बोर्ड परीक्षा में सम्मिलित होने जा रहे तो -इन बातों का रखें ख्याल- टॉपर बनेंगे आप

By: arcarrierpoint

On: Sunday, February 1, 2026 7:36 PM

बोर्ड परीक्षा में सम्मिलित होने जा रहे तो -इन बातों का रखें ख्याल- टॉपर बनेंगे आप
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बोर्ड परीक्षा में सम्मिलित होने जा रहे तो -इन बातों का रखें ख्याल- टॉपर बनेंगे आप:-बोर्ड परीक्षा किसी भी छात्र के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव होती है। इस परीक्षा में किया गया सही या गलत निर्णय आपके भविष्य की दिशा तय कर सकता है। अक्सर देखा जाता है कि छात्र दिन-रात मेहनत तो करते हैं, लेकिन सही रणनीति, टाइम मैनेजमेंट और मानसिक संतुलन की कमी के कारण अपेक्षित परिणाम नहीं ला पाते।

अगर आप भी बोर्ड परीक्षा 2026 में शामिल होने जा रहे हैं और चाहते हैं कि अच्छे नंबर आएँ, आत्मविश्वास बना रहे और परीक्षा हॉल में गलती न हो, तो यह लेख आपके लिए बेहद जरूरी है।

जैसे-जैसे परीक्षा नजदीक आती है, बच्चों की धड़‌कनें भी तेज होने लगती हैं। दिनभर पढ़ाई करने के बावजूद ऐसा लगता है कि कुछ भी याद नहीं हुआ, सिलेबस अभी भी पहाड़ जैसरा खड़ा है और जो पढ़ा है वह दिमाग में टिकेगा भी या नहीं। दरअसल, इन सवालों और उलझनों की वजह उनका पढ़ने का तरीका ही है। याद रखें, सारा सिलेबस रट लेना ही लक्ष्य नहीं है। उससे कहीं ज्यादा जरूरी है उसे सही ढंग से समझकर पढ़ना। समझदारी से पढ़ेंगे तो मेहनत आधी और नतीजा दोगुना होगा।

अक्सर बच्चे जोश में आकर 14-15 घंटे पढ़ने का नियम बना लेते हैं, जो दो दिन बाद टूट जाता है। बेहतर होगा कि शुरुआत में 5-6 घंटे ध्यान से पढ़ाई करें। धीरे-धीरे समय बढ़ाएं।

लगातार कई घंटों तक पढ़ने से दिमा थक जाता है। 50 मिनट पूरी एकाग्रता के साथ पढ़ें। 10 मिनट का विराम लेकर टहलें या स्ट्रेचिंग करें। इस दौरान फोन या सोशल मीडिया से दूर रहें।

यह एक सामान्य ढांचा है, जिसे बच्चे परीक्षा की तैयारी में अपना सकते हैं-

  • सुबह… गणित या विज्ञान जैसे कठिन विषय सुबह पढ़ें। इस समय मस्तिष्क ताजदम रहता है इसलिए दिलचस्पी के साथ पढ़ना, समझना व याद रखना आसान होता है।
  • दोपहर… थोड़ा आसान विषय पढ़ें। दोपहर में नींद आ सकती है. तो लिखकर अभ्यास करना बेहतर होगा।
  • शाम… ऐसे विषय पढ़ें जो न अधिक कठिन हैं और न अधिक सरल। पुराने प्रश्नपत्र भी हल कर सकते हैं। इससे यह अंदाजा मिलता है कि परीक्षक प्रश्न कैसे घुमाकर पूछते हैं। अक्सर बोर्ड परीक्षाओं में प्रश्न दोहराते हैं या उसी कॉन्सेप्ट पर आधारित होते हैं।
  • रात… दिनभर जो पढ़ा उसका रिवीजन करें। अपनी लय पहचानें- हर छात्र की ‘जैविक घड़ी’ अलग होती है। उसी के अनुसार समय तय करें। दोस्तों की नकल न करें

तैयारी कितनी भी अच्छी हो, परीक्षा के 3 घंटे ही आपका परिणाम तय करते हैं।

प्रश्नपत्र के दिशा-निर्देश ध्यान से पढ़ें। कई बार जल्दबाजी में छात्र ‘और’ को ‘अथवा समझ लेते हैं और पूरा प्रश्न पत्र हल करने से चूक जाते हैं। ऐसी गलतियों से बचें।

जितना पूछा हो, उत्तना ही उत्तर दें। 2 अंक के प्रश्न में 2 पेज भरने से ज्यादा अंक नहीं मिलेंगे। दूसरे प्रश्नों के लिए समय कम पड़ेगा। इसलिए घर पर परीक्षा के समय अनुसार टेस्ट दें।

अगर प्रश्नपत्र कठिन लगे, तो उसे दी चरणों में हल करें। पहले चरण में वी प्रश्न करें जो अच्छी तरह से आते हैं। इससे आत्मविश्वास बढ़ेगा। दूसरे चरण में कठिन प्रश्नों पर दिमाग लगाएं।

परीक्षा में लिखने के काम आने वाली सामग्री, जैसे-पेन, पेंसिल, रबर, स्केल आदि लेकर जाएं। दोस्तों के भरोसे न रहें। अतिरिक्त पेन हमेशा साथ रखें।

प्रश्न के जवाब में जरूरत के अनुसार चित्र/डायग्राम और बिंदुओं का समावेश हो तो नंबर बढ़ जाते हैं। परीक्षक को कॉपी जांचने में जितनी आसानी होगी, अंक उतने अच्छे मिलेंगे।

परीक्षा अंतराल को को छुट्टी न समझें। इस दौरान अपनाई गई सही रणनीति, विषमवार समय नियोजन और गहन अभ्यास सफलता की कुंजी बन सकते हैं।

गणित को रटें नहीं, समझाकर बार-बार हल करें। इसकी रणनीति कुछ यूं होगी…

  • पहला दिन (कठिन अध्याय)..
    • जिन अध्यायों में आप अटकते हैं उनके महत्वपूर्ण सवाल हल करें।
  • दूसरा दिन (मध्यम)….
    • उन अध्याय को देखें जो आसान हैं लेकिन आप अधिकांशतः गलतियां कर देते हैं।
  • जैसे- सांख्यिकी प्रायिकता।
  • तीसरा दिन (रिवीजन)….
    • सूत्रों को लिखकर याद करें। सवाल हल करते समय भी सूत्र जरूर लिखें।
  • चौथे दिन (मॉक टेस्ट)….
    • ‘बायोलॉजिकल क्लॉक’ नियम अपनाते हुए परीक्षा के समय के अनुसार पेपर हल करें।

विज्ञान में डायग्राम्स, सवालों और थ्योरी का मिश्रण होता है। इसलिए इसके हर विषय को अलग समय देना होगा।

  • भौतिक विज्ञान…..
    • मैप के पहले दिन ही सभी सूत्र और डेरिवेशन दोबारा पढ़ लें। सवाल भी हल करें, हालांकि नए प्रश्नों के बजाय केवल पिछले साल के प्रश्न हल करें।
  • रसायन विज्ञान…
    • भौतिक रसायन के सूत्र पढ़ें। कार्बनिक रसायन की चेन रिएक्शन्स को लिखकर देखें।
  • जीव विज्ञान…
    • डायग्राम्स की प्रैक्टिस रैपिड रिवीजन मोड में करें। एनसीईआरटी के डायग्राम्स देखें और लेवलिंग का अभ्यास करें।

यह विषय बहुत विस्तृत होता है, इसलिए यहां आपकी ‘टुकड़ों में बोटने’ (50-30-20) वाली रणनीति सबसे सटीक बैठेगी।

  • इतिहास…
    • इसमें किसी भी घटना या फिर सन् का रट्टा मारने के बजाय घटनाओं को एक कहानी की तरह पढ़ें।
  • भूगोल…
    • नक्शों का अभ्यास जरूर करें क्योंकि ये छूट जाते हैं। हर दिन के लिए 30 मिनट निकालें। यह मुफ़्त के नंबर होते हैं।
  • राजनीति/अर्थशास्त्र….
    • केवल बुलेट पॉइंट्स और हेडिंग्स याद करें।
  • सुझाव..
    • उत्तर लिखने का अभ्यास करें। सामाजिक विज्ञान में ‘क्या लिखना है’ से ज्यादा ‘कैसे लिखना है’ महत्वपूर्ण होता है।

इन विषयों में गैप अक्सर ही अ कम मिलता है। इसलिए इसे अधिकतम 2 दिन में भी तैयार किया जा सकता है।

  • सबसे पहले पत्र, नोटिस, और निबंध के फॉर्मेट पक्के करें। इसमें पूरे नंबर मिलते हैं।
  • साहित्य…
    • पूरी कहानियां दोबारा न पढ़ें। केवल ‘चैप्टर समरी’ पढ़ें। इसके अलावा ‘कवि और लेखक का जीवन परिचय’ भी जरूर पढ़ लें।
  • व्याकरण..
    • यहां अक्सर गलतियां होती हैं, इसलिए नियमों को सही तरह से देखें और 5-10 उदाहरण हल करें।
  • सुझाव…
    • शब्दावली की छोटी-छोटी गलतियों से बचने के लिए कठिन शब्दों को एक बार लिखकर देख लें।

जैसे गाड़ी को चलने के लिए अच्छे ईंधन की जरूरत होती है, वैसे ही परीक्षा की तैयारी के दौरान दिमाग को तेज और सक्रिय रखने के लिए सही पोषण की आवश्यकता होती है। यह पोषण मिलेगा सही और छोटे-छोटे आहार से। छात्रों को पढ़ने के दौरान बीच-बीच में भूख भी लगती है। ऐसे में अभिभावक उनके लिए कुछ स्नैक्स भी तैयार करके रख सकते हैं।

परीक्षा के दौरान तीन हिस्सों (सुबह, दोपहर और रात का खाना) में भारी भीजन देने के बजाय, हर 2-3 घंटे में छोटे हिस्से में खाना दें। भारी खाने से पाचन तंत्र पर जोर पड़ता है और दिमाग को ऑक्सीजन कम मिलती है, जिससे नींद आती है।

  • सुबह का नाश्ता… इसे कभी नहीं छोड़ना है। इसमें प्रोटीन और फाइबर का संतुलन होना चाहिए। जैसे- ओट्स, दलिया, उपमा, पोहा या अंडे, बादाम का दूध, नारियल बफी आदि।
  • नाश्ते के बाद… पढ़ने के दौरान बीच-बीच में विप्स या बिस्किट के बजाय हर 2-3 घंटे में भुने हुए चने, मखाने या फ्रूट चाट, हरा चना चाट, मूंगफली, तिल के लड्डू आदि दें।

दिमाग को तेज चलाने और याददाश्त को बेहतर बनाने के लिए ओमेगा-3 फैटी एसिड और एंटी-ऑक्सीडेंट्स की जरूरत होती है।

  • डार्क चॉकलेट… इसका एक छोटा-सा टुकड़ा दें।
  • अखरोट और बादाम… रात को 5 बादाम और 2 अखरोट भिगो दें। सुबह बच्चे को बादाम (छीलकर) व अखरोट को अच्छी तरह चबाकर खाने को कहें।
  • पालक… आहार में पालक को जरूर शामिल करें।
  • बीज… कडू, सूरजमुखी, तरबूज, खरबूज के बीज को सूखा भून लें और मिश्रण बनाकर एक जार में भरकर स्टडी टेबल पर रख दें।
  • बेरीज… स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी या जामुन और आंवले खिलाएं। अंगूर या किशमिश के अलावा संतरा, अमरूद, अवोकाडो, स्ट्रॉबेरी भी शामिल करें।

लगातार पढ़ने से शारीरिक और मानसिक थकान होती है। इसे दूर करने के लिए शरीर को ग्लूकोज और प्रोटीन चाहिए, लेकिन सही स्रोत से।

  • केला… एक केला त्वरित ऊर्जा का सबसे अच्छा स्रोत है।
  • दही और पनीर… प्रोटीन के लिए दही या पनीर का सैंडविच/टिक्की दें।
  • साबूत अनाज… मैदा और शक्कर से बचें। इसकी जगह मल्टीग्रेन बेड या रोटी का प्रयोग करें, जिससे ऊर्जा धीरे-धीरे और लंबे समय तक मिलती रहे।
  • साज्जूर और गुड़… खजूर से विटामिन-मिनरल्स मिलते हैं। बहें गुरु से मिलने वाले आयरन से थकान दूर होती है।
  • पेय… अक्सर सिरदर्द और कम एकाग्रता का मुख्य कारण पानी की कमी होती है। भरपूर पानी पीने के साथ नारियल पानी, नींबू पानी या छाछ, जूस और सूप पिलाएं।
  • मखाना भेल… मखानों को थोड़े से घी में कुरकुरा भूनें। इसमें बारीक कटा प्याज, टमाटर, अनार के दाने, भुनी हुई मूंगफली,थोड़ा-सा चाट मसाला और नींबू का रस मिलाएं।
  • पनीर टिक्की… 200 ग्राम पनीर, एक कटा प्याज, एक कीसी हुई गाजर, नमक, काली मिर्च पाउडर, हरा धनिया व हरी मिर्च को मिलाकर टिक्कियों बनाएं और तवे पर सेंकें।
  • ओट्स-केला लड्डू… एक कप भुने हुए ओट्स, दो पके व मसले हुए केले और मुट्ठी भर कटे हुए मेवों को मिलाकर लड्डू बनाएं। यह लड्डू ऊर्जा देगा।

परीक्षा पास आ गई है। ऐसे में छात्रों के लिए परीक्षा में उत्तीर्ण होने और अच्छे अंक लाने का तनाव तथा थोड़ी-सी घबराहट होना स्वाभाविक है। दुनिया के कुछ नामचीन विद्वानों ने सफलता और किसी काम को करने के ऐसे नियम बताए हैं, जिन्हें छात्र भी परीक्षा में आज़‌माकर अच्छे अंक हासिल कर सकते हैं।

लेखक जेम्स क्लियर के अनुसार, बड़े काम को शुरू करना सबसे कठिन है। इसे इतना छोटा करें कि सिर्फ दो मिनट लगें। शुरुआत होने पर रफ्तार अपने आप बन जाती है। अगर किसी पाठ को कठिन होने की वजह से टाल रहे हो तो सबसे पहले उसके मुख्य बिंदु पढ़कर कॉपी में लिखो। फिर एक-एक बिंदु का विस्तार संक्षेप में लिखने की कोशिश करो।

कठिन विषय हो या पाठ, तुम्हें अच्छे अंक से परीक्षा पास करनी है, इसलिए पढ़ना तो पड़ेगा ही। लेखक ब्रायन ट्रेसी का नियम सीधा है- दिन का सबसे मुश्किल और कठिन विषय सुबह सबसे पहले खत्म करो। जब आप सबसे कठिन काम कर लेते हैं, तो बाकी दिन का तनाव खत्म हो जाता है और आत्मविश्वास बढ़ जाता है।

अगर बहुत सारे काम हैं तो सबको एक साथ करने के बजाय, एक बार में एक ही काम पर ध्यान दो और उसे पूरे ध्यान से यानी उसमें डूबकर करो। लेखक कैल न्यूपोर्ट के अनुसार, एक घंटा बिना फोन और इंटरनेट के पढ़ना, 4 घंटे की खलल वाली पढ़ाई से कहीं बेहतर है। इसलिए परीक्षा के दौरान पूरी तरह से एकाग्र होकर पढ़ें।

अवसर ही आपने अपने बड़ों से सुबह जल्दी उठने की राय सुनी होगी। लेखक रॉबिन शर्मा भी यही कहते हैं। उनके अनुसार सुबह जल्दी उठकर पहले घंटे को तीन हिस्सों में बांटो 20 मिनट कसरत, 20 मिनट योजना/ध्यान और 20 मिनट पढ़ाई। यह दिमाग को परीक्षा के दबाव और तनाव के लिए तैयार करता है।

किसी काम में अपना मकसद जोड़े बिना उसमें पूरी ऊर्जा व रोचकता नहीं आती। लेखक साइमन सिनेक का मानना है कि गर हमें पता हो कि हम परीक्षा क्यों दे रहे हैं, लक्ष्य क्या है, तो इससे थकान व बोरियत कम महसूस होती है। ‘क्यों’ को हमेशा कागज पर लिखकर सामने रखें।

अगर बहुत सारे काम करने हैं- नोट्स बनाने हैं, पढ़ना है, पर यह तय ही नहीं किया कि सबसे जरूरी क्या है तो शुरुआत कैसे करेंगे? लेखक स्टीफन कवी की सलाह है कि सिलेबस को ‘जरुरी’ और ‘अहम’ के आधार पर बांटें। उन अध्यायों पर पहले देखें जो परीक्षा के लिए महत्वत्पूर्ण हैं।

आत्मविश्वास और आगे बढ़ते रहने का प्रण विद्यार्थी जीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। लेखक कैरोल ड्वेक कहते हैं कि पढ़ते समय हमेशा यह विश्वास रखें कि आपकी बुद्धिमत्ता स्थिर नहीं है। कठिन विषयों को डर के बजाय एक चुनौती और सीखने के अवसर के रूप में देखें।

बाद में क्या होगा यह अभी सोचेंगे तो अभी क्या करेंगे? लेखक एकहार्ट टॉल्ल कहते हैं कि भविष्य (परिणाम) की चिंता करने के बजाय केवल उस ‘एक घंटे’ पर ध्यान दें जो आप अभी पढ़ रहे हैं। इससे परीक्षा का तनाव कम होता है।

डायग्राम और लेबलिंग तकनीक में जटिल डेटा को चित्रों, तीरों और संक्षिप्त शब्दों के माध्यम से एक ग्राफिक संरचना में बदला जाता है। हमारा मस्तिष्क शब्दों की तुलना में छवियों को कई गुना तेजी से समझता है. इसलिए यह तकनीक सीखने की गति बढ़ा देती है।

  • विषय का चयन… ऐसे विषयों को चुनें जिन्हें चित्र में बदला जा सकता हो, जैसे- मानव पाचन तंत्र, प्रकाश संश्लेषण या ज्वालामुखी को संरचना।
  • रूपरेखा व स्केच… पहले शुरुआत में पेंसिल से हल्की रेखाएं बनाएं। चित्र के अनुपात पर ध्यान दें। उदाहरण के लिए, यदि हृदय का चित्र बना रहे हैं, तो उसके कक्षों का आकार सही होना चाहिए ताकि क्रियाविधि समझ आए।
  • सटीक लेबलिंग… चित्र के विभिन्न भागों को चिह्नित करने के लिए सीधी रेखाओं का उपयोग करें। मुख्य तकनीकी शब्दों का प्रयोग करें।
  • रंग और कोडिंग… चीजों को अलग दिखाने के लिए रंगों का उपयोग करें। जैसे ऑक्सीजन युक्त रक्त के लिए ‘लाल’ व कार्बन डाइऑक्साइड युक्त रक्त के लिए ‘नीला’ रंग।
  • संक्षिप्त सारांश… चित्र के पास में बिंदुओं में क्रियाविधि लिखें। अपने शब्दों में लिखें ताकि आसानी से समझ आए।

परीक्षा की तैमारी के साथ-साथ बच्चों को तनाव और नकारात्मक चिंतन का सामना करना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में कुछ सरल श्वास तकनीकें मन को शांत करने में मदद करती हैं। इन्हें रोष कुछ मिनट नियम बनाकर करने से एकाग्रता बढ़ती है और चिंता कम होती है।

यह सरल तकनीक सांस रोककर तंत्रिका तंत्र को संतुलित करने में मदद करती है।

  • कैसे करें… गहरी सांस लें और 8-9 सेकंड तक रोककर रखें। फिर 10-15 सेकंड तक धारे-धीरे सांस छोड़ें। इसे 2-3 बार दोहराएं।
  • कब करें? इसे पढ़ाई से पहले रोज करें। परीक्षा से पहले करें। तनाव या बेचैनी महसूस होने पर भी कर सकते हैं।
  • ध्यान देने योग्य बात… ये तकनीकें सभी उम्र के बच्चों के लिए आसान हैं। नियमित अभ्यास से प्रभाव बेहतर दिखता है।

इस तकनीक में सांस लेना, रोकना, छोड़ना और फिर रोकना-इन चारों चरणों को बराबर समय तक किया जाता है।

  • कैसे करें…
    • किसी चौकोर वस्तु पर ध्यान केंद्रित करें, जैसे- खिड़की, दरवाजा, फोटो फ्रेम या कंप्यूटर स्क्रीन।
    • अब आंखों को नीचे बाएं कोने पर टिकाएं और चार तक गिनते हुए सांस अंदर लें, और आंखों को ऊपर बाएं कोने तक ले जाएं।
    • जटिल विषय आसानी से समझा जा सकता है।
    • लेबलिंग से मुख्य शब्द याद रहते हैं।
    • एक ही पृष्ठ पर पूरा विषय दिखता है और आसानी से समझ में आता है।
  • कब करें?
    • इसे पढ़ाई से पहले रोज करें। परीक्षा से पहले करें। तनाव या बेचैनी महसूस होने पर भी कर सकते हैं।
  • ध्यान देने योग्य बात… ये तकनीकें सभी उम्र के बच्चों के लिए आसान हैं। नियमित अभ्यास से प्रभाव बेहतर दिखता है।
    • चार सेकंड तक सांस रोकें और आंखों को ऊपर दाएं कोने तक ले जाएं।
    • अब चार सेकंड तक गिनते हुए सांस छोड़ें और आंखों को नीचे दाएं कोने तक ले जाएं।
    • चार सेकंड तक रोकें और आंखों को प्रारंभिक नीचे बाएं कोने पर वापस लाएं। नियम समझें
    • 4 सेकंड सांस अंदर, 4 सेकंड रोकें, 4 सेकंड सांस चाहर, 4 सेकंड रोकें।
    • भटकाव कम होता है। मन और शरीर शांत होता है।
  • इससे लाभ.. चौकोर आकृति पर ध्यान केंद्रित करने से दिमाग को एक दृश्य मार्गदर्शन मिलता है। साथ ही सांस लेने-छोड़ने पर ध्यान बना रहता है।

परीक्षा की एक रात पहले नई चीजें सीखने के बजाय जो पढ़ा है उसे संजोना और खुद को शांत रखना ज़रूरी है। तनाव आपको भ्रमित कर सकता है, वहीं आत्मविश्वास परिणाम बदल सकता है। पेपर वाले दिन खुद को सहज, शांत और सकारात्मक रखने के कुछ प्रभावी तरीके यहां दिए गए हैं…

सुबह के लिए कुछ भी काम न छोड़ें, क्योंकि जल्दबाजी में कोई चीज छूट भी सकती है। समय की बाध्यता तनाव भी पैदा करती है। इसलिए तैयारी रात में ही कर लें।

प्रवेश पत्र, कम से कम दो काले और दो नीले पेन, स्केल, पेंसिल, रबर, पानी की बोतल और अन्य अनिवार्य दस्तावेज, सभी को एक पारदर्शी बैग में व्यवस्थित करके रख लें। स्कूल ड्रेस, जूते-मोजे सहित रात में ही अलग करके रख दें।

परीक्षा की रात आपका पेट आपकी एकाग्रता तय करता है। इसलिए सोने से कम से कम 2-3 घंटे पहले यानी रात 8 बजे तक खाना खा लें।

हल्का और सुपाच्य भोजन करें। भारी, तला-भुना या जंक फूड न खाएं। इससे सुस्ती और अपच हो सकता है। पर्याप्त पानी पिएं। कैफीन न लें, यह आपकी नींद में खलल डाल सकता है।

इस दौरान दो बातें ध्यान रखें… पहली, सामग्री कम और सटीक हो। दूसरी, कुछ भी नया न हो क्योंकि नई और अधिक जानकारी तनाव पैदा करेगी। साथ ही पुरानी जानकारी को लेकर भ्रमित भी कर सकती है।

केवल 45-60 मिनट का समय ही क्विक रिवीजन के लिए रखें ताकि दिमाग ताजा रहे। सिर्फ अपने बनाए हुए शॉर्ट नोट्स, फॉर्मूले, डायग्राम या महत्वपूर्ण की-वर्ड्स देखें। और हां, घर से निकलने से आधा-एक घंटा पहले पढ़ाई पूरी तरह बंद कर दें। इससे आप खुद को शांत रख पाएंगे।

रात में सिर्फ पढ़ते ही न रहें। दिमाग को तरोताजा करना भी जरूरी है ताकि मन शांत हो जाए।

15-20 मिनट के लिए खुली हवा में टहलें। यह मस्तिष्क में ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ाता है। कोई धीमा संगीत सुनें या अपनी किसी हॉबी में 10 मिनट बिताएं। सोने से पहले मोबाइल का उपयोग न करें।

कुछ विद्यार्थियों को लगता है कि सोकर वे समय बर्बाद कर रहे हैं। लेकिन ऐसा नहीं है, सोते समय ही हमारा दिमाग़ जानकारी को ‘शॉर्ट टर्म’ से ‘लॉन्ग टर्म’ मेमोरी में भेजता है। इसलिए पढ़ाई के साथ-साथ नींद भी बहुत जरूरी है।

अधूरी नींद के कारण परीक्षा हॉल में सब कुछ भूल जाना यानी ‘ब्लैकआउट’ होने का ख़तरा बढ़ जाता है। इसलिए 7-8 घंटे की गहरी नींद लें। रात 10:30 या 11 बजे तक बिस्तर पर चले जाएं।

अगर आप ऊपर बताए गए सभी बिंदुओं का पालन करते हैं –
सही रणनीति
नियमित रिवीजन
मानसिक संतुलन
आत्मविश्वास

तो यकीन मानिए, आप न सिर्फ पास होंगे बल्कि टॉपर बनने की दिशा में भी बढ़ेंगे।

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