---|---|---|
| पश्चिम चंपारण | 9 | 7 | 2 |
| पूर्वी चंपारण | 12 | 11 | 1 |
| शिवहर | 1 | 1 | 0 |
| सीतामढ़ी | 8 | 8 | 0 |
| मधुबनी | 10 | 9 | 1 |
| सुपौल | 5 | 5 | 0 |
| अररिया | 6 | 2 | 3 |
| किशनगंज | 4 | 2 | 1 |
| पूर्णिया | 7 | 6 | 0 |
| कटिहार | 7 | 4 | 3 |
| सहरसा | 4 | 2 | 2 |
| दरभंगा | 10 | 10 | 0 |
| मुजफ्फरपुर | 11 | 10 | 1 |
| गोपालगंज | 6 | 6 | 0 |
| सिवान | 8 | 7 | 1 |
| सारण | 10 | 7 | 3 |
| वैशाली | 8 | 7 | 1 |
| समस्तीपुर | 10 | 7 | 3 |
| बेगूसराय | 7 | 5 | 2 |
| खगड़िया | 4 | 4 | 0 |
| भागलपुर | 7 | 7 | 0 |
| बांका | 5 | 5 | 0 |
| मुंगेर | 3 | 3 | 0 |
| लखीसराय | 2 | 2 | 0 |
| शेखपुरा | 2 | 2 | 0 |
| नालंदा | 7 | 7 | 0 |
| पटना | 14 | 11 | 3 |
| भोजपुर | 7 | 7 | 0 |
| बक्सर | 4 | 3 | 1 |
| रोहतास | 7 | 6 | 1 |
| अरवल | 2 | 2 | 0 |
| जहानाबाद | 3 | 1 | 2 |
| औरंगाबाद | 6 | 5 | 1 |
| गया | 10 | 8 | 2 |
| नवादा | 5 | 4 | 1 |
| जमुई | 4 | 3 | 1 |
सबसे बड़ी और सबसे छोटी जीत – बिहार चुनाव 2025
- राधा चरण साह (जदयू, संदेश) 27 वोट से जीते
- कलाधर मंडल (जदयू, रूपौली) 73572 से जीते
IMPORTANT LINK
| ARATTAI CHANNEL | CLICK HERE |
| WHATSAPP CHANNEL | CLICK HERE |
| TELEGRAM CHANNEL | JOIN |
| YOU TUBE CHANNEL | SUBSCRIBE |


























