मछली पालने के लिए सरकार दे रही है पैसा | फ्री के पैसे से शुरू करें अपना मछली पालन और लाखों कमाए

By: arcarrierpoint

On: Monday, October 5, 2026 7:05 PM

मछली पालने के लिए सरकार दे रही है पैसा
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मछली पालने के लिए सरकार दे रही है पैसा- बिहार में रोजगार को बढ़ावा देने के साथ ही मछली निर्यात में वृद्धि के लिए सरकार ने मुख्यमंत्री तालाब मात्स्यिकी विकास योजना शुरू की है। इसके जरिए युवाओं को नया बिजनेस मॉडल मिलेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर बनेंगे। मछली मार्केट में बिहार की मछलियों की संख्या अधिक होगी। इस योजना के सहारे सस्कार मछली उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने के लिए काम कर रही है। योजना का उद्देश्य राज्य के तालाब जल-संसाधनों का विवेकपूर्ण दोहन करते हुए मत्स्य उत्पादन की श्रृंखलाओं को बढ़ावा देना है।

मछली पालन से कम लागत में अधिक आय होती है। एक जगह पर ही कई लोगों को रोजगार मिलता है। बिहार सरकार की ओर से तालाबों में मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए 70% तक अनुदान दिया जा रहा है। साथ ही मत्स्य-बीज उत्पादन, ट्यूबवेल-पंप सेट और यांत्रिक एरेटर के लिए भी अनुदान दिया जाएगा। सरकार के मुताबिक वर्ष 2025-26 में राज्य से 39.07 हजार टन मछलियां बाहर भेजी गई हैं। बिहार से मछलियां नेपाल, सिलिगुड़ी, लुधियाना, अमृतसर, बनारस, गोरखपुर, देवरिया, कप्तानगंज, रांची तथा गोड्डा आदि शहरों में भेजी जाती है।

योजना के तहत उन्नत मत्स्य-बीज उत्पादन के लिए निर्धारित इकाई लागत एक लाख रुपए प्रति 0.5 एकड़ है। वहीं, ट्यूबवेल तथा पंप सेट के लिए निर्धारित इकाई लागत 1.20 लाख रुपए और तालाब मात्स्यिकी के लिए यांत्रिक एरेटर की इकाई लागत 50 हजार रुपए निर्धारित की गई है। इन सामग्रियों पर सामान्य वर्ग के लाभुकों को निर्धारित इकाई लागत का 50%, अति पिछड़ा वर्ग, एससी-एसटी लाभुकों को 70% अनुदान दिया जाएगा।

योजना के लिए मत्स्य विभाग की वेबसाइट fisheries.bihar.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। आवेदक के पास मोबाइल नंबर, बैंक खाता संख्या और आईएफएससी कोड, आधार कार्ड, राशन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, जमीन के नक्शे की अभिप्रमाणित प्रति होनी चाहिए। इसके साथ ही एससी-एसटी व अति पिछड़ा वर्ग के लाभुकों के लिए जाति प्रमाणपत्र संलग्न करना अनिवार्य है।

बिहार सरकार के पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के अंतर्गत मत्स्य निदेशालय द्वारा मुख्यमंत्री तालाब मात्स्यिकी विकास योजना संचालित की जा रही है। इसका उद्देश्य तालाबों में आधुनिक तरीके से मछली पालन को बढ़ावा देना और मत्स्य पालकों की आय बढ़ाना है।

योजना के अंतर्गत मछली पालन से संबंधित अलग-अलग गतिविधियों के लिए वित्तीय सहायता/अनुदान का प्रावधान है। वर्तमान 2026-27 के आधिकारिक लक्ष्य में इस योजना के तहत उन्नत मत्स्य बीज उत्पादन, यांत्रिक एरेटर तथा ट्यूबवेल-पंपसेट जैसी इकाइयां शामिल हैं।

योजना का मुख्य उद्देश्य

  • ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ाना
  • किसानों को मछली पालन की ओर आकर्षित करना
  • तालाबों की उत्पादकता बढ़ाना
  • आधुनिक तकनीक से मछली उत्पादन बढ़ाना
  • मछली पालकों की आमदनी में वृद्धि करना
  • बिहार में मछली उत्पादन को बढ़ावा देना

बिहार मत्स्य निदेशालय की वर्तमान जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री तालाब मात्स्यिकी विकास योजना में तीन प्रमुख घटक शामिल हैं।

योजना/इकाईनिर्धारित इकाई लागतभूमि/जलक्षेत्र संबंधी शर्त
उन्नत मत्स्य बीज उत्पादन₹1 लाखएक व्यक्ति/परिवार को अधिकतम 0.5 एकड़ तक लाभ
यांत्रिक एरेटर₹50,0000.40 एकड़ जलक्षेत्र का तालाब
ट्यूबवेल एवं पंपसेट₹1.20 लाखन्यूनतम 0.25 एकड़ जलक्षेत्र

ध्यान दें: ऊपर दी गई राशि योजना की निर्धारित इकाई लागत है। इसका अर्थ यह नहीं है कि इतनी पूरी राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में नकद दी जाएगी। वास्तविक अनुदान योजना के नियम, स्वीकृत इकाई और पात्रता के अनुसार निर्धारित होता है।

मछली पालन से संबंधित सरकारी योजनाओं में वर्ग के अनुसार अलग-अलग अनुदान प्रावधान हो सकते हैं। उपलब्ध योजना सामग्री में सामान्य वर्ग के लिए 50% तथा अत्यंत पिछड़ा वर्ग और SC/ST लाभार्थियों के लिए 70% तक अनुदान का प्रावधान बताया गया है।

हालांकि, आवेदन करने से पहले अपने वित्तीय वर्ष के स्वीकृति आदेश और नवीनतम दिशा-निर्देश को जरूर देखना चाहिए, क्योंकि योजना की इकाई, पात्रता और अनुदान नियम वित्तीय वर्ष के अनुसार बदल सकते हैं।

बिहार मत्स्य निदेशालय ने 2026-27 के लिए मुख्यमंत्री तालाब मात्स्यिकी विकास योजना से संबंधित स्वीकृति आदेश और शपथ पत्र सहित दस्तावेज अपनी वेबसाइट पर उपलब्ध कराए हैं।

उदाहरण के तौर पर यदि किसी स्वीकृत इकाई की लागत ₹1,00,000 निर्धारित है और उस इकाई पर 50% अनुदान लागू होता है, तो अनुमन्य अनुदान ₹50,000 तक हो सकता है।

वहीं यदि किसी पात्र श्रेणी में 70% अनुदान लागू होता है तो ₹1,00,000 की अनुमन्य इकाई लागत पर अधिकतम ₹70,000 तक अनुदान बन सकता है।

लेकिन यह सिर्फ समझाने के लिए उदाहरण है। वास्तविक भुगतान संबंधित योजना के स्वीकृत प्रावधान और विभागीय सत्यापन के आधार पर होगा।

मछली पालन में पानी में ऑक्सीजन की पर्याप्त मात्रा बनाए रखना काफी महत्वपूर्ण होता है। इसके लिए मैकेनिकल एरेटर उपयोगी होता है।

इसी प्रकार तालाब में पानी की उपलब्धता और प्रबंधन के लिए ट्यूबवेल एवं पंपसेट की आवश्यकता पड़ सकती है। वर्तमान 2026-27 की मुख्यमंत्री तालाब मात्स्यिकी विकास योजना में इन दोनों गतिविधियों को भी शामिल किया गया है।

इससे लाभार्थी केवल पारंपरिक तरीके से मछली पालने के बजाय आधुनिक मत्स्य पालन तकनीक का उपयोग कर सकता है।

योजना की पात्रता संबंधित स्वीकृति आदेश और दिशा-निर्देशों के अनुसार निर्धारित होती है। इसलिए आवेदन से पहले आधिकारिक नियमों को पढ़ना जरूरी है।

सामान्य रूप से आवेदक के पास मछली पालन के लिए संबंधित तालाब/जलक्षेत्र या योजना के अनुसार आवश्यक संसाधन उपलब्ध होना चाहिए।

इसके अलावा आवेदक को विभाग के पोर्टल पर पंजीकरण करना पड़ सकता है। मत्स्य निदेशालय की वेबसाइट पर वर्तमान में मत्स्य योजनाओं के लिए नया पंजीकरण और पहले से पंजीकृत आवेदकों के लिए लॉगिन की सुविधा दी गई है।

योजना के अनुसार दस्तावेजों में अंतर हो सकता है, इसलिए आवेदन के समय संबंधित दिशानिर्देश जरूर देखें।

आम तौर पर निम्न दस्तावेज तैयार रखना उपयोगी रहेगा:

  • आधार कार्ड
  • मोबाइल नंबर
  • बैंक खाता विवरण
  • बैंक पासबुक
  • आधार से संबंधित जानकारी
  • जमीन/तालाब से संबंधित दस्तावेज
  • भूमि के नक्शे/अभिलेख, जहां आवश्यक हो
  • जाति प्रमाण पत्र, यदि आरक्षित श्रेणी का लाभ लेना है
  • पासपोर्ट साइज फोटो
  • स्व-घोषणा/शपथ पत्र
  • अन्य विभागीय दस्तावेज

जरूरी बात: केवल दस्तावेज होने से अनुदान की गारंटी नहीं होती। आवेदन का सत्यापन और विभागीय स्वीकृति आवश्यक होती है।

बिहार मत्स्य निदेशालय की आधिकारिक वेबसाइट पर वित्तीय वर्ष 2026-27 की योजनाओं के लिए आवेदन प्रक्रिया उपलब्ध है।

आधिकारिक वेबसाइट खोलें

सबसे पहले बिहार मत्स्य निदेशालय की वेबसाइट खोलें: बिहार मत्स्य निदेशालय की आधिकारिक वेबसाइट

मत्स्य योजनाओं के आवेदन पर जाएं

वेबसाइट पर “मत्स्य योजनाओं हेतु आवेदन” विकल्प दिखाई देगा।

नया पंजीकरण करें

अगर आपने पहले पंजीकरण नहीं किया है तो नया पंजीकरण करें। पहले से पंजीकृत लाभार्थी अपने लॉगिन विवरण से पोर्टल में प्रवेश कर सकते हैं।

योजना का चयन करें

उपलब्ध योजनाओं में से अपनी आवश्यकता के अनुसार संबंधित योजना/इकाई का चयन करें।

जानकारी भरें

आवेदन फॉर्म में मांगी गई व्यक्तिगत, बैंक, जमीन/तालाब और अन्य जानकारी सावधानीपूर्वक भरें।

दस्तावेज अपलोड करें

आवश्यक दस्तावेजों की स्कैन कॉपी/फोटो अपलोड करें।

आवेदन सबमिट करें

सभी जानकारी जांचने के बाद आवेदन को अंतिम रूप से सबमिट करें और Application/Registration Number सुरक्षित रखें।

मछली पालन एक व्यवसाय है और सही प्रबंधन होने पर इससे अच्छी आय हो सकती है, लेकिन इसे “फ्री पैसे से शुरू करके निश्चित रूप से लाखों रुपये कमाने” की योजना के रूप में नहीं देखना चाहिए। मछली पालन में तालाब की तैयारी, मछली बीज, चारा, दवा, पानी का प्रबंधन, श्रम, बिजली/डीजल, एरेटर और बाजार भाव जैसी कई चीजों पर खर्च होता है।

इसलिए व्यवसाय शुरू करने से पहले कुल लागत, संभावित उत्पादन, स्थानीय बाजार और बिक्री मूल्य का हिसाब बनाना जरूरी है। सरकार का अनुदान शुरुआती लागत को कम करने में मदद कर सकता है, लेकिन लाभ उत्पादन और बाजार प्रबंधन पर निर्भर करेगा।

बिहार में बड़ी संख्या में किसान और मत्स्य पालक मछली पालन से जुड़े हुए हैं। मत्स्य निदेशालय के उपलब्ध आंकड़ों में राज्य में 1,12,952 पंजीकृत मत्स्य किसान दर्ज हैं।

विभाग की वेबसाइट के अनुसार बिहार में तालाब और अन्य जल संसाधनों के माध्यम से मत्स्य पालन की काफी संभावनाएं हैं।

इसलिए जिन लोगों के पास उपयुक्त तालाब और संसाधन हैं, उनके लिए यह एक संभावित ग्रामीण व्यवसाय बन सकता है।

1. योजना के नाम को ध्यान से देखें:
मुख्यमंत्री तालाब मात्स्यिकी विकास योजना और अन्य मत्स्य योजनाएं अलग-अलग हो सकती हैं।

2. अनुदान को मुफ्त नकद पैसा न समझें:
सरकार निर्धारित इकाई लागत पर नियमों के अनुसार सहायता देती है।

3. पहले विभागीय नियम पढ़ें:
2026-27 के लिए विभाग ने योजना के दस्तावेज और दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

4. फर्जी वेबसाइट से बचें:
आवेदन केवल बिहार मत्स्य निदेशालय के आधिकारिक पोर्टल से करें।

5. बैंक और दस्तावेज की जानकारी सही दें:
गलत जानकारी के कारण आवेदन में समस्या आ सकती है।

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