IIT JEE में बिहार के छात्रों का गिर रहा है सफलता का ग्राफ- एक भी छात्र सफल नहीं
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IIT JEE में बिहार के छात्रों का गिर रहा है सफलता का ग्राफ- एक भी छात्र सफल नहीं

IIT JEE में बिहार के छात्रों का गिर रहा है सफलता:-नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के द्वारा आयोजित ज्वॉइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन (जेईई) मेंस और एडवांस दोनों में ही राज्य के छात्रों के परफॉर्मेंस का ग्राफ गिर रहा है। जेईई मेंस 2021 में दो छात्र तो 2022-2023 में एक- एक छात्र सौ पसेंटाइल में था।

2024 में जेईई मेंस जनवरी सत्र के लिए जारी रिजल्ट में 100 पसेंटाइल में एक भी छात्र बिहार का नहीं है। एक मात्र टॉपर छात्र अबुबकर सिद्दीकी को 99.9929205 रैंक प्राप्त हुआ है। लिस्ट में सबसे अधिक तेलंगाना के छात्रों का नाम है। विगत वर्षों में भी टॉप रैंकर्स में राज्य के छात्र कम ही रहे हैं, 100 पसेंटाइल में कभी एक तो कभी दो छात्र ही रहे हैं या फिर कोई नहीं। जेईई एडवांस के विगत वर्षों के रिजल्ट पर नजर डालें तो उसमें भी विहार के छात्र-छात्राओं का परफॉर्मेंस कुछ खास नहीं रहा है।

2020 और 2021 में पूरे गुवाहाटी जोन से ही कोई छात्र टॉप सौ में नहीं था। उसी में बिहार आता है। 2022 में टॉप सौ में एक छात्र अभिजीत आनंद बिहार के थे। वहीं 2023 में सिर्फ 1 छात्र विवस्वान सव्यसाची ने टॉप सौ में जगह बनाई थी। एक अन्य टॉप सौ में जगह बनाने वाले छात्र गौरव विहार के ही थे लेकिन उन्होंने दिल्ली जोन से फॉर्म भरा था। आगे जेईई मेंस 2024 के रिजल्ट का असर जेईई एडवांस पर भी पड़ सकता है।

आंकड़ों के अनुसार ऐसा कह सकते हैं कि राज्य की कोचिंग संस्थान उस तरह से प्रभावी नहीं हैं जैसे दूसरे शहरों के कोचिंग कर रहे हैं। यही वजह है कि बड़ी संख्या में छात्र राज्य के बाहर पलायन कर जाते हैं। सिर्फ मेडिकल व इंजीनियरिंग का कोचिंग करने के लिए हर वर्ष करीब एक लाख छात्र राज्य से पलायन करते हैं। लेकिन सिर्फ वही एक कारण नहीं है। दूसरा कारण है कि स्कूल में इन छात्रों का बेस (बेसिक एजुकेशन) भी का स्तर भी गिर रहा है। इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षाओं को उत्तीर्ण करने के लिए विज्ञान और गणित में बेसिक एजुकेशन यानी सातवीं से दसवीं तक की स्कूली शिक्षा सबसे अधिक मायने रखती है।

राज्य के सरकारी या प्राइवेट स्कूल बच्चों को विज्ञान, गणित और अंग्रेजी में उस प्रकार से बेस नहीं तैयार कर पा रहे हैं जो इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं को उत्तीर्ण करने के लिए जरूरी है। कोचिंग भी ऐसे में बहुत कुछ नहीं कर पा रहे। कमजोर बेस की वजह से कुछ कोचिंग छात्र-छात्राओं का अब सातवीं और आठवीं से जेईई को ध्यान में रखते हुए पढ़ाई कराने लगे हैं। फिर भी रिजल्ट में वे कुछ खास नहीं कर पा रहे हैं। क्योंकि जो बेस स्कूल में बन सकता है वह चाहकर भी कोचिंग नहीं वना सकते। इसके लिए शुरू से ध्यान देने की जरूरत है। राज्य के सरकारी स्कूलों में विज्ञान के शिक्षकों की संख्या बहुत कम है और जो शिक्षक उपलब्ध हैं, उनका स्तर मेडिकल व इंजीनियरिंग के अनुसार छात्र-छात्राओं को तैयार करने के अनुकूल तो बिल्कुल नहीं है।

मौलिक शिक्षा ध्वस्त हो रही है। प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक, उच्च माध्यमिक शिक्षा यानी बेस को ठीक करना होगा। इसकी गुणवत्ता पर ध्यान देने की जरूरत है। वर्तमान में स्थिति यह है कि जब 11 वीं तक बच्चा आता है। उसका बेसिक एजुकेशन ठीक करने में ही कई साल लग जाते हैं,- अभयानंद, पूर्व डीजीपी, बिहार व अभयानंद थर्टी व रहमानी थर्टी के संस्थापक

राज्य के जो तेज बच्चे हैं, वह पहले ही अपने भविष्य को देखते हुए कोटा, दिल्ली या दूसरे शहर में कोचिंग के लिए निकल जा रहे हैं। क्योंकि उन्हें पता है कि यहां रहकर उनका देश के अच्छे इंजीनियरिंग कॉलेज में नामांकन नहीं हो सकेगा। -प्रो नित्यानंद सिंह मौर्या, प्रोफेसर एनआईटी

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