मकर संक्रांति में 14 साल बन रहा है- ये महा संयोग | जल्दी करें ये काम सभी इच्छा होगा पूर्ण

By: arcarrierpoint

On: Thursday, January 8, 2026 10:25 AM

मकर संक्रांति 2026
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मकर संक्रांति में 14 साल बन रहा है ये महा संयोग- इस बार 14 जनवरी को मकर संक्रांति मनेगी। मकर संक्रांति पर षट तिला एकादशी का दुर्लभ संयोग बन रहा है। मकर संक्रांति पर एकादशी का यह महासंयोग 22 साल बाद बन रहा है। मान्यता के अनुसार यह विशेष फलदायी माना जाता है। इससे पहले ऐसा संयोग वर्ष 2003 में देखने को मिला था। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग और अनुराधा नक्षत्र भी रहेगा, जो पर्व की शुभता को और बढ़ाएगा।

ज्योतिषीय गणना के अनुसार सूर्य का मकर राशि में प्रवेश दोपहर 3.13 बजे होगा और पुण्यकाल शाम 5.46 बजे तक रहेगा। हालांकि मकर संक्रांति सूर्योदय से ही मानी जाएगी। इस अवधि में स्नान, सूर्य देव की पूजा के साथ भगवान विष्णु की पूजा और तिल, गुड़, खिचड़ी और कंबल दान की परंपरा है। मान्यता है कि इन वस्तुओं के दान से दोगुना पुण्य प्राप्त होता है। ज्योतिषाचायों के अनुसार मकर संक्रांति प्रमुख सौर पर्व है। इसी दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं।

अनुराधा नक्षत्र का अर्थ अनुशासन के साथ सफलता है। सूर्य इस दिन अपने पुत्र शनिदेव की राशि मकर में प्रवेश करते हैं। पिता-पुत्र के मतभेदों के बावजूद यह संयोग कई राशियों के लिए शुभ फल देने वाला माना गया है। पंडित शशि मिश्रा के अनुसार मकर संक्रांति ऐसा पर्व है, जिसमें दान-पुण्य के माध्यम से सूर्यदेव और शनिदेव दोनों को एक साथ प्रसन्न किया जा सकता है। तिल, गुड़, अन्न, वस्त्र और पात्र दान करने से ग्रह दोष शमन, कृपा दृष्टि और रोगों से मुक्ति की मान्यता है।

सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही दिन बड़े और गर्म होने लगते हैं, जो आने वाली फसलों के लिए अनुकूल संकेत है। संक्रांति पर तिल, गुड़ और शीतकालीन फसलों की मांग बढ़ती है। किसानों, उत्पादकों और विक्रेताओं को इसका लाभमिलता है।

मकर संक्रांति पर षटतिला एकादशी का संयोग अनियमित अंतराल पर बनता है। पट यानी छह- इस दिन तिल का छह प्रकार से उपयोग (तिल स्नान, उबटन, हवन, दान, सेवन और जल अर्पण) विशेष फल देता है। पुराणों में इसे पाप क्षय, रोग निवारण और मोक्ष प्राप्ति का साधन बताया गया है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस दिन सुबह जल्दी उठकर तिल, हल्दी और चंदन आदि का उबटन लगाकर स्नान करें। सूर्य को अर्घ्य दें, इसके बाद जरूरतमंदों को तिल, गुड़, खिचड़ी व कंबल का दान करें।

  • मेषः आर्थिक लाभ
  • वृषभः स्थानांतरण व सुखद बदलाव
  • मिथुनः लेनदेन में सावधानी व उन्नति
  • तुलाः निवेश से लाभ
  • वृच्छिकः लाभ के साथ खर्च बढ़ेगा
  • कर्कः यश और सफलता
  • सिंहः व्यर्थ विवाद
  • कन्याः वाहन लाभ
  • धनुः शारीरिक कष्ट
  • मकरः काम बनेंगे पर नौकरी में तनाव का योग
  • कुंभः आर्थिक लाभ
  • मीनः कॅरियर में सफलता।

1) प्रातः स्नान और सूर्य अर्घ्य
सूर्योदय से पहले स्नान करें। तांबे के लोटे में जल, लाल फूल और रोली डालकर सूर्य को अर्घ्य दें।
लाभ: रोग बाधा में कमी, आत्मबल में वृद्धि।

2) तिल-गुड़ का दान
तिल, गुड़, चावल, खिचड़ी, कंबल या ऊनी वस्त्र का दान करें।
लाभ: पितृ दोष शांति, आर्थिक स्थिरता।

3) संकल्प लेकर जप-ध्यान
“ॐ घृणि सूर्याय नमः” का 108 बार जप करें।
लाभ: इच्छापूर्ति, कार्यों में सफलता।

4) गौ-सेवा और अन्नदान
गाय को हरा चारा/गुड़ खिलाएँ, जरूरतमंदों को भोजन कराएँ।
लाभ: ग्रह दोषों में कमी, पुण्यवृद्धि।

5) शुभ कार्यों की शुरुआत
नया व्यापार, पढ़ाई, निवेश की योजना या सकारात्मक आदत की शुरुआत करें।
लाभ: लंबे समय तक शुभ परिणाम।

मकर संक्रांति को सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का पर्व माना जाता है। यह दिन सूर्य उपासना, दान-पुण्य और नए संकल्पों के लिए विशेष होता है। इस बार मकर संक्रांति पर 14 वर्षों बाद दुर्लभ महा संयोग बन रहा है, जिसे शास्त्रों में अत्यंत शुभ बताया गया है। इस संयोग में किए गए धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है।

  • सूर्य का मकर राशि में प्रवेश
  • शुभ ग्रहों की अनुकूल स्थिति
  • पुण्य काल का विस्तारित समय

इन कारणों से यह दिन धन, स्वास्थ्य, करियर और पारिवारिक सुख की कामना के लिए अत्यंत प्रभावी माना जा रहा है।

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