सभी किसान फार्मर आईडी जरूर बनाए – तभी मिलेगा किसी भी योजना का लाभ

By: arcarrierpoint

On: Monday, January 12, 2026 1:40 PM

सभी किसान फार्मर आईडी जरूर बनाए - तभी मिलेगा किसी भी योजना का लाभ
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सभी किसान फार्मर आईडी जरूर बनाए – तभी मिलेगा किसी भी योजना का लाभ:-देश और राज्य सरकार द्वारा किसानों के लिए चलाई जा रही लगभग सभी प्रमुख योजनाओं को अब फार्मर आईडी (किसान पहचान पत्र) से जोड़ा जा रहा है। हाल ही में अखबारों और प्रशासनिक रिपोर्ट्स में यह सामने आया है कि 75% से 90% तक किसान अब भी फार्मर आईडी रजिस्ट्रेशन से बाहर हैं। इसका सीधा असर यह है कि लाखों किसान पीएम किसान, फसल बीमा, कृषि अनुदान, बीज-खाद सब्सिडी और आपदा राहत जैसी योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं।

यह लेख किसानों, CSC संचालकों और ग्रामीण पाठकों के लिए पूरी तरह सरल और व्यवहारिक मार्गदर्शिका है, जिसमें फार्मर आईडी से जुड़ी हर जरूरी जानकारी दी गई है।

फार्मर आईडी एक यूनिक डिजिटल पहचान संख्या है, जिसके माध्यम से किसान की जमीन, फसल, बैंक खाता और सरकारी योजनाओं को एक प्लेटफॉर्म पर जोड़ा जाता है। इसे कई जगह Farmer Registry ID या किसान रजिस्ट्रेशन आईडी भी कहा जा रहा है।

सरल शब्दों में:-

फार्मर आईडी = किसान की डिजिटल पहचान

सरकार का उद्देश्य है कि:-

  • फर्जी लाभार्थियों को हटाया जाए
  • सही किसान तक सीधा लाभ पहुंचे
  • योजनाओं में पारदर्शिता आए
  • DBT (Direct Benefit Transfer) आसान हो

भविष्य में:-

  • पीएम किसान सम्मान निधि
  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
  • कृषि यंत्र अनुदान
  • आपदा सहायता
  • बीज/खाद सब्सिडी

जैसी योजनाओं का लाभ केवल फार्मर आईडी वाले किसानों को ही मिलेगा।

पूर्वजों के नाम से जमीन है। रैयत जोत-आबाद भी कर रहे हैं। फिर भी प्रशासन की ओर से आयोजित शिविर में किसानों का आईडी कार्ड नहीं बन रहा है। जमीन की जमाबंदी रैयतों के नाम से कायम नहीं होने पर फार्मर आईडी कार्ड बनाने में सबसे ज्यादा पेंच फंस रहा है। जबकि सरकार के निर्देश पर फार्मर आईडी कार्ड बनाने के लिए सभी अंचलों में कैंप आयोजित किया है। इसमें किसानों का रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है। इसके लिए उनके नाम से जमीन की जमाबंदी जरुरी है।

ऐसे में जमाबंदी नहीं होने पर जिले के 75 फीसदी किसानों का फार्मर कार्ड नहीं बन पायेगा। जिससे किसानों की परेशानी बढ़ गई है। जबकि कागजातों की पेंच नहीं फंसे उसके लिए राजस्व कर्मचारी व किसान सलाहकारों की भी ड्यूटी लगाई गई है। उधर, कागजातों को दुरुस्त कराने के लिए किसान अभिलेखागार, अंचल कार्यालय व डीसीएलआर कार्यालयों का चक्कर लगा रहे हैं।

जमाबंदी कायम कराने के लिए अंचलों में आवेदन भी दे रहे हैं। लेकिन राजस्व कर्मचारी से लेकर सीओ तक जमाबंदी कायम करने में विभिन्न कागजातों की मांग कर रैयतों की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। सरकार की ओर से वर्ष 2025 के 16 अगस्त से 20 सितंबर तक घर-घर विशेष महाअभियान चलाया गया था। लोगों की सुविधा के लिए प्रत्येक हल्का में दो-दो शिविर भी आयोजित हुई। शिविर के माध्यम से लोगों को चार तरह की सुविधाएं दी गई थी।

बता दें कि पहला त्रुटिपूर्ण जमाबंदी में सुधार करना, दूसरा छूटी हुई जमाबंदियों को नए सिरे से जमाबंदी कायम करना, तीसरे तरह की समस्या के लिए मृत जमाबंदीदार के उत्तराधिकारी दाखिल खारिज करना व चौथे में सहमति के आधार पर बंटवारा कर दाखिल खारिज कराने की सुविधा प्रदान की गई थी।

शिविर में आवेदकों को शपथ पत्र ली गई व संबंधित रैयत का नाम, पता एवं मोबाइल नंबर की जानकारी भी थी। इसमें जिले के 17 लाख 1 हजार 896 रैयतों का जमाबंदी वितरण किया था। लेकिन रैयतों के जमीनों की कागजात को दुरुस्त नहीं किया गया है जिसका खामियाजा 75 फीसदी से ज्यादा किसान यानी रैयत भुगत रहे हैं।

फार्मर आईडी कार्ड बनाने में विभाग का शर्त रोड़ा बन रहा है। किसान सम्मान निधि के देने के नाम पर व्यवस्था भटका रही है। नौतन अंचल के किसान नथुनी प्रसाद सिंह, प्रभु यादव, बृजकिशोर यादव, सुंदर साह, शंकर साह, चंद्रिका यादव, हरिहर यादव आदि किसानों का कहना है कि यह व्यवस्था सरकार की ढकोसला है। आम पब्लिक को बेवकूफ बनाया जा रहा है।

जिसके नाम से रसीद कटती होगी, उसी का फार्मर आईडी बनेगा। नरकटियागंज प्रखंड के बनवरिया निवासी भूलन साह ने बताया कि फार्मर रजिस्ट्री में किसान के नाम से जमाबंदी चाहिए पर जमीनी कागजात पूर्वन के नाम पर है। ऐसे में परेशानी झेलना पड़ रहा है।

सुबह में सर्वर डाउन होने से परेशानी हुई है। वहीं, इस मामले में पश्चिम चंपारण बेतिया के एडीएम राजीव रंजन सिन्हा ने बताया कि विशेष राजस्व अभियान के दौरान मिले आवेदनों का यथाशीघ्र निष्पादन करने का निर्देश सभी सीओ को दिया गया है। फार्मर आईडी कार्ड बनाने में किसी तरह की परेशानी नहीं, इसको लेकर कंट्रोल रुम बनाया गया है। कागजातों को लेकर आवश्यक निर्देश देकर कार्ड बनवाया जा रहा है।

किसानों को फार्मर रजिस्ट्रेशन कराने में कई तरह की परेशानी हो रही है। जिन किसानों का जमीन पूर्वजों के नाम पर है उनका फार्मर रजिस्ट्रेशन नहीं हो पा रहा है। मनेर के दियारा क्षेत्र में 90 प्रतिशत लोगों की जमीन की जमाबंदी पूर्वजों के नाम पर है।

रजिस्ट्रेशन के लिए किसानों के स्वयं के नाम से राजस्व रसीद एवं जमाबंदी भूमि का कागजात जरूरी है। इसके अलावा जमीन के कागजात एवं आधार कार्ड में दर्ज नाम या पिता के नाम में अंतर है तो किसानों का रजिस्ट्रेशन नहीं हो पा रहा है। इधर कुछ दिनों से एफआर पोर्टल में तकनीकी खराबी आने से भी पोर्टल काम नहीं कर रहा है, और रजिस्ट्रेशन एप नहीं खुल रहा है। कई किसान सलाहकार एवं समन्वयकों ने बताया कि शुक्रवार को भी एप नहीं खुला।

अंचल कर्मचारियों का कहना है है। कि दियारा क्षेत्र के करीब 90 फीसदी लोगों के पास जमीन का बंटवारा नहीं है। जमीन के कागजात किसी गोतिया पट्टीदार के पास है भी तो वो नहीं दे रहा है। जिससे लिखित बंटवारा नहीं हो पा रहा है। मौखिक बंटवारे के आधार पर जमीन पर रैयती अपने-अपने हिस्से पर खेती तो कर रहे हैं, लेकिन ऐसे रैयतों के नाम पर जमाबंदी कायम नहीं है। इस वजह से भी किसानों का रजिस्ट्रेशन में परेशानी हो रही है।

रजिस्ट्रेशन एप में कर्मचारियों को सिर्फ खेसरा नम्बर से जमीन जांच करने का ऑप्शन है। खाता एवं नाम से जांच करने का ऑप्शन एप में नहीं है, इस वजह से भी किसानों का रिकॉर्ड खोजने में कर्मचारियों को परेशानी हो रही है। वहीं किसान सलाहकार एवं समन्यवक किसानों का ई-केवाईसी तो कर दे रहे हैं लेकिन जब राजस्व कर्मचारी जांच कर रहे हैं तो उनके नाम से जमाबंदी नहीं मिल रही है और उनका एफआर नहीं हो पा रहा है।

अंचलाधिकारी पूजा कुमारी ने बताया कि गुरुवार को करीब दो सौ एवं शुक्रवार को 251 एवं शनिवार को 360 रैयती का एफआर किया गया है। अभी जिनका स्वयं के नाम पर जमाबंदी है उन्हीं का फार्मर रजिस्ट्रेशन हो रहा है। लेकिन स्वयं जमाबंदी रैयत के नाम पर होने के बाद ही एफआर सक्सेस हो रहा है। दियारा क्षेत्र में स्वयं जमाबंदी रैयत में 10 फीसदी लोग ही मिल रहे हैं।

बिहार के 90 लाख से ज्यादा किसानों में से सिर्फ 10.46 लाख की ही फार्मर आईडी बनी है। यह अबतक की स्थिति है। पीएम किसान सम्मान निधि से अब तक 75 लाख से अधिक किसान जुड़े हैं। लेकिन इनमें से भी 65 लाख किसानों की फार्मर आईडी नहीं बनी है।

पिछले दो दिनों में फॉर्मर आईडी बनाने में रिकॉर्ड उपलब्धि हुई। 9 जनवरी को दिनभर में 1.86 लाख फॉर्मर आईडी बनाई गई। पर अबतक के आंकड़े बता रहे कि किसान, सरकार के इस अभियान से दूर हैं। ये आईडी जरूरी इसलिए है कि क्योंकि इसके आधार पर ही किसानों को अब केंद्र और राज्य की सभी कल्याणकारी योजनाओं के पैसे मिलेंगे।

फार्मर आईडी बिहार में अपेक्षित रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। जिन किसानों को पहले से सरकारी लाभ मिल रहा था, वे भी नई व्यवस्था से नहीं जुड़ पा रहे। जमीनी स्तर पर अभियान का असर बेहद सीमित है। यदि यही रफ्तार रही, तो सभी किसानों को फार्मर आईडी से जोड़ने में वर्षों लग जाएंगे।

  • ऑनलाइन प्रक्रिया किसानों के लिए जटिल है, क्योंकि वे पूरी तरह अत्याधुनिक सिस्टम से अवगत नहीं हैं।
  • जमीन रिकॉर्ड की गड़बड़ी, आपसी बंटवारा नहीं होना बड़ी वजह।
  • खाता-खेसरा अपडेट नहीं,
  • जिसके जिम्मे जमीन, दस्तावेज में उसका नाम नहीं
  • नाम में स्पेलिंग मिस्टेक, खाता खेसरा के नंबर सही नहीं
  • पुश्तैनी जमीन के कारण ऑनलाइन रजिस्टर और जमीन दस्तावेजों में मेल नहीं
  • जानकारी की भारी कमी, फायदे गांवों में किसानों को स्पष्ट नहीं
  • सीएससी और कर्मियों की सीमित क्षमता, सेंटर पर भीड़, ऑपरेटरों की संख्या कम
  • भूमिहीन और बटाईदार किसान यानी बटाई पर खेती करने वाले जिनके नाम जमीन नहीं है।

सरकार ने साफ कर दिया है कि आगे चलकर केंद्र व राज्य की सभी योजनाओं का पैसा सिर्फ फार्मर आईडी से जुड़े खाते में ही जाएगा। यानी पीएम किसान, फसल बीमा, कृषि इनपुट सब्सिडी, आपदा राहत, बीज, खाद, सिंचाई अनुदान सब कुछ फार्मर आईडी से लिंक हो जाएगा। यदि किसान आईडी से बाहर रहे तो सरकारी लाभ से वंचित हो जाएंगे।

खेती किसानी से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि ऑफलाइन विकल्प, कैंप आधारित रजिस्ट्रेशन और जमीन रिकॉर्ड की समस्याओं का जब तक समाधान नहीं होगा, फार्मर आईडी अभियान पूरी तरह सफल नहीं हो सकता है। इसके लिए गांव-स्तर पर विशेष कैंप लगाना होगा। भूमि रिकॉर्ड सुधार तेजी से करना होगा। ऐसा नहीं होने पर फार्मर आईडी योजना किसानों के लिए कल्याणकारी की जगह बाधक बन सकती है।

सबसे बड़ी समस्या यह है कि:-

  • जमीन अब भी पिता/दादा के नाम है
  • बंटवारा नहीं हुआ
  • नामांतरण नहीं कराया गया
    • ऐसी स्थिति में पोर्टल किसान को मान्य नहीं करता।
  • आधार कार्ड में नाम अलग
  • जमाबंदी में अलग
  • बैंक खाते में स्पेलिंग अलग
    • यह मामूली गलती भी रजिस्ट्रेशन रोक देती है।
  • OTP नहीं आना
  • सर्वर डाउन
  • डेटा सेव न होना
  • आवेदन पेंडिंग रहना
    • ग्रामीण इलाकों में यह समस्या ज्यादा देखी जा रही है।
  • कई किसानों को पता ही नहीं कि फार्मर आईडी अनिवार्य है
  • CSC या कैंप में सही जानकारी नहीं मिल पाती
  • ऑनलाइन प्रक्रिया समझ नहीं आती

यदि आपकी फार्मर आईडी नहीं बनी तो:-

  • पीएम किसान की किस्त रुक सकती है
  • फसल बीमा क्लेम नहीं मिलेगा
  • कृषि अनुदान नहीं मिलेगा
  • आपदा सहायता (सूखा, बाढ़) नहीं मिलेगी
  • भविष्य की नई योजनाओं से बाहर हो जाएंगे
    • यानि सीधा आर्थिक नुकसान

फार्मर-आईडी रजिस्ट्रेशन के लिए आमतौर पर चाहिए:-

  1. आधार कार्ड
  2. जमीन की जमाबंदी / खतियान
  3. बैंक पासबुक
  4. मोबाइल नंबर (आधार से लिंक)
  5. पासपोर्ट साइज फोटो

ध्यान दें: सभी दस्तावेज़ों में नाम एक जैसा होना चाहिए।

  1. नजदीकी CSC केंद्र जाएं
  2. सभी दस्तावेज़ साथ ले जाएं
  3. ऑपरेटर से फार्मर आईडी रजिस्ट्रेशन कराएं
  4. रसीद/रजिस्ट्रेशन नंबर जरूर लें
  • पंचायत/प्रखंड स्तर पर विशेष कैंप लगाए जा रहे हैं
  • वहां राजस्व और कृषि विभाग के कर्मचारी मौजूद रहते हैं
  • मौके पर सुधार और रजिस्ट्रेशन संभव है
  • राज्य के किसान पोर्टल पर जाकर
  • Farmer Registration / Farmer ID विकल्प चुनें
  • जानकारी भरकर आवेदन सबमिट करें

यदि जमीन अपने नाम से नहीं है:-

  1. अंचल कार्यालय में नामांतरण आवेदन दें
  2. बंटवारे के दस्तावेज़ जमा करें
  3. रसीद सुरक्षित रखें
  4. जमाबंदी अपडेट होने के बाद ही फार्मर आईडी बनवाएं

बिना सही जमाबंदी के फार्मर आईडी बनना लगभग असंभव है।

  • गांव-गांव विशेष रजिस्ट्रेशन कैंप
  • जमाबंदी सुधार के लिए अलग अभियान
  • पोर्टल की तकनीकी समस्याओं का स्थायी समाधान
  • किसानों को जागरूक करने के लिए प्रचार
  • इंतजार न करें, आज ही प्रक्रिया शुरू करें
  • दस्तावेज़ों को पहले सही कराएं
  • CSC रसीद जरूर रखें
  • अफवाहों पर भरोसा न करें

फार्मर आईडी अब सिर्फ एक कार्ड नहीं, बल्कि किसानों के भविष्य की चाबी है। जिन किसानों की फार्मर आईडी नहीं बनी, वे आने वाले समय में लगभग हर सरकारी योजना से बाहर हो सकते हैं।

सभी किसानों से अपील है कि जल्द से जल्द फार्मर आईडी बनवाएं, ताकि किसी भी सरकारी योजना का लाभ बिना रुकावट मिलता रहे।

विवरणलिंक
किसान आईडी / फार्मर रजिस्ट्री आधिकारिक पोर्टलhttps://bhfr.agristack.gov.in/farmer-registry-bh
Farmer Registry Loginhttps://bhfr.agristack.gov.in
आधार कार्ड आधिकारिक वेबसाइटhttps://uidai.gov.in
बिहार भूमि (जमाबंदी देखे)https://biharbhumi.bihar.gov.in
PM किसान सम्मान निधि पोर्टलhttps://pmkisan.gov.in
कृषि विभाग बिहारhttps://dbtagriculture.bihar.gov.in
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग बिहारhttps://biharbhumi.bihar.gov.in
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