बिहार यूनिवर्सिटी स्नातक में अब नये फॉरमेट का मिलेगा मार्कशीट – जल्दी देखें

By: arcarrierpoint

On: Friday, October 9, 2026 4:40 PM

बिहार यूनिवर्सिटी स्नातक में अब नये फॉरमेट का मिलेगा मार्कशीट
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बिहार यूनिवर्सिटी स्नातक में अब नये फॉरमेट का मिलेगा मार्कशीट- बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों में चार वर्षीय स्नातक (सीबीसीएस पाठ्यक्रम) में नामांकित लाखों विद्यार्थियों के लिए राहत भरी खबर है. विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्नातक के अंकपत्र का नया फॉर्मेट तैयार कर लिया है. लंबे समय से फॉर्मेट तय न होने के कारण अटकी प्रिंटिंग प्रक्रिया को हरी झंडी दे दी गयी है.

विश्वविद्यालय का नामबीआरए बिहार विश्वविद्यालय (BRABU)
संबंधित कोर्सस्नातक (UG)
अपडेट का विषयमार्कशीट का नया प्रारूप
प्रमुख बदलावकुल प्राप्तांक, पेपर का नाम और विषय कोड
नई मार्कशीट का उद्देश्यअंकों और विषयों की जानकारी को स्पष्ट बनाना
मार्कशीट जारी करने की स्थितिविश्वविद्यालय की आधिकारिक सूचना से पुष्टि करें
आधिकारिक वेबसाइटhttps://www.brabu.net/

प्रिंटिंग एजेंसी को नया प्रारूप सौंपते हुए छपाई का काम तेज करने के निर्देश दिए गए हैं. नए प्रारूप में सबसे बड़ा बदलाव यह किया गया है कि छात्रों के अंकपत्र में सिर्फ ग्रेड या सीजीपीए नहीं, बल्कि उनके वास्तविक प्राप्तांक भी स्पष्ट रूप से दर्ज होंगे. इसके साथ ही विषय कोड और पेपर का पूरा नाम भी मार्कशीट में छापा जाएगा. इससे विद्यार्थियों को भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं, शिक्षक बहाली या अन्य नौकरियों में अंक सत्यापन के लिए विश्वविद्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे.

सीबीसीएस व्यवस्था लागू होने के बाद यूजीसी और लोकभवन की मंशा थी कि छात्रों के बीच हीन भावना न आए, इसलिए केवल ग्रेड और सीजीपीए देने की व्यवस्था रखी गई थी, लेकिन व्यवहार में जब छात्र बहाली व प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल हुए तो तकनीकी दिक्कतें खड़ी हो गईं. कई भर्ती एजेंसियां और आयोग मेरिट सूची तैयार करने के लिए सीधे वास्तविक अंकों (एग्जैक्ट मार्क्स) की मांग करते हैं. ग्रेड प्रणाली में 60 से 65 फीसदी या 66 से 70 फीसदी अंक पाने वाले दो अलग-अलग छात्रों को एक समान ही ग्रेड मिल जाता है, इससे अधिक अंक लाने वाले छात्र मेरिट में पिछड़ रहे थे. इसके अलावा सीजीपीए से प्रतिशत निकालने के फॉर्मूले को लेकर भी असमंजस बना रहता था. कहीं सीबीएसई की तरह 9.5 से गुणा करने का नियम था, तो कहीं 10 से गुणा कर 0.5 घटाया जाता है.

पटना यूनिवर्सिटी के मॉडल से लिया सबक पटना विश्वविद्यालय और पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय ने 2024 में ही अपना अंकपत्र फॉर्मेट फाइनल करते हुए सीजीपीए को 10 से गुणा करने का मानक अपनाया. अंकपत्र में सीजीपीए के साथ-साथ प्राप्तांक भी दर्ज किए. इसी तर्ज पर बीआरए बिहार विश्वविद्यालय में भी कमेटी गठित कर मंथन कराया गया. कमेटी ने तय किया कि दूसरे विश्वविद्यालयों की तरह बीआरएबीयू के छात्रों को भी परेशानी से बचाने के लिए अंक और सीजीपीए दोनों दर्ज करना ही सबसे उपयुक्त विकल्प है. छात्र को प्रत्येक सेमेस्टर में कितने अंक मिले और उसका सीजीपीए क्या रहा, दोनों अंकपत्र में अलग-अलग साफ दिखेंगे.

सिर्फ विषय का नाम नहीं, बल्कि पेपर का नाम भी लिखा रहेगा. उदाहरण के तौर पर इतिहास विषय में यदि पहला पेपर भारत की अवधारणा है, तो वह स्पष्ट रूप से दर्ज होगा. इससे उच्च शिक्षा या देश-विदेश के अन्य संस्थानों में जाने पर यह सिद्ध करना आसान होगा कि छात्र ने पाठ्यक्रम में क्या पढ़ा है. प्रत्येक पेपर का आधिकारिक विषय कोड भी अंकपत्र पर अंकित होगा, जिससे दस्तावेजों के सत्यापन में कोई परेशानी नहीं होगी. पहले अंक स्पष्ट न होने की स्थिति में छात्रों को नौकरी के समय विश्वविद्यालय से अलग से टेस्टिमोनियल या वेरिफिकेशन सर्टिफिकेट बनवाना पड़ता था, जिससे अब पूरी तरह निजात मिल जाएगी.


मुजफ्फरपुर बीआरए बिहार विश्वविद्यालय में शुक्रवार को सिंडिकेट की बैठक होगी. वित्त समिति से स्वीकृत सत्र 2027-28 के बजट को इसमें मुख्य एजेंडा के रूप में शामिल किया जाएगा. बैठक दोपहर दो बजे से नये अतिथि भवन में होगी. इसको लेकर गुरुवार को विश्वविद्यालय की ओर से सभी सदस्यों को एजेंडा भेज दिया गया. एजेंडा के अनुसार वित्तीय वर्ष 2027-2028 के लिए 1234.00 करोड़ रुपये का अनुमानित बजट तैयार किया गया है, जो गत वर्ष 2026-2027 के 1115.92 करोड़ रुपये की तुलना में 118.08 करोड़ रुपये अधिक है. तैयार बजट आकलन के अनुसार, इस बार 18.53 करोड़ रुपये के घाटे का अनुमान लगाया गया है. नए बजट में वैतनादि के लिए 400.24 करोड़ रुपये (वर्ष 2026-2027 में 338.97 करोड़ रुपये) और पेंशनादि के लिए 398.60 करोड़ रुपये (वर्ष 2026-2027 में 377.09 करोड़ रुपये) का आकलन किया गया है.

मासिक पेंशन एवं पारिवारिक पेंशन का बकाया भुगतान अद्यतन हो चुका है, लेकिन सप्तम पुनरीक्षित वेतनमान के रूप में मात्र चतुर्थ चरण के महाविद्यालयों का ही पेंशन एवं पारिवारिक अंतर की राशि बकाया है. इसके अलावा, वर्ष 2027-2028 में सरकार से विभिन्न मदों के अनुदान के लिए कुल 248.15 करोड़ रुपये की मांग की गयी है. इसमें अतिथि शिक्षकों के मानदेय के लिए 38.12 करोड़, आउटसोर्सिंग नॉन टीचिंग स्टाफ के लिए 9.21 करोड़, नए निर्माण एवं जीर्णोद्धार के लिए 114.55 करोड़, और छात्राओं तथा एससी-एसटी के विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लिए 26.01 करोड़ रुपये शामिल हैं. साथ ही, आंतरिक स्रोत से प्राप्त आय के विरुद्ध 187.45 करोड़ रुपये के व्यय का आकलन किया गया है, जिसमें विश्वविद्यालय परीक्षा मद के लिए 120.23 करोड़ रुपये मुख्य रूप से शामिल हैं.

विश्वविद्यालय पर वर्तमान में कई सेमेस्टर बीत जाने के कारण करीब चार से पांच लाख अंकपत्रों के पेंडिंग होने का भारी दबाव है. विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रिंटिंग एजेंसी को पहले सेमेस्टर से शुरुआत करते हुए क्रमशः दूसरे, तीसरे और चौथे सेमेस्टर के अंकपत्र तेजी से प्रिंट कर कॉलेजों को भेजने का निर्देश दिया है

नई मार्कशीट का उद्देश्य विद्यार्थियों को उनके परीक्षा परिणाम की स्पष्ट और विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराना है। पुराने प्रारूप में कुछ जानकारियों को समझने या अंकों का मिलान करने में परेशानी होने की बात सामने आई थी। इसी को ध्यान में रखते हुए मार्कशीट का नया प्रारूप तैयार किया गया है।

नई मार्कशीट में विद्यार्थियों के कुल प्राप्तांक को स्पष्ट रूप से दर्ज करने की व्यवस्था होगी। इससे विद्यार्थी यह समझ सकेंगे कि उन्होंने संबंधित परीक्षा में कुल कितने अंक प्राप्त किए हैं।

कुल प्राप्तांक की स्पष्ट जानकारी आगे की पढ़ाई, प्रवेश प्रक्रिया, प्रतियोगी परीक्षाओं और नौकरी के आवेदन के समय भी उपयोगी हो सकती है।

मार्कशीट में परीक्षा के पेपर का नाम भी स्पष्ट रूप से दर्ज करने की व्यवस्था बताई गई है। इससे विद्यार्थियों को यह पहचानने में आसानी होगी कि किस पेपर में कितने अंक प्राप्त हुए हैं।

यह बदलाव विशेष रूप से उन विद्यार्थियों के लिए उपयोगी हो सकता है, जिन्हें अपने विषयों और पेपर के विवरण का सत्यापन कराना पड़ता है।

नई मार्कशीट में विषय कोड दर्ज रहने की भी जानकारी दी गई है। विषय कोड के माध्यम से किसी विषय या पेपर की पहचान करना आसान होता है।

यदि किसी विद्यार्थी को प्रवेश, दस्तावेज सत्यापन या अन्य शैक्षणिक कार्यों के दौरान विषय से संबंधित जानकारी देनी हो, तो यह विवरण मददगार साबित हो सकता है।

मार्कशीट में संबंधित जानकारियां स्पष्ट होने से विद्यार्थियों, कॉलेजों और विश्वविद्यालय के कर्मचारियों को अंकों तथा विषयों का मिलान करने में सुविधा मिल सकती है। इससे दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होने की उम्मीद है।

हालांकि, नई मार्कशीट से सत्यापन की प्रक्रिया में कितना बदलाव होगा, इसकी विस्तृत जानकारी विश्वविद्यालय की आधिकारिक अधिसूचना से ही स्पष्ट होगी।

प्रकाशित समाचार में मार्कशीट के प्रारूप और विद्यार्थियों को होने वाली परेशानियों का भी उल्लेख किया गया है। पुराने प्रारूप में कुछ जानकारियों के स्पष्ट न होने से विद्यार्थियों को अंकपत्र और विषयों से संबंधित विवरण समझने में कठिनाई होने की बात सामने आई थी।

नए प्रारूप में अधिक स्पष्ट जानकारी दर्ज होने से ऐसी समस्याओं को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, मार्कशीट की वैधता, उसमें सुधार कराने की समय-सीमा या किसी विशेष अवधि तक दस्तावेज उपलब्ध कराने से जुड़े नियम अलग विषय हैं। इनके बारे में विश्वविद्यालय की आधिकारिक सूचना को ही अंतिम माना जाना चाहिए।

उपलब्ध समाचार के अनुसार, बिहार विश्वविद्यालय ने स्नातक की मार्कशीट का नया प्रारूप तैयार किया है और इसे छापने की तैयारी से संबंधित जानकारी सामने आई है। लेकिन सभी कॉलेजों में नई मार्कशीट वितरण शुरू होने की निश्चित तारीख की पुष्टि आधिकारिक सूचना से करना जरूरी है।

विद्यार्थियों को सलाह दी जाती है कि वे अपने कॉलेज के परीक्षा विभाग से संपर्क बनाए रखें। मार्कशीट जारी होने, कॉलेज में पहुंचने और वितरण की तारीख से संबंधित जानकारी कॉलेज के नोटिस बोर्ड या विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर देखी जा सकती है।

ध्यान दें: नया प्रारूप तैयार होने और सभी विद्यार्थियों को नई मार्कशीट मिलना शुरू होने के बीच अंतर हो सकता है। इसलिए वितरण की तारीख की पुष्टि किए बिना किसी निश्चित दिन का इंतजार न करें।

नई मार्कशीट व्यवस्था से BRABU के स्नातक विद्यार्थियों को लाभ मिलने की उम्मीद है। इसमें निम्नलिखित विद्यार्थी शामिल हो सकते हैं:

  • स्नातक के प्रथम, द्वितीय और तृतीय वर्ष के विद्यार्थी, जहां संबंधित परीक्षा और मार्कशीट व्यवस्था लागू हो।
  • स्नातक सत्र 2023–27, 2024–28, 2025–29 और अन्य संबंधित सत्रों के विद्यार्थी, विश्वविद्यालय के लागू नियमों के अनुसार।
  • वे विद्यार्थी जिन्हें परीक्षा परिणाम के बाद अंकपत्र की आवश्यकता है।
  • आगे की पढ़ाई, दूसरे विश्वविद्यालय में प्रवेश या नौकरी के लिए दस्तावेज तैयार कर रहे विद्यार्थी।

यह सूची संभावित लाभार्थियों की जानकारी के लिए है। किस सत्र और किस परीक्षा की मार्कशीट नए प्रारूप में जारी होगी, इसका निर्णय विश्वविद्यालय की आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार होगा।

नई मार्कशीट उपलब्ध होने पर विद्यार्थी नीचे दिए गए सामान्य चरणों का पालन कर सकते हैं।

  1. सबसे पहले अपने संबंधित कॉलेज के परीक्षा विभाग से संपर्क करें।
  2. पता करें कि आपकी परीक्षा की मार्कशीट कॉलेज में पहुंची है या नहीं।
  3. कॉलेज द्वारा मांगे जाने पर रजिस्ट्रेशन नंबर, रोल नंबर, एडमिट कार्ड या अन्य आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करें।
  4. निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अपनी मार्कशीट प्राप्त करें।
  5. मार्कशीट मिलने के बाद नाम, रोल नंबर, रजिस्ट्रेशन नंबर, विषय, विषय कोड और प्राप्तांकों की जांच करें।
  6. किसी प्रकार की गलती होने पर तुरंत कॉलेज या विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग को सूचित करें।

यदि मार्कशीट में कोई त्रुटि मिलती है, तो सुधार के लिए आवेदन देने से पहले संबंधित कॉलेज से आवश्यक दस्तावेजों और निर्धारित प्रक्रिया की जानकारी अवश्य लें।

  • BRABU में पेंशन एवं पारिवारिक पेंशन के बकाया भुगतान की स्थिति की समीक्षा की गई।
  • सप्तम पुनरीक्षित वेतनमान के तहत चतुर्थ चरण के महाविद्यालयों की पेंशन अंतर राशि का भुगतान बाकी है।
  • वित्तीय वर्ष 2027-28 के लिए सरकार से कुल ₹248.15 करोड़ के अनुदान की मांग की गई है।
  • अतिथि शिक्षकों के मानदेय के लिए ₹38.12 करोड़ प्रस्तावित हैं।
  • आउटसोर्सिंग नॉन टीचिंग स्टाफ के लिए ₹9.21 करोड़ की मांग की गई है।
  • नए निर्माण एवं भवनों के जीर्णोद्धार के लिए ₹114.55 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।
  • छात्राओं और SC-ST विद्यार्थियों की कल्याणकारी योजनाओं के लिए ₹26.01 करोड़ की मांग की गई है।
  • विश्वविद्यालय की आंतरिक आय के विरुद्ध ₹187.45 करोड़ के व्यय का आकलन किया गया है।
  • विश्वविद्यालय परीक्षा मद के लिए ₹120.23 करोड़ का व्यय प्रस्तावित है।
  • इन प्रस्तावों का उद्देश्य विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, प्रशासनिक और वित्तीय आवश्यकताओं के लिए बजट की व्यवस्था करना है।
  • अनुदान की मांग को अंतिम स्वीकृति या भुगतान नहीं माना जाना चाहिए; वास्तविक स्थिति आधिकारिक आदेश के बाद स्पष्ट होगी।
  • BRABU में पेंशन एवं पारिवारिक पेंशन के बकाया भुगतान की स्थिति की समीक्षा की गई।
  • सप्तम पुनरीक्षित वेतनमान के तहत चतुर्थ चरण के महाविद्यालयों की पेंशन अंतर राशि का भुगतान बाकी है।
  • वित्तीय वर्ष 2027-28 के लिए सरकार से कुल ₹248.15 करोड़ के अनुदान की मांग की गई है।
  • अतिथि शिक्षकों के मानदेय के लिए ₹38.12 करोड़ प्रस्तावित हैं।
  • आउटसोर्सिंग नॉन टीचिंग स्टाफ के लिए ₹9.21 करोड़ की मांग की गई है।
  • नए निर्माण एवं भवनों के जीर्णोद्धार के लिए ₹114.55 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।
  • छात्राओं और SC-ST विद्यार्थियों की कल्याणकारी योजनाओं के लिए ₹26.01 करोड़ की मांग की गई है।
  • विश्वविद्यालय की आंतरिक आय के विरुद्ध ₹187.45 करोड़ के व्यय का आकलन किया गया है।
  • विश्वविद्यालय परीक्षा मद के लिए ₹120.23 करोड़ का व्यय प्रस्तावित है।
  • इन प्रस्तावों का उद्देश्य विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, प्रशासनिक और वित्तीय आवश्यकताओं के लिए बजट की व्यवस्था करना है।
  • अनुदान की मांग को अंतिम स्वीकृति या भुगतान नहीं माना जाना चाहिए; वास्तविक स्थिति आधिकारिक आदेश के बाद स्पष्ट होगी।

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