अगर आपके संबंध अच्छे नहीं है तो जीवन में नहीं मिलेगी सफलता
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अगर आपके संबंध अच्छे नहीं है तो जीवन में नहीं मिलेगी सफलता

अगर आपके संबंध अच्छे नहीं है तो जीवन में नहीं मिलेगी सफलता:-आप अपनी दुनिया ठीक करिए, बाकी दुनिया खुद-ब-खुद ठीक हो जाएगी। मतलव खुद को एडजस्ट करिए, बाकी दुनिया खुद उस हिसाब से हो जाएगी। यूक्रेन, इजराइल या बाकी दुनिया की चिंता करने से वहां के हालात ठीक नहीं होने वाली। शिकायत करते हुए जीवन मत जिएं। अंग्रेजी में एक कहावत है कि मैन इज वॉर्न क्राइंग… मतलब व्यक्ति रोते-रोते पैदा होता है, फरियाद करते-करते जीता है और पूर्ण असंतोष के साथ मरता है। सवाल है कि अपने आप को ठीक करना मतलब क्या है?

पहली बात, आप जो भी काम करते हों, फिर चाहे नौकरी, व्यवसाय या कोई सेवा कार्य। उसमें नैतिकता यानी एथिक्स के साथ पुरुषार्थ करें। परिश्रमी बनें। जब काम होता है, तो लोग काम करते हैं। लेकिन काम की एक आदत सी होनी चाहिए। हमारी सोच होनी चाहिए कि जब तक मैं आठ घंटे काम के लिए नहीं दूंगा, मुझे खाने-पीने और सोने का भी अधिकार नहीं है। दो दशक पुराना एक वाकिया है। तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन भारत आए थे। तव हैदराबाद की हाइटेक सिटी में उनका आईटी पेशेवरों के लिए एक कार्यक्रम था। उसमें बिल क्लिंटन ने कहा कि मुझे बताया गया है कि भारत में 54 करोड़ युवा हैं, जिनकी आयु 15 से 35 के बीच है।

उन्होंने कहा कि अगर ये 54 करोड़ युवा रोज 8 घंटे या 4 घंटे भी नैतिकता के साथ काम करें तो भारत को विकसित होने से कोई भी नहीं रोक सकता। जब नैतिकता के साथ कोई काम किया जाता है, तो छोटे से सॉरी संस्का छोटा काम भी बड़ा बन जाता है और नैतिकता नहीं हो तो बड़े से बड़ा काम भी छोटा बनकर रह जाता है। आप 500 महापुरुषों का जीवन पढ़ें, प्रेरक लोगों की कहानियां पढ़ें, आपको समझ आएगा कि एथिक्स, वैल्यू और उच्च चरित्र ने ही उन्हें उस ऊंचाई पर पहुंचाया। वरना इन दिनों ऐसे कई उदाहरण सुनने को मिल जाएंगे कि बड़े पदों पर मौजूद लोगों को एथिक्स की कमी के कारण पद छोड़ना पड़ा। रोज सुबह उठकर खुद से कहिए मैं जीवन में कोई भी गलत काम नहीं करूंगा। इस तरह आप ठीक होंगे तो आपकी दुनिया भी ठीक हो जाएगी।

दूसरी बात, कार्य के बाद आती है लोगों और परिस्थितियों के साथ आपका अभिगम यानी व्यवहार। भले ही दो-चार लोगों से आपका परिचय हो या 500 लोगों के साथ आप रोज काम करते हों, या आपके सहकर्मी। उनके साथ आपका व्यवहार और रिश्ता ही आपकी प्रगति का बड़ा कारण बन सकता है। प्रबंधन गुरु ऑग मेंडिनो कहते हैं कि बिजनेस में 90 फीसदी ग्रोथ आपके मानवीय संबंधों पर टिकी होती है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने दस हजार लोगों का एक सर्वे किया। इसमें सामने आया कि आपकी उन्नति में लिखाई पढ़ाई, अनुभव और कला आपकी सिर्फ 15 फीसदी मदद कर सकती है।

बाकी 85 फीसदी योगदान लोगों के साथ आपका मानवीय संबंधों पर निर्भर है। इसलिए अपने व्यवहार में हमेशा नम्रता और विवेक रखिए। क्योंकि 21वीं सदी में आप बुद्धि से किसी को नहीं जीत पाएंगे क्योंकि हर तीसरा व्यक्ति किसी न किसी क्षेत्र में आपसे 21वीं सदी में यदि किसी व्यक्ति को जीतना है, जीवनभर उसके साथ अच्छे संबंध रखने हैं तो हर किसी के साथ नम्रता और अच्छा व्यवहार रखना बेहद जरूरी है।

। विनम्रता रखने में व्यक्ति की उम्र या पद आड़े नहीं आना चाहिए। अपने से छोटा हो या बड़ा, उसके साथ वैसा ही व्यवहार रखिए। प्रमुख स्वामी महाराज को किसी ने पत्र लिखा और आग्रह किया कि आप उसमें एक वाक्य अंग्रेजी में लिखिएगा “आई ब्लेस यू’। प्रमुख स्वामी महाराज पढ़े- लिखे नहीं थे। किसी संत की मदद ली और लिखा आई ब्लेस यू। लेकिन उन्होंने इसमें शुरुआती “आई’ स्मॉल लैटर में लिखा और बाकी सारे अक्षर केपिटल लैटर्स में थे। किसी ने उन्हें बताया कि व्याकरण के हिसाब से यह गलत है। स्वामी जी मुस्कराए और कहा कि जिंदगी में आई हमेशा छोटा होना चाहिए।

इसी तरह काम में निपुणता रखना भी बेहद जरूरी है। मार्टिन लूथर किंग कहते थे- ‘भले ही किसी व्यक्ति का काम गली में झाड़ लगाना हो, लेकिन वह अपने इस कार्य को इतनी तल्लौनता से करे जैसे कोई सिद्धहस्त शिल्पकार आकृति को रूप देता है। मानो बीथोवेन ने संगीत की नई धुन बनाई हो या शेक्सपीयर ने नई कविता रची हो। स्वामी मुकुंदानंद की नवीनतम पुस्तक ‘क्वेश्चंस यू ऑलवेज वांटेड टू आस्क’ के चुनिंदा अंश।

मेरे बेटे टॉम
प्रेम में होना अच्छी बात है, लेकिन प्रेम कई प्रकार का होता है। एक तो होता है स्वार्थी, अहंकारी किस्म का प्यार, जिसमें हम स्वयं को ही अधिक महत्व देने की कोशिश करते हैं। यह कुरूप है। दूसरा होता है वैसा प्यार, जिसमें
हम अपने भीतर की तमाम अच्छाइयों, कोमलता, उदारता, सम्मान और सुंदरताओं को किसी पर उड़ेल देना चाहते हैं। इस प्रेम में हम किसी का महज सामाजिक शिष्टाचारवश ही सम्मान नहीं करते, बल्कि उसे अपने जीवन में एक यूनीक और मूल्यवान व्यक्ति होने के लिए उसका आदर करते हैं। पहले तरह का प्यार तुम्हें ओछा और कमजोर बना सकता है, लेकिन दूसरे तरह का प्यार तुम्हें मजबूत, साहसी, नेक और यहां तक कि बुद्धिमान भी बनाएगा।

अगर तुम दूसरी तरह के प्रेम में हो तो प्रसन्न होओ और इसके लिए कृतज्ञता के भाव से भर जाओ।
हम जिसे प्यार करते हैं, वह हमारे लिए सबसे सुंदर हो जाता है, और उसके योग्य बनने के लिए हमें भी उतना ही सुंदर बनना होता है, यह याद रखो। प्रेम को व्यक्त करने में में हर्ज नहीं, किंतु यह स्मरण रहे कि कुछ लोग बहुत शर्मीले होते हैं और इसे कहते समय आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए।

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