चार वर्षिय स्नातक कोर्स और पीजी का नया सिलेबस जारी- 7.5 सीजीपीए अनिवार्य

By: arcarrierpoint

On: Friday, September 4, 2026 6:53 PM

चार वर्षिय स्नातक कोर्स और पीजी का नया सिलेबस जारी- 7.5 सीजीपीए अनिवार्य
Google News
Follow Us

चार वर्षिय स्नातक कोर्स और पीजी का नया सिलेबस जारी -:-राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत उच्च शिक्षा व्यवस्था में लगातार बदलाव किए जा रहे हैं। इसी क्रम में चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम और पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) के नए सिलेबस एवं नियमों को लेकर महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया है। नए प्रावधानों के अनुसार अब चार वर्षीय स्नातक में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए पहले तीन वर्षों में 7.5 CGPA हासिल करना बेहद महत्वपूर्ण होगा।

खास बात यह है कि चौथे वर्ष में रिसर्च आधारित पढ़ाई का विकल्प सभी विद्यार्थियों को नहीं मिलेगा। जिन छात्रों का पहले तीन वर्षों यानी छह सेमेस्टर में CGPA 7.5 या उससे अधिक रहेगा, वही चौथे वर्ष में शोध आधारित पढ़ाई का विकल्प चुन सकेंगे। वहीं 7.5 से कम CGPA वाले विद्यार्थियों को सामान्य ऑनर्स डिग्री के साथ स्नातक पूरा करना होगा।

मुख्य बातें

विषयमहत्वपूर्ण जानकारी
स्नातक कोर्स4 वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम में नया सिलेबस लागू
7.5 CGPA अनिवार्यचौथे वर्ष में रिसर्च के लिए पहले 3 वर्षों में 7.5 CGPA जरूरी
रिसर्च ट्रैक7.5 या उससे अधिक CGPA वाले छात्र चौथे वर्ष में शोध आधारित पढ़ाई कर सकेंगे
7.5 से कम CGPAसामान्य 4 वर्षीय ऑनर्स से स्नातक पूरा करना होगा
NET-JRF/PhDरिसर्च आधारित स्नातक करने वालों के लिए आगे NET-JRF/PhD का रास्ता
PG का नया ढांचा1 वर्षीय और 2 वर्षीय PG के लिए नया सिलेबस/क्रेडिट व्यवस्था
PG में 3 विकल्पकेवल कोर्सवर्क, कोर्सवर्क + रिसर्च, या केवल रिसर्च
रिसर्च कार्यरिसर्च मेथोडोलॉजी, लिटरेचर रिव्यू, थीसिस/डिसर्टेशन आदि शामिल
Patent Filingपेटेंट फाइलिंग को भी 3 क्रेडिट की मान्यता
स्पेशलाइजेशनPG में विद्यार्थियों को स्पेशलाइज्ड अध्ययन का अवसर
सबसे महत्वपूर्ण:- पहले 6 सेमेस्टर में 7.5 CGPA = चौथे वर्ष में रिसर्च का मौका

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत लागू चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम को लेकर बड़ा नीतिगत निर्णय लिया गया है। इसके तहत अब चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम के चौथे वर्ष में केवल रिसर्च बेस्ड (शोध परक) पढ़ाई करने वाले छात्रों को ही ‘नेट फॉर पीएचडी’ और ‘असिस्टेंट प्रोफेसर’ के लिए नेट-जेआरएफ परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिलेगा। सामान्य चार वर्षीय स्नातक ऑनर्स की डिग्री लेने वाले छात्र इस परीक्षा के लिए पात्र नहीं होंगे।

चौथे वर्ष में रिसर्च बेस्ड सिलेबस में प्रवेश के लिए विद्यार्थियों को शुरुआती तीन वर्षों (छह सेमेस्टर) में न्यूनतम 7.5 सीजीपीए अंक हासिल करना अनिवार्य किया गया है। जिन छात्रों का सीजीपीए 7.5 से कम रहेगा, उन्हें सामान्य ऑनर्स डिग्री से ही संतोष करना पड़ेगा। इसके अलावा, यदि रिसर्च आधारित स्नातक करने वाले छात्र का नेट के जरिए सीधे पीएचडी में दाखिला नहीं होता है, तो उन्हें एक वर्षीय रिसर्च बेस्ड पीजी में प्रवेश मिलेगा। राजभवन से इस नए योग्यता-आधारित सिलेबस को स्वीकृति मिल चुकी है।

चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम के चौथे वर्ष में शोध को शामिल किया गया है, लेकिन इसमें हर छात्र को प्रवेश नहीं मिलेगा। पहले तीन वर्षों यानी छह सेमेस्टर के कुल परिणाम में न्यूनतम 7.5 सीजीपीए अंक होना अनिवार्य है। जिन विद्यार्थियों के अंक इस कट-ऑफ से कम होंगे, वे चौथे वर्ष में सामान्य स्नातक ऑनर्स की पढ़ाई पूरी करेंगे। वहीं 7.5 सीजीपीए या उससे अधिक अंक पाने वाले छात्र ही चौथे वर्ष में शोध आधारित पढ़ाई का चयन कर सकेंगे।

स्नातक और स्नातकोत्तर (पीजी) दोनों स्तरों के पाठ्यक्रम अब पहले की तुलना में अधिक योग्यता और शोध-आधारित हो गए हैं। नए नियमों के अनुसार पीजी का पाठ्यक्रम भी दो अलग-अलग श्रेणियों में बंटा होगा। यदि छात्र चार साल का रिसर्च बेस्ड स्नातक पूरा करता है और पीएचडी में सीधे नामांकित नहीं होता, तो उसे एक वर्षीय पीजी में रिसर्च बेस्ड सिलेबस पढ़ने का मौका मिलेगा। सामान्य चार वर्षीय स्नातक ऑनर्स करने वाले छात्रों के लिए एक वर्षीय पीजी का सामान्य सिलेबस उपलब्ध रहेगा।

  • 4 वर्षीय स्नातक के चौथे वर्ष में ‘ऑनर्स विद रिसर्च’ केवल उन्हीं छात्रों को मिलेगा, जिनका शुरुआती 3 वर्षों में कम से कम 7.5 सीजीपीए रहेगा।
  • 4 वर्षीय स्नातक में रिसर्च कंपोनेंट पूरा करने वाले छात्र बिना मास्टर डिग्री किए सीधे पीएचडी में प्रवेश के लिए नेट देने के पात्र होंगे।
  • 1 वर्षीय शोध-आधारित पीजी में केवल वही छात्र दाखिला ले सकेंगे, जिनका बैकग्राउंड रिसर्च-बेस्ड स्नातक का रहेगा।

नए सिलेबस में रिसर्च बेस्ड पीजी सिलेबस वही पढ़ सकेंगे, जो स्नातक में रिसर्च बेस्ड सिलेबस चौथे वर्ष में पढ़ा हो। उन्हें नेट फॉर पीएचडी और सामान्य नेट स्नातक के बाद देने की छूट होगी। बाकी अन्य को एक या दो वर्षीय (जो भी मान्य) पीजी करने के बाद ही नेट फॉर पीएचडी और नेट-जेआरएफ देने का मौका मिलेगा।

नॉन-प्रैक्टिकल विषयों में 3 विकल्प होंगे-पढ़ाई, रिसर्च या पढ़ाई संग रिसर्च

उच्च शिक्षा में पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) स्तर पर पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के लिए नए रेगुलेशन 2026 के तहत बड़ा बदलाव लागू कर दिया गया है। नॉन-प्रैक्टिकल विषयों (कला, मानविकी, वाणिज्य आदि) के लिए एक वर्षीय एवं दो वर्षीय पीजी पाठ्यक्रमों का आधिकारिक पेपर और क्रेडिट डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेमवर्क जारी किया गया है। नए ढांचे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सेमेस्टर-IV में छात्रों को अपनी रुचि और कॅरियर लक्ष्य के मुताबिक तीन अलग-अलग ट्रैक (विकल्प) चुनने की पूरी आजादी दी गई है। इसमें एक है सिर्फ पढ़ाई, दूसरा पढ़ाई संग रिसर्च या तीसरा सिर्फ रिसर्च। एक और दो वर्षीय पीजी प्रोग्राम के लिए पेपर डिस्ट्रीब्यूशन भी तय किया गया है।

दो वर्षीय पीजी का सेमेस्टर-III ही एक वर्षीय पीजी कोर्स करने वाले छात्रों का पहला सेमेस्टर होगा। इसके लिए 22 क्रेडिट तय किए गए हैं। वहीं कोर्स वर्क ग्रुप में 3 कोर पेपर (सीसी 9, सीसी 10, सीसी 11 कुल 12 क्रेडिट) शामिल किया गया है। दो स्पेशलाइज्ड इलेक्टिव पेपर डीएसई । और डीएसई-2 कुल 8 क्रेडिट का होगा। स्किल/एबिलिटी कोर्स (एसईसी/एईसी) 2 क्रेडिट का होगा। रिसर्च ग्रुप में रिसर्च मेथोडोलॉजी (4 क्रेडिट), लिटरेचर रिव्यू (4 क्रेडिट), एनालिटिकल टूल्स (4 क्रेडिट), फील्ड/इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग (4 क्रेडिट) और रिसर्च प्रपोजल सेमिनार (6 क्रेडिट) रखे गए हैं।

जो विद्यार्थी पारंपरिक व गहन शैक्षणिक पढ़ाई करना चाहते हैं, वे पांच स्पेशलाइज्ड पेपर (सीसी 12 से सीसी 16) पढ़ेंगे (प्रत्येक 4 क्रेडिट = 20 क्रेडिट) और 2 क्रेडिट का साक्षात्कार होगा।

इस हाइब्रिड मॉडल में छात्रों को डिसटेंशन / रिसर्च प्रोजेक्ट या पेटेंट के लिए सीधे 18 क्रेडिट का बड़ा वेटेज मिलेगा। साथ ही 2 क्रेडिट वायवा और 2 क्रेडिट पब्लिकेशन/एईसी के होंगे।

पूरी तरह शोध को समर्पित ट्रैक में थीसिस/डिसटेंशन (14 क्रेडिट), सेमिनार (4 क्रेडिट), प्री-सबमिशन प्रेजेंटेशन (2 क्रेडिट) और वायवा (2 क्रेडिट) शामिल हैं

पीजी स्तर पर शोध कार्य में केवल थीसिस ही नहीं, बल्कि पेटेंट फाइलिंग को भी प्रोजेक्ट के रूप में 18 क्रेडिट की पूरी मान्यता दी गई है।

चौथे सेमेस्टर में कोर्स-वर्क चुनने वाले छात्रों को सेमेस्टर-III में पढ़े गए डीएसई के दो पेपर में से ही स्पेशलाइज्ड अध्ययन के लिए चुनना होगा।

7.5 CGPA क्यों है महत्वपूर्ण?

नए चार वर्षीय स्नातक मॉडल में 7.5 CGPA केवल एक सामान्य अंक सीमा नहीं है, बल्कि यह तय करने वाला महत्वपूर्ण मानदंड है कि विद्यार्थी चौथे वर्ष में रिसर्च आधारित पढ़ाई कर पाएगा या नहीं।

इसलिए जो विद्यार्थी आगे चलकर शोध, NET-JRF या PhD की दिशा में जाना चाहते हैं, उनके लिए स्नातक के शुरुआती तीन वर्ष काफी महत्वपूर्ण हो जाएंगे।

छह सेमेस्टर का प्रदर्शन → 7.5 CGPA → रिसर्च ट्रैक → आगे रिसर्च आधारित अवसर

इस बदलाव के बाद विद्यार्थियों को स्नातक के शुरुआती वर्षों से ही अपनी पढ़ाई को गंभीरता से लेना होगा। खासकर जिन छात्रों का लक्ष्य रिसर्च, NET-JRF या PhD है, उन्हें छह सेमेस्टर में 7.5 CGPA की शर्त पूरी करने पर विशेष ध्यान देना होगा।दूसरी तरफ, 7.5 CGPA हासिल नहीं करने वाले विद्यार्थी अपनी चार वर्षीय स्नातक पढ़ाई सामान्य ऑनर्स ट्रैक से पूरी कर सकेंगे। इसलिए 7.5 CGPA की शर्त का मतलब यह नहीं है कि कम अंक वाले विद्यार्थी स्नातक नहीं कर पाएंगे; बल्कि उनका रिसर्च ट्रैक का विकल्प सीमित हो जाएगा।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर नए सिलेबस में स्नातक से लेकर PG तक पढ़ाई को रिसर्च से जोड़ने पर जोर दिया गया है। चार वर्षीय स्नातक में पहले तीन वर्षों का CGPA चौथे वर्ष के ट्रैक को तय करेगा। 7.5 CGPA या उससे अधिक वाले विद्यार्थियों को रिसर्च आधारित चौथे वर्ष का विकल्प मिलेगा, जबकि अन्य विद्यार्थी सामान्य ऑनर्स ट्रैक से आगे बढ़ेंगे।

बिहार यूनिवर्सिटी Official WebsiteCLICK HERE
ARATTAI CHANNELCLICK HERE
WHATSAPP CHANNELCLICK HERE
TELEGRAM CHANNELJOIN
YOUTUBE CHANNELSUBSCRIBE

स्नातक का सिलेबस बदल गया | 7.5 CGPA से कम अंक लाने पर नहीं मिलेगा डिग्री

For Feedback - feedback@example.com

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment