आपके जाने के बाद कौन होगा आपके फेसबुक इंस्टाग्राम यूट्यूब का मालिक- देखें-:-आज के दौर में हमारी पहचान केवल भौतिक संपत्तियों तक सीमित नहीं रह गई है। बैंक बैलेंस, जमीन-जायदाद और निवेश के साथ-साथ ई-मेल, सोशल मीडिया अकाउंट, यूट्यूब चैनल, क्लाउड स्टोरेज, वेबसाइट, डोमेन नेम और डिजिटल वॉलेट भी हमारी महत्वपूर्ण संपत्ति बन चुके हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपके निधन के बाद इन डिजिटल संपत्तियों का क्या होगा? इन्हें कौन संभालेगा और इनका वारिस कौन बनेगा?
डिजिटल वसीयत; आपके ई-मेल, यूट्यूब, पेटीएम का वारिस कौन?
डिजिटल क्रांति के दौर में हम अपने मकान, जमीन, दुकान और बैंक खातों के लिए तो वारिस नॉमिनी चुन लेते हैं, लेकिन अपनी ‘डिजिटल संपत्ति’ को भूल जाते हैं। मृत्यु के बाद ई-मेल, यूट्यूब चैनल, इंस्टा-फेसबुक अकाउंट, वॉट्सएप व पेटीएम जैसे वॉलेट का वारिस कौन होगा… ये तय ही नहीं करते। मैकएफी का ‘डिजिटल आफ्टरलाइफ’ सर्वे कहता है दुनियाभर में 70% से ज्यादा लोग इस बात को लेकर चिंतित हैं कि उनके मरने के बाद उनके ऑनलाइन डेटा का क्या होगा ? लेकिन 10-15% लोग ही ‘डिजिटल वसीयत’ बनाते हैं।
दुनिया के करीब 70% लोग अपनी डिजिटल संपत्ति को लेकर चिंतित, पर 10-15% ही इसके लिए कोई नॉमिनी तय करते हैं
ट्रस्ट एंड विल्स अनुअल स्टेट प्लानिंग रिपोर्ट-2025 कहती है- 40% लोग चाहते हैं कि उनकी मृत्यु के बाद उनके सोशल मीडिया और ईमेल अकाउंट्स को हमेशा के लिए डिलीट कर दिया जाए। 7% ही चाहते हैं कि उनके जाने के बाद कोई दूसरा व्यक्ति उनका अकाउंट चलाए। 32% लोगों का मानना है कि उनके मरने के बाद भी उनके पर्सनल मैसेज और चैट्स उनके परिवार से भी तरह छिपे रहने चाहिए। पुरानी पीढ़ी के 55% लोग अपने अकाउंट्स को तुरंत डिलीट करना पसंद करते हैं। इसके विपरीत जैन जी पीड़ी के ज्यादातर लोग इसे संरक्षित करने के पक्ष में हैं।
पूरी प्रक्रिया कैसे काम करती है?
कंपनियों और कानूनी सिस्टम को किसी के न रहने की जानकारी मिलने के दो मुख्य तरीके होते हैं।
पहला (तकनीकी तरीका)
गूगल जैसे प्लेटफॉर्म यूजर की ऑनलाइन एक्टिविटी (जैसे लॉगिन, ईमिल या यूट्यूब देखना) ट्रैक करते हैं। यदि तय समयसीमा (जैसे 3 माह) तक अकाउंट में हलचल नहीं होती, तो सिस्टम पहले बैकअप ईमेल-फोन पर अलर्ट भेजता है। कोई जवाब न मिलने पर सिस्टम उसे मृत मान लेता है और चुने ‘लेगेसी कॉन्टैक्ट’ को डेटा डाउनलोड करने का लिंक ऑटोमेटिक दे देता है।
दूसरा (कानूनी तरीका)
एपल फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म पर सिस्टम खुद कुछ नहीं करता, बल्कि परिकार को संपर्क करना पड़ता है। इसके तहत कानूनी वारिस या लेगेसी कॉन्टैक्ट को कंपनी के पोर्टल पर जाकर मृत व्यक्ति का आधिकारिक ‘डेथ सर्टिफिकेट’ और वसीयत की ‘एक्सेस की’ (सीक्रेट कोड) अपलोड करनी होती है। सब कुछ सही पाए जाने पर, कंपनी मृतक का अकाउंट हमेशा के लिए लीक कर देती है और डेटा (जैसे आईक्लाउड की तस्वीरें या फेसबुक डेटा) कानूनी वारिस को सौंप देती है।
क्या है?
ब्लॉग, डोमेन नेम, क्रिप्टोकरेंसी किसकी होगी? ये तय करने का कानूनी दस्तावेज
डिजिटल वसीयत ऐस्त्र कानूनी दस्तावेज है, जिसमें आप तय करते हैं कि आपके मरने के बाद आपकी डिजिटल संपत्तियों का क्या होगा? इन्हें कौन लेगा? इसमें ये तीन प्रमुख कैटेगरी हैं….
- वित्तीय संपत्तियां:- क्रिप्टोकरेंसी, ऑनलाइन बैंकिंग क्रेडेंशियल्स, ई-वॉलेट्स (पेटीएम, फोनपे, गूगल पे आदि), ट्रेडिंग अकाउंट्स (जीरोधा और ग्रो आदि)।
- बौद्धिक संपदाः- ब्लॉग, डोमेन नेम, यूट्यूब चैनल।
- व्यक्तिगत डेटाः- फेसबुक, इंस्टा, लिकडान, गूगल डाइव, आईक्लाउड, ईमेल व व्यक्तिगत तस्वीरें आदि।
क्यों जरूरी ?
पैसा नहीं डूबेगा, तस्वीरें व डेटा सुरक्षित होगा, परिजन कानूनी पचड़ों से भी बचेंगे
- वित्तीय नुकसान से बचावः- यदि नॉमिनी को क्रिप्टो वॉलेट या डिजिटल ट्रेडिंग अकाउंट का पता नहीं होगा, तो पैसा हमेशा के लिए ब्लॉक हो सकता है।
- पहचान की चोरी. साइबर फ्रॉडः- निष्क्रिय सोशल मीडिया या मिल अकाउंटस को हैकर्स निशाना बना सकते हैं, गलत इस्तेमाल कर सकते हैं।
- वादों को सुरक्षित रहानाः- तस्वीरों और निजी ईमेल को सुरक्षा मिलेगी। उन्हें सम्मानजनक तरीके से ले सकते हैं।
- कानूनी विवादों से चचनाः- परिजनों को टेक कंपनियों से डेटा पाने के लिए कोर्ट के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
कैसे बनाएं?
क्या-किसे देना है, इसकी पूरी सूची बनाएं सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में रजिस्ट्रेशन कराएं
- स्टेप 1. सभी डिजिटल संपत्तियों की सूची तैयार करें, लेकिन इसमें पासवर्ड कभी न लिखें।
- स्टेप 2. किसी तकनीकी समझ बाले को उत्तराधिकारी चुने।
- स्टेप 3. हर डिजिटल असेट के लिए स्पष्ट निर्देश लिखें कि उसे किसे सौंपना है?
- स्टेप 4. गूगल, फेसबुक और एप्पल जैसे प्लेटफॉम्स पर उपलब्ध इन-बिल्ट लेगेसी फीचर्स को सेटअप करें।
- स्टेप 5. कागज पर लिखें। 2. गवाहों के सामने हस्ताक्षर करें। सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में रजिस्ट्रेशन करा लें।
- जैसा सुप्रीम कोर्ट के रारातील विरात्र गुप्ता ने बताया
न बनाएं तो ?
निवेशकों के 1,800 करोड़ रु. डूबने और लंबी कानूनी लड़ाई के उदाहरण मौजूद हैं
- केस-1:- क्वाडिगासीएक्स (कनाडा):- 2018 में क्रिप्टो एक्सचेंज प्रमुख जेराल्ड कॉटन की मौत के बाद पासवर्ड बैकअप या डिजिटल वसीयत न होने से निवेशकों के 19 करोड़ डॉलर (करीब 1,804 करोड़ रु.) हमेशा के लिए लॉक हो गए, जिससे बाद में ये कंपनी दिवालिया भी हो गई।
- केस-2:- एप्पल बनाम राहेल (यूके):- पति की मौत के बाद लेगेसी कॉन्टैक्ट न होने से एपल ने प्राइवेसी का हवाला देकर डेटा ब्लॉक कर दिया। पत्नी को पारिवारिक तस्वीरें पाने के लिए कई महीनों तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी।
इसी व्यवस्था को डिजिटल विरासत (Digital Legacy) कहा जाता है।
क्या है डिजिटल विरासत?
डिजिटल विरासत का मतलब उन सभी ऑनलाइन खातों, डेटा और डिजिटल संपत्तियों से है जो किसी व्यक्ति के नाम पर इंटरनेट पर मौजूद हैं।
इसमें शामिल हैं:-
- ई-मेल अकाउंट
- Facebook, Instagram, X (Twitter) अकाउंट
- YouTube चैनल
- WhatsApp अकाउंट
- Google Drive, iCloud, Dropbox का डेटा
- वेबसाइट और डोमेन नेम
- ऑनलाइन बैंकिंग अकाउंट
- डिजिटल वॉलेट
- क्रिप्टोकरेंसी और NFT जैसी डिजिटल संपत्तियां
यदि किसी व्यक्ति के निधन के बाद इनका प्रबंधन कौन करेगा, इसकी पहले से व्यवस्था की गई हो, तो उसे डिजिटल विरासत की योजना माना जाता है।
डिजिटल विरासत बनाना क्यों जरूरी है?
1. महत्वपूर्ण डेटा सुरक्षित रहता है
परिवार को जरूरी दस्तावेज, फोटो, वीडियो और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड आसानी से मिल जाते हैं।
2. आर्थिक नुकसान से बचाव
यदि किसी व्यक्ति के पास ऑनलाइन निवेश, डिजिटल वॉलेट या यूट्यूब से आय का स्रोत है, तो उत्तराधिकारी उसे संभाल सकते हैं।
3. कानूनी विवाद कम होते हैं
स्पष्ट निर्देश होने से परिवार के सदस्यों के बीच विवाद की संभावना कम हो जाती है।
4. सोशल मीडिया अकाउंट का दुरुपयोग नहीं होता
निष्क्रिय अकाउंट हैकिंग या फर्जी गतिविधियों का शिकार हो सकते हैं।
डिजिटल विरासत कैसे बनाएं?
चरण 1: डिजिटल संपत्तियों की सूची तैयार करें
सभी महत्वपूर्ण ऑनलाइन अकाउंट और डिजिटल संपत्तियों की सूची बनाएं।
चरण 2: एक विश्वसनीय व्यक्ति चुनें
तय करें कि आपके बाद कौन इन अकाउंट्स को संभालेगा।
चरण 3: कानूनी दस्तावेज तैयार करें
वसीयत या अन्य कानूनी दस्तावेज में डिजिटल संपत्तियों का उल्लेख करें।
चरण 4: प्लेटफॉर्म की सुविधाओं का उपयोग करें
Google Inactive Account Manager
Google उपयोगकर्ताओं को पहले से यह तय करने की सुविधा देता है कि अकाउंट लंबे समय तक निष्क्रिय रहने पर क्या किया जाए।
Facebook Legacy Contact
Facebook पर आप एक Legacy Contact चुन सकते हैं जो आपके निधन के बाद प्रोफाइल का सीमित प्रबंधन कर सके।
यदि डिजिटल विरासत नहीं बनाई तो क्या होगा?
यदि किसी व्यक्ति ने अपने डिजिटल अकाउंट के बारे में कोई व्यवस्था नहीं की है, तो परिवार को कई कानूनी और तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
- महत्वपूर्ण डेटा तक पहुंच नहीं मिल सकती।
- डिजिटल निवेश फंस सकते हैं।
- YouTube या अन्य ऑनलाइन आय स्रोत बंद हो सकते हैं।
- अकाउंट रिकवरी की प्रक्रिया लंबी और जटिल हो सकती है।
- परिवार को कानूनी दस्तावेज जमा करने पड़ सकते हैं।
कंपनियां अकाउंट की जानकारी कैसे प्राप्त करती हैं?
आमतौर पर कंपनियों को किसी व्यक्ति की मृत्यु की जानकारी निम्न माध्यमों से मिलती है:-
- परिवार द्वारा सूचना देना
- मृत्यु प्रमाण पत्र जमा करना
- अदालत के आदेश
- लंबे समय तक अकाउंट का निष्क्रिय रहना
इसके बाद संबंधित प्लेटफॉर्म अपनी नीति के अनुसार अकाउंट को मेमोरियलाइज, बंद या उत्तराधिकारी को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया शुरू करते हैं।
भारत में जागरूकता अभी भी कम
रिपोर्टों के अनुसार अधिकांश लोग अपनी डिजिटल संपत्तियों को लेकर चिंतित तो हैं, लेकिन बहुत कम लोग इनके लिए किसी प्रकार का डिजिटल नॉमिनी या कानूनी व्यवस्था तय करते हैं। यही कारण है कि भविष्य में डिजिटल विरासत की योजना वित्तीय योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने जा रही है।
निष्कर्ष
डिजिटल युग में केवल संपत्ति ही नहीं, बल्कि आपका ऑनलाइन डेटा, सोशल मीडिया अकाउंट, यूट्यूब चैनल, ई-मेल और डिजिटल निवेश भी मूल्यवान संपत्ति हैं। इसलिए समय रहते डिजिटल विरासत की योजना बनाना आवश्यक है, ताकि आपके बाद परिवार को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
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