राज्य के सभी स्कूलों में अब ऑनलाइन हाज़िरी – जल्दी देखें ऐसे बनेगा

By: arcarrierpoint

On: Sunday, January 25, 2026 11:53 AM

शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला
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राज्य के सभी स्कूलों में अब ऑनलाइन हाज़िरी – राज्य के 76 हजार सरकारी स्कूलों में अगले माह से शिक्षकों और बच्चों की ऑनलाइन हाजिरी बनेगी। लगभग पौने दो करोड़ स्कूली बच्चों और करीब छह लाख शिक्षकों की भी हाजिरी टैब से ही बनेगी। इसके अलावा मध्याह्न भोजन की रिपोर्ट भी टैब के जरिए ही ली जाएगी।

शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को तैयारी पूरी कर इसे अगले माह से शुरू कराने का निर्देश दिया है। आदेश का पालन नहीं करने पर कार्रवाई होगी। राज्य में 76 हजार 116 सरकारी प्रारंभिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालय हैं। इसमें से अभी तक 75640 स्कूलों में 155 417 टैब उपलब्ध करा दिये गए हैं।

प्रत्येक स्कूल को दो-दो टैब दिये गए हैं। जिन स्कूलों में बच्चों का नामांकन अधिक है, वहां तीन टैब दिए गए हैं। बिहार राज्य शिक्षा परियोजना परिषद की ओर से एजेंसी के जरिए टैब उपलब्ध कराये गये हैं। अभी तीन दर्जन स्कूलों में टैब से हाजिरी बन रही है।

तीन दिन पहले शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेन्दर ने समीक्षा में पाया था कि राज्य के 96 प्रतिशत स्कूलों में टैब उपलब्ध करा दिये गये हैं। लेकन 11 जिले पूर्णिया, लखीसराय, सीवान, वैशाली, पटना सहरसा, गोपालगंज, पश्चिम चंपारण, कटिहार, पूर्वी चंपारण और अरवल में 95 प्रतिशत से कम स्कूलों में टैब का वितरण किया गया है। हालांकि अपर मुख्य सचिव ने 22 जनवरी से ही टैब से हाजिरी बनवाने का निर्देश दिया था।

टैब के जरिए बच्चों और शिक्षकों की हाजिरी सही तरीके से बनाने और मध्याह्न भोजन संबंधी रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए प्रशिक्षण दिलाया जा रहा है। पिछले माह ज्यादातर प्रधान शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों को प्रशिक्षण दिलाया गया था। बचे हुए प्रधान शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों का भी प्रशिक्षण जल्द पूरा हो जायेगा। प्रधान शिक्षक और प्रधानाध्यापक के साथ ही प्रत्येक स्कूल में इसके लिए एक-एक नोडल शिक्षक को भी प्रशिक्षण दिया जाना है।

शिक्षकों और विद्यार्थियों की हाजिरी बनते ही ई शिक्षा कोष पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज हो जायेगी। इस व्यवस्था में फेशियल रिक्ग्नाइजेशन सिस्टम (एफआरएस) का उपयोग होगा। इसमें वर्ग शिक्षक को संबंधित कक्षा के सभी बच्चों का सामूहिक फोटो भी अपलोड करना होगा।

  • रजिस्टर पर हाजिरी बनाने में लगने वाले समय की बचत होगी
  • हाजिरी में हेराफेरी और फर्जीवाड़ा पर रोक लगेगी
  • सही उपस्थिति का पता रहने से एमडीएम में गड़बड़ी लगेगी रोकी
  • मुख्यालय से सीधे मॉनिटरिंग की जा सकेगी
  • पढ़ाई व्यवस्था को सुधारने में भी मदद काफी मिलेगी

राज्य में कुल 76,116 सरकारी स्कूल हैं, जिनमें शामिल हैं- प्रारंभिक विद्यालय, माध्यमिक विद्यालय, उच्च माध्यमिक विद्यालय इनमें से अब तक 75,640 स्कूलों को टैबलेट उपलब्ध कराए जा चुके हैं, यानी करीब 96 प्रतिशत स्कूलों में तकनीकी तैयारी पूरी हो चुकी है।

  • लंबे समय में छात्रों की शैक्षणिक प्रगति बेहतर होगी
  • छात्रों की उपस्थिति अब पूरी तरह डिजिटल होगी
  • स्कूल में अनुशासन बढ़ेगा
  • अभिभावकों को भी सही उपस्थिति की जानकारी मिल सकेगी

ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली लागू होने से शिक्षा व्यवस्था में कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे।

1. समय की बचत

अब रजिस्टर में नाम पुकारकर हाज़िरी बनाने की जरूरत नहीं होगी। इससे पढ़ाई के लिए अधिक समय मिलेगा।

2. फर्जीवाड़े पर रोक

फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम के कारण फर्जी हाज़िरी और हेराफेरी लगभग असंभव हो जाएगी।

3. मिड-डे मील में पारदर्शिता

सही उपस्थिति दर्ज होने से मध्याह्न भोजन (MDM) में गड़बड़ी पर रोक लगेगी।

4. सीधी मॉनिटरिंग

शिक्षा विभाग मुख्यालय से ही सभी स्कूलों की उपस्थिति रियल-टाइम मॉनिटर कर सकेगा।

5. पढ़ाई की गुणवत्ता में सुधार

शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित होने से शिक्षण व्यवस्था बेहतर होगी।

ऑनलाइन हाज़िरी व्यवस्था को ई-शिक्षा कोष पोर्टल से जोड़ा गया है। जैसे ही शिक्षक या छात्र की हाज़िरी दर्ज होगी, वह सीधे पोर्टल पर ऑनलाइन अपडेट हो जाएगी।

इस व्यवस्था में फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम (FRS) का उपयोग किया जाएगा।

  • शिक्षक और छात्रों की पहचान चेहरे के आधार पर होगी
  • फर्जी हाज़िरी की संभावना लगभग खत्म हो जाएगी
  • संबंधित कक्षा के सभी छात्रों की हाज़िरी टैब से बनाना
  • कक्षा का सामूहिक फोटो अपलोड करना
  • मध्याह्न भोजन (MDM) की रिपोर्ट दर्ज करना

बिहार के सरकारी स्कूलों में ऑनलाइन हाज़िरी व्यवस्था शिक्षा प्रणाली को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। टैब और फेशियल रिकॉग्निशन तकनीक के जरिए न सिर्फ हाज़िरी प्रक्रिया आसान होगी, बल्कि फर्जीवाड़े पर भी प्रभावी रोक लगेगी।

इससे छात्रों की पढ़ाई, शिक्षकों की जवाबदेही और सरकारी योजनाओं की निगरानी—तीनों में सुधार होगा। यदि यह योजना सही ढंग से लागू होती है, तो आने वाले समय में बिहार की स्कूल शिक्षा व्यवस्था डिजिटल इंडिया की दिशा में एक मजबूत उदाहरण बन सकती है।

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