बिहार बोर्ड मैट्रिक इंटर का परीक्षा पैटर्न बदल गया | अब रट कर नहीं समझ कर देना होगा जबाब

By: arcarrierpoint

On: Wednesday, November 4, 2026 6:07 PM

बिहार बोर्ड मैट्रिक इंटर परीक्षा
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बिहार बोर्ड मैट्रिक इंटर का परीक्षा पैटर्न बदल गया- बिहार बोर्ड समझ, तर्क और विश्लेषण पर आधारित प्रश्न पूछेगा। यह बच्चों की दक्षता की जांच करेगा। स्कूलों में दक्षता आधारित पढ़ाई पर भी जोर दिया जाएगा। बोर्ड द्वारा एनसीईआरटी-परख द्वारा तैयार राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) आधारित प्रश्नों के पैटर्न का इस्तेमाल करेगा। परख के द्वारा बाल वाटिका से लेकर प्लस टू तक के लिए प्रश्नों का – पूरा बैंक और परफॉर्मा तैयार किया गया है।

बोर्ड का नामबिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB)
परीक्षा का नामबिहार बोर्ड मैट्रिक एवं इंटर वार्षिक परीक्षा
संबंधित कक्षाएं10वीं और 12वीं
परीक्षा वर्ष2027
मुख्य उद्देश्यविद्यार्थियों की वास्तविक समझ का आकलन
आधिकारिक जानकारीCLICK HERE

हालांकि बोर्ड उसे अपने 10वीं और 12वीं के बोर्ड परीक्षाओं में लागू करेगी। पैटर्न को लेकर मंगलवार को होटल चाणक्या में वर्कशॉप की शुरुआत हुई। यह पांच दिनों तक चलेगी। इसमें राज्य भर से स्कूलों के शिक्षक शामिल हो रहे हैं। ये मास्टर ट्रेनर बनेगा और अपने-अपने क्षेत्र के शिक्षकों को इस संबंध में ट्रेंड करेंगे। यह पैटर्न जल्द लागू करने की तैयारी है।

इस वर्कशॉप का उद्देश्य यह है कि अब ऐसे सवाल पूछे जाएंगे, जिनसे यह परखा जा सके कि विद्यार्थी ने विषय को कितना समझा है और सीखी गई बातों का इस्तेमाल वास्तविक जीवन में कैसे कर सकता है। परख के रिसोर्स पर्सन अमनदीप ने बताया कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत अब तक देश के 27 शिक्षा बोडों में काम पूरा हो चुका है। बिहार देश का 28वां बोर्ड है, जहां इसकी शुरुआत हुई है। कार्यशाला में बाल वाटिका से 12वीं तक के लिए कौशल और दक्षता आधारित पाठ्यक्रम के साथ नए प्रश्नपत्र पैटर्न की जानकारी दी जा रही है।

अभी 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में एक तय पैटर्न पर सवाल पूछे जाते हैं। प्रश्नपत्र तैयार करने में भी पिछले तीन से पांच वर्षों के प्रश्नों को आधार बनाया जाता है। नई शिक्षा नीति के तहत इस व्यवस्था को बदलने की तैयारी है। अब प्रश्नपत्रों में दक्षता आधारित सवालों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके लिए देशभर के शिक्षा बोडों के लिए समतुल्य क्वेश्चन बैंक तैयार किया जा रहा है। इसमें अलग-अलग तरह के प्रश्नों और उनकी प्रकृति की जानकारी होगी। राज्य के बोर्ड इस बैंक की मदद से नए तरीके के सवाल तैयार कर सकेंगे। आने वाले वर्षों में इसे सभी बोडों की परीक्षाओं में लागू करने की योजना है।

कार्यशाला में शिक्षकों को रटकर पढ़ाने और पढ़ने की परंपरा से बाहर निकालने पर जोर दिया जाएगा। उन्हें ऐसे सवाल तैयार करना सिखाया जाएगा, जिनसे बच्चों की विषय पर पकड़, तार्किक क्षमता, आलोचनात्मक सोच और सीखे गए ज्ञान के व्यावहारिक इस्तेमाल का आकलन हो सके।

बिहार बोर्ड की परीक्षाओं में अब रटकर जवाब देने की परंपरा बदलने वाली है. नयी शिक्षा नीति के तहत बाल वाटिका से लेकर 12वीं तक के पाठ्यक्रम और प्रश्नपत्रों का स्वरूप बदला जायेगा. अब प्रश्नपत्रों में ऐसे सवाल पूछे जायेंगे. जिनसे विद्यार्थियों की विषयों की समझ, आलोचनात्मक चिंतन और वास्तविक जीवन में ज्ञान के उपयोग की क्षमता का आकलन किया जा सकेगा. इस दिशा में मंगलवार को शहर के एक स्थानीय होटल में एनसीइआरटी के परख की ओर से पांच दिवसीय कार्यशाला की शुरुआत की गयी.

इसमें बिहार विद्यालय परीक्षा समिति, एससीइआरटी और चयनित 110 मास्टर ट्रेनर भाग ले रहे हैं. परख के रिसोर्स पर्सन अमनदीप ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत अब तक देश के 27 शिक्षा बोर्डों में कार्य पूरा हो चुका है. बिहार बोर्ड देश का 28वां बोर्ड है जहां मंगलवार से कार्यशाला शुरू की गयी है. कार्यशाला में बाल वाटिका से लेकर 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए कौशल और दक्षता आधारित पाठ्यक्रम तैयार करने के साथ प्रश्नपत्रों के नये पैटर्न की जानकारी दी जा रही है.

अमन दीप ने बताया कि वर्तमान में 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में लगभग एक तय पैटर्न पर प्रश्न पूछे जाते हैं. प्रश्नपत्रों की तैयारी में भी पिछले तीन से पांच वर्षों के प्रश्नों को आधार बनाया जाता है. नयी शिक्षा नीति के तहत इस व्यवस्था में बदलाव किया जा रहा है. अब प्रश्नपत्र पूरी तरह दक्षता आधारित होंगे. इसके लिए देशभर के शिक्षा बोर्डों के लिये एक समतुल्य क्वेश्चन बैंक तैयार किया जा रहा है.

सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक सत्र 2027-28 से विद्यार्थियों को दक्षता आधारित प्रश्नों से रूबरू कराया जायेगा. कक्षाओं में भी शिक्षकों का जोर बच्चों की समझ और योग्यता के अनुरूप सवाल पूछने पर होगा. कार्यशाला में मास्टर ट्रेनरों को मूल्यांकन के नियमों और मानकों की विस्तृत जानकारी दी जायेगी ताकि देश के सभी शिक्षा बोडों में मूल्यांकन प्रक्रिया में एकरूपता और समानता सुनिश्चित की जा सके.

कार्यशाला मेंशिक्षकों को रटकर पढ़ने और पढ़ाने की प्रणाली से दूर करने का प्रशिक्षण दिया जायेगा. ऐसे प्रश्न तैयार करने की जानकारी दी जायेगी जिससे समझ, विश्लेषणात्मक एवं आलोचनात्मक सोच और वास्तविक जीवन में सीखे गये ज्ञान के अनुप्रयोग की क्षमता का आकलन किया जा सकेगा

बिहार बोर्ड की परीक्षा में प्रस्तावित बदलाव का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों की वास्तविक समझ और योग्यता को परखना है। इसके तहत निम्नलिखित बातों पर अधिक जोर दिया जा सकता है:

  • रटने के बजाय समझने पर जोर: विद्यार्थियों को केवल उत्तर याद करने के बजाय विषय को अच्छी तरह समझकर पढ़ना होगा।
  • तर्क आधारित प्रश्न: विद्यार्थियों से किसी घटना या नियम के पीछे का कारण पूछा जा सकता है, ताकि उनकी सोचने की क्षमता का पता चले।
  • विज्ञान में व्यावहारिक समझ: केवल परिभाषा याद करना पर्याप्त नहीं होगा। जैसे, पौधों को धूप नहीं मिलने पर उनके विकास पर क्या असर पड़ेगा और क्यों।
  • गणित में सूत्रों का इस्तेमाल: केवल सूत्र याद करने के बजाय यह समझना होगा कि किस सवाल में कौन-सा सूत्र लगाना है।
  • सामाजिक विज्ञान में विश्लेषण: इतिहास, भूगोल और अन्य विषयों में घटनाओं के कारण, परिणाम और प्रभाव को समझना जरूरी होगा।
  • हिंदी और अंग्रेजी में समझ: गद्यांश या अनुच्छेद को पढ़कर उसका अर्थ समझना और उससे संबंधित सवालों के सही जवाब देना महत्वपूर्ण होगा।
  • किसी उदाहरण, घटना या जानकारी के आधार पर सवाल पूछे जा सकते हैं, जिनका जवाब विषय की समझ से देना होगा।

ध्यान दें: इस बदलाव का उद्देश्य परीक्षा को कठिन बनाना नहीं, बल्कि यह जांचना है कि विद्यार्थी ने पढ़ाई को कितना समझा है और सीखे हुए ज्ञान का इस्तेमाल कैसे कर सकता है।

बिहार बोर्ड की पुरानी परीक्षा प्रणाली में भी ऑब्जेक्टिव, लघु उत्तरीय और दीर्घ उत्तरीय प्रश्न पूछे जाते रहे हैं। विद्यार्थियों को प्रश्नों के निर्धारित अंक के अनुसार उत्तर लिखने होते थे। अलग-अलग विषयों में प्रश्नों की संख्या, अंक विभाजन और विकल्पों का स्वरूप अलग हो सकता था।

परीक्षा की तैयारी करते समय विद्यार्थी अक्सर महत्वपूर्ण प्रश्नों की सूची बनाते थे। पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों को हल करते थे और बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर याद करते थे। कई विद्यार्थी गाइड और नोट्स की मदद से ऐसे उत्तर तैयार करते थे, जिन्हें परीक्षा में लगभग उसी रूप में लिखा जा सके।

यह तरीका पूरी तरह गलत नहीं था। परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए पाठ्यक्रम का अध्ययन, उत्तर लेखन का अभ्यास और पिछले प्रश्नपत्रों को हल करना आज भी उपयोगी है। समस्या तब पैदा होती है, जब विद्यार्थी बिना विषय को समझे केवल उत्तर याद करने पर निर्भर हो जाता है। मान लीजिए, गणित में किसी सवाल का हल विद्यार्थी ने याद कर लिया। यदि परीक्षा में उसी सवाल के आंकड़े बदल दिए जाएं या सवाल को दूसरे तरीके से पूछा जाए, तो वह उलझ सकता है। विज्ञान में किसी परिभाषा को याद करने वाला विद्यार्थी उसके व्यावहारिक उपयोग के बारे में पूछे गए सवाल का उत्तर देने में कठिनाई महसूस कर सकता है।

इसी तरह सामाजिक विज्ञान में किसी ऐतिहासिक घटना की तारीख याद होना जरूरी है, लेकिन उस घटना के कारण, प्रभाव और महत्व को समझना भी उतना ही जरूरी है। नई शिक्षा नीति के अनुरूप दक्षता आधारित शिक्षा का जोर इसी अंतर को कम करने पर है।

समाचारों में सामने आई जानकारी के आधार पर प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में निम्नलिखित पहलुओं पर अधिक जोर देखने को मिल सकता है।

1. रटने के बजाय विषय को समझने पर जोर

अब पढ़ाई करते समय केवल यह याद रखना पर्याप्त नहीं होगा कि किताब में क्या लिखा है। विद्यार्थी को यह भी समझना होगा कि किसी तथ्य का अर्थ क्या है और वह वास्तविक जीवन में कैसे उपयोगी हो सकता है।

उदाहरण के लिए, यदि भूगोल में वर्षा के बारे में पढ़ाया गया है, तो विद्यार्थी को वर्षा की परिभाषा के साथ-साथ कृषि, जल संसाधन और पर्यावरण पर उसके प्रभाव को भी समझना चाहिए।

2. तर्क और विश्लेषण पर आधारित प्रश्न

ऐसे प्रश्नों में विद्यार्थियों से किसी तथ्य के पीछे का कारण बताने, दो स्थितियों की तुलना करने या किसी निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए कहा जा सकता है।

उदाहरण के लिए, यदि किसी क्षेत्र में लगातार पेड़ों की कटाई हो रही है, तो इससे पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ सकते हैं? विद्यार्थी को अपने उत्तर में मिट्टी का कटाव, तापमान, वर्षा चक्र और जैव विविधता जैसे विषयों की समझ का उपयोग करना होगा।

3. परिस्थिति आधारित प्रश्न

परिस्थिति आधारित प्रश्नों में विद्यार्थियों के सामने कोई उदाहरण, घटना, आंकड़ा, चित्र या अनुच्छेद दिया जा सकता है। उसके आधार पर सवालों का उत्तर देना होता है।

इस तरह के प्रश्नों में उत्तर सीधे किताब की किसी एक पंक्ति में नहीं मिलता। विद्यार्थी को दी गई जानकारी पढ़कर, समझकर और संबंधित विषय के ज्ञान का उपयोग करके जवाब देना होता है।

4. सीखी हुई जानकारी का व्यावहारिक उपयोग

नई शिक्षा नीति के अनुरूप पढ़ाई में ज्ञान को वास्तविक जीवन से जोड़ने पर जोर दिया जाता है। इसका असर प्रश्न निर्माण पर भी पड़ सकता है।

उदाहरण के लिए, गणित में प्रतिशत पढ़ने वाले विद्यार्थी को छूट, लाभ-हानि या दैनिक जीवन में प्रतिशत के उपयोग से संबंधित प्रश्न समझने चाहिए। इसी तरह विज्ञान में ऊर्जा के स्रोत पढ़ने के बाद उनके लाभ, सीमाओं और उपयोग को समझना उपयोगी होगा।

5. मूल्यांकन प्रणाली में एकरूपता

समाचारों के अनुसार, मूल्यांकन प्रणाली में एकरूपता लाने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह है कि विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच निर्धारित मानकों के अनुरूप हो और उनके उत्तरों का मूल्यांकन अधिक व्यवस्थित तरीके से किया जा सके।

हालांकि, वास्तविक अंक देने के नियम, उत्तरों के मूल्यांकन की विस्तृत प्रक्रिया और किसी वैकल्पिक उत्तर को स्वीकार करने के मानक संबंधित बोर्ड के निर्देशों पर निर्भर करेंगे।

समाचारों के अनुसार, कक्षा 10वीं के प्रश्नपत्रों को भी समझ और दक्षता आधारित बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसलिए मैट्रिक के विद्यार्थियों को सभी अध्याय अच्छी तरह समझकर पढ़ने चाहिए।

हालांकि, परीक्षा 2027 में प्रश्नों की संख्या, अंक विभाजन और प्रश्नपत्र के स्वरूप में क्या बदलाव होगा, इसकी पुष्टि आधिकारिक मॉडल पेपर और बोर्ड के निर्देश से ही करें।

इंटर के विद्यार्थियों को भी विषयों की मूल अवधारणाओं, तर्क और विश्लेषण पर ध्यान देना चाहिए।

विज्ञान के विद्यार्थियों को नियम, सूत्र और उनके उपयोग समझने चाहिए। कला के विद्यार्थियों को घटनाओं के कारण और परिणाम पढ़ने चाहिए, जबकि वाणिज्य के विद्यार्थियों को विषयों के नियमों और व्यावहारिक उदाहरणों का अभ्यास करना चाहिए।

इंटर परीक्षा 2027 के लिए लागू होने वाले वास्तविक बदलावों की पुष्टि आधिकारिक सूचना से करना जरूरी है।

प्रश्नपत्र को समझ आधारित बनाने का अर्थ यह नहीं है कि ऑब्जेक्टिव प्रश्न समाप्त हो जाएंगे या उनकी संख्या निश्चित रूप से कम हो जाएगी।

किसी अनुच्छेद को पढ़कर सही विकल्प चुनना या किसी परिस्थिति के आधार पर उत्तर देना भी दक्षता आधारित प्रश्न हो सकता है। इसलिए विद्यार्थियों को ऑब्जेक्टिव और सब्जेक्टिव, दोनों प्रकार के प्रश्नों का अभ्यास जारी रखना चाहिए।

नहीं, गाइड और महत्वपूर्ण प्रश्न अभी भी दोहराव के लिए उपयोगी हैं। लेकिन केवल कुछ प्रश्न याद करके पूरे पाठ्यक्रम को छोड़ देना सही रणनीति नहीं है।

विद्यार्थियों को पहले पाठ्यपुस्तक पढ़नी चाहिए, फिर महत्वपूर्ण प्रश्नों का अभ्यास करना चाहिए। इससे प्रश्नों का तरीका बदलने पर भी उत्तर देने में आसानी होगी।

विद्यार्थी अभी से अपनी पढ़ाई में कुछ जरूरी बदलाव कर सकते हैं।

  1. पाठ्यपुस्तक पढ़ें: प्रत्येक अध्याय को अच्छी तरह समझें।
  2. नियमित अभ्यास करें: रोज ऑब्जेक्टिव और सब्जेक्टिव प्रश्न हल करें।
  3. अपने शब्दों में उत्तर लिखें: उत्तर को स्पष्ट और सरल तरीके से लिखने की आदत डालें।
  4. मॉडल पेपर हल करें: आधिकारिक मॉडल पेपर से प्रश्नों के स्वरूप को समझें।
  5. कमजोर विषयों पर ध्यान दें: जिन अध्यायों में कठिनाई होती है, उनका दोबारा अभ्यास करें।
  6. समय का ध्यान रखें: निर्धारित समय में प्रश्नपत्र हल करने की कोशिश करें।
  • गणित: सूत्र याद करने के साथ उनका इस्तेमाल करना सीखें।
  • विज्ञान: नियम, कारण, परिणाम और प्रयोगों को समझें।
  • सामाजिक विज्ञान: घटनाओं, तिथियों, कारणों और परिणामों का अध्ययन करें।
  • हिंदी: पाठ का भाव समझें और अपने शब्दों में उत्तर लिखें।
  • अंग्रेजी: व्याकरण, गद्यांश और लेखन का नियमित अभ्यास करें।

FAQs: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न 1: क्या बिहार बोर्ड परीक्षा 2027 का पैटर्न बदल गया है?

उत्तर: प्रश्नपत्रों को समझ आधारित बनाने की दिशा में काम किए जाने की खबर है। अंतिम बदलावों की पुष्टि आधिकारिक निर्देशों से करें।

प्रश्न 2: क्या अब रटकर परीक्षा नहीं दे सकते हैं?

उत्तर: याद करना भी जरूरी है, लेकिन विषय को समझना और उसका उपयोग करना भी महत्वपूर्ण होगा।

प्रश्न 3: क्या ऑब्जेक्टिव प्रश्न कम हो जाएंगे?

उत्तर: इसकी आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। समझ आधारित प्रश्न ऑब्जेक्टिव और सब्जेक्टिव, दोनों प्रकार के हो सकते हैं।

प्रश्न 4: मैट्रिक और इंटर परीक्षा 2027 की तैयारी कैसे करें?

उत्तर: पाठ्यपुस्तक पढ़ें, सभी अध्याय समझें, प्रश्नों का अभ्यास करें और आधिकारिक मॉडल पेपर हल करें।

प्रश्न 5: नया परीक्षा पैटर्न कहां देखें?

उत्तर: बिहार बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट https://biharboardonline.bihar.gov.in/ पर संबंधित मॉडल पेपर और नोटिस देखें।

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