2026 में इतना दिन है लगन – खरमास का मुहूर्त इस दिन से:-भारत में विवाह के शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व है। साल 2026 में विवाह करने वाले लोगों के लिए अच्छी खबर यह है कि इस वर्ष फरवरी से दिसंबर तक कुल 79 विवाह मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे। हालांकि उससे पहले दिसंबर 2025 के अंत से शुरू होने वाले खरमास के कारण एक महीने तक सभी मांगलिक कार्यों पर रोक रहेगी। आइए जानते हैं कि खरमास कब शुरू होगा, कब समाप्त होगा और 2026 में कौन-कौन से दिन विवाह के लिए शुभ माने गए हैं।
इस साल 16 दिसंबर से थम जाएगी शहनाई की गूंज नए साल में फरवरी से दिसंबर तक 79 विवाह मुहूर्त
सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करने के साथ ही 16 दिसंबर से खरमास की शुरुआत हो जाएगी जो 14 जनवरी तक रहेगा। इसके बाद जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेंगे तो 14 जनवरी को खरमास की समाप्ति होगी। 15 जनवरी से पुनः मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे। हालांकि, इस बार जनवरी 2026 में विवाह का कोई मुहूर्त नहीं है। शुक्र ग्रह अस्त रहने के कारण जनवरी में विवाह नहीं होंगे। 23 जनवरी को बसंत पंचमी है।
अगस्त, सितंबर, अक्टूबर में चातुर्मास के कारण नहीं होते विवाह मुहूत
इसे लेकर पं. हरिशंकर पाठक ने विभिन्न पंचांगों के हवाले से बताया कि अगस्त, सितंबर और अक्टूबर में आमतौर पर चातुर्मास के कारण विवाह मुहूर्त नहीं होते हैं। ये सामान्य मुहूर्त हैं। उन्होंने बताया कि शुभमुहूर्त के दिनों में भी वर-वधू पक्ष की कुंडली के आधार पर विवाह का सबसे उत्तम और सटीक मुहूर्त का पता लगाया जाता है।
वर्ष 2026 में विवाह के शुभ मुहूर्त
- फरवरी:- 03, 4, 5, 6, 8, 10, 11 12, 13, 14, 15, 19, 20, 21, 24, 25, 26 मार्च: 02, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12, 13 व 14
- अप्रैल:- 20, 21, 25, 26, 27, 28, 29 व 30
- मई:- 01, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 12, 13, 14
- जून :- 19, 20, 21, 22, 23, 24, 25, 26, 27, 29 व 30
- जुलाई:- 01, 2, 6, 7, 8 व 11
- नवंबर :- 20, 21, 24, 25, 26, 27 व 30
- दिसंबर :- 01, 2, 3, 4, 6, 9 व 10 तारीख
सूर्य के धनु में प्रवेश करने पर शुरू होता है खरमास
जहां सूर्य अपनी वार्षिक यात्रा के दौरान धनु राशि (जो वृहस्पति की राशि है) में गोचर करता है उसे ज्योतिष में ‘धनु संक्रांति’ कहते हैं। यह हर साल लगभग 15-16 दिसंबर को होता है जिससे व्यक्ति में आशावाद, ज्ञान की खोज और आध्यात्मिक रुचि बढ़ती है। सूर्य हर महीने एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है। जब यह धनु राशि में आता है तो इसे धनु संक्रांति कहते हैं। धनु राशि का स्वामी गुरु (वृहस्पति) है जो सूर्य का मित्र है। इसलिए, जब सूर्य धनु राशि में होता है तो यह ज्ञान, आध्यात्मिकता, उच्च शिक्षा और विस्तार की भावनाओं को बढ़ावा देता है। सूर्य के धनु राशि में आने से खरमास (मलमास) शुरू होता है।
इसमें विवाह, गृह प्रवेश जैसे शुभकार्य वर्जित माने जाते हैं,
लेकिन दान-पुण्य और आध्यात्मिक कार्यों का महत्व बढ़ जाता है। इसके प्रभाव से सकारात्मक विचार के रूप में आत्मविश्वास, साहस, सत्य की खोज, उत्साह, और जीवन के प्रति सकारात्मकता में वृद्धि होती है। जबकि, नकारात्मक विचार के रूप में अति-आत्मविश्वास, बेचैनी और कठोर वचन बोलने की प्रवृत्ति हो सकती है। इसलिए संतुलन बनाए रखना जरूरी है। यह एक प्राकृतिक ज्योतिषीय घटना है जो हर साल होती है और इसका मुख्य कारण ग्रहों की गति और उनका राशियों से संबंध है। इससे लोगों के जीवन में परिवर्तन और अवसर आते हैं।
खरमास 16 से शुरू होगा, एक माह के लिए रुक जाएंगे मांगलिक कार्य
पौष कृष्ण प्रतिपदा 16 दिसंबर मंगलवार से सनातन धर्मावलंबियों का खास महीना खरमास शुरू हो रहा है। खरमास शुरू होते ही हिंदुओं के शुभ कार्यों या मांगलिक कार्यों पर महीने भर के लिए रोक लग जाएगी। सूर्य के गुरु की राशि धनु में गोचर करने पर खरमास शुरू होगा और मकर राशि में प्रवेश पर खत्म हो जाएगा। 16 दिसंबर मंगलवार की दोपहर 1.24 बजे सूर्य धनु राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के धनु राशि में गोचर से खरमास का आरंभ हो जाएगा। मिथिला पंचांग में भद्रामुख के हिसाब से समय निर्धारित की जाती है। जबकि बनारसी पंचांगों में भद्रा पूछ के अनुसार।
14 जनवरी एकादशी तिथि को रात 9:19 बजे सूर्य के मकर राशि में प्रवेश से खरमास समाप्त हो जाएगा
फिर नए साल में 14 जनवरी बुधवार माघ कृष्ण एकादशी की रात्रि 9.19 बजे सूर्य का मकर राशि में प्रवेश होने से खरमास समाप्त हो जाएगा। सूर्य ही संक्रांति और लग्न के राजा माने जाते हैं। इनकी राशि का परिवर्तन ही खरमास का द्दोतक है।
शुभ कार्य वर्जित
ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश झा ने पंचागों के हवाले से बताया कि खरमास में कोई भी शुभ मांगलिक आयोजन नहीं होंगे। विवाह, नए घर में गृह प्रवेश, नए वाहन की खरीद, संपत्तियों का क्रय-विक्रय अऔर मुंडन संस्कार जैसे अनेक शुभ कार्य वर्जित होते हैं। खरमास 14 जनवरी 2026 को सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के बाद समाप्त होगा।
खास भगवत पूजन व सेवा करने का मास
खरमास में भगवान नारायण की पूजा विशेष फलदायी होता है। इस मास में विष्णु सहस्त्रनाम, पुरुष सूक्त, सत्यनारायण कथा, भागवत पाठ, आदित्य हृदयस्त्रोत्र का पाठ, भास्कर को अर्घ्य और गरीब, असहाय को अन्न, वस्त्र का दान, गौ सेवा, बड़े-बुजुगों की सेवा, ब्राह्मण को अन्न, फल, ऊनी वस्त्र का दान करने से कई गुना पुण्य फल मिलता है। खरमास में पितृ पिंडदान का खास महत्व है। खरमास में भगवान विष्णु विधिपूर्वक पूजा-पाठ करने से अत्यंत प्रसन्न होते हैं।
सूर्य का राशि परिवर्तन समय
- सूर्य का धनु राशि में प्रवेशः- मंगलवार 16 दिसंबर, दोपहर 1.24 बजे
- सूर्य का धनु राशि में समयावधिः- लगभग एक मास
- सूर्य की स्थिति में परिवर्तनः- 14 जनवरी 2026 की रात्रि 9.19 बजे मकर राशि में प्रवेश
वर्ष में पहला खरमास धनुर्मास और दूसरा मीन मास में लगता है
साल में दो बार खरमास लगता है। पहला खरमास धनुर्मास और दूसरा मीन मास में लगता है। यानि सूर्य जब गुरु की राशियों धनु व मीन में प्रवेश करता है, तो खरमास होता है। क्योंकि, सूर्य के कारण गुरु निस्तेज हो जाते हैं, इसीलिए सूर्य के गुरु की राशि में प्रवेश करने से विवाह आदि मांगलिक कार्य नहीं होते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शादी-विवाह के शुभ योग के लिए बृहस्पति, शुक्र और सूर्य का शुभ होना जरूरी है।
निष्कर्ष
वर्ष 2026 विवाह के लिए बेहद शुभ रहने वाला है। कुल 79 विवाह मुहूर्त लोगों को अपनी सुविधा अनुसार शादी की तारीख चुनने का अवसर देंगे।
खरमास 16 दिसंबर से 14 जनवरी तक रहेगा, जिसके बाद शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाएगी।
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