इस कम्पनी का सक्सेस स्टोरी आपको बिजनेस मैन बना देगा:-आज के समय में डेल्टा एयरलाइंस (Delta Air Lines) का नाम दुनिया की सबसे भरोसेमंद और मुनाफे में चलने वाली एयरलाइंस कंपनियों में लिया जाता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यही कंपनी साल 2005 में दिवालिया होने के कगार पर खड़ी थी। कर्ज इतना ज्यादा था कि कंपनी के बंद होने की खबरें आम हो चुकी थीं।
इसके बावजूद डेल्टा एयरलाइंस ने न सिर्फ खुद को बचाया, बल्कि कुछ ही वर्षों में दुनिया की टॉप-2 एयरलाइन बनकर उभरी।
यह कहानी केवल एक कंपनी की नहीं है, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो बिजनेस शुरू करना चाहता है या बिजनेस में असफलता से जूझ रहा है।
2005 में दिवालिया होने वाली थी, 2 लाख करोड़ से ज्यादा कर्ज था, आज टॉप-2 एयरलाइंस में डेल्टा
11 सितंबर 2001, अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के ट्विन टॉवर पर आतंकी हमला हुआ। इस घटना ने न केवल अमेरिकियों को बुरी तरह झकझोरा बल्कि वहां की एविएशन इंडस्ट्री को भी खासा प्रभावित किया। उन्हीं में से एक थी डेल्टा एयरलाइंस। इस घटना के बाद करीब 10 करोड़ विदेशी यात्री घट गए, जिसका असर एयरलाइन कंपनियों की कमाई पर पड़ा। इसके करीब 2 साल बाद अमेरिका ने इराक पर हमला कर दिया, जिससे तेल की कीमतें ढाई गुना से ज्यादा बढ़ गईं। इसने कंपनी को और पीछे धकेल दिया। कंपनी पर 2 लाख करोड़ रुपए से अधिक का कर्ज हो गया।
ब्रांड से सबक DELTA । डेल्टा एयरलाइन, अमेरिकी एविएशन कंपनी
आखिरकार कंपनी ने 15 सितंबर 2005 में खुद को दिवालिया घोषित करने की कार्रवाई शुरू कर दी। हालांकि सरकारी मदद, रणनीतिक पुनर्गठन और इनोवेटिव मॉडल को लागू कर कंपनी 2007 में फिर उठ खड़ी हुई। कंपनी के तत्कालीन सीईओ गेराल्ड ग्रिनस्टीन ने रीस्ट्रक्चरिंग को ‘लाइफ सेविंग चांस’ बताया। ग्रिनस्टीन ने खुद अपने वेतन में 25 प्रतिशत की कटौती को स्वीकार किया।
कंपनी की ये रणनीतियां बताती हैं कि संकट के समय में भी यदि सही रणनीति अपनाई जाए तो दोबारा उठ खड़ा हुआ जा सकता है। आज ब्रांड से सबक में पढ़िए कहानी डेल्टा एयरलाइंस की।
वर्तमान स्थिति
दुनिया की दूसरी बड़ी एयरलाइन कंपनी है
आज यह एयरलाइंस 52 से अधिक देशों में सेवाएं दे रही है। वर्तमान में दुनिया की टॉप-2 एयरलाइन कंपनियों में शामिल है। 2024 में इससे करीब 20 करोड़ यात्रियों ने यात्राएं कीं। कंपनी के बेड़े में वर्तमान में करीब 986 मेनलाइन एयरक्राफ्ट हैं। इसके सहयोगियों को यदि शामिल कर लिया जाए तो करीब 5500 फ्लाइट्स रोज उड़ती हैं, जो दुनियाभर में करीब 325 डेस्टिनेशंस पर पहुंचती हैं। अटलांटा, मिनियापोलिस, डेट्रॉइट, साल्ट लेक सिटी प्रमुख केंद्र हैं।
4 सबक क्यों- कभी एयरलाइन इंडस्ट्री से बाहर होने वाली थी, आज 3 लाख करोड़ से अधिक की कंपनी है।
- 19 प्रतिशत हिस्सेदारी है अमेरिका के एयरलाइन उद्योग में कंपनी की
- 986 के करीब विमान हैं कंपनी के बेड़े में वर्तमान में, जो आधुनिक सुविधाओं से लैस हैं
- 2026 अटलांटा से दिल्ली के लिए सेवा शुरू कर सकती है।
- 18 करोड़ से अधिक यात्रियों को दनियाभर में सेवा प्रदान कर रही है कंपनी।
- कुछ इस तरह खेतों में दवा का छिड़काव करने वाले प्लेन से शुरू हुई थी डेल्टा एयरलाइन कंपनी।
यूं संकट में फंसी थी डेल्टा
ईंधन के दामों में बेतहाशा बढ़ोतरी
साल 2000 में 28 डॉलर प्रति बैरल वाला जहाज का ईंधन 2005 में 70 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया। इससे कंपनी का मार्जिन बेहद कम हो गया। पुराने और कम क्षमता वाले जहाजों को उड़ाना और महंगा हो गया।
9/11 हमले का प्रभाव
2001 में अमेरिका में हुए 9/11 हमले के बाद लोगों ने हवाई यात्राएं बड़ी संख्या में टाली। सिक्योरिटी का खर्च बढ़ा। इससे कंपनी को करीब 10 हजार करोड़ का नुकसान हुआ।
हाई लेबर, पेंशन खर्च
लग्जरी सुविधाओं के कारण कंपनी का लेबर खर्च अधिक था। इसके अलावा कर्मचारियों को इंडस्ट्री तीसरी सर्वाधिक पेंशन कंपनी देती थी। इससे भी कंपनी पर भारी बोझ बढ़ा।
सस्ती एयरलाइंस का दबाव
साउथ वेस्ट, जेटब्लू जैसी सस्ती एयरलाइंस ने उस दौर में अच्छा खासा मार्केट छीना। कमाई पर असर पड़ा।
इस तरह की वापसी
कर्ज घटाया, बैलेंस सीट मजबूत की
कंपनी ने चैप्टर 11 बैंकरप्सी को केवल कर्ज घटाने का माध्यम नहीं बनाया बल्कि इसे रीस्ट्रक्चरिंग के रूप में इस्तेमाल किया। कर्ज आधा किया, लेबर कॉस्ट 9 हजार करोड़ तक घटाई। इससे बचत शुरू हुई।
नॉर्थ वेस्ट के साथ विलय
2008 में डेल्टा तथा नॉर्थवेस्ट एयरलाइंस का विलय हुआ। इससे यह दुनिया की सबसे बड़ी एयरलाइन बन गई। ग्लोबल नेटवर्क बढ़ा। अंतरराष्ट्रीय रूट्स का विस्तार हुआ।
अंतरराष्ट्रीय रूट, प्रीमियम पर फोकस
बैंकरप्सी की प्रक्रिया के बाद कंपनी ने 50 से अधिक नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाई। प्रीमियम सेवाओं पर फोकस बढ़ाया।
ग्राहक अनुभव को बेहतर किया
कंपनी ने स्काई मॉल्स प्रोग्राम, एम्प्लॉयी प्रॉफिट शेयरिंग जैसी योजनाएं शुरू की। ‘पीपल्स फर्स्ट’ जैसा कल्चर शुरू किया।
कंपनी ने मिसिसिपी डेल्टा से चुना था नाम
शुरुआत : दवाओं के छिड़काव के लिए शुरू हुई थी यह हवाई सेवा
जॉर्जिया में 1925 में हफ डैलैंड डस्टर्स नाम की दुनिया की पहली एरियल क्रॉप डस्टिंग कंपनी शुरू हुई जो फसलों में कीटनाशकों का छिड़काव करती थी। 1928 में कृषि अर्थशास्त्र के जानकार सी.ई. वूलमैन ने कुछ निवेशकों के साथ इसे खरीद लिया। और नाम दिया डेल्टा एयर सर्विस। कंपनी ने 1929 में यात्री सेवा शुरू की।
ऐसे पड़ा नाम:- कंपनी ने डेल्टा नाम मिसिसिपी डेल्टा क्षेत्र से लिया था, जहां कंपनी की शुरुआती उड़ानें संचालित होती थीं।
गिरावट ईंधनों के बढ़े दामों से कंपनी में आया सबसे बड़ा संकट
कंपनी में गिरावट का मुख्य दौर 2000-2005 तक था, जब कंपनी को करीब १० हजार करोड़ रुपए से अधिक का घाटा हुआ। सबसे बड़ा कारण ईंधन का महंगा होना था, जो ऑपरेटिंग कॉस्ट का 30% था। 2001 में 9/11 की घटना से यात्री विमानों की मांग घटने, 2002-03 में इराक पर अमेरिकी हमले जैसी घटनाओं ने भी असर डाला।
सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी :- इस एयरलाइन का सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी अमेरिकन एयरलाइंस है, जो बाजार हिस्सेदारी से लेकर यात्री संख्या तक में आगे है।
12वीं पास, मीडिया की चकाचौंध से दूर, हर कुंभ में स्नान करते हैं, अक्सर सफेद शर्ट पहनते हैं दमानी
साल 1992, देश के शेयर बाजार में हाहाकार मचाने वाला हर्षद मेहता कांड सामने आया। एक तरफ जहां सैकड़ों निवेशक डूब रहे थे, वहीं दूसरी ओर एक निवेशक ऐसा था, जिसने गिरते बाजार से खूब कमाई की। वे थे, देश के रिटेल किंग कहे जाने वाले राधाकिशन दमानी।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उस समय दमानी ने
एक बात कही थी ‘अगर हर्षद मेहता सात दिन और अपनी लॉन्ग पोजिशन होल्ड कर लेता, तो मुझे कटोरा लेकर सड़क पर उतरना पड़ता।’ ऐसा इसलिए क्योंकि हर्षद ने शेयर बाजार में तेजी पर दांव लगाया था, जबकि दमानी ने बाजार के गिरने पर। हालांकि घोटाला सामने आने पर बाजार धड़ाम से गिरे और दमानी को जबर्दस्त प्रॉफिट हुआ।
दमानी भले ही देश के टॉप-10 अमीरों में शामिल हों, लेकिन बेहद ही सरल जीवन जीते हैं।
वे बोगन हैं। सादगी ऐसी है कि लंच के बाद चर्चगेट या मुंबई के इंडस्ट्री हाउस के पास बनी छोटी सी दुकान से पान खाने चले जाते हैं। बेहद सुलझे व्यक्तित्व वाले इंसान हैं। दिन की शुरुआत में उलझन न हो इसलिए सिर्फ सफेद कपड़े पहनते हैं। हालांकि इस सादगी के बावजूद पिछले कुछ सालों में उनकी संपत्तियों को लेकर खूब चचर्चाएं हुई। जैसे 2023 में मुंबई के वली इलाके के ‘श्री सिक्स्टी वेस्ट में उन्होंने 28 लग्जरी अपार्टमेंट एक साथ खरीदे, जिनकी कीमत करीब 1,238 करोड़ रुपए थी, जो देश की सबसे महंगी रेसिडेंशियल प्रॉपर्टी है। इसके अलावा 2021 में साउथ मुंबई के मालाबार हिल्स में एक बंगला खरीदा, जिसकी कीमत हजार करोड़ रुपए से अधिक है।
चर्चा में क्यों- हाल ही में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और हुरुन इंडिया द्वारा जारी सेल्फ मेड बिलियनेअर्स की सूची में टॉप-3 में शामिल हैं।
दमानी का निवेश मंत्र है: कम दाम में अच्छी कंपनियों के शेयर खरीदना और पांच से 10 साल तक इंतजार करना।
- जन्म : 1954 (71 वर्ष), बीकानेर, राजस्थान
- शिक्षा : कॉलेज ड्रॉप आउट
- परिवार : पत्नी- श्रीकांतादेवी
- दमानी, तीन बेटियां- मधु चांडक, ज्योति काबरा, मंजरी चांडक
- संपत्ति : करीब 3 लाख करोड़ रु. (हुरुन इंडिया के अनुसार)
शुरुआत
कॉलेज की पढ़ाई छोड़ संभाला परिवार
बीकानेर के मारवाड़ी परिवार में जन्में राधाकिशन के पिता शिवकिशन दमानी दलाल स्ट्रीट में स्टॉक ब्रोकर थे। साथ ही बॉल बेयरिंग का व्यवसाय करते थे। ऐसे में वे मुंबई आ गए। और एक कमरे के घर में रहने लगे। राधाकिशन का बचपन साधारण रहा। जब वे 12वीं पास कर ग्रेजुएशन में पहुंचे तभी पिता का निधन हो गया। ऐसे में पढ़ाई छोड़ परिवार संभालने लगे।
विवाह
श्रीकांतादेवी से किया पारंपरिक रीति से विवाह
राधाकिशन दमानी ने श्रीकांतादेवी से विवाह किया है। उनका विवाह परिवार की मर्जी से पारंपरिक मारवाड़ी व्यवस्था के तहत हुआ। दमानी और उनका पूरा परिवार अक्सर मीडिया की चकाचौंध से दूर रहता है। इसलिए वे सार्वजनिक कार्यक्रमों में बेहद कम नजर आते हैं। उनकी तीन बेटियां मधु चांडक, ज्योति काबरा और मंजरी चांडक हैं।
करियर
शेयर ट्रेडिंग से देश के छठे सबसे अमीर तक
पिता की मौत के बाद राधाकिशन ने घाटे में चल रहे बॉल बेयरिंग व्यवसाय को बंद कर दिया। और भाई गोपीकिशन के साथ 5000 रुपए से शेयर ट्रेडिंग शुरू कर दी। इसके बाद 1999 में मुंबई के नेरुल में ‘अपना बाजार’ की फ्रेंचाइजी शुरू की, पर उन्हें यह मॉडल जमा नहीं। फिर 2002 में मुंबई के पवई में डीमार्ट का पहला स्टोर खोला। अब देश के छठे सबसे अमीर हैं।
रोचक : 12 राज्यों में 440 से अधिक स्टोर हैं राधाकिशन दमानी के
खास : राकेश झुनझुनवाला इन्हें अपना मेंटर कहते थे
- दमानी हमेशा सफेद शर्ट और सफेद पतलून पहनते हैं, इसलिए लोग उन्हें प्यार से ‘मिस्टर व्हाइट एंड व्हाइट’ भी कहते हैं।
- भारत के वॉरेन बफे कहे जाने वाले राकेश झुनझुनवाला के मेंटर रहे हैं।
- हर कुंभ के दौरान डुबकी लगाने के लिए जरूर जाते हैं।
उपलब्धि : ‘रिटेल किंग’ कहे जाते हैं, फोर्ब्स की सूची में शामिल
- देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इनके 440 से अधिक स्टोर हैं।
- रिटेल स्टोर चेन डीमार्ट के सफल होने पर लोग इन्हें ‘रिटेल किंग’ भी कहते हैं।
- फोब्र्स द्वारा जारी दुनिया के सबसे अमीर लोगों की सूची में 2017 से शामिल हैं। वर्तमान में 138वें नंबर पर हैं।
सेवा और दान: पीएम केयर फंड में 100 करोड़ किए दान
- मुंबई में शिवकिशन मिंडाराम दमानी चैरिटेबल ट्रस्ट चलाते हैं।
- 56 लाइब्रेरी बनाई हैं, जिसका फायदा 50 हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स को मिल रहा है।
- बच्चों को कम्प्यूटर शिक्षा के लिए 70 से ज्याद लैब बनवाई हैं।
- पीएम केयर फंड में 100 करोड़ और कोरोना काल में 55 करोड़ रुपए दान कर चुके हैं
निष्कर्ष
डेल्टा एयरलाइंस की सक्सेस स्टोरी यह साबित करती है कि सही रणनीति, धैर्य और विज़न के साथ कोई भी बिजनेस दिवालिया होने से दुनिया की टॉप कंपनी बन सकता है।
यह कहानी हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो
नौकरी से आगे बढ़कर बिजनेस की दुनिया में नाम बनाना चाहता है।
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