स्टैंड अप कमेडियन कैसे बने - लोगो को हंसा कर कमा सकते हैं लाखों
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स्टैंड अप कमेडियन कैसे बने – लोगो को हंसा कर कमा सकते हैं लाखों

स्टैंड अप कमेडियन कैसे बने – आपको लगता है कि आपके पहले चुटकुले पर ही कोई हंस देगा या श्रोताओं की ओर से खूब तालियां बजेंगी, तो ऐसा सोचना जल्दबाजी होगी। स्टैंड-अप कॉमेडियन बनना इससे कहीं ज्यादा मुश्किल है। आपको हर दिन, हर घंटे अपनी रचनात्मकता से कुछ नया गढ़ना होता है। कुछ ऐसा, जिसमें लोगों को भी मजा आए और आपको भी।’ यह कहना है स्टैंड-अप कॉमेडियन प्रशस्ति सिंह का, जिन्होंने आईआईएम लखनऊ से एमबीए करने और एक मल्टीनेशनल कंपनी में करीब चार साल काम करने के बाद अपनी नौकरी छोड़ दी, सिर्फ अपने पैशन को पूरा करने के लिए। लेकिन इसकी वजह पैसा या शोहरत नहीं थे, बल्कि वो संतुष्टि थी, जो उन्हें ये कॉमेडी एक्ट करके मिलती थी।

प्रशस्ति की तरह और भी कई ऐसे युवा हैं, जिन्होंने बतौर स्टैंड-अप कॉमेडियन अपनी पहचान बनाने के लिए अपनी जमी-जमाई नौकरी छोड़ दी और आज ह्यूमर की दुनिया के बादशाह बने हुए हैं। युवाओं की इस जमात में कानन गिल, बिस्वा कल्याणरथ, स्वाति सचदेवा, अनुभव सिंह बस्सी, रवि गुप्ता, राहुल सुब्रमण्यम जैसे कई नाम शामिल हैं। लेकिन मंच पर खड़े होकर दर्शकों को हंसाना क्या इतना आसान है कि लोग अपनी नौकरी छोड़कर पेशेवर कॉमेडियन बन रहे हैं?

टीवी या यूट्यूब पर होने वाली जोरदार मिमिक्री से लेकर आपके शहर में लगभग हर हफ्ते होने वाली लाइव कॉमेडी तक, छोटे शहरों से लेकर महानगरों तक में स्टैंड-अप कॉमेडी बड़े पैमाने पर सामने आई है। एक से पांच मिनट के छोटे-छोटे वीडियो सभी उम्र के लोगों द्वारा खूब पसंद किए जा रहे हैं। लेकिन जिस चुटकुले पर आप लगातार पांच मिनट तक हंसे थे, हो सकता है उसे बनाने में शायद पांच दिन लगे हों। प्रशस्ति कहती हैं, ‘किसी मंच पर खड़े होकर दर्शकों को चुटकुले सुनाना जितना आसान लगता है, उतना है नहीं। इसके लिए बहुत अधिक कौशल और अभ्यास की जरूरत होती है।

यही कारण है कि हर कोई इस क्षेत्र में सफल नहीं होता है। भले ही आपके अंदर प्रतिभा है, लेकिन हर कोई इससे पैसे बना पाए या यह कब होगा, कितना होगा, कभी होगा भी या नहीं? इसमें बहुत सारे फैक्टर काम करते हैं। हालांकि इस मामले में मैं लकी थी कि उसी समय अमेजन पर कॉमिक्स का एक शो आने वाला था, जहां मुझे मौका मिल गया। उसकी वजह से फटाफट सब कुछ होता चला गया। लेकिन यहां बहुत लोग ऐसे हैं, जो धीरे-धीरे मेहनत करके बहुत सारे छोटे-छोटे शो करते हैं, यू-ट्यूब या अन्य सोशल मीडिया मंच पर छोटे-छोटे वीडियो डालते रहते हैं। फिर सालों बाद अपना नाम बना पाते हैं। लब्बोलुआब यह है कि आपको यहां धैर्य और समय की जरूरत होती है। जरूरी नहीं आप तुरंत ही इससे पैसा कमाने लगें।’

यदि स्टैंड-अप कॉमेडी केवल चुटकुले सुनाना होता, तो कोई भी इसे कर सकता था। लेकिन यहां डायलॉग अदायगी और बॉडी लैंग्वेज खास मायने रखती है, तभी आप अपनी बात को मजेदार तरीके से दर्शकों तक पहुंचा पाते हैं और इसी से आपकी सफलता जुड़ी होती है। प्रशस्ति कहती हैं, ‘ये तो निर्भर करता है कि आप अपनी सफलता को परिभाषित कैसे करते हैं।

मुझे लगता है कि अगर एक स्टैंड-अप कॉमेडियन के लिए जो बेसिक पैरामीटर यानी मानक है, वह यह कि आपने जो चुटकुले बोले और लोग उस पर हंस दिए, तो वह अपने आप में एक सफलता है। और ऐसी छोटी-छोटी सफताओं को जोड़ कर ही एक सफल करियर बनता है। लेकिन यहां यह जरूरी नहीं है कि आपने कोई जोक लिखा और वो चलेगा ही। हो सकता है उसमें से आधे ही पसंद किए जाएं। ऐसे में आपको इसी संभावना पर काम करना होता है, बिना धैर्य खोए हुए।’

यहां काम पाने के तरीके भी कई हैं। एक विकल्प यह है आपका वीडियो वायरल हो जाए या आप इतने लोकप्रिय हो जाएं कि लोग आपको स्टैंडअप कॉमेडी या लाइव शो करने के लिए अपने किसी आयोजन में बुलाएं। दूसरा आप किसी ब्रांड को मजाकिया तरीके से प्रचार करें। इसके लिए भी ब्रांड आपको भुगतान कर सकते हैं। कॉमेडी के साथ-साथ लोग लिखने का भी काम करते हैं, फिल्म या शो के लिए।

पिछले कुछ सालों में स्टैंड-अप कॉमेडी मनोरंजन का एक लोकप्रिय साधन बन गयी है। यहां ऐसे लोग भी हैं, जिन्होंने अपने सपनों को पूरा करने के लिए अपनी उच्च वेतन वाली नौकरियां तक छोड़ दीं। आखिर क्यों युवा इस ओर आकर्षित हुए हैं? शोहरत व ग्लैमर की चाह है या फिर पैसा ? यहां खुद की पहचान बनाने के लिए क्या करना पड़ता है, आइए जानते हैं कुछ स्टैंडअप कॉमेडियन्स से

यहां सफल होने के लिए अपनी प्रस्तुति, कॉमिक टाइमिंग और मंच पर प्रस्तुति देने के तरीके पर खास ध्यान देने की जरूरत होती है। इसके लिए पहले अन्य हास्य कलाकारों को ध्यान से देखें और सुनें।

  • पहला काम है रोज लिखना। इस कला में सफलता के लिए जो पहला काम जरूरी है, वह है लिखना। जितना आप नई बातें बोलेंगे, लोगों के लिए वो कीमती होंगी। मतलब, यहां लगातार लिखने का अनुशासन रखना बहुत जरूरी है।
  • मंच का अभ्यास है जरूरी किसी-न-किसी तरीके से चाहे दस लोगों का ही ग्रुप हो, आपको दर्शकों से रूबरू होने का अभ्यास निरंतर करते रहना होगा। जैसे खेल में होता है, जहां आप क्रिकेट खेलते हैं, तो आपको हमेशा नेट प्रैक्टिस करने की जरूरत होती है। यहां आपके लिए ओपन माइक, लाफ क्लब वगैरह हैं, जहां पर छोटे दर्शक होते हैं, वहां आप अपने जोक्स की प्रैक्टिस करें।
  • दुनिया के बारे में खुद की एक अलग राय बनाना चाहे किताबें पढ़कर या समाचार पढ़कर। चाहे सिनेमा देख कर या खुद की कल्पना से। अपना खुद का एक नजरिया रखें और अपना एक क्षेत्र विकसित करें, जिसे आप बेहतर तरीके से कर सकते हैं। कॉमेडी के स्टैंड-अप ऐक्ट करते समय यही काम आएगा।
  • असफल होने से न डरें संभव है आपके किसी शो के दर्शक आपके चुटकुलों पर नहीं हंसेंगे। ऐसे में आप रुकें नहीं, दूसरा शो बुक करें, तब भी जब चीजें आपके अनुकूल न हों।

बरेली के कानन गिल, जिन्होंने कंप्यूटर साइंस में बैचलर की डिग्री लेने के बाद सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में तीन साल तक एक कंपनी में काम किया, लेकिन उनकी महत्वाकांक्षा कुछ ऐसी थी कि उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और अपने ह्यूमर सेंस से लोगों का मनोरंजन करने लगे। ‘पंचलाइन बैंगलोर’, ‘कॉमेडी स्टोर’ सहित कई कॉमेडी प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले कानन ने अपने मजाकिया अंदाज से न सिर्फ लोगों का दिल जीता, बल्कि सोशल मीडिया में लाखों फॉलोअर्स बना लिए। अब इसी से वे अपना नाम भी बना रहे हैं।

मैं एक मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब कर रही थी, लेकिन नौकरी के साथ-साथ मजे मजे में जब मैंने स्टैंड-अप कॉमेडी करना शुरू किया, तो मुझे लगा कि इतना दिमाग तो किसी और चीज में लगाया ही नहीं। मैं इसमें अपना सौ फीसदी देती थी। इसे करके मुझे एहसास हुआ कि शायद मैं इसी के लिए ही बनी हूं। पैसा और शोहरत इतना बड़ा मोटिवेशन तो नहीं था, लेकिन हां, इसको लेकर जुनून जरूर था। जो मजा मुझे इस काम में आ रहा था, उतना किसी और काम में नहीं मिल रहा था। मेरे ख्याल से जिस काम में आपको मजा आए, वहीं करना चाहिए।’

ओडिशा के रहने वाले बिस्वा कल्याण रथ ने आईआईटी खड़गपुर से बायो टेक्नोलॉजी में अपनी डिग्री पूरी की। इसके बाद ग्राफिक डिजाइन, विज्ञापन और सॉफ्टवेयर में काम किया, पर 2013 में एक ओपन माइक इवेंट में जब उनकी मुलाकात कानन गिल से हुई, तो उनका विचार ही बदल गया। वे एक-दूसरे से जुड़े और 2013 में बिस्वा प्रीटेंशियस मूवी रिव्यूज की अवधारणा लेकर आए, जिसे खूब पसंद किया गया। लोगों की सराहना मिली, तो 2014 में नौकरी छोड़ कॉमेडी करने का फैसला किया।

माइक्रोबियल एंड फूड टेक्नोलॉजी में बैचलर ऑफ साइंस की डिग्री लेने वाली चंडीगढ़ की गुरलीन पन्नू ने भी नौकरी करने के बजाय अपने पैशन को आगे बढ़ाने का काम किया, जिसकी शुरुआत कॉलेज टैलेंट शो और ओपन माइक नाइट्स में उनकी भागीदारी से हुई। एक यूट्यूबर और कॉमेडी-स्केच कलाकार के रूप में शुरुआत करने से लेकर अपने स्वयं के स्टैंड-अप सेशन प्रस्तुत करने तक, गुरलीन पन्नू अपने मजाकिया किस्सों और धमाकेदार कॉमेडी से दुनिया में तहलका मचा रही हैं।

कॉमेडी की दुनिया में अभिषेक उपमन्यु भी आज एक बहुत बड़ा नाम बन चुके हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि स्टैंडअप कॉमेडियन बनने से पहले ये बतौर इंजीनियर एक कंपनी में रिसर्च एनालिस्ट के तौर पर काम कर रहे थे। इसके बाद वह ऑन एयर विद एआईबी (एक व्यंग्य टीवी शो) के साथ जुड़े और यहां से उनका सफर शुरू हुआ। इसके बाद उन्होंने कॉमेडी की दुनिया में अपना सिक्का जमा लिया।

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