मैट्रिक इंटर में अब कोई विधार्थी नहीं होगा फेल – बड़ा बदलाव अब फेल पर रोक -:- बिहार बोर्ड के मैट्रिक और इंटरमीडिएट के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा विभाग ने एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी की है। अब बिहार में 10वीं और 12वीं की परीक्षा में अपेक्षित अंक प्राप्त नहीं करने वाले विद्यार्थियों की मार्कशीट या प्रमाण पत्र पर ‘FAIL’ या ‘फेल’ शब्द नहीं लिखने की योजना है।
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने समीक्षा बैठक में कहा कि विद्यार्थियों के प्रमाण पत्र पर ‘फेल’ शब्द के स्थान पर ‘कौशल के लिए पात्र’ (Eligible for Skills) शब्द का प्रयोग किया जाएगा। इसके लिए नियमों में आवश्यक बदलाव करने और बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) को निर्देश जारी करने की बात कही गई है।
लेकिन यहां विद्यार्थियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह समझना जरूरी है कि मार्कशीट से ‘फेल’ शब्द हटने का मतलब यह नहीं है कि अब सभी विद्यार्थी अपने-आप पास हो जाएंगे। पास होने के लिए बोर्ड द्वारा निर्धारित न्यूनतम अंक और परीक्षा नियम लागू रहेंगे।
इंटर तक का कोई स्टूडेंट अब नहीं होगा ‘फेल’
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा है कि बच्चों की मार्कशीट पर अब ‘फेल’ शब्द नहीं लिखा जायेगा. इसके लिए नियम में बदलाव किया जायेगा. शिक्षा विभाग जल्द ही बिहार विद्यालय परीक्षा समिति को आवश्यक निर्देश जारी करेगा.
शिक्षा मंत्री बोले-प्रमाण पत्र पर ‘फेल’ की जगह ‘कौशल के लिए पात्र’ शब्द का होगा प्रयोग
मैट्रिक व इंटर की मार्कशीट पर इसे लागू किया जायेगा. ‘फेल’ की जगह प्रमाण पत्र पर ‘कौशल के लिए पात्र’ शब्द का प्रयोग किया जायेगा. गुरुवार की रात विकास भवन स्थित मदन मोहन सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में मंत्री ने यह घोषणा की.
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि
बच्चों के मनोबल को बनाये रखना जरूरी है. किसी परीक्षा में अपेक्षित अंक नहीं आने से बच्चे की प्रतिभा खत्म नहीं हो जाती. इसलिए प्रमाण पत्र पर ‘फेल’ जैसे शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जायेगा.
मैट्रिक पूरक परीक्षा देने वालों के लिए विशेष कक्षा
शिक्षा मंत्री ने कहा कि मैट्रिक की पूरक परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों के लिए एक महीने तक विशेष कक्षाएं चलेंगी. बैठक में पांच सितंबर को कृष्ण मेमोरियल हॉल में होने वाले शिक्षक दिवस समारोह की तैयारियों की भी समीक्षा की गयी. इसका उद्घाटन मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी करेंगे और दोनों उपमुख्यमंत्री भी उपस्थित रहेंगे. इस मौके पर मुख्यमंत्री शिक्षक सहयोग पोर्टल की भी शुरुआत करेंगे. हर जिले से एक-एक चयनित शिक्षक को राजकीय पुरस्कार से सम्मानित किया जायेगा. सरस्वती विद्या निकेतन के रूप में चयनित पटना के 10 मॉडल स्कूलों के बच्चों को भी आमंत्रित किया जायेगा.
मैट्रिक-इंटर की मार्कशीट पर अब नहीं लिखा जाएगा ‘फेल’
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि मैट्रिक और इंटर के बच्चों की पर अब मार्कशीट ‘फेल’ शब्द नहीं लिखा जाएगा। इसके लिए नियम में बदलाव होगा। शिक्षा विभाग जल्द ही बिहार विद्यालय परीक्षा समिति को आवश्यक निर्देश जारी करेगा। ‘फेल’ की जगह कौशल के लिए पात्र शब्द का प्रयोग होगा।
गुरुवार को आयोजित समीक्षा बैठक में उन्होंने कहा कि
बच्चों के मनोबल को बनाए रखना जरूरी है। किसी परीक्षा में अपेक्षित अंक नहीं आने से बच्चे की प्रतिभा खत्म नहीं हो जाती। इसलिए प्रमाण पत्र पर ‘फेल’ जैसे शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मैट्रिक की पूरक परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों के लिए एक महीने तक विशेष कक्षाएं चलाई जाएंगी। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को बेहतर तैयारी का अवसर देना और उनकी सफलता सुनिश्चित करना है।
बैठक में 5 सितंबर को श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजित होने वाले शिक्षक दिवस समारोह की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। समारोह का उद्घाटन मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी करेंगे। इस अवसर पर दोनों उपमुख्यमंत्री भी उपस्थित रहेंगे। मुख्यमंत्री शिक्षक सहयोग पोर्टल की भी शुरुआत करेंगे। हर जिले से एक-एक चयनित शिक्षक को राजकीय पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।
कौशल के लिए पात्र शब्द का प्रयोग होगा
कार्यक्रम में सरस्वती विद्या निकेतन के रूप में चयनित पटना के 10 मॉडल स्कूलों के बच्चों को भी आमंत्रित किया जाएगा। इसके अलावा डायट, एससीईआरटी और शिक्षक प्रशिक्षण केंद्रों के शिक्षकों को भी समारोह में आमंत्रित किया जाएगा। शिक्षा मंत्री ने बिहार शिक्षा परियोजना परिषद सहित विभिन्न विभागों के आय-व्यय का ब्योरा लिया। बैठक में विभाग के सचिव राजीव रौशन, विशेष सचिव धर्मेंद्र कुमार समेत सभी वरीय अधिकारी उपस्थित रहे।
पहले कितने अंक से कम आने पर विद्यार्थी फेल होते थे?
बिहार बोर्ड की परीक्षाओं में सामान्य रूप से विद्यार्थियों को न्यूनतम पासिंग अंक प्राप्त करना आवश्यक होता है।
मैट्रिक में पास होने के लिए कितने अंक जरूरी थे?
बिहार बोर्ड की माध्यमिक परीक्षा के नियमों में सामान्य रूप से प्रत्येक विषय में 30 प्रतिशत के आसपास न्यूनतम अंक प्राप्त करने का प्रावधान रहा है।
उदाहरण के तौर पर
| कुल अंक | 30 प्रतिशत अंक |
|---|---|
| 100 अंक | 30 अंक |
| 80 अंक | 24 अंक |
| 70 अंक | 21 अंक |
| 50 अंक | 15 अंक |
बिहार बोर्ड के प्रकाशित परीक्षा नियमों में भी माध्यमिक परीक्षा के लिए प्रत्येक विषय में 30 प्रतिशत से अधिक/न्यूनतम निर्धारित अंक प्राप्त करने का प्रावधान दर्ज है।
विद्यार्थियों के लिए क्यों लिया गया यह फैसला?
इस फैसले के पीछे सबसे बड़ी वजह विद्यार्थियों का मनोबल और आत्मविश्वास माना जा रहा है।
कई बार परीक्षा में कम अंक आने के बाद विद्यार्थी खुद को पूरी तरह असफल मान लेते हैं। मार्कशीट पर ‘फेल’ शब्द देखने के बाद उन पर मानसिक और सामाजिक दबाव भी बढ़ सकता है।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि किसी परीक्षा में अपेक्षित अंक नहीं आने से विद्यार्थी की प्रतिभा समाप्त नहीं हो जाती। इसी सोच के साथ प्रमाण पत्र पर ‘फेल’ जैसे शब्द का इस्तेमाल नहीं करने की तैयारी की जा रही है।
‘कौशल के लिए पात्र’ का क्या मतलब है?
नई शब्दावली का उद्देश्य विद्यार्थियों को यह संदेश देना है कि यदि किसी परीक्षा में उनके अंक अपेक्षा के अनुसार नहीं आए हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि उनके पास कोई प्रतिभा नहीं है।
हर विद्यार्थी की रुचि अलग-अलग क्षेत्रों में हो सकती है, जैसे—
- कंप्यूटर और आईटी
- तकनीकी शिक्षा
- डिजिटल स्किल
- व्यवसाय और उद्यमिता
- खेल
- कला और संगीत
- डिजाइनिंग
- अन्य व्यावसायिक एवं कौशल आधारित क्षेत्र
इसलिए सरकार की नई सोच विद्यार्थियों को केवल ‘पास’ और ‘फेल’ के आधार पर देखने के बजाय उनकी अन्य क्षमताओं और कौशल के अवसरों से जोड़ने की दिशा में है।
मैट्रिक पूरक परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों के लिए विशेष कक्षाएं
इस फैसले के साथ-साथ मैट्रिक की पूरक/सप्लीमेंट्री परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों के लिए भी विशेष व्यवस्था की बात कही गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, पूरक परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों के लिए एक महीने तक विशेष कक्षाएं संचालित करने की योजना है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को दोबारा परीक्षा की बेहतर तैयारी कराना और उनकी कमजोरियों को दूर करने में मदद करना है।
विशेष कक्षाओं का फायदा
इस व्यवस्था से विद्यार्थियों को—
- कमजोर विषयों पर दोबारा ध्यान देने का मौका मिलेगा।
- महत्वपूर्ण टॉपिक की तैयारी कराई जा सकती है।
- परीक्षा का डर कम करने में मदद मिलेगी।
- बेहतर मार्गदर्शन मिल सकता है।
- अगली परीक्षा में प्रदर्शन सुधारने का अवसर मिलेगा।
क्या बिहार बोर्ड 2027 के विद्यार्थियों पर भी लागू होगा नया नियम?
मैट्रिक और इंटर परीक्षा 2027 की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है। हालांकि शिक्षा मंत्री द्वारा बदलाव की घोषणा के साथ ही यह भी कहा गया है कि इसके लिए नियमों में बदलाव किया जाएगा और बिहार विद्यालय परीक्षा समिति को आवश्यक निर्देश जारी किए जाएंगे।
इसलिए अंतिम रूप से यह जानने के लिए कि नई व्यवस्था किस परीक्षा और किस परिणाम से लागू होगी, विद्यार्थियों को BSEB और बिहार शिक्षा विभाग की आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार करना चाहिए।
विद्यार्थियों को अब क्या करना चाहिए?
इस खबर के बाद विद्यार्थियों को किसी भ्रम में नहीं रहना चाहिए।
ध्यान रखें—
- 1. पढ़ाई को गंभीरता से जारी रखें
- ‘फेल’ शब्द हटने का मतलब यह नहीं है कि पासिंग मार्क्स समाप्त हो गए हैं।
- 2. प्रत्येक विषय में अच्छे अंक लाने का लक्ष्य रखें
- केवल पास होने की बजाय बेहतर अंक प्राप्त करने की कोशिश करें।
- 3. कमजोर विषयों पर ज्यादा ध्यान दें
- मैथ, साइंस, इंग्लिश या किसी अन्य कमजोर विषय को समय रहते मजबूत करें।
- 4. बोर्ड के आधिकारिक नोटिस देखें
- नए नियम से संबंधित अंतिम जानकारी आधिकारिक अधिसूचना से ही मानें।
- 5. कम अंक आने पर निराश न हों
- एक परीक्षा जीवन और भविष्य का अंतिम फैसला नहीं करती। दोबारा तैयारी और बेहतर प्रदर्शन के कई अवसर होते हैं।
निष्कर्ष
बिहार के मैट्रिक और इंटर के विद्यार्थियों के लिए यह शिक्षा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण और बड़ा बदलाव हो सकता है। अब विद्यार्थियों की मार्कशीट पर ‘FAIL’ या ‘फेल’ शब्द नहीं लिखने की तैयारी की जा रही है और इसकी जगह ‘कौशल के लिए पात्र’ जैसी नई शब्दावली इस्तेमाल करने की योजना है।
लेकिन विद्यार्थियों को सबसे जरूरी बात यह समझनी चाहिए कि ‘फेल’ शब्द हटने का मतलब पासिंग नियम खत्म होना नहीं है। परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए निर्धारित न्यूनतम अंक और बोर्ड के नियमों को पूरा करना अभी भी आवश्यक होगा।
इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों के ऊपर ‘फेल’ शब्द से पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को कम करना और उनके आत्मविश्वास को बनाए रखना है।
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