चार वर्षीय स्नातक कोर्स समझें आसान भाषा में
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चार वर्षीय स्नातक कोर्स समझें आसान भाषा में

इस वर्ष से राज्यभर के कॉलेजो में चार वर्षीय स्नातक कोर्स हो जायेगा शुरू –

चार वर्षीय स्नातक कोर्स-नई शिक्षा नीति के अंतर्गत बिहार राज्य के विश्वविधालयों में इसी वर्ष से सत्र मतलब की सत्र 2023 से 2027 से च्च्वईश बेस्ड क्रेडिट सिस्टम के अनुसार चार वर्षीय स्नातक कोर्स की पढाई शुरू करने का निर्णय लिया गया है. आपको बता दे की इस स्न्नात्क कोर्ष का रोडमैप तैयार करने का जिम्मा राज्यपाल सह कुलाधिपति द्व्रारा कुलपतियो की एक पाच सदस्यीय कमिटी बनाई गयी है.

इस कमिटी को यह आदेश दिया गया है की कम से कम दो सेमेस्टर का सिलेबस 21 दिनों के भीतर तैयार करके दे अगर ये कमेटी कम से कम दो सेमेस्टर का सिलेबस तैयार कर देती है तो इस वर्ष से ही कॉलेजों में इसकी पढाई शुरू हो जाएगी. अगले 2 वर्ष का भी सिलेबस बाद में इसी कमिटी द्वरा तैयार की जाएगी .

चार वर्षीय स्नातक कोर्स

च्च्वईश बेस्ड क्रेडिट सिस्टम का क्या अर्थ है ?

च्च्वईश बेस्ड क्रेडिट सिस्टम एक शैक्षिणिक मॉडल है जो स्टूडेंट को अपनी पसंद से पाठ्यक्रम और आप कौन सा विषय पढना चाहते है ये चुनने का आजादी देता है. इस सिस्टम में आप अपनी पसंद से विषयों का चयन कर सकते है. जैसे की आप अपने द्वरा इसमें कोर विषय ,वैकल्पिक विषय, खेल या वैश्विक येक्छिक विषय और कौशल आधारित पाठ्यक्रम अपनी मर्जी से चुन सकते है,

चार वर्षीय स्नातक कोर्स किस वर्ष क्या होगा ?

वर्ष प्रथम वर्ष द्वितीय वर्ष तृतीय वर्ष चौथे वर्ष
सेमेस्टर1 और 2 सेमेस्टर3,4 सेमेस्टर5,6 सेमेस्टर7,8 सेमेस्टर
क्रेडिट 40 क्रेडिट80 क्रेडिट120 क्रेडिट160 क्रेडिट
डिग्रीयूजी सर्टिफिकेट
(बशर्ते 4 क्रेडिट का एक
वोकेशनल कोर्स करें)
यूजी डिप्लोमायूजी डिग्री ऑनर्स विद रिसर्च डिग्री
  • नोट- 3 वर्षों में विधार्थी कभी भी पढाई छोड़ सकते है और फिर कोर्स पूरा करने के लिए अगले 3 साल में नामांकन जरुरी |
  • कोई छात्र इतिहास के साथ फिजिक्स भी ले सकेगा |

च्च्वईश बेस्ड क्रेडिट सिस्टम ( सीबीसीएस ) के क्या फायदे है ?

  • पसंद आधारित : – आप अपने पसंद से जो भी पढना चाहे उसका चयन कर सकते
  • ग्रेडिंग :- इस कोर्स के तहत जो अंक प्राप्त होंगे वो ग्रेड प्रारूप में होंगे इसका मतलब है की जो वर्तमान में डिवीज़न मिलता है वो नही मिलके आपको ग्रेड दिए जायेंगे.
  • सेमेस्टर :- सिस्टम के तहत सेमेस्टर वाईज स्टूडेंट और टीचर में कितना जुडाव रहा प्रत्र्त्येक सेमेस्टर में उसको मापा या पहचाना जा सकेगा.
  • क्रेडिट : – इस सिस्टम में प्रति सप्ताह कक्षा के घंटे क्रेडिट सिस्टम में अतिरिक्त महत्व रखते है.
  • मुल्यांकन :- इस प्रणाली में क्लास अटेंडेंस, मिट टर्म टेस्ट आदि के रूप में निरंतर और व्यापक है.

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