महाशिवरात्रि 15 फरवरी को – ऐसे करें पुजा तभी होगा सभी मनोकामना पूर्ण

By: arcarrierpoint

On: Thursday, February 5, 2026 7:24 PM

महाशिवरात्रि 15 फरवरी को - ऐसे करें पुजा तभी होगा सभी मनोकामना पूर्ण
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महाशिवरात्रि 15 फरवरी को – ऐसे करें पुजा तभी होगा सभी मनोकामना पूर्ण:-महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली पर्व है, जो भगवान शिव को समर्पित होता है। वर्ष 2026 में महाशिवरात्रि 15 फरवरी (रविवार) को मनाई जाएगी। इस वर्ष महाशिवरात्रि का महत्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, शुक्रादित्य योग और श्रवण नक्षत्र का दुर्लभ संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसे योग में की गई पूजा से मनुष्य की हर मनोकामना पूर्ण होती है।

  • महाशिवरात्रि का महत्व
  • पूजा की सही विधि
  • व्रत नियम
  • राशि अनुसार उपाय
  • क्या करें और क्या न करें
  • किन लोगों को विशेष लाभ मिलेगा

फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि रविवार 15 फरवरी को अत्यंत दुर्लभऔर शुभ संयोगों के साथ महाशिवरात्रि मनाई जाएगी। ज्योतिषीय दृष्टि से यह महाशिवरात्रि कई दशकों में मिलने वाले विशेष योगों के कारण पूजा, व्रत, साधना और शिव आराधना कारला जावत सपनादायी साधी आही हा महाशिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग, शुक्रादित्य योग और श्रवण नक्षत्र का दुर्लभ संयोग बन रहा है।

सर्वार्थ सिद्धि योग सभी प्रकार की पूजा-पाठ के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। पटना समेत पूरे बिहार के शिवालयों में इस दिन श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी। महाशिवरात्रि को लेकर महावीर मंदिर, खाजपुरा शिव मंदिर, अगमकुआं शिवालय, पुनपुन के प्राचीन शिव मंदिर समेत अन्य मंदिरों में विशेष तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार महाशिवरात्रि को पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। इस दौरान ग्रहराज सूर्य और भाग्य ग्रह शुक्र कुंभ राशि में विराजमान रहेंगे। दोनों ग्रहों की युति इस राशि में होने से शुक्रादित्य योग बन रहा है। ऐसे में महाशिवरात्रि पर शुक्रादित्य का दुर्लभ संयोग होगा। इस संयोग के प्रभाव से कुंभ, मेष और कन्या राशि वालों के लिए यह दिन अत्यंत फलदायी होगा। मान्यता के अनुसार भोलेनाथ की आराधना से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होगा।

  • मेष राशिः- रोजगार और नौकरी में सफलता मिलेगी। आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी। अविवाहितों के विवाह योग बनेंगे।
  • कन्या राशिः- संतान सुख, वाहन एवं संपत्ति लाभ के योग हैं। आत्मविश्वास बढ़ेगा और स्वास्थ्य में सुधार होगा।
  • कुंभ राशिः- व्यवसाय में उन्नति, दांपत्य जीवन में मधुरता और छात्रों को सफलता मिलेगी।
  • राशि के अनुसार ऐसे करें पूजा
  • मेषः- गुड़, लाल चंदन, गुलाब जल से अभिषेक, कनेर का फूल चढ़ाएं।
  • वृषभः- दही, शकर, चावल, सफेद फूल से पूजा करें। मिथुन: गन्ने के रस से अभिषेक व दूब अर्पित करें।
  • कर्कः- घी, कच्चा दूध और शंखपुष्पी से अभिषेक करें। सिंह गुड़ के जल से अभिषेक और खीर का भोग लगाएं।
  • कन्याः- गन्ना रस से अभिषेक, भांग, दूब और पान चढ़ाएं।
  • तुलाः- इत्र या सुगंधित तेल से अभिषेक, दही-शहद का भोग, सफेद फूल चढ़ाएं।
  • वृश्चिकः- पंचामृत से अभिषेक, लाल पुष्प से पूजा करें।
  • धनुः- हल्दी मिश्रित दूध से अभिषेक, बेसन की मिठाई और गेंदे के फूल अर्पित करें।
  • मकरः- नारियल पानी से अभिषेक, उड़द की मिठाई और नीलकमल का फूल चढ़ाएं।
  • कुंभः- तिल के तेल से अभिषेक, शमी पत्ती और उड़द की मिठाई का भोग लगाएं।
  • मीनः- केसर मिली दूध से अभिषेक, पीली सरसों और दही-भात का भोग लगाएं।
  • महाशिवरात्रि तिथि: 15 फरवरी 2026 (रविवार)
  • चतुर्दशी तिथि आरंभ: 14 फरवरी, रात्रि
  • निशिता काल पूजा: मध्य रात्रि (सबसे शुभ समय)
  • व्रत पारण: 16 फरवरी को सूर्योदय के बाद

पंचांग के अनुसार निशिता काल में की गई पूजा सबसे अधिक फलदायी मानी जाती है।

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार:

  • इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था
  • इसी रात्रि शिवलिंग प्रकट हुआ
  • समुद्र मंथन के समय भगवान शिव ने हलाहल विष का पान किया

महाशिवरात्रि आत्मशुद्धि, तप, साधना और ध्यान की रात्रि है। यह पर्व काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है।

  • हर कार्य में सफलता
  • नौकरी, व्यापार, परीक्षा, विवाह में लाभ
  • सौभाग्य, प्रेम, दांपत्य जीवन में सुधार
  • धन और ऐश्वर्य में वृद्धि
  • शिव भक्ति के लिए सर्वोत्तम
  • मनोकामना सिद्धि का विशेष योग
  • ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें
  • स्वच्छ वस्त्र धारण करें
  • व्रत का संकल्प लें
  • घर के मंदिर की सफाई करें

अभिषेक का सही क्रम:-

  1. जल
  2. दूध
  3. दही
  4. घी
  5. शहद
  6. गंगाजल

इसके बाद:-

  • चंदन
  • भस्म
  • अक्षत अर्पित करें
  • बेलपत्र (तीन दल वाला)
  • धतूरा, भांग
  • सफेद फूल
  • धूप, दीप
  • फल, मिठाई या पंचामृत

बेलपत्र शिव को अत्यंत प्रिय है, लेकिन तुलसी कभी न चढ़ाएँ।

ॐ नमः शिवाय – 108 या 1008 बार

  • शिव चालीसा
  • रुद्राष्टक
  • महामृत्युंजय मंत्र

रात्रि जागरण में मंत्र जाप का फल कई गुना बढ़ जाता है।

महाशिवरात्रि की रात्रि चार प्रहरों में बंटी होती है:-

  • प्रत्येक प्रहर में शिव पूजन
  • भजन, कीर्तन और ध्यान
  • मोबाइल, नकारात्मक विचारों से दूरी

मान्यता है कि जागरण करने से पूर्व जन्म के पाप भी नष्ट हो जाते हैं।

  • सूखे या टूटे बेलपत्र न चढ़ाएँ
  • तुलसी का प्रयोग न करें
  • झूठ, क्रोध और नकारात्मक विचार से बचें
  • रात में सोने से बचें
  • मांस, मदिरा और तामसिक भोजन त्यागें
  • विवाह में बाधा वाले युवक-युवती
  • नौकरी या व्यापार में रुकावट झेल रहे लोग
  • संतान सुख की कामना करने वाले
  • रोग और मानसिक तनाव से ग्रस्त व्यक्ति

15 फरवरी 2026 की महाशिवरात्रि अत्यंत दुर्लभ और शक्तिशाली योग में आ रही है। यदि आप विधि-विधान, शुद्ध मन और श्रद्धा से पूजा करते हैं, तो भगवान शिव की कृपा से आपकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण हो सकती हैं।

“भोलेनाथ भाव के भूखे हैं, विधि से अधिक भक्ति को महत्व देते हैं।”

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