बिहार में अब सडको पर चलने के लिए देन होगें प्रति किलोमीटर पर टैक्स

By: arcarrierpoint

On: Monday, July 6, 2026 8:13 PM

बिहार में अब सडको पर चलने के लिए देन होगें प्रति किलोमीटर पर टैक्स
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बिहार में अब सडको पर चलने के लिए देन होगें प्रति किलोमीटर पर टैक्स- बिहार में आने वाले समय में राज्य की सड़कों पर सफर करने वाले लोगों को अब प्रति किलोमीटर के हिसाब से टोल टैक्स देना पड़ सकता है। बिहार सरकार ने राज्य के स्वामित्व वाली सड़कों, स्टेट हाईवे (SH), बाईपास और बड़े पुलों पर टोल शुल्क लगाने को लेकर नई नीति तैयार की है। इसके तहत वाहन चालकों से तय दूरी के अनुसार शुल्क वसूला जाएगा। सरकार की ओर से ‘बिहार पथ उपयोगकर्ता शुल्क (दरों का निर्धारण एवं संग्रहण) नियमावली, 2026’ को मंजूरी दी गई है। इस नई व्यवस्था के तहत अलग-अलग प्रकार के वाहनों के लिए अलग-अलग प्रति किलोमीटर टोल टैक्स की दर तय की गई है।

हालांकि यह व्यवस्था तत्काल लागू नहीं होगी। पहले सड़कों पर वाहनों की संख्या, ट्रैफिक और अन्य जरूरी चीजों का सर्वे किया जाएगा। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से नई टोल व्यवस्था लागू करने की तैयारी की जाएगी।

पिछले कुछ वर्षों में सड़क निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर पर तेजी से काम हुआ है। राज्य में कई नए स्टेट हाईवे, बाईपास और बड़े पुल बनाए गए हैं। इन सड़कों के रखरखाव और बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सरकार अब यूजर चार्ज सिस्टम लागू करने की तैयारी में है। नई व्यवस्था के तहत जो वाहन जितनी दूरी तय करेगा, उसे उसी हिसाब से टोल शुल्क देना होगा। यानी अब निर्धारित टोल प्लाजा शुल्क की जगह दूरी आधारित शुल्क व्यवस्था लागू की जाएगी। इससे सरकार को सड़कों की मरम्मत, रखरखाव और नई सुविधाओं को विकसित करने में मदद मिलेगी।

नई नीति के तहत वाहनों की कैटेगरी के आधार पर अलग-अलग शुल्क तय किया गया है। छोटे वाहनों से कम और बड़े कमर्शियल वाहनों से ज्यादा शुल्क लिया जाएगा।

वाहन का प्रकारप्रति किलोमीटर टोल टैक्स
कार, जीप और वैन (हल्के वाहन)₹1.25 प्रति किलोमीटर
छोटे व्यावसायिक वाहन₹2.00 प्रति किलोमीटर
बस और दो एक्सल वाले ट्रक₹4.25 प्रति किलोमीटर
भारी वाहन (Heavy Vehicle)₹6.65 प्रति किलोमीटर
7 या उससे अधिक एक्सल वाले बड़े वाहन₹8.10 प्रति किलोमीटर

इस नियम के लागू होने के बाद वाहन मालिकों को यात्रा की दूरी के आधार पर भुगतान करना होगा।

नई व्यवस्था सभी सड़कों पर लागू नहीं होगी। सरकार ने इसके लिए कुछ नियम तय किए हैं। टोल टैक्स मुख्य रूप से इन जगहों पर लगाया जाएगा –

  • राज्य सरकार द्वारा निर्मित स्टेट हाईवे (SH)
  • बड़े बाईपास रोड
  • प्रमुख सड़क परियोजनाएं
  • बड़े पुल और उनसे जुड़ी सड़कें

सरकार पहले यह देखेगी कि किस सड़क पर रोजाना कितने वाहन चलते हैं और उससे कितना राजस्व प्राप्त हो सकता है।

सरकार ने कुछ सड़कों को टोल टैक्स से बाहर रखने का भी प्रावधान किया है। जिन स्टेट हाईवे की चौड़ाई 5.5 मीटर से कम होगी, वहां वाहन चालकों से कोई टोल टैक्स नहीं लिया जाएगा। यानी छोटी और कम चौड़ी सड़कों पर यात्रा करने वाले लोगों को इस व्यवस्था से राहत मिलेगी।

नई नीति के अनुसार बिहार में बने बड़े पुलों पर भी टोल शुल्क लगाया जाएगा। जिन पुलों की लंबाई 250 मीटर से ज्यादा होगी, वहां वाहन चालकों को टोल टैक्स देना होगा। इसमें पुल के साथ-साथ उससे जुड़े एप्रोच रोड की लंबाई भी शामिल की जाएगी और उसी के आधार पर शुल्क तय किया जाएगा।

नई टोल व्यवस्था को डिजिटल और आसान बनाने के लिए सरकार FASTag आधारित भुगतान सिस्टम लागू करेगी। सभी टोल प्लाजा पर डिजिटल तरीके से शुल्क लिया जाएगा। इससे वाहन चालकों को कैश भुगतान की जरूरत नहीं पड़ेगी और टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी लाइन भी कम होगी। FASTag के माध्यम से वाहन गुजरते ही निर्धारित शुल्क अपने आप कट जाएगा।

टोल प्लाजा के आसपास रहने वाले लोगों को राहत देने के लिए मासिक पास की सुविधा भी दी जाएगी। जो लोग टोल प्लाजा के 20 किलोमीटर के दायरे में रहते हैं, वे केवल ₹250 में मासिक पास बनवा सकेंगे। इस पास के जरिए स्थानीय वाहन मालिक एक महीने तक अनलिमिटेड यात्रा कर सकेंगे।

जो लोग नियमित रूप से लंबी दूरी की यात्रा करते हैं, उनके लिए राज्य स्तर का मासिक पास भी उपलब्ध होगा। इसकी कीमत ₹2500 प्रति महीना होगी। इस पास के जरिए वाहन चालक बिहार के राज्य टोल प्लाजा पर बिना बार-बार भुगतान किए यात्रा कर सकेंगे।

नई टोल नीति में किसानों का भी ध्यान रखा गया है। कृषि कार्यों में इस्तेमाल होने वाले पंजीकृत ट्रैक्टरों को टोल टैक्स से पूरी तरह छूट दी जाएगी। यानी खेती से जुड़े कामों के लिए उपयोग होने वाले ट्रैक्टरों को कोई शुल्क नहीं देना पड़ेगा।

बिहार में नई टोल टैक्स व्यवस्था तुरंत लागू नहीं की जा रही है। फिलहाल पथ निर्माण विभाग द्वारा सड़कों पर कैमरे लगाकर वाहनों की संख्या और ट्रैफिक का सर्वे किया जा रहा है। सर्वे पूरा होने के बाद सरकार यह तय करेगी कि किन-किन सड़कों और पुलों पर पहले चरण में टोल सिस्टम शुरू किया जाएगा। माना जा रहा है कि नवंबर 2026 तक इस व्यवस्था को जमीन पर उतारने की तैयारी की जा सकती है।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद निजी वाहन मालिकों और कमर्शियल वाहन चालकों दोनों पर असर देखने को मिलेगा। कार और छोटे वाहन चालकों को लंबी दूरी की यात्रा में अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है, जबकि बड़े ट्रक और भारी वाहनों को ज्यादा शुल्क देना होगा। हालांकि सरकार का कहना है कि इससे मिलने वाली राशि का उपयोग सड़कों को बेहतर बनाने और रखरखाव के लिए किया जाएगा।

बिहार सरकार की नई प्रति किलोमीटर टोल टैक्स व्यवस्था राज्य की सड़कों और पुलों के रखरखाव के उद्देश्य से लाई जा रही है। इसके तहत वाहन की श्रेणी और तय दूरी के अनुसार शुल्क देना होगा।

FASTag सिस्टम, मासिक पास और किसानों के लिए छूट जैसी सुविधाओं को भी इसमें शामिल किया गया है। आने वाले समय में सर्वे पूरा होने के बाद यह साफ होगा कि किन सड़कों पर सबसे पहले यह व्यवस्था लागू की जाएगी।

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