2026 में शादी विवाह मुंडन और गृहप्रवेश के इस दिन है शुभ मुहूर्त – लहेरियासराय स्थित अखिल भारतीय मैथिल महासभा भवन बलभद्रपुर के प्रांगण में संस्कृत विवि के कुलपति लक्ष्मी निवास पांडेय की अध्यक्षता में वर्ष 2026 27 ई. सन 1434 साल में मांगलिक कायों के लिए पंडित सभा हुई। बैठक में सर्वसम्मति से सभी पंचांगों के पंचांगकारों ने अपने-अपने पंचांगों में पर्व, त्यौहार एवं लग्न मुहूर्त में एकरूपता रखने का निर्णय लिया। पंडितों की हुई सभा के मुताबिक 2026 में सौराठ सभा 2 जुलाई से 12 जुलाई 2026 एवं 2027 में 1 जुलाई से 9 जुलाई तक होगी। उपनयन के लिए 14 दिन, शादी के लिए 63 दिन, द्विरागमन के लिए 27 दिन, मुंडन के लिए 22 दिन आदि निर्धारित किए गए। सिमरिया कल्पवास 18 अक्टूबर से 17 नवंबर 2026 व प्रयाग कल्पवास 15 जनवरी 2027 से 13 फरवरी 2027 तक होगा।
उपनयन 14 दिन, शादी 63 दिन, द्विरागमन 27 दिन व मुंडन 22 दिन होंगे
ज्योतिष शोध केंद्र बलभद्रपुर के निदेशक सह सचिव पंडित विश्वनाथ झा शास्त्री की देखरेख में हुई पंडित महासभा की बैठक में मिथिला से प्रकाशित होने वाले विश्वविद्यालय पंचांग के पंचांगकार पंडित रामचंद्र झा, विद्यापति पंचांग के पंचांगकार देवकी नंदन झा, वैदेही पंचांग के अजय मिश्र, महावीर पंचांग के पंडित शिवेंद्र झा, मिथिला पंचांग के मुक्ति कुमार झा ने भाग लिया। साथ ही कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विवि और मिथिलांचल के दर्जनों विद्वान के अलावा पंडित बौआ नंद झा, पंडित लक्ष्मी नाथ झा, पूर्व कुलपति शशि नाथ झा आदि ने भाग लिया।
उपनयन : 14 दिन
2027 में फरवरी माह के 9 तारीख (छन्दोग), 11, 16 (छन्दोंग), 17, मार्च में 17 को (क्षत्रिय वैश्य), 18, अप्रैल में 11, मई में 10, जून माह में 07, 09, 13, 14, जुलाई में 06 (छन्दोग), 28 को उपनयन होगा।
मुंडन : 22 दिन
नवंबर 2026 में 26, दिसंबर में 14, जनवरी 2027 में 20 और 27, फरवरी में 08, 11, 18, 19, 22, 25, मार्च में 10 और 11, मई में 12, 17, 21, जून में 07, 14, 21, 23 और 24, जुलाई में OS और 12
विवाह : 63 दिन
वर्ष 2026 में नवंबर में 22, 25, 26, 30, दिसंबर में 04, 06, 09, 10, 11, 14, जनवरी 2027 में 18, 24, 28, 29, 31, फरवरी में 07, 10, 11, 15, 21, 22, 24, 25, 28, मार्च में 01, 03, 04, 10, 11, अप्रैल माह में 10, 21, 23, 25, 28, 29, मई में 02, 03, 07, 09, 13, 17, 20, 21, 23, 24, 26, 27, 30, 31, जून में 02, 04, 09, 10, 13, 14, 18, 23, 24, जुलाई में 01, 02, 07, 08, 09
देवादि प्रतिष्ठा :18 दिन
जनवरी 2027 में 20, 22, फरवरी में 08, 11, 18, 19, मार्च में 10, 11, अप्रैल में 18, मई में 09, 12, 17, जून में 06, 07, 13, 14, जुलाई में 05 और 09
गृहप्रवेश: 18 दिन
अक्टूबर 2026 में 24, नवंबर में 14, 19, 20, 21 तथा 14 दिसंबर को, जनवरी 2027 में 18 और 20, फरवरी में 15, 17, 18, 19, मई में 10, 12, 17, जून में 14। जुलाई में 09, 10
द्विरागमन: 27 दिन
नवंबर 2026 में 22, 25, 26, 29, दिसंबर में 09, 10, 11, 13, 14,
फरवरी 2027 में 15, 17, 18, 19, 22, 24, 25, मार्च में 10, 11, अप्रैल में 18, 19, 21, 23, 25, 26, मई में 09, 10, 12
गृहारंभ : 19 दिन
अक्टूबर 2026 में 24, 26, 30, नवंबर में 20, 21, 26, 28, जनवरी 2027 में 22 को, फरवरी में 19, 22, 25, अप्रैल में 23, मई में 17, 20, 22, जून में 14, 21,
23, 24
शादी शुभ मुहूर्त में क्यों करनी चाहिए
हिंदू धर्म में विवाह केवल सामाजिक नहीं बल्कि धार्मिक संस्कार माना जाता है। यदि विवाह शुभ मुहूर्त में किया जाए तो:
- वैवाहिक जीवन सुखी रहता है
- ग्रह दोष कम होते हैं
- दांपत्य जीवन में स्थिरता आती है
अगर बिना मुहूर्त के विवाह किया जाए तो मान्यता है कि:
- दांपत्य जीवन में तनाव बढ़ सकता है
- आर्थिक परेशानी आ सकती है
- पारिवारिक विवाद हो सकते हैं
(हालांकि यह धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है)
शुभ मुहूर्त क्यों देखे जाते हैं
हिंदू धर्म में हर कार्य के लिए शुभ समय देखना महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे पंचांग और ग्रह नक्षत्रों के आधार पर तय किया जाता है। शुभ मुहूर्त देखने के फायदे:
- ग्रहों की अनुकूल स्थिति
- कार्य की सफलता
- सकारात्मक ऊर्जा
- परिवार में सुख और समृद्धि
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