जमीन मापी अब ऑनलाइन होगा- घर बैठे बुक करें सरकारी अमीन

By: arcarrierpoint

On: Friday, January 16, 2026 7:51 PM

जमीन मापी अब ऑनलाइन होगा- घर बैठे बुक करें सरकारी अमीन
Google News
Follow Us

जमीन मापी अब ऑनलाइन होगा- घर बैठे बुक करें सरकारी अमीन:-राज्य सरकार ने जमीन मापी (भूमि पैमाइश) की प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया है। अब आम नागरिकों को सरकारी दफ्तरों और अमीन के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। 26 जनवरी 2026 से भूमि मापी की नई ऑनलाइन व्यवस्था लागू हो रही है, जिसके तहत घर बैठे आवेदन कर सरकारी अमीन से जमीन की मापी कराई जा सकेगी।

इस नई व्यवस्था के साथ 26 जनवरी से 31 मार्च 2026 तक सभी जिलों में भूमि मापी महाअभियान चलाया जाएगा। इसका उद्देश्य जमीन से जुड़े विवादों को कम करना और पारदर्शिता बढ़ाना है।

राज्य में जमीन की मापी (पैमाइश) को लेकर होने वाली परेशानियों और भागदौड़ से अब लोगों को मुक्ति मिलेगी। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने ‘ईज ऑफ लिविंग’ के तहत मापी की प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी बनाएगा। अब 7 से 11 दिन में ही पैमाइश हो जाएगी। नई व्यवस्था 26 जनवरी 2026 से पूरे राज्य में प्रभावी होगी।

जमीन विवादित है या नहीं। विवादित होने पर अंचलाधिकारी (सीओ) विवाद की स्थिति स्पष्ट करेंगे। जमीन बंटवारे के दौरान हिस्सेदारी, पुश्तैनी विवाद, नामी में कमी, रसीद को लेकर उलझे मामले सहित अन्य विवाद में फंसे जमीन की 11 दिनों में मापी की जाएगी।

यदि, जमीन विवाद रहित रहा और सभी पक्ष संतुष्ट रहे, तो जमीन पैमाइश (मापी) की कार्रवाई 7 दिनों में ही पूरी की जाएगी। दोनों ही प्रकार के मामलों में मापी के उपरांत अमीन द्वारा प्रतिवेदन ऑनलाइन अपलोड करना अनिवार्य होगा, जो आवेदन की तिथि से 14वें दिन तक पोर्टल पर उपलब्ध कराना होगा।

राजस्व व भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सी. के. अनिल के अनुसार, इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए विशेष सर्वेक्षण अमीनों की प्रतिनियुक्ति भी की जाएगी।

पारंपरिक व्यवस्था में अमीन व अंचल कार्यालय के कर्मियों पर अक्सर रिश्वत मांगने के आरोप लगते थे। ऑनलाइन व्यवस्था और तय शुल्क होने से बिचौलियों की भूमिका खत्म हो जाएगी। पहले एक मापी के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता था। पहले पता नहीं चलता था कि उनका आवेदन किस स्तर पर लंबित है।

‘अविवादित’ मामलों में 7 दिनों की समय-सीमा तय कर दी गई है, जिससे काम में तेजी आएगी। ऑनलाइन ट्रैकिंग से पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो जाएगी। मापी की प्रक्रिया सरल और सरकारी निगरानी में होने से आपसी झगड़े कम होंगे। पहले शुल्क का निर्धारण स्पष्ट नहीं था। अब सीधे शुल्क जमा होने से राजस्व की चोरी रुकेगी।

विवादित मामलों में सीओ आवेदन प्राप्त होने के तीन दिनों के भीतर मापी की तिथि और अमीन का निर्धारण करेंगे। यह तिथि सात दिनों के भीतर की होगी तथा सभी चौहद्दीदारों को सिस्टम के माध्यम से नोटिस भेजा जाएगा। विवादित भूमि की मापी अधिकतम 11 दिनों में पूरी की जाएगी। नोटिस की तामिला व्यवस्था भी स्पष्ट की गई है।

अब जमीन मापी कर जैसे-तैसे प्रतिवेदन नहीं जमा किया जा सकेगा। इसके लिए विभाग द्वारा भू मापी प्रतिवेदन का मानक प्रारूप भी सभी को उपलब्ध करा दिया गया है। इसमें आवेदक का पूर्ण विवरण, मापी गई भूमि का पूर्ण विवरण, मापी के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण चेकलिस्ट, मापी का विवरण व नजरी नक्शा के कॉलम भी दिए गए हैं।

राज्य में जमीन मापी में अक्सर विवाद की स्थिति बनती थी। कई बार यह सब केस-मुकदमे तक पहुंच जाता है। आपसी विवाद और विश्वास की कमी के कारण जमीन की मापी सालों-साल टलती रहती है। अब नई व्यवस्था में समय सीमा तय होने और पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होने से पारदर्शिता बढ़ेगी। अनावश्यक विवादों पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा। राज्य में भूमि विवाद के मामलों में उत्तरोत्तर कमी दर्ज हो सकेगी। मापी महाअभियान से लंबित मामलों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित किया जाएगा।

नई व्यवस्था राज्य सरकार के सात निश्चय-3 के तहत नागरिकों को त्वरित, पारदर्शी सेवा देने की दिशा में एक ठोस कदम है। अब लोगों को महीनो इंतजार नहीं करना पड़ेगा। -विजय कुमार सिन्हा, मंत्री, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग

राज्य में 26 जनवरी से 31 मार्च तक भूमि मापी महाअभियान चलेगा। अविवादित जमीन की मापी 7 और विवादित जमीन की मापी 11 दिनों में पूरी कर ली जाएगी। अमीन भूमि मापी रिपोर्ट 14 दिन में पोर्टल पर अपलोड करेंगे। मापी के लिए बिहार भूमि ई मापी पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा।

उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जिलों में जनसुनवाई के दौरान मापी से संबंधित शिकायतें भी मिल रही थीं। इसलिए यह फैसला लिया गया है। पहले 30 दिन में मापी की व्यवस्था थी।

राजस्व व भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल ने इस संबंध में जिलों को निर्देश दिया है।

अभियान के लिए विशेष सर्वेक्षण अमीनों की प्रतिनियुक्ति भी की जाएगी। समाहर्ता आवश्यकता के अनुसार प्रति हल्का एक अमीन के मानक पर विशेष सर्वेक्षण अमीनों की अधियाचना कर सकेंगे। पूरे मापी अभियान के नियंत्री पदाधिकारी संबंधित जिले के समाहर्ता होंगे।

अब जमीन मापी कर जैसे-तैसे रिपोर्ट जमा नहीं होगी। इसके लिए विभाग द्वारा भू मापी प्रतिवेदन का मानक प्रारूप भी सभी को उपलब्ध करा दिया गया है। इसमें आवेदक का पूर्ण विवरण, मापी गई भूमि का पूर्ण विवरण, मापी के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण चेकलिस्ट, मापी का विवरण व नजरी नक्शा, साक्षियों या चौहद्दीदारों की विवरणी समेत अमीन का मंतव्य एवं हस्ताक्षर के कॉलम भी दिए गए हैं।

नई व्यवस्था से भूमि सीमांकन से जुड़े विवादों में कमी आने की उम्मीद है। आवेदक में स्पष्ट करना होगा कि भूमि अविवादित है या विवादित। यदि भूमि विवादित है तो अंचलाधिकारी द्वारा विवाद की प्रकृति को परिभाषित किया जाएगा। विवादित मामलों में अंचलाधिकारी आवेदन प्राप्त होने के तीन दिनों में मापी की तिथि और अमीन तय करेंगे। यह तिथि सात दिनों के भीतर की होगी। भूमि की मापी प्रक्रिया अधिकतम 11 दिनों में पूरी की जाएगी।

नई व्यवस्था के तहत विवादित और अविवादित दोनों मामलों में आवेदन के साथ ही मापी शुल्क का भुगतान करना होगा। ग्रामीण क्षेत्र में यह शुल्क 500 रुपये प्रति खेसरा और शहरी क्षेत्र में 1000 रुपये प्रति खेसरा निर्धारित किया गया है। तत्काल मापी के मामलों में यह राशि दोगुनी होगी।

सभी चौहद्दीदारों को नोटिस की तामिला के लिए व्यवस्था की गई है। विवादित मामलों में चौकीदार, जबकि अविवादित मामलों में कार्यालय परिचारी द्वारा नोटिस तामिला कराया जाएगा। इसके अतिरिक्त पंजीकृत डाक से भी सूचना भेजी जा सकेगी। साथ ही आवेदन में दर्ज सभी मोबाइल नंबरों पर सिस्टम द्वारा स्वतः एसएमएस जाएगा।

पुलिस बल के साथ जमीन मापी के लिए टीम जाएगी, ताकि कर्मियों की सुरक्षा की पूरी व्यवस्था हो। सीओ स्थानीय थाने को लिखित सूचना देंगे और पुलिस बल की व्यवस्था होगी। महाअभियान में विभाग को मापी के संबंध में पहले मिले आवेदनों का भी निबटारा होगा।

जमीनकी मापी (पैमाइश) कई कारणों से बेहद जरूरी होती है। इससे न सिर्फ जमीन की सही सीमा तय होती है बल्कि भविष्य के कानूनी विवादों से भी बचा जा सकता है।

  • जमीन की वास्तविक सीमा (Boundary) स्पष्ट होती है
  • पड़ोसी से होने वाले विवाद समाप्त होते हैं
  • जमीन खरीद-बिक्री में कानूनी सुरक्षा मिलती है
  • दाखिल-खारिज और रजिस्ट्री में आसानी होती है
  • कोर्ट केस की संभावना कम होती है

आवेदक को राज्य सरकार के भू-अभिलेख पोर्टल पर जाकर जमीन से संबंधित जानकारी भरनी होगी, जैसे:-

  • खाता और खेसरा नंबर
  • जमीन का विवरण
  • आवेदक का नाम और मोबाइल नंबर
  • मापी का कारण (विवादित / अविवादित)
  • ग्रामीण क्षेत्र: ₹500
  • शहरी क्षेत्र: ₹1000

शुल्क का भुगतान पूरी तरह ऑनलाइन माध्यम से होगा।

  • जमीन से सटे सभी पड़ोसियों (चौहद्दीदारों) को नोटिस भेजा जाएगा
  • SMS और लिखित नोटिस दोनों माध्यमों से सूचना दी जाएगी
  • निर्धारित तिथि पर सरकारी अमीन जमीन की मापी करेगा
  • मापी के समय पुलिस बल मौजूद रहेगा
  • GPS, नक्शा और राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर पैमाइश होगी
  • 7 से 11 दिनों में मापी प्रक्रिया पूरी
  • मापी रिपोर्ट पोर्टल पर ऑनलाइन अपलोड की जाएगी
  • मापी समय: लगभग 7 दिन
  • प्रक्रिया सरल और तेज
  • किसी प्रकार की आपत्ति नहीं
  • मापी समय: अधिकतम 11 दिन
  • सभी पक्षों की उपस्थिति जरूरी
  • पुलिस बल की निगरानी में मापी
  • विवाद निपटारे की विस्तृत रिपोर्ट
  • जमीन का पूरा विवरण
  • क्षेत्रफल (एरिया)
  • डिजिटल नक्शा
  • सरकारी अमीन की रिपोर्ट
  • चौहद्दीदारों के हस्ताक्षर

यह रिपोर्ट भविष्य में कानूनी दस्तावेज के रूप में मान्य होगी।

  • भ्रष्टाचार पर रोक
  • पूरी प्रक्रिया पारदर्शी
  • समय और पैसे की बचत
  • आम नागरिकों को सुविधा
  • जमीन विवादों का स्थायी समाधान
  • मापी के समय पुलिस बल की मौजूदगी
  • स्थानीय थाना को पहले से सूचना
  • किसी भी विवाद की स्थिति में त्वरित कार्रवाई

राज्य सरकार का कहना है कि इस योजना का उद्देश्य सुशासन, पारदर्शिता और आम जनता को राहत देना है। इससे भूमि विवादों में कमी आएगी और जमीन से जुड़े कार्य आसान होंगे।

जमीन मापी की ऑनलाइन व्यवस्था आम लोगों के लिए एक बड़ी राहत है। अब न तो दफ्तरों के चक्कर लगाने होंगे और न ही दलालों पर निर्भर रहना पड़ेगा। यह कदम जमीन विवादों को कम करने और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में बेहद अहम साबित होगा।

अगर आपको यह जानकारी उपयोगी लगी हो तो इसे शेयर जरूर करें।

Arattai Group JoinCLICK HERE
Whatsapp Group JoinCLICK HERE
TELEGRAMjoin
YOUTUBESUBSCRIBE

For Feedback - feedback@example.com

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment

रात में मुंह में लौंग रखने के फायदे यहाँ मिल रहा है सबसे सस्ता बड्स – 199 में शादी में फिजूल खर्च ऐसे रोके हनुमान जी को इलायची चढाने के लाभ पर्स में रखें ये चिजें- नहीं होगा पैसों की कमी