बिहार में 9152 पदों पर होगी बंपर बहाली- बिहार में उच्च शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब राज्य के उन प्रखंडों में भी डिग्री कॉलेज खोले जाएंगे, जहां अब तक उच्च शिक्षा की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। सरकार ने नए सत्र 2026-27 से 208 नए डिग्री कॉलेजों की शुरुआत करने की योजना बनाई है। इसके साथ ही इन कॉलेजों में पढ़ाई और प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने के लिए 6656 असिस्टेंट प्रोफेसर तथा 2496 गैर-शिक्षकीय कर्मचारियों की नियुक्ति की जाएगी।
यह फैसला बिहार के लाखों छात्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए जिन्हें उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए दूर-दराज शहरों में जाना पड़ता था। सरकार की इस पहल से शिक्षा का दायरा बढ़ेगा और स्थानीय स्तर पर बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार होगा।
इस पोस्ट में क्या-क्या है
- बिहार में 208 नए डिग्री कॉलेज खोलने की योजना
- 6656 असिस्टेंट प्रोफेसर पदों पर नियुक्ति
- 2496 गैर-शिक्षकीय कर्मचारियों की बहाली
- प्रत्येक कॉलेज में 16 विषयों की पढ़ाई
- नए सत्र 2026-27 से एडमिशन प्रक्रिया
- सीटों और विषयों की पूरी जानकारी
- ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को बड़ा फायदा
- शिक्षा विभाग की नई रणनीति
6656 असिस्टेंट प्रोफेसर और 2496 कर्मियों की होगी नियुक्ति
बिहार में उच्च शिक्षा के विस्तार को लेकर राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है. राज्य के 208 ऐसे प्रखंडों में, जहां अब तक डिग्री कॉलेज नहीं हैं, वहां नये डिग्री कॉलेज खोलने और उनके संचालन के लिए बड़े पैमाने पर शिक्षकीय एवं गैर-शिक्षकीय पदों के सृजन को स्वीकृति दी गयी है. 6656 असिस्टेंट प्रोफेसर और 2496 कर्मियों की नियुक्ति की जायेगी. यह पहल राज्य सरकार के सात निश्चय-3 (2025-30) के तहत ‘उन्नत शिक्षा-उज्ज्वल भविष्य’ योजना का हिस्सा है. विभाग ने इस निर्णय की जानकारी राज्यपाल सचिवालय, विश्वविद्यालयों, वित्त विभाग और अन्य संबंधित विभागों को भेज दी है, ताकि जल्द से जल्द कॉलेज स्थापना और पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की जा सके. शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कहा कि इस फैसले से ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में उच्च शिक्षा की पहुंच बढ़ेगी. छात्रों को अब उच्च शिक्षा के लिए दूर-दराज शहरों में नहीं जाना पड़ेगा.
9152 पदों के सृजन को मिली मंजूरी
उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी पत्र के अनुसार, प्रत्येक नये कॉलेज में शिक्षण और प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कुल 9152 पदों के सृजन को मंजूरी दी गयी है. इसमें शिक्षक वर्ग के 6656 पद और गैर-शिक्षक वर्ग के 2496 पद शामिल हैं. प्रत्येक कॉलेज में औसतन 44 पद सृजित किये गये हैं, जिसमें 32 शिक्षक श्रेणी के और 12 शिक्षकेतर श्रेणी के पद होंगे. इन पदों के सृजन से राज्य सरकार पर सालाना करीब 937 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय अनुमानित है.
| पद का नाम | पदों की संख्या |
| असिस्टेंट प्रोफेसर | 6656 |
| गैर-शिक्षकीय कर्मचारी | 2496 |
| कुल पद | 9152 |
हर कॉलेज में 16 विषयों की पढ़ाई
प्रत्येक कॉलेज में एक प्राचार्य के अलावा विभिन्न विषयों के सहायक प्राध्यापक नियुक्त किये जायेंगे. इन कॉलेजों में कुल 16 विषयों की पढ़ाई होगी. इसमें हिंदी, अंग्रेजी, अर्थशास्त्र, इतिहास, मनोविज्ञान, भूगोल, राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र, गृह विज्ञान, गणित, भौतिकी, रसायनशास्त्र, वनस्पति विज्ञान, प्राणी विज्ञान, वाणिज्य और पर्यावरण विज्ञान विषय शामिल हैं. पर्यावरण विज्ञान छोड़ कर सभी विषयों में दो-दो पद निर्धारित किये गये हैं. पर्यावरण विज्ञान में एक पद सृजित किये गये हैं.
12 शिक्षकेतर श्रेणी के पद
प्रत्येक कॉलेज में प्रशासनिक कामकाज के लिए कुल 12 पद सृजित किये गये हैं. इसमें एक उच्च वर्गीय लिपिक, तीन निम्न वर्गीय लिपिक, एक पुस्तकाध्यक्ष और सात प्रयोगशाला सहायक लैब इंचार्ज के पद भी सृजित किये गये हैं. लैब इंचार्ज में भौतिकी, रसायन विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, प्राणि विज्ञान, मनोविज्ञान, भूगोल एवं गृह विज्ञान शामिल हैं.
50-50 सीटों पर एडमिशन
नये सत्र 2026-27 में इस सभी 208 नये डिग्री कॉलेजों में पढ़ाई शुरू हो जायेगी. पहले छह विषयों की ही पढ़ाई होगी. इसमें हिंदी, अंग्रेजी, इकोनॉमिक्स, पॉलिटिकल साइंस, इतिहास और समाजशास्त्र की पढ़ाई होगी. सभी छह विषयों में 50-50 सीटों पर एडमिशन नये सत्र 2026 में ही होगा. संबंधित यूनिवर्सिटी को इन नये कॉलेजों के 300 सीटों को जोड़ कर नये सत्र में एडमिशन लेना होगा.
गेस्ट फैकल्टी की बहाली नहीं
उच्च शिक्षा विभाग ने सभी संबंधित यूनिवर्सिटियों को प्रभारी प्राचार्य के साथ-साथ शिक्षक व कर्मचारियों भेजने का निर्देश दिया है. विभाग ने साफ कहा है कि नये डिग्री कॉलेज में गेस्ट फैकल्टी की बहाली नहीं होगी
गेस्ट फैकल्टी की बहाली नहीं होगी
उच्च शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि नए कॉलेजों में गेस्ट फैकल्टी के भरोसे पढ़ाई नहीं कराई जाएगी। नियमित नियुक्ति के माध्यम से योग्य शिक्षकों की बहाली की जाएगी। यह फैसला इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि लंबे समय से कई कॉलेजों में अतिथि शिक्षकों के माध्यम से पढ़ाई कराई जा रही थी, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती थी। अब सरकार स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति कर शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना चाहती है।
ग्रामीण छात्रों को मिलेगा सबसे बड़ा लाभ
इस योजना का सबसे अधिक फायदा ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के छात्रों को होगा। अभी तक कई छात्रों को स्नातक की पढ़ाई के लिए जिला मुख्यालय या बड़े शहरों में जाना पड़ता था। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण कई छात्र उच्च शिक्षा से वंचित रह जाते थे। अब अपने प्रखंड में ही कॉलेज खुलने से:
- छात्रों का समय और पैसा बचेगा
- लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा
- ड्रॉपआउट दर कम होगी
- स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना बिहार की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकती है।
कब से शुरू होगा एडमिशन?
सरकार की योजना है कि नए सत्र 2026-27 से इन कॉलेजों में नामांकन प्रक्रिया शुरू कर दी जाए। फिलहाल कॉलेज भवन, स्टाफ नियुक्ति और विश्वविद्यालय संबद्धता की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया गया है कि वे नए कॉलेजों को जल्द से जल्द संबद्ध करें ताकि छात्रों को समय पर एडमिशन मिल सके।
शिक्षा व्यवस्था को मिलेगा नया आयाम
बिहार में उच्च शिक्षा की स्थिति को सुधारने के लिए यह कदम काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लंबे समय से राज्य में कॉलेजों की कमी और शिक्षकों के खाली पद बड़ी समस्या बने हुए थे। अब एक साथ इतने बड़े स्तर पर:
- नए कॉलेजों की स्थापना
- शिक्षकों की नियुक्ति
- कर्मचारियों की बहाली
- नए विषयों की शुरुआत
से शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा मिलेगी।
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