स्नातक का सिलेबस बदल गया | 7.5 CGPA से कम अंक लाने पर नहीं मिलेगा डिग्री -:- स्नातक छात्रों के लिए बड़ी खबर है। चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम के 8वें सेमेस्टर की पढ़ाई और सिलेबस को लेकर महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया है। खासकर उन विद्यार्थियों के लिए यह खबर बेहद महत्वपूर्ण है, जिनका छठे सेमेस्टर तक CGPA 7.5 से कम है।
BRA Bihar University (BRABU) में CBCS के तहत चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम के 8वें सेमेस्टर की संरचना में संशोधन को मंजूरी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, 6वें सेमेस्टर में 7.5 CGPA से कम प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को चौथे वर्ष की पढ़ाई से बाहर नहीं किया जाएगा, बल्कि उन्हें रिसर्च प्रोजेक्ट के स्थान पर तीन अतिरिक्त पेपर पढ़ने होंगे।
स्नातक छठे सेमेस्टर में 7.5 CGPA से कम आए तो रिसर्च की जगह पढ़ने होंगे तीन अतिरिक्त पेपर
चार वर्षीय स्नातक कोर्स में छठे सेमेस्टर का CGPA सातवीं-आठवीं सेमेस्टर की पढ़ाई में बड़ी भूमिका निभाएगा, लेकिन 75 से कम CGPA होने पर भी विद्यार्थी की चार साल की पढ़ाई नहीं रुकेगी। ऐसे विद्यार्थियों को आठवें सेमेस्टर में रिसर्च प्रोजेक्ट नहीं करना होगा। इसके बदले उन्हें चार-चार क्रेडिट के तीन अतिरिक्त पेपर पढ़ने होंगे। कोर्स पूरा करने पर उन्हें चार वर्षीय स्नातक की डिग्री मिलेगी और वे एक वर्षीय पीजी कोर्स में दाखिला ले सकेंगे।
विवि में 8वें सेमेस्टर के लिए तैयार सिलेबस एकेडमिक काउंसिल व सिंडिकेट से अप्रूव्ड
लोकभवन की ओर से स्नातक के 8वें सेमेस्टर के लिए ऑर्डिनेंस रेगुलेशन और 41 विषयों का सिलेबस तैयार कराया गया है। इसमें कहा गया है कि छठे सेमेस्टर तक 7.5 या उससे अधिक CGPA हासिल करने वाले विद्यार्थियों के लिए आठवें सेमेस्टर में रिसर्च का विकल्प रहेगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम को लेकर यह बदलाव किया गया है।
CBCS के तहत 8वें सेमेस्टर के स्नातक कोर्स की संरचना में संशोधन को मंजूरी
बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के नए गेस्ट हाउस में शनिवार को कुलपति की अध्यक्षता में एकेडमिक काउंसिल की बैठक हुई। इसमें लोकभवन के निर्देश के आलोक में CBCS के तहत आठवें सेमेस्टर के स्नातक पाठ्यक्रम की संरचना में किए गए संशोधन को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही AEDP कोर्स की पाठ्यक्रम संरचना में संशोधन को भी स्वीकृति मिली। एकेडमिक काउंसिल के बाद कुलपति की अध्यक्षता में सिंडिकेट की बैठक हुई। इसमें काउंसिल से पारित सभी एजेंडों को मंजूरी दे दी गई। अब चार वर्षीय स्नातक के आठवें सेमेस्टर के संशोधित ऑर्डिनेंस-रेगुलेशन को लोकभवन भेजा जाएगा।
41 विषयों के लिए तैयार हुआ सिलेबस
चार वर्षीय स्नातक कोर्स के आठवें सेमेस्टर के लिए 41 विषयों का सिलेबस तैयार किया गया है। इसमें भौतिकी, रसायनशास्त्र, गणित, जूलॉजी, बॉटनी, स्टेटिस्टिक्स, जियोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक्स, हिंदी, उर्दू, संस्कृत, अंग्रेजी, दर्शनशास्त्र, अर्थशास्त्र, इतिहास, भूगोल,समाजशास्त्र, मनोविज्ञान, राजनीति विज्ञान, होम साइंस, कॉमर्स एंड मैनेजमेंट, मैथिली, संगीत, ड्रामाटिक्स, भोजपुरी, एआईएच, पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, अंगिका, मगही, अरबी, इस्लामिक स्टडीज, पाली, प्राकृत, बंगाली, एंथ्रोपोलॉजी और रूरल इकोनॉमिक्स शामिल है।
लोकभवन के पत्र 1764 पर नहीं हुई चर्चा
सिंडिकेट बैठक में लोकभवन के पत्र संख्या 1764 के अनुपालन का मुद्दा भी उठा। कुलपति ने कहा कि पत्र सीधे कुलपति को संबोधित है, इसलिए इस पर सिंडिकेट में चर्चा नहीं होगी और इस पर निर्णय उनके स्तर से लिया जाएगा। वहीं अनुदानित कॉलेजों में स्थाई प्राचार्यों की नियुक्ति का दायित्व सिंडिकेट का होने का मुद्दा भी सदस्यों ने उठाया। जेएलएनएम कॉलेज, सुरसंड मामले में बताया गया कि फाइनेंशियल एडवाइजर की अध्यक्षता में गठित कमेटी की रिपोर्ट तैयार हो गई है। अगली सिंडिकेट बैठक में इस पर निर्णय लिया जाएगा। उससे पहले सभी सदस्यों को रिपोर्ट की प्रति उपलब्ध कराई जाएगी।
स्नातक-पीजी के सिलेबस की अब की जाएगी समीक्षा
बैठक में विश्वविद्यालय के स्नातक और पीजी सिलेबस की समीक्षा का भी निर्णय लिया गया। कुलपति ने सभी विभागाध्यक्षों को अपने-अपने विषय के पाठ्यक्रम की समीक्षा कर त्रुटि और संशोधन योग्य बिंदुओं की सूची विश्वविद्यालय को देने का निर्देश दिया है। पीजी विभागों में सिलेबस कमिटी को लेकर भी चर्चा हुई। कुछ सदस्यों ने विश्वविद्यालय स्तर पर सिलेबस कमिटी के गठन की बात उठाई, जबकि पीजी विभागाध्यक्षों ने कहा कि विभाग स्तर पर ही संबंधित विषयों की सिलेबस कमेटी गठित की जाएगी।
पहले समझिए 7.5 CGPA का पूरा मामला
चार वर्षीय UG यानी BA, B.Sc और B.Com जैसे स्नातक पाठ्यक्रम में छठे सेमेस्टर का CGPA आगे के शैक्षणिक विकल्पों के लिए महत्वपूर्ण हो गया है।
सरल भाषा में इसे इस तरह समझ सकते हैं—
| छठे सेमेस्टर का CGPA | आगे क्या होगा |
|---|---|
| 7.5 या उससे अधिक | चौथे वर्ष में Research/Research Project का विकल्प |
| 7.5 से कम | चौथे वर्ष की पढ़ाई जारी रख सकते हैं, लेकिन Research के स्थान पर अतिरिक्त पेपर |
| चार वर्ष पूरा | निर्धारित क्रेडिट और विश्वविद्यालय के नियम पूरे करने पर UG डिग्री |
| चार वर्षीय डिग्री के बाद | पात्रता होने पर 1 वर्षीय PG का रास्ता उपलब्ध हो सकता है |
यहां सबसे जरूरी बात यह है कि 7.5 CGPA से कम आने का मतलब यह नहीं है कि छात्र को कोई डिग्री ही नहीं मिलेगी।
हालिया बिहार विश्वविद्यालय संबंधी नियमों में 7.5 CGPA से कम वाले विद्यार्थियों को भी सातवें सेमेस्टर में आगे बढ़ने की अनुमति देने का प्रावधान सामने आया है। ऐसे विद्यार्थी सातवें और आठवें सेमेस्टर की पढ़ाई पूरी करके आवश्यक क्रेडिट हासिल करने पर स्नातक डिग्री प्राप्त कर सकते हैं।
7.5 CGPA से कम आने पर क्या बदलेगा?
अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम में छठे सेमेस्टर के CGPA का महत्व इसलिए बढ़ गया है क्योंकि इसी आधार पर यह तय होगा कि विद्यार्थी को Research वाला रास्ता मिलेगा या सामान्य चौथे वर्ष का वैकल्पिक अकादमिक रास्ता।
यदि छठे सेमेस्टर में CGPA 7.5 से कम है, तो विद्यार्थी को 8वें सेमेस्टर में Research Project/Dissertation के बजाय तीन अतिरिक्त पेपर पढ़ने होंगे।
अर्थात ऐसे विद्यार्थी चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम को पूरा कर सकते हैं, लेकिन उन्हें Research आधारित चौथे वर्ष का वही स्वरूप नहीं मिलेगा जो निर्धारित CGPA वाले विद्यार्थियों को मिलेगा।
7.5 CGPA या उससे अधिक वालों को क्या फायदा?
जिन विद्यार्थियों का छठे सेमेस्टर तक CGPA 7.5 या उससे अधिक रहता है, उनके लिए चौथे वर्ष में Research का रास्ता खुलता है।
चार वर्षीय UG के अंतिम चरण में Research Methodology, Research Project और Dissertation जैसे हिस्से महत्वपूर्ण हो जाते हैं। यही वजह है कि 7.5 CGPA को केवल एक सामान्य अंक नहीं, बल्कि Research-oriented academic progression की महत्वपूर्ण पात्रता के रूप में देखा जा रहा है।
बिहार में चार वर्षीय UG को लेकर संशोधित नियमों के तहत 7.5 से कम CGPA वाले विद्यार्थियों को भी चौथे वर्ष में आगे बढ़ने का विकल्प दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
8वें सेमेस्टर के लिए 41 विषयों का सिलेबस तैयार
आपके दिए गए अखबार की रिपोर्ट में बताया गया है कि चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम के 8वें सेमेस्टर के लिए 41 विषयों का सिलेबस तैयार किया गया है।
रिपोर्ट में जिन विषयों का उल्लेख किया गया है, उनमें प्रमुख रूप से—
- भौतिकी
- रसायनशास्त्र
- गणित
- जूलॉजी
- बॉटनी
- स्टेटिस्टिक्स
- जियोलॉजी
- इलेक्ट्रॉनिक्स
- हिंदी
- उर्दू
- संस्कृत
- अंग्रेजी
- दर्शनशास्त्र
- अर्थशास्त्र
- इतिहास
- भूगोल
- समाजशास्त्र
- मनोविज्ञान
- राजनीति विज्ञान
- होम साइंस
- कॉमर्स एंड मैनेजमेंट
- मैथिली
- संगीत
- ड्रामेटिक्स
- भोजपुरी
- पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन
- ओड़िया
- मगही
- अरबी
- इस्लामिक स्टडीज
- पाली
- प्राकृत
- बंगाली
- एंथ्रोपोलॉजी
- रूरल इकोनॉमिक्स आदि शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार 8वें सेमेस्टर के सिलेबस को विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत मंजूरी दी गई है।
CBCS के तहत 8वें सेमेस्टर की संरचना में बदलाव
यह पूरा बदलाव चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम और CBCS व्यवस्था के तहत हो रहा है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के बाद UG शिक्षा में 3-वर्षीय और 4-वर्षीय दोनों तरह के रास्ते, multiple exit और higher education में आगे बढ़ने के अलग-अलग विकल्प विकसित किए गए हैं। UGC ने भी Curriculum and Credit Framework for Undergraduate Programmes के माध्यम से flexible credit-based academic structure को बढ़ावा दिया है।
इसी व्यवस्था के तहत विश्वविद्यालयों को अपने UG पाठ्यक्रम, क्रेडिट, Research Project और चौथे वर्ष की संरचना में आवश्यक बदलाव करने पड़ रहे हैं।
क्या 7.5 से कम CGPA पर डिग्री नहीं मिलेगी?
नहीं। यह बात सही नहीं है।
यह सबसे महत्वपूर्ण clarification है।
7.5 CGPA से कम आने पर विद्यार्थी की डिग्री खत्म नहीं हो जाती।
बिहार में सामने आए संशोधित नियमों के अनुसार, 7.5 से कम CGPA वाले विद्यार्थियों को भी सातवें सेमेस्टर में आगे बढ़ने और सातवें-आठवें सेमेस्टर की पढ़ाई पूरी करने का रास्ता दिया गया है। आवश्यक क्रेडिट पूरे करने पर उन्हें स्नातक डिग्री मिल सकती है।
अंतर मुख्य रूप से Research वाले विकल्प में आता है।
इसलिए छात्रों को यह समझना चाहिए—
7.5 CGPA Research के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि 7.5 से कम होने पर स्नातक की डिग्री ही नहीं मिलेगी।
फिर 7.5 CGPA इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
इसका सबसे बड़ा कारण आगे की पढ़ाई और Research है।
UGC के PhD Regulations, 2022 के अनुसार, 4-वर्षीय/8-सेमेस्टर Bachelor’s degree के बाद PhD में प्रवेश चाहने वाले उम्मीदवार के लिए कम-से-कम 75% aggregate marks या grading system में उसके equivalent grade की आवश्यकता निर्धारित की गई है। कुछ निर्धारित आरक्षित/अन्य श्रेणियों के लिए 5% तक की relaxation का प्रावधान भी है।
इसका मतलब है कि चार वर्षीय UG के बाद सीधे PhD की पात्रता का रास्ता मौजूद है, लेकिन यह केवल डिग्री की अवधि पूरी करने से अपने-आप नहीं मिल जाता।
7.5 CGPA और Direct PhD का संबंध
चार वर्षीय Bachelor’s degree करने वाले विद्यार्थियों के लिए 7.5 CGPA की चर्चा इसलिए होती है क्योंकि कई विश्वविद्यालय अपने grading framework में 7.5 CGPA को 75% के equivalent threshold से जोड़ते हैं।
लेकिन यहां एक सावधानी जरूरी है:-
हर विश्वविद्यालय में CGPA को प्रतिशत में बदलने का तरीका एक जैसा नहीं होता।
इसलिए विद्यार्थी को केवल यह देखकर कि उसके पास 7.5 CGPA है, यह नहीं मान लेना चाहिए कि हर जगह वह स्वतः 75% के बराबर माना जाएगा। अंतिम equivalence विश्वविद्यालय/संस्थान के grading rules और संबंधित admission notification पर निर्भर कर सकती है।
UGC के नियम में मूल शर्त 75% aggregate या equivalent grade है।
क्या 7.5 CGPA से सीधे PhD मिल जाएगी?
नहीं।
7.5 CGPA होने का अर्थ यह नहीं है कि छात्र को बिना किसी अन्य प्रक्रिया के सीधे PhD में admission मिल जाएगा।
यह केवल PhD के लिए एक महत्वपूर्ण eligibility route है। इसके बाद संबंधित विश्वविद्यालय की admission प्रक्रिया, entrance test/NET अथवा अन्य लागू नियम और interview जैसी प्रक्रियाएं लागू हो सकती हैं।
UGC के नियमों में PhD admission के लिए विश्वविद्यालयों द्वारा National-level tests/fellowship या विश्वविद्यालय स्तर की entrance प्रक्रिया के माध्यम से प्रवेश का प्रावधान है।
उदाहरण के तौर पर UGC-NET के आधिकारिक information bulletin में भी 4-वर्षीय Bachelor’s degree वाले उम्मीदवारों के लिए 75% या equivalent grade की शर्त दी गई है।
7.5 CGPA से कम है तो क्या PhD का रास्ता पूरी तरह बंद है?
ऐसा भी नहीं है।
यदि विद्यार्थी 4-वर्षीय UG के बाद सीधे Bachelor’s-based PhD eligibility को पूरा नहीं करता, तो आगे Master’s degree के रास्ते से PhD की पात्रता हासिल की जा सकती है।
UGC PhD Regulations के अनुसार 1-वर्षीय Master’s degree के बाद 4-वर्षीय Bachelor’s degree वाले तथा 2-वर्षीय Master’s degree के बाद 3-वर्षीय Bachelor’s degree वाले उम्मीदवारों के लिए भी PhD eligibility का प्रावधान है, बशर्ते निर्धारित प्रतिशत/grade की शर्त पूरी हो।
इसलिए 7.5 से कम CGPA आने का अर्थ यह नहीं है कि विद्यार्थी जीवनभर PhD नहीं कर सकता।
चार वर्षीय UG के बाद 1 वर्षीय PG क्या है?
NEP 2020 के तहत उच्च शिक्षा में 4-Year UG + 1-Year PG का academic pathway विकसित किया गया है।
UGC के 2025 के UG-PG Regulations में PG programmes के लिए अलग-अलग duration structures की अनुमति दी गई है, जिसमें one-year postgraduate programme भी शामिल है।
इसका सामान्य academic structure इस तरह समझें—
3 वर्ष UG → 2 वर्ष PG
या
4 वर्ष UG → 1 वर्ष PG
हालांकि किसी खास विश्वविद्यालय में एक वर्षीय PG में admission के लिए संबंधित विश्वविद्यालय द्वारा तय eligibility, subject combination और programme-specific नियमों को देखना जरूरी होगा।
2026 में इस व्यवस्था का implementation भी शुरू हो चुका है। उदाहरण के लिए IGNOU ने 2026 में चार वर्षीय UG पूरा करने वाले विद्यार्थियों के लिए चुनिंदा विषयों में एक वर्षीय Master’s programmes शुरू किए हैं।
छात्रों के लिए आसान उदाहरण
मान लीजिए दो विद्यार्थी हैं—राहुल और अमन।
राहुल का CGPA 7.8 है
राहुल ने छठे सेमेस्टर तक 7.8 CGPA प्राप्त किया।
ऐसे विद्यार्थी के लिए चार वर्षीय UG में Research-oriented fourth year का विकल्प उपलब्ध हो सकता है। यदि वह संबंधित विश्वविद्यालय की सभी शर्तें पूरी करता है तो Research Project/Dissertation के माध्यम से आगे बढ़ सकता है।
अमन का CGPA 7.2 है
अमन का CGPA 7.2 है।
इसका मतलब यह नहीं कि उसकी पढ़ाई यहीं खत्म हो जाएगी। उपलब्ध संशोधित व्यवस्था के अनुसार वह चौथे वर्ष की पढ़ाई जारी रख सकता है और Research Project के स्थान पर निर्धारित तीन अतिरिक्त पेपर पढ़कर आवश्यक क्रेडिट पूरा कर सकता है।
अर्थात—
7.2 CGPA = डिग्री खत्म नहीं
बल्कि
7.2 CGPA = Research वाला रास्ता प्रभावित, वैकल्पिक अकादमिक रास्ता।
BRABU के छात्रों के लिए क्या महत्वपूर्ण है?
BRA Bihar University के चार वर्षीय UG विद्यार्थियों को विशेष रूप से अपने छठे सेमेस्टर के CGPA पर ध्यान देना चाहिए।
यदि आपका लक्ष्य केवल सामान्य स्नातक डिग्री प्राप्त करना है, तो 7.5 की शर्त को देखकर घबराने की जरूरत नहीं है।
लेकिन यदि आपका लक्ष्य—
- Research करना है,
- Honours with Research जैसी डिग्री/पथ चुनना है,
- चार वर्षीय UG के आधार पर आगे Research career बनाना है,
- UGC-NET/JRF के माध्यम से आगे बढ़ना है,
- या Bachelor’s degree के आधार पर PhD eligibility हासिल करना है,
तो 7.5 CGPA का महत्व काफी बढ़ जाता है।
छात्रों के लिए सलाह
इसलिए सोशल मीडिया पर चल रही इस बात पर भरोसा न करें कि “7.5 CGPA से कम आया तो डिग्री नहीं मिलेगी।” यह अधूरी जानकारी है।
सही बात यह है कि 7.5 CGPA से कम होने पर मुख्य असर Research वाले विकल्प पर पड़ता है, जबकि विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित वैकल्पिक पाठ्यक्रम, क्रेडिट और अन्य शर्तें पूरी करके छात्र चार वर्षीय UG की पढ़ाई पूरी कर सकता है।
BRABU की ओर से 8वें सेमेस्टर के विषयवार आधिकारिक syllabus/notification जारी होने के बाद प्रत्येक विषय में कितने पेपर, कितने credits और परीक्षा का pattern होगा, इसकी जानकारी और स्पष्ट होगी। विश्वविद्यालय स्तर के अंतिम नियम को ही admission और examination के समय आधार माना जाना चाहिए।
सबसे जरूरी निष्कर्ष
इस पूरे अपडेट को पांच बिंदुओं में समझिए—
- छठे सेमेस्टर में 7.5 CGPA एक महत्वपूर्ण threshold है।
- 7.5 या उससे अधिक होने पर Research-oriented fourth-year pathway का विकल्प मिलता है।
- 7.5 से कम होने पर भी चौथे वर्ष की पढ़ाई और डिग्री का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं होता; संशोधित व्यवस्था में वैकल्पिक पेपरों का प्रावधान किया गया है।
- चार वर्षीय UG के बाद 75% या equivalent grade होने पर UGC नियमों के अनुसार Bachelor’s degree के आधार पर PhD eligibility का रास्ता उपलब्ध है।
- चार वर्षीय UG के बाद पात्र विद्यार्थियों के लिए 1-Year PG का academic pathway भी NEP/UGC framework में मौजूद है।
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