अब रिजल्ट के तुरंत बाद मिल जाएगी डिग्री | स्नातक की डिग्री के लिए नहीं करना होगा आवेदन -:-बिहार के विश्वविद्यालयों में पढ़ाई पूरी कर चुके और आगे डिग्री की जरूरत रखने वाले विद्यार्थियों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अब स्नातक या पीजी का रिजल्ट जारी होने के बाद विद्यार्थियों को मूल डिग्री (Original Degree Certificate) बनवाने के लिए अलग से आवेदन करने की प्रक्रिया से राहत मिल सकती है।
बिहार लोक भवन की ओर से विश्वविद्यालयों को डिग्री वितरण की प्रक्रिया आसान बनाने का निर्देश दिया गया है। इसके तहत जिस प्रकार परीक्षा के बाद विद्यार्थियों को मार्क्सशीट और प्रोविजनल सर्टिफिकेट उपलब्ध कराया जाता है, उसी तरह डिग्री उपलब्ध कराने की व्यवस्था करने की बात कही गई है।
महत्वपूर्ण:- यह व्यवस्था सभी विश्वविद्यालयों के लिए निर्देशित की गई है, लेकिन प्रत्येक विश्वविद्यालय में इसे किस तारीख से पूरी तरह लागू किया गया है, इसकी अलग-अलग अधिसूचना/पोर्टल अपडेट जरूरी है। उदाहरण के लिए, 5 सितंबर 2026 तक BRABU के आधिकारिक पोर्टल पर अभी भी अलग से Degree Certificate के लिए ऑनलाइन आवेदन और शुल्क भुगतान की प्रक्रिया दिखाई दे रही है।
सबसे पहले जानिए क्या बदलेगा?
| पुरानी व्यवस्था | नई व्यवस्था |
|---|---|
| रिजल्ट के बाद डिग्री के लिए अलग से आवेदन करना पड़ता था | अलग आवेदन की जरूरत नहीं रखने की व्यवस्था |
| अलग से डिग्री शुल्क देना पड़ता था | डिग्री शुल्क को परीक्षा प्रक्रिया के साथ जोड़ने की दिशा |
| डिग्री मिलने में कई महीने लग जाते थे | रिजल्ट के बाद जल्द डिग्री उपलब्ध कराने का लक्ष्य |
| नौकरी/नामांकन के समय डिग्री के लिए इंतजार | समय पर मूल डिग्री मिलने की उम्मीद |
| विश्वविद्यालय के डिग्री सेक्शन में आवेदन/दौड़-भाग | प्रक्रिया को सरल और व्यवस्थित करने की तैयारी |
विश्वविद्यालय में बड़ी संख्या में गलत छपकर आ गईं डिग्रियां
बीआरएबीयू में कई छात्रों की डिग्रियां गलत छपकर आ गयी हैं। डिग्री बांटने के दौरान जब डिग्रियों को चेक किया गया तो यह गड़बड़ी सामने आयी। गड़बड़ी पकड़े जाने तक कुछ कॉलेजों में डिग्रियां भेज भी दी गईं, लेकिन अब आनन-फानन में उन्हें मंगाया जा रहा है। ये डिग्रियां वर्ष 2023 और 2024 की बतायी जा रही हैं। यह डिग्रियां विज्ञान और कॉमर्स विषय की हैं। इन डिग्रियों पर स्नातक शब्द हट गया है और केवल विषय अंकित है। कुछ डिग्रियों में प्रतिष्ठा शब्द भी नहीं है।
बीआरएबीयू ने निजी एजेंसी को दे रखी है डिग्रियां छापने की जिम्मेदारी
बीआरएबीयू-के परीक्षा नियंत्रक प्रो. अरविंद कुमार का कहना है कि सिर्फ 24 डिग्रियों में तकनीकी कारणों से मिस प्रिंट हो गया था, जिसे हटा दिया गया है। बाकी सभी डिग्रियां ठीक हैं। लेकिन, सूत्रों के अनुसार 100 से अधिक डिग्रियों में गड़बड़ी मिली है। डिग्रियों को छापने का काम विवि प्रशासन ने निजी एजेंसी को दिया है। एजेंसी से अब दोबारा से डिग्रियां छापकर मंगायी जा रही हैं। बीआरएबीयू में अभी टीआरई-4 और एसटीईटी परीक्षा के लिए युद्ध स्तर पर डिग्रियां तैयार की जा रही हैं।
परीक्षा विभाग में डिग्री के लिए छात्रों की लगी भीड़
बीआरएबीयू में सोमवार को डिग्री के लिए कतार लगी रही। सुबह से दोपहर तक डिग्री सेक्शन के बाहर छात्रों की कतार रही। डिग्री मिलने में देरी होने पर कई छात्रों ने आक्रोश भी जताया। डिग्री के अलावा मार्क्सशीट के लिए भी छात्र परीक्षा विभाग पहुंचे थे।
बिजली कटी रहने से डिग्री छापने में आई परेशानी
बीआरएबीयू में सोमवार को सुबह से दोपहर तक बिजली कटी रही। नतीजतन डिग्रियों को छापने में परेशानी हुई। डिग्रियों के छपने के अलावा डिग्री ईमेल करने में भी दिक्कत आती रही। बिजली के कारण डिग्री छपने की संख्या अन्य दिनों की तुलना में काफी कम रही।
अब रिजल्ट के बाद तुरंत मिल सकेगी डिग्री
बीआरएबीयू समेत सभी विवि में छात्रों को रिजल्ट के बाद तुरंत डिग्री मिल जाएगी। लोकभवन ने सभी विवि को डिग्री देने की प्रक्रिया आसान बनाने को कहा है। छात्रों को अब डिग्री बनाने के लिए अलग से आवेदन नहीं करना होगा। अब तक छात्रों को डिग्री के लिए अलग से आवेदन करना पड़ता था।
बीआरएबीयू की उप परीक्षा नियंत्रक डॉ. रेणु बाला ने बताया कि…
जिस तरह से छात्रों को परीक्षा के बाद मार्क्सशीट और प्रोविजनल सर्टिफिकेट मिल जाते हैं, उसी तरह डिग्री भी मिल जाएगी। हमलोग लगातार डिग्री बना रहे हैं।
10 लाख छात्रों की डिग्री लंबित
बीआरएबीयू में वर्ष 2010 से 2024 तक लगभग 10 लाख छात्रों की डिग्रियां लंबित हैं। यह डिग्रियां स्नातक और पीजी कोर्स की हैं। वोकेशनल कोर्स के भी कई छात्रों की डिग्रियां लंबित हैं। इन डिग्रियों को जल्द तैयार करने का निर्देश लोकभवन ने दिया है। दूसरे विवि में भी हजारों छात्रों की डिग्रियां लंबित हैं। लोकभवन ने वर्ष 2010 से 2016 तक की डिग्रियों को ऑनलाइन करने को कहा है।
छात्र करते हैं दो बार भुगतान
डिग्रियों के लिए छात्र दो बार भुगतान करते हैं। एक बार परीक्षा फॉर्म भरने के समय और दूसरी बार डिग्री के लिए आवेदन करने के वक्त। दोनों बार 400-400 रुपये देने पड़ते हैं। इसपर अंकुश लगाने की पूर्व परीक्षा नियंत्रक प्रो. राम कुमार ने पहल की थी और छात्रों को डिग्री के लिए एक ही भुगतान करने का निर्देश दिया था। हालांकि, अभी इस निर्देश को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है।
- डिग्री से स्नातक शब्द गायब केवल विषय अंकित
- कॉलेजों में भेजी गई डिग्रियां वापस मंगाई जा रहीं
- लोकमवन ने विश्वविद्यालय को जारी किया निर्देश
- डिग्री के लिए अलग से नहीं करना होगा आवेदन
स्नातक की डिग्री क्या होती है?
जब कोई विद्यार्थी BA, BSc, BCom या अन्य स्नातक पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा करता है, तो विश्वविद्यालय द्वारा उसे उसकी शैक्षणिक योग्यता के प्रमाण के रूप में मूल डिग्री प्रमाणपत्र (Original Degree Certificate) दिया जाता है।
उदाहरण के लिए—
- BA — Bachelor of Arts
- BSc — Bachelor of Science
- BCom — Bachelor of Commerce
- BCA — Bachelor of Computer Applications
- BBA — Bachelor of Business Administration
- अन्य स्नातक पाठ्यक्रम
मार्क्सशीट में आपके विषय और प्राप्त अंक/ग्रेड की जानकारी होती है, जबकि डिग्री सर्टिफिकेट यह प्रमाणित करता है कि आपने संबंधित विश्वविद्यालय से अपना स्नातक पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा किया है।
प्रोविजनल सर्टिफिकेट और मूल डिग्री में अंतर
रिजल्ट के बाद विश्वविद्यालय कई बार विद्यार्थियों को Provisional Certificate देता है। इसका इस्तेमाल तत्काल शैक्षणिक योग्यता साबित करने के लिए किया जा सकता है। वहीं Original Degree Certificate विश्वविद्यालय द्वारा प्रदान किया जाने वाला अंतिम/मूल डिग्री प्रमाणपत्र होता है, जिसकी जरूरत कई बार नौकरी, उच्च शिक्षा, दस्तावेज सत्यापन या अन्य आधिकारिक कार्यों में पड़ती है।
पहले डिग्री के लिए क्या करना पड़ता था?
पुरानी व्यवस्था में विद्यार्थी को रिजल्ट आने के बाद विश्वविद्यालय की ओर से डिग्री आवेदन का पोर्टल खुलने का इंतजार करना पड़ता था।
इसके बाद सामान्य तौर पर—
- विश्वविद्यालय के पोर्टल पर जाना पड़ता था।
- Degree Certificate के लिए ऑनलाइन आवेदन करना पड़ता था।
- डिग्री शुल्क जमा करना पड़ता था।
- आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने पड़ते थे।
- आवेदन की जांच के बाद डिग्री तैयार होती थी।
- फिर डिग्री विश्वविद्यालय/कॉलेज से प्राप्त करनी पड़ती थी।
BRABU के आधिकारिक पोर्टल पर वर्तमान प्रक्रिया में Final Year Marksheet, Registration Slip और ऑनलाइन भुगतान की रसीद जैसे दस्तावेज अपलोड करने की प्रक्रिया बताई गई है।
अब क्या व्यवस्था होगी?
नई व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि विद्यार्थी को रिजल्ट आने के बाद मूल डिग्री के लिए दोबारा अलग से आवेदन करने की जरूरत न पड़े।यानी विश्वविद्यालय के पास परीक्षा के दौरान ही विद्यार्थी की पूरी जानकारी उपलब्ध रहेगी और परीक्षा/रिजल्ट प्रक्रिया पूरी होने के बाद डिग्री तैयार करने की प्रक्रिया अपने स्तर से शुरू की जा सकेगी।
हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, BRABU की उप परीक्षा नियंत्रक ने बताया कि जिस तरह परीक्षा के बाद मार्क्सशीट और प्रोविजनल सर्टिफिकेट मिलते हैं, उसी तरह डिग्री उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को आसान बनाया जाएगा।
डिग्री की फीस कितनी लगेगी?
यह सबसे महत्वपूर्ण सवाल है।
BRABU में पहले क्या होता था?
BRABU से संबंधित रिपोर्ट के अनुसार विद्यार्थियों से डिग्री के लिए ₹400 शुल्क लिया जाता था। कई मामलों में परीक्षा फॉर्म भरते समय ₹400 और बाद में डिग्री के लिए आवेदन करते समय फिर ₹400 देने की स्थिति सामने आई थी। यानी कुल ₹800 तक भुगतान करना पड़ रहा था। 2025 में BRABU के परीक्षा नियंत्रक ने भी बताया था कि जिन सत्रों में परीक्षा फॉर्म के साथ डिग्री शुल्क पहले ही लिया जा चुका है, उन विद्यार्थियों से दोबारा शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए और पोर्टल में सुधार किया जाना है।
नई व्यवस्था में क्या होगा?
नई व्यवस्था का उद्देश्य एक ही प्रक्रिया में डिग्री शुल्क लेकर बाद में अलग से आवेदन और भुगतान की जरूरत खत्म करना है।
लेकिन ध्यान रखें:-
₹400 की फीस को बिहार के सभी विश्वविद्यालयों के लिए एक समान नई फीस मानना सही नहीं होगा। फीस विश्वविद्यालय और उसके नियम के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए अपने विश्वविद्यालय की आधिकारिक सूचना आने पर ही अंतिम शुल्क मानें।
डिग्री मिलने में अब कितने दिन लगेंगे?
अभी उपलब्ध जानकारी में सभी विश्वविद्यालयों के लिए कोई एक निश्चित 7 दिन/15 दिन/30 दिन की समयसीमा घोषित नहीं की गई है।नई व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि रिजल्ट के बाद डिग्री तैयार करने की प्रक्रिया पहले से शुरू हो और विद्यार्थियों को महीनों इंतजार न करना पड़े।BRABU समेत बिहार के कई विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों को डिग्री के लिए कई महीने तक इंतजार करना पड़ता रहा है। रिपोर्ट के अनुसार कुछ मामलों में छह महीने तक इंतजार की स्थिति रही है।
बिहार के किन-किन विश्वविद्यालयों के लिए यह व्यवस्था है?
बिहार-लोक भवन की वर्तमान विश्वविद्यालय सूची में 17 विश्वविद्यालय दर्ज हैं।
बिहार के प्रमुख विश्वविद्यालय
- बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय (BRABU), मुजफ्फरपुर
- भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय (BNMU), मधेपुरा
- जय प्रकाश विश्वविद्यालय (JPU), छपरा
- कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय, दरभंगा
- ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (LNMU), दरभंगा
- मगध विश्वविद्यालय, बोधगया
- मौलाना मजहरुल हक अरबी एवं फारसी विश्वविद्यालय, पटना
- नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी, पटना
- पटना विश्वविद्यालय
- तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU), भागलपुर
- वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय (VKSU), आरा
- आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय (AKU), पटना
- बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर
- बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, पटना
- पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, पटना
- मुंगेर विश्वविद्यालय, मुंगेर
- पूर्णिया विश्वविद्यालय, पूर्णिया
इन विश्वविद्यालयों की सूची बिहार लोक भवन की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।
क्या बिहार के सभी विश्वविद्यालयों में यह लागू हो चुका है?
यहां विद्यार्थियों को एक जरूरी बात समझनी चाहिए।
निर्देश सभी विश्वविद्यालयों के लिए है, लेकिन “सभी विश्वविद्यालयों में नई व्यवस्था पूरी तरह लागू हो चुकी है” ऐसा कहना अभी जल्दबाजी होगी। क्योंकि विश्वविद्यालय स्तर पर पोर्टल, शुल्क व्यवस्था और डिग्री वितरण की प्रक्रिया अलग-अलग तरीके से अपडेट हो सकती है।
इसलिए विद्यार्थियों को अपने विश्वविद्यालय की नई अधिसूचना/पोर्टल अपडेट का इंतजार करना चाहिए।
लंबित डिग्रियों को लेकर भी बड़ा फैसला
नई व्यवस्था केवल नए विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि पुरानी लंबित डिग्रियों को लेकर भी विश्वविद्यालयों पर काम तेज करने का निर्देश दिया गया है। BRABU में वर्ष 2010 से 2024 के बीच की लगभग 10 लाख डिग्रियां लंबित होने की रिपोर्ट सामने आई है। इसमें स्नातक और पीजी के साथ कुछ वोकेशनल कोर्स की डिग्रियां भी शामिल हैं।
डिग्री छापने के लिए निजी एजेंसी की मदद
डिग्री तैयार करने और छपाई की प्रक्रिया को तेज करने के लिए BRABU में निजी एजेंसी की मदद ली जा रही है।हालांकि, हाल ही में कुछ डिग्रियों में प्रिंटिंग/फॉर्मेट से संबंधित गलतियां सामने आने की खबर भी आई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने तकनीकी गलती वाली डिग्रियों को वापस लेकर दोबारा तैयार कराने की बात कही है।
इससे यह भी स्पष्ट है कि डिग्री जल्दी देने के साथ-साथ डिग्री की शुद्धता और सत्यापन भी महत्वपूर्ण रहेगा।
डिग्री ऑनलाइन भी मिलेगी?
बिहार में डिजिटल डिग्री और अन्य शैक्षणिक दस्तावेजों को DigiLocker पर उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम हुआ है। इससे विद्यार्थियों को नौकरी, उच्च शिक्षा और दस्तावेज सत्यापन के समय डिजिटल प्रमाणपत्र का उपयोग करने में सुविधा मिल सकती है।
इसलिए आने वाले समय में विद्यार्थियों को फिजिकल Original Degree + डिजिटल डिग्री दोनों माध्यमों से सुविधा मिलने की संभावना बढ़ रही है।
विद्यार्थियों के लिए सबसे जरूरी बात
अगर आप बिहार के किसी विश्वविद्यालय से BA, BSc, BCom या अन्य स्नातक कोर्स कर रहे हैं, तो आने वाले समय में रिजल्ट के बाद डिग्री बनवाने के लिए अलग से आवेदन करने की परेशानी कम हो सकती है।
नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यही है कि:–
- रिजल्ट के बाद डिग्री के लिए अलग आवेदन न करना पड़े।
- अलग से विश्वविद्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें।
- डिग्री के लिए बार-बार फीस न देनी पड़े।
- डिग्री तैयार करने का काम विश्वविद्यालय स्वयं समय पर करे।
- विद्यार्थियों को नौकरी/नामांकन के समय डिग्री के लिए महीनों इंतजार न करना पड़े।
- पुरानी लंबित डिग्रियों को भी तेजी से तैयार किया जाए।
लेकिन फीस और लागू होने की तारीख के मामले में अपने विश्वविद्यालय की आधिकारिक सूचना जरूर देखें।
खासकर BRABU के विद्यार्थियों के लिए अभी पुराने ऑनलाइन Degree Application पोर्टल पर प्रक्रिया दिखाई दे रही है, इसलिए जब तक विश्वविद्यालय की नई अधिसूचना नहीं आती, वर्तमान पोर्टल व्यवस्था को ही अंतिम मानें।
निष्कर्ष
बिहार में डिग्री वितरण की पुरानी धीमी और अलग आवेदन वाली व्यवस्था को बदलने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है। यदि इसे सभी विश्वविद्यालयों में पूरी तरह लागू किया जाता है, तो स्नातक और पीजी पास करने वाले लाखों विद्यार्थियों को सबसे बड़ा फायदा होगा। रिजल्ट के बाद डिग्री के लिए अलग आवेदन, अतिरिक्त दौड़-भाग और लंबे इंतजार की समस्या काफी हद तक खत्म हो सकती है।
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